मध्यप्रदेश में बसों की कमी से बढ़ रहा प्रदूषण, गडकरी ने बताया 1000 लोगों पर कितनी बसें जरूरी?

एमपी: गडकरी बोले- ट्रांसपोर्ट से 40% प्रदूषण, जिम्मेदारी मेरी;बताया 1000 लोगों पर कितनी बसें होनी चाहिए? — diagram

मध्यप्रदेश में बसों की कमी से बढ़ रहा प्रदूषण, गडकरी ने बताया 1000 लोगों पर कितनी बसें जरूरी?

स्वच्छ बस प्रणालीस्वच्छ ईंधन बस40% प्रदूषण घटाताप्रति 1000 पर 8 बसेंइलेक्ट्रिक बसविदेशी मुद्रा बचाताकार्बन उत्सर्जन घटातापीपीपी मॉडलनिवेश आकर्षितदक्षता बढ़ाताFAME योजनाइलेक्ट्रिक वाहन बढ़ावानीति आधारित
स्वच्छ बस प्रणाली

✎ सार्वजनिक परिवहन का विस्तार, स्वच्छ ईंधन का उपयोग और पीएम ई-बस सेवा जैसी पहलें वायु प्रदूषण को कम करने, आयात निर्भरता घटाने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (वायु प्रदूषण, स्वच्छ ईंधन)  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था (बुनियादी ढाँचा, रोजगार सृजन, आयात प्रतिस्थापन)  |  GS Paper II — शासन (सार्वजनिक-निजी भागीदारी, शहरी नियोजन)
  • Prelims: वायु प्रदूषण के स्रोत, सार्वजनिक परिवहन के लाभ, स्वच्छ ईंधन (इलेक्ट्रिक बसें), पीएम ई-बस सेवा, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल, आर्थिक संवृद्धि और रोजगार
  • Essay: सतत शहरी विकास में सार्वजनिक परिवहन की भूमिका, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: सार्वजनिक परिवहन का विस्तार, स्वच्छ ईंधन का उपयोग और पीएम ई-बस सेवा जैसी पहलें वायु प्रदूषण को कम करने, आयात निर्भरता घटाने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने मध्य प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के शुभारंभ अवसर पर सार्वजनिक परिवहन के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि देश में वायु प्रदूषण का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है और इसे कम करने के लिए स्वच्छ ईंधन आधारित बसों के संचालन तथा प्रति हजार आबादी पर बसों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।

पृष्ठभूमि

  • भारत में शहरीकरण की तीव्र गति के कारण सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे निजी वाहनों का उपयोग बढ़ा है और परिणामस्वरूप वायु प्रदूषण में वृद्धि हुई है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वायु प्रदूषण भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियाँ और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं।
  • भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे देश पर आर्थिक बोझ पड़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित होता है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से इस आयात को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • वर्तमान में, भारत में प्रति हजार आबादी पर बसों की संख्या वैश्विक मानकों (प्रति हजार पर 8 बसें) से काफी कम है, जो सार्वजनिक परिवहन की अपर्याप्तता को दर्शाता है।
  • सरकार स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतियों और योजनाओं को लागू कर रही है, जैसे राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) और फेम इंडिया योजना (FAME India Scheme)।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) मॉडल को बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं, विशेषकर परिवहन क्षेत्र में, निवेश आकर्षित करने और दक्षता बढ़ाने के लिए एक प्रभावी माध्यम के रूप में देखा जाता है।

सार्वजनिक परिवहन और वायु प्रदूषण नियंत्रण

  • सार्वजनिक परिवहन प्रणाली (Public Transport System) में बसें, ट्रेनें, मेट्रो और अन्य साझा परिवहन साधन शामिल हैं जो बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ यात्रा करने की सुविधा प्रदान करते हैं।
  • वायु प्रदूषण (Air Pollution) में हवा में हानिकारक पदार्थों की उपस्थिति शामिल है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करते हैं। परिवहन क्षेत्र, विशेषकर जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) से चलने वाले वाहन, नाइट्रोजन ऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5, PM10) और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे प्रदूषकों का एक प्रमुख स्रोत हैं।
  • स्वच्छ ईंधन (Clean Fuel) जैसे इलेक्ट्रिक ऊर्जा, CNG, इथेनॉल और हाइड्रोजन का उपयोग परिवहन क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इलेक्ट्रिक बसें शून्य टेलपाइप उत्सर्जन (Zero Tailpipe Emissions) प्रदान करती हैं।
  • पीएम ई-बस सेवा (PM e-Bus Seva) केंद्र सरकार की एक योजना है जिसका उद्देश्य देश भर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर इलेक्ट्रिक बसों को तैनात करके शहरी गतिशीलता को बढ़ाना और वायु प्रदूषण को कम करना है।
  • सार्वजनिक परिवहन का विस्तार न केवल प्रदूषण कम करता है बल्कि यातायात भीड़ (Traffic Congestion) को भी कम करता है, यात्रा के समय को बचाता है और ईंधन की खपत को घटाता है।
  • बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा देती है क्योंकि यह लोगों को कार्यस्थलों तक पहुँचने में मदद करती है, पर्यटन को बढ़ावा देती है और नए रोजगार के अवसर (Employment Opportunities) पैदा करती है, जैसे बस चालकों, तकनीकी कर्मचारियों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल सरकार और निजी क्षेत्र के बीच एक सहयोग है जहाँ निजी क्षेत्र सार्वजनिक परियोजनाओं के वित्तपोषण, निर्माण और संचालन में शामिल होता है, जिससे दक्षता और नवाचार बढ़ता है।
  • किफायती और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन सेवाएँ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर गरीब, मजदूर और ग्रामीण आबादी के लिए आवश्यक हैं, ताकि वे आरामदायक यात्रा का लाभ उठा सकें और आर्थिक गतिविधियों में भाग ले सकें।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
प्रति हजार आबादी पर बसों की संख्या में वृद्धि सार्वजनिक परिवहन की पहुंच और उपलब्धता में सुधार, विशेषकर ग्रामीण और गरीब आबादी के लिए।
स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों पर जोर वायु प्रदूषण (Air Pollution) में कमी और जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) के आयात पर निर्भरता घटाना।
कम किराया और सुरक्षित यात्रा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए परिवहन को वहनीय बनाना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास में निजी निवेश को आकर्षित करना और दक्षता बढ़ाना।
रोजगार सृजन बस संचालन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और संबंधित क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से यात्रियों के लिए यात्रा लागत में कमी आती है, जिससे उनकी डिस्पोजेबल आय बढ़ती है।
  • पेट्रोल, डीजल और गैस के आयात पर निर्भरता कम होने से देश की विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) बचती है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करती है।
  • परिवहन क्षेत्र में निवेश से बस निर्माण, चार्जिंग स्टेशन और संबंधित सेवाओं में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।

पर्यावरणीय महत्व

  • इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन वाली बसों के उपयोग से वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता सुधरती है।
  • कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में कमी लाकर भारत अपने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ता है।

सामाजिक महत्व

  • सार्वजनिक परिवहन की बेहतर पहुंच से गरीब, मजदूर, किसान और ग्रामीण आबादी को सस्ती और सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलता है, जिससे सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) बढ़ता है।
  • महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन विकल्प उपलब्ध होने से उनकी गतिशीलता और सामाजिक भागीदारी बढ़ती है।

शासनिक महत्व

  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल से सरकार पर वित्तीय बोझ कम होता है और निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ उठाया जा सकता है।
  • परिवहन क्षेत्र में नीतिगत सुधार और निवेश से देश के बुनियादी ढांचे का विकास होता है, जो समग्र शासन को मजबूत करता है।

चुनौतियाँ

1. बुनियादी ढांचे का अभाव

  • इलेक्ट्रिक बसों के लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशनों और संबंधित बुनियादी ढांचे का विकास एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • सड़कों की गुणवत्ता और बस डिपो के आधुनिकीकरण की आवश्यकता है ताकि बड़े पैमाने पर बस संचालन को सुगम बनाया जा सके।

2. वित्तीय व्यवहार्यता

  • इलेक्ट्रिक बसों की प्रारंभिक लागत डीजल बसों की तुलना में अधिक होती है, जिससे निजी ऑपरेटरों के लिए निवेश आकर्षित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • कम किराए के साथ संचालन की लागत को संतुलित करना और स्थायी राजस्व मॉडल विकसित करना आवश्यक है।

3. प्रौद्योगिकी और कौशल

  • इलेक्ट्रिक वाहनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए कुशल कार्यबल (Skilled Workforce) की कमी एक बाधा है।
  • नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उनके प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता है।

4. नियामक और नीतिगत चुनौतियाँ

  • सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में विभिन्न हितधारकों (Stakeholders) के बीच समन्वय स्थापित करना और प्रभावी नियामक ढांचा (Regulatory Framework) बनाना आवश्यक है।
  • दीर्घकालिक और सुसंगत नीतियों का अभाव निवेश और विकास को प्रभावित कर सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कम बस घनत्व प्रति हजार आबादी पर बसों की संख्या वैश्विक मानकों से काफी कम है, जिससे सार्वजनिक परिवहन की पहुंच सीमित है।
वायु प्रदूषण परिवहन क्षेत्र से होने वाला 40 प्रतिशत वायु प्रदूषण गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंता का विषय है।
जीवाश्म ईंधन आयात पेट्रोल, डीजल और गैस के आयात पर 22 लाख करोड़ रुपये का भारी खर्च देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ डालता है।
उच्च किराया डीजल बसों का अपेक्षाकृत उच्च किराया गरीब और ग्रामीण आबादी के लिए सार्वजनिक परिवहन को कम वहनीय बनाता है।
रोजगार के अवसर सार्वजनिक परिवहन के सीमित विस्तार से संबंधित क्षेत्रों में रोजगार सृजन की क्षमता का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पाता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • PM ई-बस सेवा (PM e-Bus Seva)
  • मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा (Mukhyamantri Sugam Parivahan Seva)

आगे की राह

  • इलेक्ट्रिक बसों के लिए व्यापक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास किया जाए, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाए।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल को मजबूत किया जाए और निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन (Incentives) प्रदान किए जाएं।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों के रखरखाव और संचालन के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएं।
  • किराया निर्धारण नीति को इस प्रकार तैयार किया जाए कि यह आम जनता के लिए वहनीय हो और ऑपरेटरों के लिए भी वित्तीय रूप से टिकाऊ हो।
  • सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत मल्टीमॉडल परिवहन प्रणाली (Integrated Multimodal Transport System) विकसित की जाए।
  • बस सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू किया जाए और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट किए जाएं।
  • स्वच्छ ईंधन विकल्पों जैसे इथेनॉल (Ethanol) और हाइड्रोजन (Hydrogen) आधारित परिवहन को भी बढ़ावा दिया जाए ताकि ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाई जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सार्वजनिक परिवहन · शहरी गतिशीलता · वायु प्रदूषण नियंत्रण · इलेक्ट्रिक बसें · स्वच्छ ईंधन · रोजगार सृजन · पीएम ई-बस सेवा · सतत विकास · बुनियादी ढांचा · पीपीपी मॉडल

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण और स्वास्थ्य का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}

अवधारणा प्रवाह

परिवहन से वायु प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन आयात  →  सार्वजनिक परिवहन में बसों की कमी  →  इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन बसों का विस्तार  →  कम प्रदूषण, कम आयात, कम किराया  →  बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार सृजन, सामाजिक समावेशन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में प्रति हजार आबादी पर बसों की संख्या वैश्विक मानकों से कम है।
2. पीएम ई-बस सेवा योजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित है।
3. परिवहन क्षेत्र भारत में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि भारत में प्रति हजार आबादी पर लगभग दो बसें हैं, जबकि वैश्विक मानक आठ बसों का है। कथन 2 सही है क्योंकि पीएम ई-बस सेवा योजना पीपीपी मॉडल के तहत 10,000 बसों के संचालन की परिकल्पना करती है। कथन 3 सही है क्योंकि केंद्रीय मंत्री के अनुसार, देश में 40 प्रतिशत वायु प्रदूषण परिवहन क्षेत्र के कारण होता है।

Q2. अभिकथन (A): सार्वजनिक परिवहन का विस्तार न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाता है, बल्कि रोजगार सृजन में भी सहायक होता है।
कारण (R): बस संचालन के लिए ड्राइवर, तकनीकी कर्मचारी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बस निर्माण जैसे संबंधित क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं।
सही विकल्प चुनें:

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से यात्रियों को सुविधा मिलती है और साथ ही परिवहन उद्योग में रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। कारण (R) भी सही है और यह अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है, क्योंकि बस संचालन के लिए विभिन्न सहायक सेवाओं और उद्योगों में श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में शहरी गतिशीलता (Urban Mobility) को बेहतर बनाने में सार्वजनिक परिवहन की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा देने में स्वच्छ ईंधन आधारित बसों के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** शहरी गतिशीलता की वर्तमान स्थिति और सार्वजनिक परिवहन की आवश्यकता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **सार्वजनिक परिवहन की भूमिका:**
* यात्रियों की सुविधा और पहुंच में सुधार।
* यातायात भीड़ (Traffic Congestion) को कम करना।
* व्यक्तिगत वाहनों पर निर्भरता घटाना।
* किफायती यात्रा विकल्प प्रदान करना, विशेषकर निम्न-आय वर्ग के लिए।
* सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को बढ़ावा देना।
3. **स्वच्छ ईंधन आधारित बसों का महत्व:**
* **वायु प्रदूषण नियंत्रण:** परिवहन क्षेत्र से होने वाले 40% प्रदूषण के संदर्भ में इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन बसों की भूमिका। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना।
* **आर्थिक संवृद्धि:**
* पेट्रोलियम आयात बिल (Petroleum Import Bill) को कम करना (22 लाख करोड़ रुपये के आयात का संदर्भ)।
* रोजगार सृजन (बस निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, संचालन और रखरखाव)।
* निवेश आकर्षित करना और संबंधित उद्योगों को बढ़ावा देना।
* कम किराया होने से लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) में वृद्धि।
* **सतत विकास लक्ष्य:** जलवायु परिवर्तन से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में योगदान।
4. **चुनौतियाँ और समाधान:**
* बुनियादी ढाँचे का अभाव (चार्जिंग स्टेशन)।
* उच्च प्रारंभिक लागत।
* सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का प्रभावी कार्यान्वयन (जैसे पीएम ई-बस सेवा)।
* नीतिगत समर्थन और प्रोत्साहन।
5. **निष्कर्ष:** एक सुदृढ़, स्वच्छ और कुशल सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के माध्यम से शहरी गतिशीलता, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: amarujala.com


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