08 Aug मध्य प्रदेश के सांसद ने सीएम से फसल बीमा प्रीमियम भुगतान की समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया
✎ मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) किसानों को प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से होने वाले फसल नुकसान से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है, जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का एक अभिन्न अंग है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय | GS Paper III — कृषि, मुख्य फसलें, देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न, सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली, कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी
- Prelims: मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), फसल बीमा, कृषि ऋण, मानसून वर्षा, सामान्य सेवा केंद्र (CSC), सहकारी समितियाँ
- Essay: भारत में कृषि संकट और किसानों की आय दोगुनी करने की चुनौतियाँ, जलवायु परिवर्तन और भारतीय कृषि पर इसके प्रभाव: अनुकूलन तथा शमन के उपाय
त्वरित पुनरावृत्ति: मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) किसानों को प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से होने वाले फसल नुकसान से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है, जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का एक अभिन्न अंग है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, कर्नाटक के एक सांसद ने मुख्यमंत्री से मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Weather-Based Crop Insurance Scheme – WBCIS) के तहत प्रीमियम भुगतान की समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया है। सांसद ने बताया कि राज्य में औसत वर्षा में 34% की कमी दर्ज की गई है, जबकि शिवमोग्गा जिले में यह कमी 44% है। वित्तीय बाधाओं और तकनीकी समस्याओं के कारण कई किसान प्रीमियम का भुगतान समय पर नहीं कर पाए, जिससे उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस अपील का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना है, विशेषकर ऐसे समय में जब वे मानसून की कमी के कारण पहले से ही संकट में हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में कृषि एक महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र है, जो देश की एक बड़ी आबादी को आजीविका प्रदान करता है।
- भारतीय कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर करती है, जिससे सूखे या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बना रहता है।
- किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से बचाने के लिए विभिन्न फसल बीमा योजनाएँ शुरू की गई हैं।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भारत सरकार द्वारा 2016 में शुरू की गई एक प्रमुख फसल बीमा योजना है, जिसमें मौसम आधारित फसल बीमा योजना भी शामिल है।
- फसल बीमा योजनाएँ किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं और कृषि क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद करती हैं।
- प्रीमियम भुगतान की समय सीमा अक्सर किसानों के लिए एक चुनौती होती है, खासकर जब वे वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हों या तकनीकी बाधाएँ हों।
मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) क्या है?
- मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) एक फसल बीमा उत्पाद है जो किसानों को प्रतिकूल मौसम की घटनाओं, जैसे वर्षा की कमी या अधिकता, तापमान में उतार-चढ़ाव, आर्द्रता आदि के कारण होने वाले फसल नुकसान से बचाता है।
- यह योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का एक घटक है।
- WBCIS का मुख्य उद्देश्य किसानों को मौसम की प्रतिकूलताओं के कारण होने वाले अनुमानित फसल नुकसान से होने वाली वित्तीय कठिनाइयों को कम करना है।
- इस योजना के तहत, बीमा कवरेज विशिष्ट मौसम मापदंडों के आधार पर प्रदान किया जाता है। यदि अधिसूचित मौसम स्टेशन पर दर्ज किए गए मौसम डेटा पूर्व-निर्धारित सीमा से विचलित होते हैं, तो किसानों को क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाता है।
- यह योजना फसल कटाई प्रयोगों की आवश्यकता के बिना, मौसम डेटा के आधार पर तेजी से दावों का निपटान करती है, जिससे किसानों को समय पर सहायता मिलती है।
- WBCIS में विभिन्न प्रकार की फसलों, जिनमें बागवानी फसलें भी शामिल हैं, को कवर किया जाता है, जिससे किसानों को व्यापक सुरक्षा मिलती है।
- प्रीमियम का भुगतान किसानों, राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा साझा किया जाता है, जिससे किसानों पर वित्तीय बोझ कम होता है।
- योजना का क्रियान्वयन कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत किया जाता है, जिसमें बीमा कंपनियाँ और राज्य सरकारें भागीदार होती हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मौसम आधारित फसल बीमा योजना | किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं से होने वाले फसल नुकसान से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। |
| प्रीमियम भुगतान की समय सीमा | यह सुनिश्चित करती है कि किसान समय पर बीमा कवर प्राप्त कर सकें, लेकिन वित्तीय बाधाओं के कारण अक्सर चुनौती बन जाती है। |
| बागवानी फसलें | योजना में सुपारी, काली मिर्च, अदरक और आम जैसी महत्वपूर्ण बागवानी फसलों को शामिल करना, इन फसलों पर निर्भर किसानों को लाभ पहुँचाता है। |
| वर्षा की कमी | मानसून में औसत से कम वर्षा फसल उत्पादन को सीधे प्रभावित करती है और किसानों की वित्तीय स्थिति को कमजोर करती है। |
| भुगतान के तरीके | सहकारी समितियों या बैंकों के माध्यम से प्रीमियम भुगतान की अनिवार्यता, तकनीकी समस्याओं के कारण किसानों के लिए बाधा बन सकती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- फसल बीमा योजनाएं किसानों को अप्रत्याशित मौसम घटनाओं जैसे सूखे या अत्यधिक वर्षा से होने वाले फसल नुकसान से बचाकर उनकी आय को स्थिर करने में मदद करती हैं।
- प्रीमियम भुगतान की समय सीमा बढ़ाने से उन किसानों को राहत मिल सकती है जो वित्तीय बाधाओं या तकनीकी समस्याओं के कारण समय पर भुगतान नहीं कर पाए हैं, जिससे उन्हें बीमा कवर का लाभ मिल सके।
सामाजिक महत्व
- किसानों के हितों की रक्षा करना और उन्हें वित्तीय संकट से बचाना ग्रामीण आजीविका और सामाजिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
- समय पर बीमा कवर न मिलने से किसानों में निराशा बढ़ सकती है और कृषि क्षेत्र में निवेश कम हो सकता है।
प्रशासनिक महत्व
- राज्य सरकार द्वारा प्रीमियम भुगतान की समय सीमा का विस्तार करना किसानों की समस्याओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
- भुगतान प्रणाली में तकनीकी समस्याओं को हल करना और भुगतान के अधिक सुलभ विकल्प प्रदान करना प्रशासनिक दक्षता में सुधार करेगा।
चुनौतियाँ
1. वित्तीय बाधाएँ
- मानसून की कमी के कारण फसल खराब होने से किसानों की आय प्रभावित होती है, जिससे उनके लिए प्रीमियम का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है।
- छोटे और सीमांत किसानों के पास अक्सर आपातकालीन स्थितियों के लिए पर्याप्त बचत नहीं होती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: कृषि वित्त और ऋण
2. तकनीकी और प्रक्रियात्मक समस्याएँ
- प्रीमियम भुगतान के लिए केवल सहकारी समितियों या बैंकों पर निर्भरता, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, सर्वर और अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण भुगतान में बाधा डाल सकती है।
- कॉमन सर्विस सेंटरों (Common Service Centres) के माध्यम से भुगतान का विकल्प हटाना कई किसानों के लिए असुविधाजनक हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: ई-शासन, नागरिक चार्टर
3. मौसम की अनिश्चितता
- जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा पैटर्न में बदलाव और अप्रत्याशित मौसम की घटनाएं फसल बीमा योजनाओं की आवश्यकता को बढ़ाती हैं, लेकिन साथ ही किसानों पर वित्तीय बोझ भी डालती हैं।
- मानसून की कमी सीधे फसल उत्पादन और किसानों की भुगतान क्षमता को प्रभावित करती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: जलवायु परिवर्तन, कृषि पर प्रभाव
4. योजना का प्रभावी कार्यान्वयन
- यह सुनिश्चित करना कि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे, एक चुनौती है, खासकर जब भुगतान प्रक्रिया में बाधाएं आती हैं।
- योजना के नियमों और प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता की कमी भी एक समस्या हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कल्याणकारी योजनाएं, कमजोर वर्ग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रीमियम भुगतान की समय सीमा | वित्तीय बाधाओं और तकनीकी समस्याओं के कारण कई किसान समय पर भुगतान नहीं कर पाते, जिससे वे बीमा कवर से वंचित रह जाते हैं। |
| वर्षा की कमी | मानसून में 34% से 44% तक की कमी से फसलें प्रभावित होती हैं, जिससे किसानों की आय घटती है और प्रीमियम भुगतान की क्षमता कम होती है। |
| सीमित भुगतान विकल्प | कॉमन सर्विस सेंटरों के बजाय केवल सहकारी समितियों या बैंकों के माध्यम से भुगतान की अनिवार्यता, ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए पहुंच और सुविधा की समस्या पैदा करती है। |
| सर्वर और तकनीकी समस्याएँ | भुगतान प्रक्रिया के दौरान सर्वर डाउनटाइम और अन्य तकनीकी खराबी किसानों को समय पर प्रीमियम जमा करने से रोकती है। |
| बागवानी फसलों का कवरेज | योजना में बागवानी फसलों को शामिल करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इन फसलों के किसानों को भी भुगतान संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Weather-based Crop Insurance Scheme)
आगे की राह
- प्रीमियम भुगतान की समय सीमा को पर्याप्त अवधि के लिए बढ़ाना ताकि सभी पात्र किसान भुगतान कर सकें।
- भुगतान के तरीकों में विविधता लाना, जिसमें कॉमन सर्विस सेंटर (Common Service Centres) को फिर से शामिल करना और डिजिटल भुगतान के अन्य सुलभ विकल्प प्रदान करना शामिल है।
- भुगतान पोर्टल और सर्वर की तकनीकी क्षमता को मजबूत करना ताकि अंतिम समय में होने वाली भीड़ को संभाला जा सके।
- किसानों को फसल बीमा योजनाओं के लाभों और भुगतान प्रक्रियाओं के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
- राज्य और केंद्र सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करना ताकि ऐसी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
- वित्तीय रूप से कमजोर किसानों के लिए प्रीमियम भुगतान में सहायता या सब्सिडी के विकल्पों पर विचार करना।
- मौसम डेटा संग्रह और विश्लेषण प्रणालियों में सुधार करना ताकि बीमा दावों का त्वरित और सटीक निपटान हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना · मौसम आधारित फसल बीमा · फसल बीमा प्रीमियम · कृषि संकट · जलवायु परिवर्तन · किसानों की आय · राज्यों की भूमिका · सहकारी समितियाँ · वित्तीय समावेशन · आपदा प्रबंधन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 38’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘अनुच्छेद 39’: ‘राज्य नीति के कुछ सिद्धांतों का पालन करेगा’}
- {‘अनुच्छेद 46’: ‘अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि’}
अवधारणा प्रवाह
मानसून में कम वर्षा → फसल को नुकसान और किसानों की आय में कमी → प्रीमियम भुगतान में वित्तीय बाधाएँ → तकनीकी समस्याओं से भुगतान में देरी → बीमा कवर से वंचित होने का जोखिम → किसानों की वित्तीय सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली फसल क्षति के लिए किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
2. मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) PMFBY का एक घटक है, जिसमें उपज के बजाय मौसम के मापदंडों को बीमा का आधार बनाया जाता है।
3. PMFBY के तहत, सभी किसानों के लिए फसल बीमा प्रीमियम का भुगतान अनिवार्य है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। PMFBY का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों से होने वाली फसल क्षति के खिलाफ किसानों को बीमा कवरेज प्रदान करना है। कथन 2 भी सही है। WBCIS, PMFBY का ही एक हिस्सा है जो मौसम के मापदंडों (जैसे वर्षा, तापमान) के आधार पर क्षतिपूर्ति प्रदान करता है, न कि वास्तविक उपज हानि के आधार पर। कथन 3 गलत है। PMFBY के तहत, ऋणी किसानों के लिए बीमा अनिवार्य है, लेकिन गैर-ऋणी किसानों के लिए यह स्वैच्छिक है।
Q2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रशासित है।
2. इसमें अनाज, बाजरा, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलें शामिल हैं।
3. केंद्र और राज्य सरकारें प्रीमियम सब्सिडी साझा करती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है। PMFBY को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रशासित किया जाता है। कथन 2 भी सही है। इसमें अधिसूचित खाद्य फसलें (अनाज, बाजरा, दलहन), तिलहन और वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलें शामिल हैं। कथन 3 भी सही है। केंद्र और राज्य सरकारें प्रीमियम सब्सिडी को 50:50 के अनुपात में साझा करती हैं, हालांकि पूर्वोत्तर राज्यों में यह अनुपात 90:10 है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में कृषि क्षेत्र को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने में मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उन्हें दूर करने के उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें इसके उद्देश्य और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के एक घटक के रूप में इसकी स्थिति शामिल हो।
2. **WBCIS की भूमिका:**
* किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना।
* मौसम के मापदंडों (वर्षा, तापमान आदि) के आधार पर त्वरित क्षतिपूर्ति।
* जोखिम प्रबंधन में सहायता।
* फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन।
* कृषि क्षेत्र की स्थिरता में योगदान।
3. **कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:**
* **प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा:** किसानों की वित्तीय बाधाओं के कारण प्रीमियम भुगतान में देरी।
* **तकनीकी समस्याएँ:** सर्वर डाउनटाइम, भुगतान गेटवे की समस्याएँ (जैसा कि समाचार में उल्लिखित है)।
* **जागरूकता का अभाव:** किसानों के बीच योजना के लाभों और प्रक्रिया की जानकारी की कमी।
* **मौसम डेटा की सटीकता:** स्थानीय स्तर पर सटीक और विश्वसनीय मौसम डेटा की उपलब्धता और गुणवत्ता।
* **दावों का निपटान:** दावों के निपटान में पारदर्शिता और गति की कमी।
* **वित्तीय समावेशन:** सहकारी समितियों और बैंकों तक सभी किसानों की पहुँच का अभाव।
* **फसलों का कवरेज:** सभी महत्वपूर्ण फसलों और क्षेत्रों को पर्याप्त रूप से कवर न कर पाना।
4. **चुनौतियों को दूर करने के उपाय:**
* **प्रीमियम भुगतान की समय-सीमा में लचीलापन:** विशेष परिस्थितियों में समय-सीमा का विस्तार।
* **भुगतान के वैकल्पिक माध्यम:** कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जैसे अधिक सुलभ विकल्पों को पुनः शामिल करना।
* **तकनीकी बुनियादी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण:** सर्वर क्षमता बढ़ाना और डिजिटल भुगतान प्रणालियों को मजबूत करना।
* **जागरूकता अभियान:** स्थानीय भाषाओं में व्यापक प्रचार-प्रसार।
* **मौसम स्टेशनों का विस्तार:** अधिक संख्या में स्वचालित मौसम स्टेशनों (AWS) की स्थापना और डेटा की गुणवत्ता में सुधार।
* **दावा निपटान प्रक्रिया का सरलीकरण:** पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना।
* **वित्तीय साक्षरता और पहुँच:** किसानों को बैंकों और सहकारी समितियों से जोड़ने के प्रयास।
5. **निष्कर्ष:** WBCIS की क्षमता को पहचानते हुए, इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए नीतिगत सुधारों और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता पर बल दें, ताकि यह भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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