28 Jul भारत बना बाघ संरक्षण में वैश्विक नेता, 70% जंगली बाघों का घर


मानचित्र व माइंड-मैप: India leads global tiger conservation
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और जैव विविधता | GS Paper III — आपदा प्रबंधन
- Prelims: अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस, सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट, प्रोजेक्ट टाइगर, अंब्रेला प्रजाति, बाघ अनुमान, राष्ट्रीय पशु
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, जैव विविधता का महत्व और मानव कल्याण
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत विज्ञान-आधारित नीतियों और मजबूत सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वैश्विक बाघ संरक्षण में अग्रणी है, जो विश्व के लगभग 70% जंगली बाघों का घर है और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
पूर्व में पूछा गया: Asked in UPSC Prelims 2019
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ मनाया जाता है, जो बाघ संरक्षण के वैश्विक महत्व को रेखांकित करता है। भारत ने विज्ञान-आधारित नीतियों, मजबूत संस्थागत सहयोग और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से बाघ संरक्षण के क्षेत्र में विश्व भर में अपनी अग्रणी पहचान बनाई है, वर्तमान में यह विश्व के लगभग 70% जंगली बाघों का घर है।
पृष्ठभूमि
- भारत में दुनिया की सबसे बड़ी जंगली बाघों की आबादी है, जो वैश्विक स्तर पर सभी जंगली बाघों का लगभग 70% है।
- ‘अखिल भारतीय बाघ अनुमान (2022)’ के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 3,682 है, जो 2006 के बाद से दोगुनी से भी अधिक हो गई है।
- ‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ की शुरुआत नवंबर 2010 में आयोजित ‘सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट’ से हुई थी, जहाँ 13 बाघ-रेंज वाले देशों ने 2022 तक जंगली बाघों की आबादी को दोगुना करने का ‘Tx2’ लक्ष्य अपनाया था।
- बाघ को 1972 में भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया था, जो देश की समृद्ध जैव-विविधता और पारिस्थितिक संपदा का प्रतीक है।
- बाघ एक शीर्ष शिकारी और ‘अंब्रेला प्रजाति’ (Umbrella Species) होने के नाते स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- बाघों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण वनों, नदियों और अनगिनत अन्य प्रजातियों की रक्षा करता है, जो जल नियंत्रण, मृदा संरक्षण और परागण जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ प्रदान करते हैं।
बाघ संरक्षण का महत्व और भारत की भूमिका
- बाघ संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने से कहीं अधिक है; यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और स्थिरता को सुनिश्चित करता है।
- भारत का बाघ संरक्षण मॉडल विज्ञान-आधारित निगरानी, प्रभावी शासन और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर आधारित है।
- बाघों के आवासों का संरक्षण वनों की रक्षा करता है, जो जलवायु परिवर्तन को कम करने, जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपदा जोखिम को कम करने में सहायक होते हैं।
- बाघ भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग हैं, जिन्हें सदियों से ताकत और प्रभुत्व के प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है।
- भारत वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देकर बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- ‘अखिल भारतीय बाघ अनुमान’ दुनिया के सबसे बड़े और सबसे व्यापक वन्यजीव सर्वेक्षणों में से एक है, जो बाघों की संख्या का सटीक आकलन प्रदान करता है।
- बाघों की बढ़ती संख्या भारत की जैव विविधता संरक्षण नीतियों की सफलता का प्रमाण है और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाती है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विश्व के 70% जंगली बाघों का घर | भारत वैश्विक बाघ संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाता है। |
| विज्ञान-आधारित नीतियां और संस्थागत सहयोग | संरक्षण प्रयासों की सफलता का आधार, प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करता है। |
| तकनीक-आधारित निगरानी और सामुदायिक भागीदारी | संरक्षण को मजबूत करता है और स्थानीय समुदायों को शामिल करता है। |
| अंब्रेला प्रजाति (Umbrella Species) | स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में सहायक, कई अन्य प्रजातियों की रक्षा करता है। |
| अखिल भारतीय बाघ अनुमान (2022) | विश्व का सबसे बड़ा और व्यापक वन्यजीव सर्वेक्षण, बाघों की संख्या 3,682 दर्शाता है। |
महत्व
पारिस्थितिकीय महत्व
- बाघ एक शीर्ष शिकारी और ‘अंब्रेला प्रजाति’ है, जो स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- बाघों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण वनों, नदियों और अनगिनत अन्य प्रजातियों की रक्षा करता है, जिससे जैव विविधता मजबूत होती है।
- ये वन जल नियंत्रण, मृदा संरक्षण, परागण में सहयोग करते हैं और स्थानीय जलवायु को संतुलित रखते हैं, साथ ही आपदा जोखिम को भी कम करते हैं।
सांस्कृतिक महत्व
- बाघ सदियों से भारतीय संस्कृति में ताकत और प्रभुत्व का प्रतीक रहा है, जो पुराने सिक्कों, शाही मुहरों और मंदिरों की नक्काशी में दर्शाया गया है।
- रॉयल बंगाल टाइगर को 1972 में भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया, जो इसकी सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत को दर्शाता है।
- बाघ भारत की समृद्ध जैव-विविधता, पारिस्थितिक संपदा और विविध इलाकों में फैली साझा प्राकृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।
वैश्विक नेतृत्व और सतत विकास
- भारत बाघ संरक्षण में वैश्विक अग्रणी के रूप में उभरा है, जो दुनिया के लगभग 70% जंगली बाघों का घर है।
- बाघों और उनके आवासों की रक्षा करके, सरकार जैव विविधता संरक्षण को मजबूत कर रही है, पारिस्थितिक सुरक्षा को बढ़ा रही है और सतत विकास के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ा रही है।
- भारत ‘सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट’ के ‘Tx2’ लक्ष्य में सक्रिय भागीदार रहा है, जो वैश्विक संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- बाघों की बढ़ती आबादी और मानव बस्तियों के विस्तार से संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
- यह स्थानीय समुदायों के लिए खतरा पैदा करता है और संरक्षण प्रयासों के प्रति उनके समर्थन को कम कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: वन्यजीव संरक्षण
2. पर्यावास का विखंडन और हानि
- विकास परियोजनाओं जैसे सड़क निर्माण, खनन और शहरीकरण से बाघों के प्राकृतिक आवास खंडित हो रहे हैं।
- यह बाघों की आवाजाही को बाधित करता है और उनकी आनुवंशिक विविधता को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: जैव विविधता का संरक्षण
3. अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार
- बाघों के अंगों की अंतरराष्ट्रीय मांग अवैध शिकार को बढ़ावा देती है, जिससे बाघों की आबादी को खतरा होता है।
- प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन की कमी इस चुनौती को और बढ़ाती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: वन्यजीव अपराध
4. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- जलवायु परिवर्तन से बाघों के आवासों में बदलाव आ सकता है, जैसे सुंदरबन में समुद्र के स्तर में वृद्धि।
- यह उनके शिकार आधार और प्रजनन पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पर्यावास का विखंडन | विकास परियोजनाओं के कारण बाघों के गलियारों का बाधित होना। |
| अवैध शिकार | बाघों के अंगों की अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण अवैध शिकार का खतरा। |
| मानव-बाघ संघर्ष | बढ़ती बाघ आबादी और मानव बस्तियों के बीच टकराव। |
| जलवायु परिवर्तन | समुद्र के स्तर में वृद्धि और बदलते मौसम पैटर्न से आवासों को खतरा। |
| पर्याप्त वित्तीय संसाधन | संरक्षण प्रयासों के लिए निरंतर और पर्याप्त धन की आवश्यकता। |
आगे की राह
- बाघ गलियारों (Tiger Corridors) को सुरक्षित और बहाल करना ताकि बाघों की आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए स्थानीय समुदायों को शामिल करना और क्षतिपूर्ति तंत्र को मजबूत करना।
- अवैध शिकार विरोधी उपायों को और सख्त करना तथा वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन करना और बाघों के आवासों को अनुकूल बनाने के लिए रणनीतियाँ विकसित करना।
- बाघ संरक्षण के लिए विज्ञान-आधारित अनुसंधान और निगरानी को निरंतर समर्थन देना।
- संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना और उन्हें संरक्षण के लाभों से जोड़ना।
- संरक्षण के लिए पर्याप्त और निरंतर वित्तीय संसाधनों का आवंटन सुनिश्चित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बाघ संरक्षण · पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं · अंब्रेला प्रजाति · अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस · प्रोजेक्ट टाइगर · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 · सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट · टी x2 लक्ष्य · अखिल भारतीय बाघ अनुमान · सतत विकास · जैव विविधता संरक्षण · सामुदायिक भागीदारी
अवधारणा प्रवाह
बाघों की संख्या में वृद्धि (वैज्ञानिक अनुमान) → पर्यावास संरक्षण और प्रबंधन → स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र → जैव विविधता का संवर्धन → पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की निरंतरता → सतत विकास और ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में विश्व के लगभग 70% जंगली बाघ पाए जाते हैं।
2. ‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है।
3. ‘टी x2 लक्ष्य’ का उद्देश्य 2022 तक जंगली बाघों की आबादी को दोगुना करना था।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि भारत में विश्व के लगभग 70% जंगली बाघ पाए जाते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि ‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि ‘टी x2 लक्ष्य’ का उद्देश्य 2022 तक जंगली बाघों की आबादी को दोगुना करना था, जिसे सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में अपनाया गया था।
Q2. बाघों को ‘अंब्रेला प्रजाति’ (Umbrella Species) क्यों कहा जाता है?
- क्योंकि वे वर्षावन पारिस्थितिकी तंत्र में रहते हैं।
- क्योंकि वे अन्य सभी प्रजातियों को भोजन प्रदान करते हैं।
- क्योंकि उनके संरक्षण से कई अन्य प्रजातियों और उनके आवासों का भी संरक्षण होता है।
- क्योंकि वे अपने शिकारियों से बचने के लिए छतरी जैसी संरचनाओं का उपयोग करते हैं।
उत्तर: क्योंकि उनके संरक्षण से कई अन्य प्रजातियों और उनके आवासों का भी संरक्षण होता है। — बाघों को ‘अंब्रेला प्रजाति’ कहा जाता है क्योंकि वे एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के शीर्ष शिकारी होते हैं। उनके आवासों की रक्षा करने से वनों, नदियों और अनगिनत अन्य प्रजातियों की भी रक्षा होती है, जिससे संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ मिलता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में बाघ संरक्षण के प्रयासों और उनकी सफलता के पीछे के प्रमुख कारकों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही, एक ‘अंब्रेला प्रजाति’ के रूप में बाघों का पारिस्थितिक महत्व समझाइए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, भारत में बाघ संरक्षण के प्रयासों जैसे ‘प्रोजेक्ट टाइगर’, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, वैज्ञानिक प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी का उल्लेख करें। इसकी सफलता के पीछे के कारकों जैसे नीतिगत समर्थन, निगरानी और संस्थागत सहयोग पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, बाघों को ‘अंब्रेला प्रजाति’ क्यों कहा जाता है, इसका पारिस्थितिक महत्व समझाएं, जिसमें स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने, जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं में उनकी भूमिका शामिल हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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