महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन: केंद्र-राज्य समन्वय और सशक्तिकरण पर केंद्रित

महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन: केंद्र-राज्य समन्वय और सशक्तिकरण पर केंद्रित

महिला एवं बाल विकास शिखर सम्मेलन: केंद्र-राज्य समन्वय और सशक्तिकरण पर केंद्रित

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महिला एवं बाल विकास प्रक्रिया

✎ महिला और बाल विकास पर विभागीय शिखर सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा महिलाओं और बच्चों के कल्याण से संबंधित पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय, केंद्र एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद  |  GS Paper I — समाज और महिला सशक्तिकरण
  • Prelims: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, आंगनवाड़ी केंद्र, महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, पोषण, केंद्र-राज्य संबंध, समन्वय, योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
  • Essay: भारत में महिला एवं बाल विकास: चुनौतियाँ और आगे की राह, सहकारी संघवाद के माध्यम से सामाजिक क्षेत्र में सुधार

त्वरित पुनरावृत्ति: महिला और बाल विकास पर विभागीय शिखर सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा महिलाओं और बच्चों के कल्याण से संबंधित पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने नई दिल्ली में महिला और बाल विकास पर आयोजित दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के महिला और बाल विकास मंत्रियों तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करना तथा महिलाओं को सशक्त बनाने एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने वाली पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता करना था।

पृष्ठभूमि

  • भारत में महिला और बाल विकास एक महत्वपूर्ण नीतिगत क्षेत्र है, जिसमें विभिन्न सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना शामिल है, जैसे कि कुपोषण, शिक्षा तक पहुँच, लैंगिक असमानता और सुरक्षा संबंधी मुद्दे।
  • भारत सरकार ने महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए कई योजनाएँ और कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’, ‘पोषण अभियान’ और ‘मिशन शक्ति’ प्रमुख हैं।
  • इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत समन्वय और सहयोग पर निर्भर करता है, क्योंकि सामाजिक क्षेत्र राज्य सूची का विषय है।
  • आंगनवाड़ी केंद्र एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत जमीनी स्तर पर पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा सेवाएँ प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत और कानूनी प्रावधानों को मजबूत करना, विशेषकर संवेदनशील परिस्थितियों में रहने वालों के लिए, एक सतत प्राथमिकता रही है।
  • विभागीय शिखर सम्मेलन जैसे मंच केंद्र और राज्यों को अनुभवों का आदान-प्रदान करने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने का अवसर प्रदान करते हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) क्या है?

  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है, जो महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास और कल्याण के लिए नीतियाँ, कार्यक्रम और योजनाएँ तैयार करने और उन्हें लागू करने के लिए जिम्मेदार है।
  • इस मंत्रालय की स्थापना 2006 में हुई थी, जिसे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय (Ministry of Human Resource Development) के तहत एक विभाग के रूप में कार्य करता था।
  • इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण, सुरक्षा और सामाजिक-कानूनी अधिकारों को बढ़ावा देना है।
  • मंत्रालय विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से कार्य करता है, जिनमें एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS), पोषण अभियान, मिशन शक्ति, मिशन वात्सल्य और सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 शामिल हैं।
  • यह महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव को रोकने के लिए कानूनी और संस्थागत ढाँचे को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
  • मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करता है ताकि जमीनी स्तर पर नीतियों और कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
द्विदिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन महिला एवं बाल विकास से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों पर गहन चर्चा और समन्वय स्थापित करने का मंच।
केंद्रीय और राज्य मंत्रियों व अधिकारियों की भागीदारी केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना।
प्रमुख चर्चा के विषय महिला सशक्तिकरण, बाल विकास, पोषण, सुरक्षा और कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना।
आंगनवाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ बनाना बेहतर पोषण और प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने के लिए बुनियादी ढांचे और सेवाओं में सुधार।
संवेदनशील परिस्थितियों में बच्चों की सुरक्षा असुरक्षित बच्चों के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और सहायता प्रणालियों का विकास।
महिलाओं की सुरक्षा के कानूनी प्रावधानों का क्रियान्वयन मौजूदा कानूनों और संस्थागत तंत्रों को प्रभावी ढंग से लागू कर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • यह शिखर सम्मेलन महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है, जो समाज के सबसे संवेदनशील वर्गों में से हैं।
  • पोषण, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके, यह समाज में लैंगिक समानता और बाल अधिकारों को बढ़ावा देने में मदद करता है।
  • महिलाओं और बच्चों के कल्याण से संबंधित नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से सामाजिक सूचकांकों में सुधार होता है और मानव विकास को बढ़ावा मिलता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने से नीतियों के बेहतर डिजाइन और क्रियान्वयन में मदद मिलती है, जिससे संसाधनों का अधिकतम उपयोग होता है।
  • विभिन्न राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को अपनाने और नीतिगत कमियों को दूर करने में सहायक होता है।
  • यह सम्मेलन सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह महिलाओं और बच्चों के मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडे में प्राथमिकता दे रही है।

संस्थागत महत्व

  • आंगनवाड़ी केंद्रों को सुदृढ़ बनाने पर जोर देने से जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित संस्थागत और कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा से इन तंत्रों को मजबूत करने और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक सहयोगात्मक तंत्र स्थापित करता है, जो संघीय ढांचे में महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

  • केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रभाव न पड़ना।
  • संसाधनों की कमी, जागरूकता का अभाव और प्रशासनिक बाधाएं क्रियान्वयन में चुनौतियां पैदा करती हैं।

2. पोषण और प्रारंभिक शिक्षा में अंतराल

  • बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की उच्च दर अभी भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
  • आंगनवाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता और पहुंच में असमानताएं, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।

3. बच्चों की सुरक्षा और कल्याण

  • बाल श्रम, बाल विवाह, तस्करी और यौन शोषण जैसे मुद्दे बच्चों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
  • संवेदनशील परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों (जैसे अनाथ, बेघर, संघर्ष प्रभावित) के लिए पर्याप्त सुरक्षा तंत्र का अभाव।

4. महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण

  • घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसी घटनाएं अभी भी व्यापक हैं।
  • कानूनी प्रावधानों के बावजूद, न्याय तक पहुंच और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र की कमी।
  • महिलाओं की आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी में असमानताएं।

5. केंद्र-राज्य समन्वय में चुनौतियां

  • नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को शामिल करने में कठिनाई।
  • निधियों के हस्तांतरण, निगरानी और मूल्यांकन में समन्वय की कमी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणामों की कमी और प्रशासनिक बाधाएं।
पोषण और प्रारंभिक शिक्षा कुपोषण, एनीमिया और आंगनवाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में असमानताएं।
बच्चों की सुरक्षा बाल श्रम, तस्करी, शोषण और संवेदनशील बच्चों के लिए अपर्याप्त सुरक्षा तंत्र।
महिलाओं की सुरक्षा हिंसा, उत्पीड़न और कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन में चुनौतियां।
केंद्र-राज्य समन्वय नीति निर्माण और क्रियान्वयन में राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं को शामिल करने में कठिनाई।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन शक्ति (Mission Shakti)
  • मिशन वात्सल्य (Mission Vatsalya)
  • सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (Saksham Anganwadi and Poshan 2.0)

आगे की राह

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच नियमित संवाद और समन्वय तंत्र को और अधिक मजबूत करना।
  • आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं, प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा सामग्री से लैस कर उन्हें ‘उत्कृष्टता केंद्र’ के रूप में विकसित करना।
  • बच्चों के लिए एक मजबूत सुरक्षा जाल बनाना, जिसमें बाल संरक्षण सेवाओं को सुदृढ़ करना और हेल्पलाइन नंबरों की प्रभावशीलता बढ़ाना शामिल है।
  • महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना और फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से त्वरित न्याय प्रदान करना।
  • महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों और उद्यमिता को बढ़ावा देना।
  • पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan) जैसे कार्यक्रमों के तहत जागरूकता बढ़ाना और व्यवहार परिवर्तन संचार (Behavior Change Communication) पर जोर देना।
  • डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए महिलाओं और बच्चों से संबंधित विश्वसनीय डेटा संग्रह और विश्लेषण प्रणालियों में सुधार करना।
  • स्थानीय समुदायों और नागरिक समाज संगठनों को महिला एवं बाल विकास पहलों में सक्रिय रूप से शामिल करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय · केंद्र-राज्य समन्वय · महिला सशक्तिकरण · बाल विकास · पोषण · सुरक्षा · कल्याण · आंगनवाड़ी केंद्र · संस्थागत प्रावधान · कानूनी प्रावधान · योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन · नीति निर्माण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 15(3)’, ‘note’: ‘महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘6-14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 24’, ‘note’: ‘बच्चों के नियोजन पर प्रतिबंध’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e) और (f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 42’, ‘note’: ‘काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाएं, मातृत्व राहत’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

केंद्र-राज्य समन्वय बढ़ाना  →  महिला एवं बाल विकास पर चर्चा  →  बेहतर नीतियों का निर्माण  →  योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन  →  महिलाओं और बच्चों का सर्वांगीण विकास  →  सामाजिक और मानव विकास में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है जो महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास के लिए नीतियों और कार्यक्रमों को तैयार करता है।
2. आंगनवाड़ी केंद्र एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत स्थापित किए गए हैं।
3. भारत के संविधान में महिलाओं और बच्चों से संबंधित विशिष्ट प्रावधानों का उल्लेख नहीं है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए कार्य करता है, और आंगनवाड़ी केंद्र ICDS योजना का हिस्सा हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि संविधान में महिलाओं और बच्चों के लिए कई विशिष्ट प्रावधान हैं, जैसे अनुच्छेद 15(3) और अनुच्छेद 39(f)।

Q2. कथन (A): केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय महिलाओं और बच्चों से संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण है।
कारण (R): महिला एवं बाल विकास से संबंधित विषय समवर्ती सूची (Concurrent List) के अंतर्गत आते हैं, जिस पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — कथन A सही है क्योंकि केंद्र-राज्य समन्वय योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है। कारण R भी सही है क्योंकि महिला एवं बाल विकास से जुड़े कई विषय समवर्ती सूची में हैं, जिसके लिए केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर काम करना होता है। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए। इस संबंध में प्रभावी नीति क्रियान्वयन के लिए किन संस्थागत और कानूनी प्रावधानों को सुदृढ़ किया जा सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** महिला एवं बाल विकास के महत्व और इस क्षेत्र में केंद्र-राज्य समन्वय की आवश्यकता पर संक्षिप्त प्रकाश डालें।
2. **समन्वय की आवश्यकता:** स्पष्ट करें कि क्यों केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। इसमें शामिल होंगे:
* समवर्ती सूची के विषय (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा)।
* योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर पहुंच।
* संसाधनों का इष्टतम उपयोग।
* विभिन्न राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं और चुनौतियों का समाधान।
* नीति निर्माण में एकरूपता और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान।
3. **संस्थागत प्रावधानों को सुदृढ़ करना:** उन संस्थागत तंत्रों का उल्लेख करें जिन्हें मजबूत किया जा सकता है:
* अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) और क्षेत्रीय परिषदों (Zonal Councils) की भूमिका।
* नीति आयोग (NITI Aayog) और इसके सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत।
* महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के राज्य स्तरीय विभागों के साथ नियमित सम्मेलन और कार्यशालाएँ।
* आंगनवाड़ी केंद्रों जैसी जमीनी स्तर की संस्थाओं को सशक्त बनाना।
* संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Groups) और विशेषज्ञ समितियों का गठन।
4. **कानूनी प्रावधानों को सुदृढ़ करना:** उन कानूनी ढाँचों पर चर्चा करें जिन्हें बेहतर बनाया जा सकता है:
* संविधान के अनुच्छेद 15(3), 39(f), 45, 243G जैसे प्रावधानों का प्रभावी उपयोग।
* बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, POCSO अधिनियम जैसे कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
* कानूनी साक्षरता और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।
* कानूनी सहायता सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना।
5. **निष्कर्ष:** एक संतुलित निष्कर्ष दें जो महिला एवं बाल विकास में केंद्र-राज्य समन्वय के महत्व को दोहराए और भविष्य की राह सुझाए।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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