माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 11 हुई, तीसरी बार गूंजी किलकारी

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माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 11 हुई, तीसरी बार गूंजी किलकारी

बाघ पुनर्स्थापना प्रक्रियाकार्यक्रम शुरू10 मार्च 2023बाघिन प्रसवतीसरी बारआबादी वृद्धि11 तक पहुंची
बाघ पुनर्स्थापना प्रक्रिया

✎ बाघ पुनर्स्थापना की सफलता का मुख्य संकेतक शावकों का जन्म और जनसंख्या में निरंतर वृद्धि है, जबकि बाघ अभयारण्य की अधिसूचना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38V के अंतर्गत और NTCA की संस्तुति पर होती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — राजव्यवस्था (संघ-राज्य संबंध: वन और वन्यजीव समवर्ती सूची में)  |  GS Paper III — पर्यावरण (जैव विविधता और संरक्षण, लुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण)
  • Prelims: बाघ परियोजना (Project Tiger), 1973, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वैधानिक निकाय, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 — धारा 38V (बाघ अभयारण्य की अधिसूचना), समवर्ती सूची की प्रविष्टि 17ख (वन्य पशु-पक्षी संरक्षण), 42वाँ संवैधानिक संशोधन, 1976, बाघ की IUCN स्थिति: लुप्तप्राय (Endangered), टाइगर रिजर्व में कोर क्षेत्र और बफर क्षेत्र का अंतर, बाघ पुनर्स्थापना (Tiger Reintroduction) और इसकी प्रक्रिया, सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा, 2010 (TX2 लक्ष्य)
  • Essay: संरक्षित क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका के बीच संतुलन, विकास के दौर में जैव विविधता की रक्षा: राज्य की भूमिका और सहभागी संरक्षण

त्वरित पुनरावृत्ति: बाघ पुनर्स्थापना की सफलता का मुख्य संकेतक शावकों का जन्म और जनसंख्या में निरंतर वृद्धि है, जबकि बाघ अभयारण्य की अधिसूचना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38V के अंतर्गत और NTCA की संस्तुति पर होती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित माधव बाघ अभयारण्य में बाघिन MT3 ने करीब तीन महीने पहले दो शावकों को जन्म दिया है, जिससे रिजर्व में बाघों की कुल संख्या 11 हो गई है। वन विभाग की टीम ने इन शावकों को बाघिन के साथ देखा है। यह उपलब्धि बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के तहत तीसरी बार हुए शावक जन्म के रूप में सामने आई है, जिसे वन प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यक्रम की महत्वपूर्ण सफलता मान रहे हैं। इसलिए यह समाचार बाघ पुनर्स्थापना की प्रक्रिया, आवास प्रबंधन और जनसंख्या निगरानी की दृष्टि से परीक्षा के लिए प्रासंगिक है।

पृष्ठभूमि

  • माधव बाघ अभयारण्य में 10 मार्च 2023 को बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके बाद से रिजर्व में तीसरी बार शावकों का जन्म दर्ज हुआ है।
  • रिजर्व में जन्मे बाघों की कुल संख्या बढ़कर छह हो गई है, जो पुनर्स्थापना कार्यक्रम की सफलता का सूचक है। इसके साथ रिजर्व में दो प्रसव-योग्य बाघिनें मौजूद हैं।
  • बाघिन MT3 का यह दूसरा प्रसव है। उसके पहले प्रसव के दो शावक (एक नर और एक मादा) अब लगभग 28 महीने के हो चुके हैं।
  • इस उपलब्धि में वन क्षेत्र के मैदानी अमले, पशु चिकित्सा दल, रिजर्व प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों के निरंतर प्रयासों की भूमिका बताई गई है।
  • बाघों की संख्या में वृद्धि को वन्यजीव आवास के अनुकूल विकास और जनसंख्या के स्थायी विकास की दिशा में प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।

बाघ पुनर्स्थापना और बाघ अभयारण्य प्रबंधन क्या है?

  • बाघ पुनर्स्थापना (Tiger Reintroduction) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी ऐसे क्षेत्र में बाघों को फिर से बसाया जाता है, जहाँ वे पहले से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुके हों या जनसंख्या बहुत कम रह गई हो। इसका उद्देश्य वहाँ के पारिस्थितिक तंत्र में बाघ की भूमिका को पुनः स्थापित करना है।
  • बाघ अभयारण्य (Tiger Reserve) को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की संस्तुति पर अधिसूचित किया जाता है। यह बाघ परियोजना (Project Tiger) का हिस्सा है।
  • बाघ अभयारण्य में कोर क्षेत्र को पूर्ण संरक्षित रखा जाता है, जबकि बफर क्षेत्र में सीमित मानवीय गतिविधियों और सह-अस्तित्व की व्यवस्था होती है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) बाघ अभयारण्यों के लिए बाघ संरक्षण योजना के मानक तय करता है, बाघों की निगरानी और आकलन कराता है तथा राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता देता है।
  • बाघ परियोजना वर्ष 1973 में शुरू हुई थी और यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसमें वन्यजीव संरक्षण का दायित्व केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझा होता है, क्योंकि वन और वन्यजीव संविधान की समवर्ती सूची में हैं।
  • बाघों की जनसंख्या आकलन में शावकों का जन्म, मृत्यु दर, शिकार-आधार (प्रे बेस) की उपलब्धता और आवास की गुणवत्ता प्रमुख संकेतक होते हैं। शावकों के जन्म को पुनर्स्थापना की सफलता का सीधा संकेत माना जाता है।
  • बाघ को IUCN की रेड लिस्ट में लुप्तप्राय (Endangered) श्रेणी में रखा गया है। भारत में विश्व की लगभग तीन-चौथाई बाघ आबादी पाई जाती है, इसलिए बाघ संरक्षण को वैश्विक दायित्व के रूप में भी देखा जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
स्थान माधव बाघ संरक्षित क्षेत्र (Madhav Tiger Reserve) शिवपुरी, मध्य प्रदेश में स्थित है
बाघिन MT3 का प्रसव बाघिन MT3 ने दो शावकों को जन्म दिया, जो लगभग तीन महीने के हैं। यह उसका दूसरा प्रसव है
कुल बाघ संख्या नए शावकों के जन्म से रिजर्व में बाघों की कुल संख्या 11 हो गई है
बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम 10 मार्च 2023 से शुरू इस कार्यक्रम के अंतर्गत रिजर्व में तीसरी बार शावकों का जन्म हुआ है
रिजर्व में जन्मे बाघ यहाँ जन्म लेने वाले बाघों की कुल संख्या 6 हो गई है, जो प्रजनन आधारित आबादी विकास का संकेत है
प्रसव योग्य बाघिनें वर्तमान में रिजर्व में दो प्रसव योग्य बाघिनें मौजूद हैं, जिससे भावी प्रजनन की संभावना बनी रहती है

महत्व

पारिस्थितिक महत्व

  • बाघ खाद्य शृंखला के शीर्ष शिकारी (Apex Predator) हैं, इसलिए उनकी उपस्थिति से पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेत मिलता है
  • शाकाहारी जीवों की आबादी का नियंत्रण वनस्पति आवरण को संतुलित रखने में सहायक होता है

संरक्षण एवं प्रबंधन की दृष्टि से महत्व

  • बाघों की प्रजनन सफलता यह दर्शाती है कि रिजर्व में आवास, शिकार-आधार और सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर हो रही है
  • वन विभाग के मैदानी अमले, पशु चिकित्सा दल और रिजर्व प्रबंधन के समन्वित प्रयासों का परिणाम इस उपलब्धि में दिखता है

नीतिगत एवं प्रशासनिक महत्व

  • बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के मूल्यांकन के लिए शावकों का जन्म और आबादी का स्वाभाविक विस्तार प्रमुख मापदंड बन सकता है
  • स्थानीय स्तर पर संरक्षित क्षेत्र का आबादी-आधारित विकास राज्य की व्याघ्र संरक्षण नीति को ठोस आधार देता है

चुनौतियाँ

1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) का संकट

  • सीमित बाघों की संख्या वाले क्षेत्र में निकट-संबंधी प्रजनन (Inbreeding) से आनुवंशिक दुर्बलता और रोग-प्रतिरोधक क्षमता में कमी का खतरा रहता है
  • नए बाघों को अन्य क्षेत्रों से लाकर आनुवंशिक प्रवाह बनाए रखना वैज्ञानिक निगरानी की माँग करता है

2. आवास संपर्क (Habitat Connectivity) की समस्या

  • बाघों के विचरण के लिए वन गलियारों का टूटना उन्हें छोटे-छोटे खंडों में सीमित कर देता है
  • सड़कों, खनन और बस्तियों के विस्तार से बाघों और मानव के बीच टकराव बढ़ सकता है

3. वहन क्षमता (Carrying Capacity) का प्रश्न

  • बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त शिकार-आधार (Prey Base) और जल स्रोत उपलब्ध रहना आवश्यक है
  • सीमित क्षेत्र में अधिक बाघ होने पर क्षेत्रीय संघर्ष और बाघों का रिजर्व से बाहर निकलना बढ़ सकता है

4. मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict)

  • बाघों के बाहर विचरण से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन की हानि और जन-असंतोष उत्पन्न हो सकता है
  • स्थानीय समुदायों का सहयोग न मिलने पर संरक्षण प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं

5. अवैध शिकार और निगरानी की चुनौती

  • बाघ के अंगों की अंतरराष्ट्रीय माँग के कारण अवैध शिकार का खतरा सदैव बना रहता है
  • कैमरा ट्रैप और गश्ती तंत्र के माध्यम से सतत निगरानी के बिना आबादी के सही आँकड़े और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
आनुवंशिक विविधता निकट-संबंधी प्रजनन से आनुवंशिक दुर्बलता का खतरा
आवास संपर्क वन गलियारों के टूटने से बाघों का विखंडित आवास
वहन क्षमता सीमित शिकार-आधार और जल स्रोतों पर दबाव
मानव-वन्यजीव संघर्ष पशुधन हानि और स्थानीय असंतोष की संभावना
अवैध शिकार बाघ के अंगों की अवैध माँग से सुरक्षा पर खतरा
निगरानी तंत्र आँकड़ों की विश्वसनीयता और गश्ती क्षमता बनाए रखने की आवश्यकता

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)

आगे की राह

  • आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के लिए अन्य बाघ संरक्षित क्षेत्रों के साथ वैज्ञानिक आधार पर बाघों के आवागमन की योजना बनाई जाए
  • माधव बाघ संरक्षित क्षेत्र और आसपास के वन खंडों को जोड़ने वाले वन गलियारों की पहचान और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
  • शिकार-आधार (तृणभोजी वन्यजीवों की आबादी) के नियमित आकलन के साथ रिजर्व की वहन क्षमता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाए
  • कैमरा ट्रैप और गश्ती तंत्र को सुदृढ़ कर अवैध शिकार पर रोकथाम को प्रभावी बनाया जाए
  • बाघों के आसपास बसे गाँवों में क्षतिपूर्ति तंत्र और जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाकर मानव-वन्यजीव संघर्ष घटाया जाए
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रक्रिया में भागीदार बनाकर पारिस्थितिकी-आधारित आजीविका के अवसर बढ़ाए जाएँ
  • बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के परिणामों का डेटा-आधारित मूल्यांकन कर भविष्य की रणनीति को संशोधित किया जाए

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बाघ संरक्षण · माधव टाइगर रिजर्व · बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम · प्रोजेक्ट टाइगर · जैव विविधता संरक्षण · पर्यावरण पर्यटन · मानव-वन्यजीव संघर्ष · संरक्षण प्रयास · पारिस्थितिक संतुलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: राज्य द्वारा पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा का निर्देश
  • अनुच्छेद 51A(g): नागरिकों का वन्यजीवों की रक्षा का मौलिक कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत संरक्षित आवास में बाघों की आबादी का विकास  →  प्रसव योग्य बाघिनों द्वारा शावकों का जन्म (बाघिन MT3 का दूसरा प्रसव)  →  रिजर्व में जन्मे बाघों की संख्या बढ़कर 6 और कुल बाघ संख्या 11 होना  →  वन विभाग द्वारा आबादी का अवलोकन, निगरानी और पशु चिकित्सा देखभाल  →  आबादी बढ़ने से वहन क्षमता, आनुवंशिक विविधता और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी नई चुनौतियों का उभरना  →  डेटा-आधारित प्रबंधन और आवास संपर्क सुधार से आबादी का स्थायी विकास सुनिश्चित होना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माधव टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित है।
2. भारत में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत 1973 में हुई थी।
3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत बाघ को अनुसूची I में सूचीबद्ध किया गया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि माधव टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के शिवपुरी में स्थित है। कथन 2 सही है क्योंकि ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ 1973 में शुरू किया गया था। कथन 3 सही है क्योंकि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत बाघ को सर्वोच्च संरक्षण प्रदान करते हुए अनुसूची I में रखा गया है।

Q2. माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में वृद्धि किस कार्यक्रम की सफलता को दर्शाती है?

  1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
  2. बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम
  3. जल जीवन मिशन
  4. स्वच्छ भारत अभियान

उत्तर: बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम — माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में वृद्धि ‘बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम’ की सफलता को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में बाघों को फिर से स्थापित करना है जहाँ उनकी संख्या कम हो गई थी या वे विलुप्त हो गए थे।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में बाघ संरक्षण के महत्व और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। साथ ही, माधव टाइगर रिजर्व जैसे सफल पुनर्स्थापना कार्यक्रमों की भूमिका का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** भारत में बाघों की स्थिति और उनके संरक्षण के महत्व का संक्षिप्त उल्लेख। ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ (Project Tiger) और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का संदर्भ।
2. **बाघ संरक्षण का महत्व:**
* **पारिस्थितिक संतुलन:** खाद्य श्रृंखला में शीर्ष शिकारी के रूप में भूमिका, जैव विविधता का संकेतक।
* **जैव विविधता संरक्षण:** अन्य प्रजातियों के आवासों का संरक्षण।
* **पर्यावरण पर्यटन:** आर्थिक लाभ और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका।
* **सांस्कृतिक महत्व:** भारत की राष्ट्रीय विरासत का प्रतीक।
3. **बाघ संरक्षण की चुनौतियाँ:**
* **आवास का नुकसान और विखंडन:** शहरीकरण, कृषि विस्तार, बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ।
* **अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार:** बाघ उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय मांग।
* **मानव-वन्यजीव संघर्ष:** वन क्षेत्रों के पास बढ़ती मानव आबादी के कारण।
* **जलवायु परिवर्तन:** आवासों और शिकार की उपलब्धता पर प्रभाव।
* **पर्याप्त वित्तपोषण और जनशक्ति की कमी।**
4. **माधव टाइगर रिजर्व जैसे पुनर्स्थापना कार्यक्रमों की भूमिका:**
* **सफलता का उदाहरण:** माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में वृद्धि को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करना।
* **रणनीतियाँ:** बाघों का स्थानांतरण, उनके प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण, निगरानी और सुरक्षा।
* **सामुदायिक भागीदारी:** स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना।
* **प्रबंधन की भूमिका:** वन विभाग, पशु चिकित्सा दल और रिजर्व प्रबंधन के निरंतर प्रयास।
* **सीख और भविष्य की दिशा:** इन सफलताओं से अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा और मॉडल।
5. **निष्कर्ष:** बाघ संरक्षण के लिए एक समग्र और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जिसमें नीतिगत हस्तक्षेप, सामुदायिक भागीदारी और वैज्ञानिक प्रबंधन शामिल हों।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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