महाराष्ट्र विधानसभा ने ‘एक राष्ट्र, एक एप्लिकेशन’ नेवा को अपनाया

महाराष्ट्र विधानसभा ने 'एक राष्ट्र, एक एप्लिकेशन' नेवा को अपनाया — Maharashtra NeVA Implementation Milestones

महाराष्ट्र विधानसभा ने ‘एक राष्ट्र, एक एप्लिकेशन’ नेवा को अपनाया

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, शासन प्रणाली और सामाजिक न्याय  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – सूचना प्रौद्योगिकी
  • Prelims: राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा), डिजिटल इंडिया कार्यक्रम, एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन, संसदीय कार्य मंत्रालय, कागज़ रहित विधानमंडल, ई-शासन, समझौता ज्ञापन (एमओयू), राज्य विधानमंडल, मिशन मोड परियोजना, नागरिक-केंद्रित शासन
  • Essay: डिजिटल इंडिया: शासन में पारदर्शिता और दक्षता का मार्ग, लोकतंत्र में प्रौद्योगिकी की भूमिका: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत एक मिशन मोड परियोजना है, जिसका उद्देश्य ‘एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन’ के विजन को साकार करते हुए सभी राज्य विधानसभाओं को कागज़ रहित, पारदर्शी और कुशल बनाना है, जिससे लोकतांत्रिक शासन में सुधार और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा मिले।

यह खबर चर्चा में क्यों?

महाराष्ट्र विधानसभा ने राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) को अपनाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 16 जुलाई 2026 को मुंबई में संसदीय कार्य मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार के संसदीय कार्य विभाग और महाराष्ट्र विधानसभा सचिवालय के बीच एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें नेवा परियोजना के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर में तेजी लाने पर सहमति बनी। यह पहल महाराष्ट्र विधानमंडल को कागज़ रहित, पारदर्शी और कुशल बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

पृष्ठभूमि

  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत ‘एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन’ का विजन भारत में शासन को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
  • राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) संसदीय कार्य मंत्रालय की एक मिशन मोड परियोजना है, जिसका उद्देश्य सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभाओं को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है।
  • यह परियोजना कुल 673.94 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ स्वीकृत की गई है, जिसमें महाराष्ट्र के लिए अनुमानित लागत लगभग 48 करोड़ रुपये है।
  • नेवा का लक्ष्य विधायी कामकाज को इलेक्ट्रॉनिक रूप से सुलभ बनाकर कागज़ रहित, पारदर्शी और कुशल कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना है।
  • अब तक, 33 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं ने संसदीय कार्य मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, और 21 विधानसभाएं पूरी तरह से डिजिटल सदनों में परिवर्तित हो चुकी हैं।
  • महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा नेवा को अपनाना देश के डिजिटल विधायी परितंत्र को और मजबूत करेगा और राष्ट्रव्यापी विस्तार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) क्या है?

  • नेवा भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय की एक मिशन मोड परियोजना है, जिसे डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है।
  • इसका प्राथमिक उद्देश्य देश के सभी 37 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभाओं को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटलीकरण करना है।
  • यह ‘एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका लक्ष्य विधायी कामकाज के लिए एक समान और कुशल प्रणाली स्थापित करना है।
  • नेवा विधायकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से विधायी कामकाज तक पहुंच प्रदान करता है, जिसमें प्रश्न, विधेयक, प्रस्ताव, समितियां और अन्य विधायी दस्तावेज शामिल हैं।
  • यह परियोजना कागज़ के उपयोग को कम करके ‘कागज़ रहित’ विधानमंडलों को बढ़ावा देती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होती है।
  • नेवा का उद्देश्य विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, जिससे नागरिकों को विधायी कार्यों और कार्यवाही तक सुगम पहुंच मिल सके।
  • यह क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता प्रदान करके विधायकों और सचिवालय कर्मचारियों को डिजिटल उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सक्षम बनाता है।
  • परियोजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच एक निर्धारित अनुपात में किया जाता है, जिसमें केंद्र सरकार 60:40 के अनुपात में (उत्तर-पूर्वी और पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10) वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म सभी विधायी कार्यों को एक ही स्थान पर लाता है, जिससे पहुंच और प्रबंधन आसान होता है।
कागज़ रहित कार्यप्रणाली कागज़ के उपयोग को कम करता है, पर्यावरण संरक्षण में योगदान देता है और परिचालन लागत बचाता है।
पारदर्शिता और दक्षता विधायी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाता है और कार्यप्रणाली की दक्षता में सुधार करता है।
नागरिक-केंद्रित पहुंच नागरिकों को विधायी कार्यों और कार्यवाही तक आसान पहुंच प्रदान करता है, जिससे जनभागीदारी बढ़ती है।
क्षमता निर्माण विधायकों और कर्मचारियों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करता है, जिससे डिजिटल साक्षरता बढ़ती है।
सुरक्षित डेटा प्रबंधन विधायी डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करता है, जिससे संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहती है।

महत्व

शासन में सुधार

  • नेवा विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाता है, जिससे सुशासन को बढ़ावा मिलता है।
  • यह विधायकों को अपने विधायी दायित्वों का अधिक कुशलता से निर्वहन करने में सहायता करता है, जिससे नीति निर्माण की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • कागज़ रहित कार्यप्रणाली प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाती है और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करती है।

डिजिटल सशक्तिकरण

  • यह परियोजना देश के विधायी निकायों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है, जो डिजिटल इंडिया के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है।
  • नागरिकों को विधायी कार्यों तक सुगम पहुंच प्रदान करके, यह डिजिटल साक्षरता और जनभागीदारी को मजबूत करता है।
  • यह एक आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत विधायी प्रणाली की नींव रखता है, जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।

पर्यावरण संरक्षण

  • कागज़ के उपयोग को कम करके, नेवा वनों की कटाई को रोकने और कार्बन पदचिह्न को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
  • यह एक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल शासन मॉडल को बढ़ावा देता है, जो दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ प्रदान करता है।
  • कम कागज़ का उपयोग अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों को भी कम करता है।

संघवाद को सुदृढ़ करना

  • सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभाओं को एक समान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर, नेवा सहकारी संघवाद को बढ़ावा देता है।
  • यह विभिन्न विधानमंडलों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं और सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाता है।
  • एक एकीकृत प्रणाली राष्ट्रीय स्तर पर विधायी डेटा के संकलन और विश्लेषण को आसान बनाती है।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी अवसंरचना का अभाव

  • कई राज्यों में आवश्यक हार्डवेयर, नेटवर्क कनेक्टिविटी और बिजली आपूर्ति की कमी एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
  • पुराने सिस्टम को नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत करना जटिल हो सकता है।

2. डिजिटल साक्षरता और क्षमता निर्माण

  • विधायकों और सचिवालय कर्मचारियों के बीच डिजिटल उपकरणों के उपयोग की जानकारी और कौशल का अभाव।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता और उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करना।

3. डेटा सुरक्षा और गोपनीयता

  • संवेदनशील विधायी डेटा को साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच से बचाना।
  • डेटा गोपनीयता कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना।

4. वित्तीय बाधाएं

  • परियोजना के कार्यान्वयन और रखरखाव के लिए पर्याप्त और समय पर धन की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • राज्यों द्वारा अपने हिस्से के वित्तपोषण को पूरा करने में चुनौतियां।

5. प्रतिरोध और अनुकूलन

  • पारंपरिक कार्यप्रणाली से डिजिटल कार्यप्रणाली में बदलाव के प्रति कर्मचारियों और विधायकों का प्रतिरोध।
  • नए सिस्टम के अनुकूलन में लगने वाला समय और प्रयास।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तकनीकी एकीकरण विभिन्न राज्यों में मौजूदा आईटी प्रणालियों के साथ नेवा का निर्बाध एकीकरण।
मानव संसाधन डिजिटल कौशल वाले प्रशिक्षित कर्मियों की कमी और निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता।
साइबर सुरक्षा विधायी डेटा की सुरक्षा और साइबर खतरों से बचाव के लिए मजबूत उपाय।
वित्तीय स्थिरता परियोजना के दीर्घकालिक रखरखाव और उन्नयन के लिए सतत वित्तपोषण मॉडल।
उपयोगकर्ता स्वीकृति विधायकों और कर्मचारियों द्वारा नए डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाने और उपयोग करने की इच्छा।
पहुंच और समावेशन डिजिटल डिवाइड को कम करना और सभी हितधारकों के लिए समान पहुंच सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम
  • भारतनेट परियोजना
  • उमंग (UMANG) ऐप
  • ई-गवर्नेंस योजना
  • राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (NKN)
  • साइबर सुरक्षित भारत पहल
  • प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA)
  • राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN)
  • डिजिलॉकर
  • माईगव (MyGov)

आगे की राह

  • सभी हितधारकों के लिए व्यापक और निरंतर क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिसमें डिजिटल साक्षरता और नेवा के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाए।
  • राज्य सरकारों को पर्याप्त वित्तीय सहायता और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान की जाए, विशेष रूप से उन राज्यों को जहां अवसंरचनात्मक चुनौतियां अधिक हैं।
  • एक मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा विकसित किया जाए, जिसमें नियमित ऑडिट और भेद्यता परीक्षण शामिल हों, ताकि डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
  • नेवा प्लेटफॉर्म को उपयोगकर्ता के अनुकूल और सहज बनाने के लिए निरंतर फीडबैक और सुधार तंत्र स्थापित किया जाए।
  • डिजिटल डिवाइड को पाटने और सभी क्षेत्रों, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए भारतनेट जैसी परियोजनाओं का विस्तार किया जाए।
  • परियोजना के कार्यान्वयन की प्रगति की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए, ताकि किसी भी बाधा को समय पर दूर किया जा सके।
  • अन्य सफल ई-गवर्नेंस पहलों से सीख लेकर नेवा के कार्यान्वयन में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जाए।
  • नागरिकों को विधायी प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं और फीडबैक तंत्र स्थापित किए जाएं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) · डिजिटल इंडिया · ई-शासन · कागज़ रहित विधानमंडल · पारदर्शिता · दक्षता · नागरिक-केंद्रित शासन · क्षमता निर्माण · साइबर सुरक्षा · सहकारी संघवाद · तकनीकी एकीकरण · डिजिटल डिवाइड

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 168: राज्यों में विधानमंडलों का गठन
  • अनुच्छेद 187: राज्य विधानमंडल का सचिवालय
  • सातवीं अनुसूची (राज्य सूची): राज्य विधानमंडल से संबंधित विषय
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को कानूनी मान्यता
  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम: ई-शासन और डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा

अवधारणा प्रवाह

डिजिटल इंडिया विजन  →  एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन  →  नेवा परियोजना का विकास  →  राज्य विधानसभाओं द्वारा अंगीकरण  →  कागज़ रहित, पारदर्शी विधानमंडल  →  नागरिकों को सुगम पहुंच  →  सुशासन और सशक्त लोकतंत्र

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय की एक मिशन मोड परियोजना है।
2. इसका उद्देश्य केवल लोकसभा और राज्यसभा को डिजिटलीकरण करना है।
3. यह ‘एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन’ के विजन के तहत विकसित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है। नेवा संसदीय कार्य मंत्रालय की एक मिशन मोड परियोजना है। कथन 2 गलत है। नेवा का उद्देश्य सभी 37 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभाओं का डिजिटलीकरण करना है, न कि केवल लोकसभा और राज्यसभा का। कथन 3 सही है। यह ‘एक राष्ट्र, एक एप्लीकेशन’ के विजन के तहत विकसित किया गया है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के संभावित लाभों में से है/हैं?
1. विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता में वृद्धि।
2. कागज़ के उपयोग में कमी से पर्यावरणीय लाभ।
3. नागरिकों को विधायी कार्यों तक सुगम पहुंच।
4. विधायकों की क्षमता निर्माण।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 3 और 4
  3. केवल 1, 2 और 3
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — सभी कथन सही हैं। नेवा विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाता है, कागज़ के उपयोग को कम करके पर्यावरणीय लाभ प्रदान करता है, नागरिकों को विधायी कार्यों तक सुगम पहुंच प्रदान करता है, और विधायकों की क्षमता निर्माण में सहायता करता है। इसलिए, विकल्प ‘D’ सही उत्तर है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) भारत में लोकतांत्रिक शासन को कैसे मजबूत कर सकता है? इसके कार्यान्वयन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, नेवा के माध्यम से लोकतांत्रिक शासन में सुधार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालें, जैसे पारदर्शिता, दक्षता, जनभागीदारी और पर्यावरणीय लाभ। दूसरे भाग में, नेवा के कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों, जैसे तकनीकी अवसंरचना, डिजिटल साक्षरता, डेटा सुरक्षा और वित्तीय बाधाओं का विश्लेषण करें। अंत में, इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए क्षमता निर्माण, वित्तीय सहायता, साइबर सुरक्षा उपायों और उपयोगकर्ता-केंद्रित दृष्टिकोण जैसे ठोस उपायों का सुझाव दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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