महिला आरक्षण विधेयक: शिअद ने केंद्र से तुरंत लागू करने की मांग, जानें पूरा मामला

महिला आरक्षण विधेयक को अकाली दल का समर्थन: शिअद ने केंद्र से की ये मांग, BJP से गठबंधन पर क्या बोले गुलजार? — concept mind map

महिला आरक्षण विधेयक: शिअद ने केंद्र से तुरंत लागू करने की मांग, जानें पूरा मामला

Map of Punjab highlighted on the map of India — Women Reservation Bill implementation demand UPSC
मानचित्र व माइंड-मैप: SAD demands Women Reservation Bill implementation

✎ महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करता है, जो अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान, संसद और राज्य विधायिका, केंद्र-राज्य संबंध, सामाजिक न्याय  |  GS Paper I — भारतीय समाज में महिलाओं की भूमिका
  • Prelims: महिला आरक्षण विधेयक, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, परिसीमन, अनुच्छेद 330A, अनुच्छेद 332A, अनुच्छेद 334A, शिरोमणि अकाली दल
  • Essay: भारत में महिला सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान, लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व का महत्व और समावेशी शासन

त्वरित पुनरावृत्ति: महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करता है, जो अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने केंद्र सरकार से महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) को तत्काल लागू करने की मांग की है। पार्टी ने सभी राज्यों में संसदीय सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के केंद्र के प्रस्ताव का भी समर्थन किया है, जिसे परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया जाना है। अकाली दल ने स्पष्ट किया है कि वे महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों को पंजाब के हित, शांति और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।

पृष्ठभूमि

  • महिला आरक्षण विधेयक, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से भी जाना जाता है, सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था।
  • यह विधेयक लोकसभा (Lok Sabha) और राज्य विधानसभाओं (State Assemblies) में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है।
  • इस आरक्षण को लागू करने के लिए संविधान में नए अनुच्छेद 330A, 332A और 334A जोड़े गए हैं।
  • हालांकि, यह आरक्षण तत्काल लागू नहीं होगा, बल्कि अगली जनगणना (Census) और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही प्रभावी होगा।
  • परिसीमन का अर्थ है किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय के लिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण।
  • भारत में परिसीमन का कार्य परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जिसका गठन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया जाता है।

महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन क्या है?

  • महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम): यह विधेयक भारतीय संविधान में संशोधन करके लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में महिलाओं के लिए कुल सीटों का एक-तिहाई (33%) आरक्षित करता है। इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी आवाज़ को मजबूत करना है, जिससे लैंगिक समानता (Gender Equality) और समावेशी लोकतंत्र को बढ़ावा मिल सके।
  • लागू होने की प्रक्रिया: यह अधिनियम अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही प्रभावी होगा। अनुच्छेद 334A में यह प्रावधान किया गया है कि आरक्षण 15 वर्षों की अवधि के लिए होगा, जिसे संसद द्वारा बढ़ाया जा सकता है।
  • परिसीमन: परिसीमन का अर्थ है किसी देश या विधायी निकाय वाले प्रशासनिक क्षेत्र में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करना। यह प्रक्रिया जनसंख्या में परिवर्तन को दर्शाने और ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए की जाती है।
  • परिसीमन आयोग: भारत में परिसीमन का कार्य एक स्वतंत्र उच्च-शक्ति निकाय, परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है। इस आयोग के आदेशों को कानून का बल प्राप्त होता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
  • वर्तमान स्थिति: भारत में अंतिम परिसीमन 2002 में हुआ था, लेकिन लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को 1971 की जनगणना के आधार पर 2026 तक के लिए फ्रीज कर दिया गया था। महिला आरक्षण विधेयक के लागू होने के लिए इस फ्रीज को हटाना और एक नया परिसीमन करना आवश्यक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वृद्धि और लैंगिक समानता को बढ़ावा
परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन संसदीय सीटों का निष्पक्ष और समान वितरण सुनिश्चित करना
तत्काल कार्यान्वयन की मांग विधेयक के लाभों को जल्द से जल्द जमीनी स्तर पर लाना
संसदीय सीटों में 50% वृद्धि का समर्थन राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करना और संघीय ढांचे को मजबूत करना
सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरणा महिलाओं की गरिमा, समानता और समान अधिकारों के सिद्धांतों का पालन

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह विधेयक महिलाओं को राजनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करेगा, जिससे उनकी आवाज और मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा।
  • महिलाओं के सशक्तिकरण (Empowerment) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे समाज में उनकी स्थिति मजबूत होगी और लैंगिक समानता (Gender Equality) के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

राजनीतिक महत्व

  • परिसीमन प्रक्रिया के साथ महिला आरक्षण का समर्थन संसदीय प्रतिनिधित्व को अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनाएगा।
  • राज्यों की संसदीय सीटों में 50% की वृद्धि का प्रस्ताव संघीय ढांचे (Federal Structure) को मजबूत करेगा और विभिन्न राज्यों को उचित प्रतिनिधित्व प्रदान करेगा।

शासनिक महत्व

  • महिला आरक्षण के तत्काल कार्यान्वयन की मांग से शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे नीतियों और कार्यक्रमों में महिलाओं के दृष्टिकोण को शामिल किया जा सकेगा।
  • परिसीमन प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से लागू करने से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

चुनौतियाँ

1. परिसीमन की निष्पक्षता

  • परिसीमन प्रक्रिया में राज्यों के हितों का ध्यान रखना और किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो, यह सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है।

2. कार्यान्वयन में देरी

  • महिला आरक्षण विधेयक के तत्काल कार्यान्वयन की मांग के बावजूद, इसे लागू करने में प्रक्रियात्मक और राजनीतिक बाधाएं आ सकती हैं।
  • परिसीमन और आरक्षण दोनों को एक साथ लागू करने में समय लग सकता है।

3. राजनीतिक सहमति

  • महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन दोनों पर सभी राजनीतिक दलों के बीच पूर्ण सहमति बनाना एक चुनौती है।
  • गठबंधन की राजनीति और क्षेत्रीय दलों के हित इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परिसीमन की प्रक्रिया राज्यों के बीच सीटों के वितरण में संभावित असंतुलन और राजनीतिक विवाद
महिला आरक्षण का कार्यान्वयन तकनीकी और कानूनी बाधाओं के कारण कार्यान्वयन में देरी की संभावना
राजनीतिक सर्वसम्मति का अभाव विधेयक के त्वरित और सुचारु कार्यान्वयन के लिए सभी दलों का समर्थन प्राप्त करना
संसदीय सीटों में वृद्धि संसद के आकार और कार्यप्रणाली पर संभावित प्रभाव

आगे की राह

  • महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए।
  • सभी राज्यों और राजनीतिक दलों के साथ व्यापक विचार-विमर्श (Consultation) किया जाए ताकि उनकी चिंताओं को दूर किया जा सके।
  • परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) को पर्याप्त स्वायत्तता और संसाधन प्रदान किए जाएं ताकि वह निष्पक्ष रूप से कार्य कर सके।
  • महिलाओं को राजनीतिक प्रक्रियाओं में भाग लेने के लिए जागरूक और प्रशिक्षित करने हेतु कार्यक्रम चलाए जाएं।
  • संसद में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के आवंटन में क्षेत्रीय और सामाजिक विविधता का ध्यान रखा जाए।
  • परिसीमन प्रक्रिया के दौरान जनसंख्या के आंकड़ों को अद्यतन (Updated) और सटीक रखा जाए ताकि न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

महिला आरक्षण विधेयक · नारी शक्ति वंदन अधिनियम · परिसीमन · समान प्रतिनिधित्व · संवैधानिक संशोधन · स्थानीय निकायों में महिला आरक्षण · संघवाद · राजनीतिक सशक्तिकरण · आरक्षण का क्रियान्वयन · संसदीय सीटें

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 82’, ‘note’: ‘परिसीमन के संबंध में प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 330A’, ‘note’: ‘लोकसभा में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 332A’, ‘note’: ‘राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण’}

अवधारणा प्रवाह

महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन  →  परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन  →  संसदीय सीटों में 50% वृद्धि का प्रस्ताव  →  महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण  →  लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व में सुधार  →  शासन में लैंगिक समानता को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
2. यह अधिनियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिसके लिए किसी और प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है।
3. यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 334ए में संशोधन करता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। कथन 2 गलत है। यह अधिनियम तत्काल प्रभाव से लागू नहीं हुआ है। इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। कथन 3 गलत है। यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 334ए को सम्मिलित करता है, संशोधन नहीं करता।

Q2. महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. यह विधेयक केवल लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है।
  2. इस विधेयक के तहत आरक्षण केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए है।
  3. यह विधेयक महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के रोटेशन का प्रावधान करता है।
  4. इस विधेयक को लागू करने के लिए राज्यों की सहमति अनिवार्य है।

उत्तर: यह विधेयक महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के रोटेशन का प्रावधान करता है। — विकल्प C सही है। महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के रोटेशन का प्रावधान करता है, ताकि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को समय-समय पर प्रतिनिधित्व मिल सके। विकल्प A गलत है, क्योंकि यह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं दोनों में आरक्षण का प्रावधान करता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि यह सभी महिलाओं के लिए है, जिसमें SC/ST महिलाओं के लिए उप-आरक्षण भी शामिल है। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह एक संवैधानिक संशोधन है जिसे संसद द्वारा पारित किया जाता है और राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं होती (कुछ विशेष मामलों को छोड़कर)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के प्रमुख प्रावधानों की चर्चा कीजिए। इसके क्रियान्वयन में परिसीमन की भूमिका और संभावित चुनौतियों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का संक्षिप्त परिचय, इसके ऐतिहासिक संदर्भ और उद्देश्य का उल्लेख।
2. **प्रमुख प्रावधान:**
* लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटों का आरक्षण।
* अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए एक-तिहाई उप-आरक्षण।
* आरक्षित सीटों का रोटेशन (चक्रानुक्रम) का प्रावधान।
* संविधान में अनुच्छेद 334ए का समावेश, जो आरक्षण को 15 वर्षों के लिए प्रभावी बनाता है, जिसे संसद द्वारा बढ़ाया जा सकता है।
* यह आरक्षण जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होगा।
3. **परिसीमन की भूमिका:**
* परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया का अर्थ और उद्देश्य (जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण)।
* महिला आरक्षण के लिए सीटों के निर्धारण और रोटेशन में परिसीमन की अनिवार्यता।
* परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) की भूमिका और संरचना।
4. **संभावित चुनौतियाँ:**
* क्रियान्वयन में देरी: जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया में लगने वाला समय।
* राजनीतिक इच्छाशक्ति: परिसीमन के बाद भी तत्काल लागू करने में राजनीतिक दलों की भूमिका।
* राज्यों के बीच असमानता: विभिन्न राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर के कारण सीटों के पुनर्वितरण पर संभावित मतभेद।
* प्रतिनिधित्व का स्वरूप: क्या यह आरक्षण वास्तविक राजनीतिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करेगा या केवल सांकेतिक रहेगा।
* आरक्षित सीटों के रोटेशन से उत्पन्न होने वाली समस्याएँ (जैसे मौजूदा प्रतिनिधियों का निर्वाचन क्षेत्र बदलना)।
5. **निष्कर्ष:** विधेयक के महत्व को रेखांकित करते हुए, इसके सफल और समयबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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