भूमि संसाधन विभाग का ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ स्वच्छता अभियान

भूमि संसाधन विभाग का 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' स्वच्छता अभियान

भूमि संसाधन विभाग का ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ स्वच्छता अभियान

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स्वच्छता अभियान प्रक्रिया

✎ 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' अभियान 'स्वच्छता ही सेवा' पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक स्वच्छता को बढ़ावा देना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
  • Prelims: स्वच्छता ही सेवा, स्वच्छ भारत अभियान, भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सार्वजनिक स्वच्छता, सामुदायिक भागीदारी
  • Essay: स्वच्छता: व्यक्तिगत जिम्मेदारी से राष्ट्रीय आंदोलन तक, सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास

त्वरित पुनरावृत्ति: ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान ‘स्वच्छता ही सेवा’ पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक स्वच्छता को बढ़ावा देना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) के भूमि संसाधन विभाग (Department of Land Resources) ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ पहल के अंतर्गत ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान चलाया। इस अभियान के तहत नई दिल्ली में एक सार्वजनिक पार्क में विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया, जिसमें विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों की सफाई और स्वच्छ वातावरण के निर्माण में सामूहिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

पृष्ठभूमि

  • स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती पर किया गया था, जिसका लक्ष्य देशभर में स्वच्छता को बढ़ावा देना था।
  • इस अभियान के दो मुख्य घटक हैं: स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत अभियान (शहरी)।
  • स्वच्छता ही सेवा (Swachhta Hi Seva) अभियान स्वच्छ भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को एक जन आंदोलन बनाने पर केंद्रित है।
  • यह अभियान लोगों को स्वच्छता गतिविधियों में स्वेच्छा से भाग लेने और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करता है।
  • सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता न केवल स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार करती है।
  • भूमि संसाधन विभाग ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और भूमि से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान क्या है?

  • यह ‘स्वच्छता ही सेवा’ पहल के तहत एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य व्यापक सामुदायिक भागीदारी के साथ स्वच्छता गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
  • इस अभियान के तहत, नागरिक और संगठन एक निश्चित दिन पर एक घंटे के लिए एक साथ मिलकर सार्वजनिक स्थलों की सफाई करते हैं।
  • इसका मुख्य लक्ष्य लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करना है।
  • यह पहल सामूहिक प्रयास और साझा जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित करती है, जिससे स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का निर्माण होता है।
  • अभियान में सार्वजनिक पार्कों, सड़कों, जल निकायों और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सफाई शामिल होती है।
  • यह स्वच्छता को एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़कर एक जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान यह अभियान स्वच्छता ही सेवा पहल का हिस्सा है, जो सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है।
भूमि संसाधन विभाग की भागीदारी ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक प्रमुख विभाग के रूप में, इसकी भागीदारी सरकारी संस्थानों में स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सार्वजनिक पार्क में सफाई सार्वजनिक स्थलों, विशेषकर पार्कों की सफाई, नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार करती है।
कचरा एकत्र करना और निपटान यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) के सिद्धांतों का पालन करता है, जो स्वच्छ भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण घटक है।
कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी यह सरकारी कर्मचारियों के बीच नागरिक कर्तव्य और सामुदायिक सेवा की भावना को मजबूत करता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना: यह अभियान नागरिकों को अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करता है।
  • सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना: यह स्वच्छता को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानकर, एक सामूहिक प्रयास के रूप में स्थापित करता है।
  • स्वच्छता ही सेवा की भावना को सुदृढ़ करना: यह महात्मा गांधी के ‘स्वच्छता ईश्वरत्व के बगल में है’ के दर्शन को आगे बढ़ाता है।

पर्यावरणीय महत्व

  • सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता: पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सफाई से प्रदूषण कम होता है और स्वस्थ वातावरण बनता है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन: कचरा एकत्र करने और उसके उचित निपटान से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

प्रशासनिक महत्व

  • सरकारी विभागों की भूमिका: यह दर्शाता है कि सरकारी विभाग भी स्वच्छता अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लेकर एक उदाहरण स्थापित कर सकते हैं।
  • नीति कार्यान्वयन: यह स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) जैसी राष्ट्रीय नीतियों के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को मजबूत करता है।

चुनौतियाँ

1. व्यवहार परिवर्तन की चुनौती

  • स्वच्छता को एक आदत बनाना: केवल एक दिन के अभियान से स्थायी व्यवहार परिवर्तन लाना मुश्किल है।
  • नागरिकों की उदासीनता: कुछ नागरिकों में सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता के प्रति अभी भी उदासीनता देखी जाती है।

2. अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौती

  • कचरे का उचित निपटान: एकत्र किए गए कचरे का प्रभावी ढंग से पुनर्चक्रण (Recycling) या निपटान करना एक बड़ी चुनौती है।
  • बुनियादी ढांचे की कमी: कई क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढाँचा (Infrastructure) उपलब्ध नहीं है।

3. संसाधनों का अभाव

  • मानव संसाधन: स्वच्छता अभियानों के लिए पर्याप्त स्वयंसेवकों और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • वित्तीय संसाधन: स्वच्छता के स्थायी समाधानों के लिए निरंतर वित्तीय सहायता की आवश्यकता।

4. जागरूकता का अभाव

  • ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता: शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता कम हो सकती है।
  • विभिन्न हितधारकों को शामिल करना: सभी हितधारकों (Stakeholders) को एक साथ लाना और उन्हें प्रेरित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्थायी व्यवहार परिवर्तन एकल अभियान के बजाय दीर्घकालिक आदतों का विकास।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कचरे के संग्रहण, पृथक्करण (Segregation) और निपटान की प्रभावी प्रणाली।
बुनियादी ढांचे की कमी अपशिष्ट प्रसंस्करण (Waste Processing) और निपटान सुविधाओं का अभाव।
जनभागीदारी की निरंतरता अभियानों के बाद भी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बनाए रखना।
संसाधन आवंटन स्वच्छता कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की उपलब्धता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan)
  • स्वच्छता ही सेवा पहल

आगे की राह

  • स्वच्छता शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करना ताकि बचपन से ही स्वच्छता के महत्व को समझाया जा सके।
  • स्थानीय निकायों (Local Bodies) को सशक्त बनाना ताकि वे अपने क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
  • कचरा पृथक्करण और पुनर्चक्रण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना और इसके लिए बुनियादी ढांचे में निवेश करना।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को बढ़ावा देना ताकि स्वच्छता पहलों में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ उठाया जा सके।
  • स्वच्छता चैंपियंस को पहचानना और पुरस्कृत करना ताकि अन्य लोगों को भी प्रेरित किया जा सके।
  • नियमित अंतराल पर जागरूकता अभियानों का आयोजन करना ताकि स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता बनी रहे और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा मिले।
  • अपशिष्ट से ऊर्जा (Waste-to-Energy) संयंत्रों जैसे नवाचारों को बढ़ावा देना ताकि कचरे का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वच्छता अभियान · स्वच्छ भारत अभियान · स्वच्छता ही सेवा · सार्वजनिक स्वास्थ्य · सामुदायिक भागीदारी · ग्रामीण विकास मंत्रालय · भूमि संसाधन विभाग · सतत विकास लक्ष्य · अपशिष्ट प्रबंधन · नागरिक कर्तव्य

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

स्वच्छता ही सेवा पहल  →  ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ अभियान  →  सार्वजनिक स्थलों की सफाई  →  कचरा एकत्र करना और निपटान  →  स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का निर्माण  →  सामूहिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. स्वच्छ भारत अभियान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी।
2. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सार्वभौमिक स्वच्छता कवरेज प्राप्त करना है।
3. यह केवल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित है, तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है, स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी। कथन 2 भी सही है, इसका लक्ष्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छता सुनिश्चित करना है। कथन 3 गलत है, स्वच्छ भारत अभियान ठोस और तरल दोनों प्रकार के अपशिष्ट प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय ‘स्वच्छता ही सेवा’ पहल से संबंधित है, जैसा कि हाल के अभियान में देखा गया है?

  1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
  2. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय
  3. ग्रामीण विकास मंत्रालय
  4. जल शक्ति मंत्रालय

उत्तर: ग्रामीण विकास मंत्रालय — प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘स्वच्छता ही सेवा’ पहल के अंतर्गत ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने विशेष स्वच्छता अभियान चलाया।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में सार्वजनिक स्वच्छता सुनिश्चित करने में ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसी पहलों के महत्व का परीक्षण कीजिए। क्या ये पहलें दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन लाने में सफल रही हैं? समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: ‘स्वच्छता ही सेवा’ पहल का संक्षिप्त परिचय और इसका ‘स्वच्छ भारत अभियान’ से संबंध।
महत्व: सार्वजनिक स्वच्छता में इन पहलों की भूमिका का उल्लेख करें – सामुदायिक भागीदारी, जागरूकता सृजन, सार्वजनिक स्थानों की सफाई, स्वास्थ्य लाभ, पर्यावरणीय स्थिरता।
सफलता का विश्लेषण: दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन लाने में सफलता और चुनौतियों का मूल्यांकन करें। सफलता के बिंदु: खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति, अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार, नागरिक जुड़ाव। चुनौतियाँ: व्यवहार परिवर्तन की निरंतरता, बुनियादी ढांचे की कमी, रखरखाव, शहरी-ग्रामीण अंतर, वित्तीय स्थिरता।
आगे की राह: स्थायी स्वच्छता के लिए नीतिगत सुझाव – शिक्षा, प्रौद्योगिकी का उपयोग, स्थानीय निकायों की भूमिका, नागरिक समाज का सहयोग, निरंतर निगरानी।
निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें कि ये पहलें महत्वपूर्ण हैं लेकिन दीर्घकालिक सफलता के लिए निरंतर प्रयासों और बहु-आयामी रणनीति की आवश्यकता है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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