मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी ‘भव्य रसायन योजना’, जानिए क्या है पूरा प्लान

मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी 'भव्य रसायन योजना', जानिए क्या है पूरा प्लान — रसायन पार्क योजना 'भव्य रसायन' की कार्यप्रणाली

मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी ‘भव्य रसायन योजना’, जानिए क्या है पूरा प्लान

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: भव्य रसायन योजना, रसायन पार्क, केंद्रीय मंत्रिमंडल, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, विनिर्माण क्षेत्र, पर्यावरण अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र
  • Essay: विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में औद्योगिक विकास की भूमिका, सतत विकास और पर्यावरणीय अनुपालन के साथ आर्थिक संवृद्धि

त्वरित पुनरावृत्ति: भव्य रसायन योजना देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करके भारतीय रासायनिक उद्योग के सतत विकास, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और पर्यावरणीय अनुपालन को बढ़ावा देने की एक केंद्र सरकार की पहल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ या ‘भव्य रसायन’ योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित की गई थी और इसका उद्देश्य रासायनिक उद्योग के समग्र विकास को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत का रासायनिक उद्योग अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals), न्यूट्रास्यूटिकल्स (Nutraceuticals), निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवश्यक उत्पादों का उत्पादन करता है।
  • वर्तमान में, भारतीय रासायनिक उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने और दक्षता बढ़ाने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे और लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता की आवश्यकता है।
  • रसायन उत्पादन में अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय अनुपालन एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए केंद्रीकृत सुविधाओं की आवश्यकता होती है।
  • सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारतीय उद्योगों के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • यह योजना घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, आयात प्रतिस्थापन में सुधार करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक कदम है।
  • 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र का विकास महत्वपूर्ण है, जिसमें रासायनिक उद्योग एक प्रमुख भूमिका निभाता है।

भव्य रसायन योजना क्या है?

  • यह योजना देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित एक पहल है।
  • इसका कुल वित्तीय आवंटन 3,030 करोड़ रुपये है, जिसमें से 3,000 करोड़ रुपये भीतरी अवसंरचना सुविधाओं और बुनियादी उपयोगिताओं के लिए तथा 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक व्यय के लिए हैं।
  • यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी।
  • केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए संबंधित राज्य सरकार के न्यूनतम 500 करोड़ रुपये के योगदान के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करेगी।
  • इन पार्कों में कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (2,000 एकड़) का निर्बाध भूमि क्षेत्र होगा और ये रासायनिक उद्योग के लिए सामान्य अवसंरचना सुविधाएं प्रदान करेंगे।
  • इन सुविधाओं में सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (TSDF), जल आपूर्ति प्रणाली, विलायक पुनर्प्राप्ति सुविधाएं, भाप उत्पादन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स (Logistics) सुविधाएं शामिल होंगी।
  • यह योजना कच्चे माल की सोर्सिंग (Upstream) से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति (Downstream) तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं में रासायनिक उद्योग के विकास को बढ़ावा देगी।
  • इसका उद्देश्य साझा बुनियादी ढांचे के माध्यम से लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, भारतीय उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और पर्यावरण के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
तीन समर्पित रासायनिक पार्क देश में रासायनिक उद्योग के लिए विशिष्ट, एकीकृत विनिर्माण केंद्र स्थापित करना।
कुल वित्तीय आवंटन ₹3,030 करोड़ (₹3,000 करोड़ अवसंरचना के लिए, ₹30 करोड़ प्रशासनिक व्यय के लिए) – योजना के कार्यान्वयन हेतु पर्याप्त वित्तीय सहायता सुनिश्चित करना।
योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक (पांच वर्ष) – दीर्घकालिक विकास और स्थिरता के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा प्रदान करना।
केंद्र सरकार का अनुदान प्रत्येक पार्क के लिए ₹1,000 करोड़ तक (राज्य सरकार के न्यूनतम ₹500 करोड़ के योगदान के बाद) – राज्य सरकारों को भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करना और वित्तीय बोझ साझा करना।
न्यूनतम भूमि क्षेत्र प्रत्येक पार्क के लिए कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (2,000 एकड़) – बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास और एकीकृत सुविधाओं के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित करना।
सामान्य अवसंरचना सुविधाएँ साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, जल आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग आदि – लागत दक्षता बढ़ाना, पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह योजना कच्चे माल की सोर्सिंग (अपस्ट्रीम) से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति (डाउनस्ट्रीम) और सहायक उद्योगों सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं में रासायनिक उद्योग के विकास को बढ़ावा देगी, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग होगा और माल ढुलाई तथा प्रबंधन लागत कम होगी।
  • साझा बुनियादी ढांचा सुविधाओं और मूलभूत उपयोगिताओं के माध्यम से, यह लागत दक्षता बढ़ाएगी और भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी, जिससे निर्यात में वृद्धि होगी तथा आयात प्रतिस्थापन में सुधार होगा।
  • घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करके, घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर तथा रोजगार सृजित करके यह योजना आत्मनिर्भरता को बल देगी और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।

पर्यावरणीय महत्व

  • यह योजना पर्यावरण के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर भारतीय रसायन उद्योग के सतत विकास को बढ़ावा देगी। इसमें केंद्रीकृत सुविधाएं होंगी, जैसे साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (TSDF), तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना।
  • इससे पर्यावरण नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा, जिससे उद्योग का विकास पर्यावरण के अनुकूल तरीके से होगा और पर्यावरणीय प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

सामरिक महत्व

  • रसायन और पेट्रोकेमिकल्स का उपयोग कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विभिन्न उद्योगों में होता है। इस योजना से इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवश्यक इनपुट की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे अन्य उद्योगों का भी विकास होगा।
  • भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बेहतर ढंग से एकीकृत होने में मदद मिलेगी, जिससे देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और महत्वपूर्ण रसायनों के लिए विदेशी निर्भरता कम होगी।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण

  • प्रत्येक पार्क के लिए कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (2,000 एकड़) के निर्बाध भूमि क्षेत्र की आवश्यकता है, जो भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
  • भूमि अधिग्रहण में स्थानीय विरोध, कानूनी अड़चनें और मुआवजे संबंधी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे परियोजना में देरी हो सकती है।

2. पर्यावरणीय मंजूरी और अनुपालन

  • रासायनिक पार्कों की स्थापना के लिए कड़े पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और विभिन्न नियामक मंजूरियों की आवश्यकता होगी।
  • खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना एक सतत चुनौती होगी, खासकर जब कई उद्योग एक ही स्थान पर संचालित होंगे।

3. राज्य सरकारों की भागीदारी

  • योजना में राज्य सरकारों से न्यूनतम ₹500 करोड़ का योगदान अपेक्षित है, जो कुछ राज्यों के लिए वित्तीय बोझ हो सकता है।
  • प्रतिस्पर्धी, प्रदर्शन-आधारित वित्त पोषण तंत्र (चैलेंज रूट) के तहत राज्यों को आकर्षित करना और उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।

4. तकनीकी विशेषज्ञता और कौशल विकास

  • आधुनिक रासायनिक विनिर्माण इकाइयों और साझा अवसंरचना सुविधाओं के संचालन के लिए उच्च तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल कार्यबल की आवश्यकता होगी।
  • उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रमों को अद्यतन करना और पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
भूमि की उपलब्धता बड़े पैमाने पर निर्बाध भूमि का अधिग्रहण और स्थानीय समुदायों का विस्थापन।
पर्यावरणीय जोखिम रासायनिक उत्पादन से जुड़े संभावित प्रदूषण और अपशिष्ट निपटान की चुनौतियाँ।
वित्तीय व्यवहार्यता राज्य सरकारों द्वारा अपेक्षित योगदान और परियोजना की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता।
नियामक ढाँचा जटिल मंजूरी प्रक्रियाएँ और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी।
आधारभूत संरचना का विकास उच्च गुणवत्ता वाली साझा सुविधाओं (जैसे CETP, TSDF) का समय पर और कुशल निर्माण।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन)

आगे की राह

  • भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और प्रभावित समुदायों के लिए उचित पुनर्वास तथा मुआवजे के प्रावधानों को सुनिश्चित करने हेतु एक पारदर्शी नीति अपनाई जाए।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाए और रासायनिक पार्कों में कठोर प्रदूषण नियंत्रण उपायों तथा अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को अनिवार्य किया जाए।
  • राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित किया जाए, ताकि वे योजना में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
  • रासायनिक उद्योग की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को डिजाइन और कार्यान्वित किया जाए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
  • अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा दिया जाए ताकि रासायनिक उत्पादन में नवाचार, हरित प्रौद्योगिकियों का उपयोग और संसाधन दक्षता में सुधार हो सके।
  • घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूल कारोबारी माहौल बनाया जाए, जिसमें एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली और आकर्षक प्रोत्साहन शामिल हों।
  • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन किया जाए और उन्हें भारतीय संदर्भ में अनुकूलित किया जाए ताकि रासायनिक पार्कों को विश्व स्तरीय बनाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) · रसायन पार्क · विनिर्माण क्षेत्र · आत्मनिर्भर भारत · सतत विकास · पर्यावरण अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र · रोजगार सृजन · वैश्विक मूल्य श्रृंखला · राजकोषीय प्रोत्साहन · औद्योगिक अवसंरचना

अवधारणा प्रवाह

केंद्र सरकार द्वारा ‘भव्य रसायन’ योजना को मंजूरी  →  तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना हेतु वित्तीय आवंटन  →  साझा अवसंरचना (CETP, जल आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स) का विकास  →  रासायनिक उद्योग की लागत दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि  →  निर्यात में वृद्धि, आयात प्रतिस्थापन और रोजगार सृजन  →  पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का उद्देश्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना है।
2. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी।
3. केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए संबंधित राज्य सरकार की ओर से न्यूनतम 500 करोड़ रुपये का योगदान करने के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करेगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — सभी तीनों कथन सही हैं। ‘भव्य रसायन’ योजना का लक्ष्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना है, यह वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू है, और केंद्र सरकार राज्य के योगदान के बाद प्रत्येक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान देगी।

Q2. ‘भव्य रसायन’ योजना के संभावित लाभों में निम्नलिखित में से कौन-कौन से शामिल हैं?
1. कच्चे माल की सोर्सिंग से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं में रासायनिक उद्योग के विकास को बढ़ावा देना।
2. भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बेहतर ढंग से एकीकृत करना, जिससे निर्यात में वृद्धि होगी।
3. केंद्रीकृत अपशिष्ट उपचार संयंत्रों के माध्यम से पर्यावरण नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करना।
4. कृषि, वस्त्र और फार्मास्यूटिकल्स जैसे विभिन्न उद्योगों में उपयोग होने वाले रसायनों के उत्पादन को बढ़ावा देना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प ‘भव्य रसायन’ योजना के संभावित लाभों को दर्शाते हैं। यह योजना संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगी, निर्यात बढ़ाएगी, पर्यावरण अनुपालन सुनिश्चित करेगी और विभिन्न संबद्ध उद्योगों के लिए रसायनों के उत्पादन को बढ़ावा देगी।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन)’ भारत के विनिर्माण क्षेत्र को कैसे बढ़ावा दे सकती है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में कैसे सहायक हो सकती है? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, ‘भव्य रसायन’ योजना के प्रमुख प्रावधानों और यह कैसे रासायनिक उद्योग की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगी, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगी, और साझा अवसंरचना के माध्यम से दक्षता लाएगी, इस पर चर्चा करें। दूसरे भाग में, यह बताएं कि कैसे यह योजना आयात प्रतिस्थापन, निर्यात वृद्धि, रोजगार सृजन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों (जैसे कृषि, फार्मास्यूटिकल्स) के विकास को बढ़ावा देकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य में योगदान करेगी। पर्यावरण अनुकूल उपायों के माध्यम से सतत विकास पर भी प्रकाश डालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment