हौथी-बनाम-सऊदी गठबंधन के भयंकर हमलों में नई जानहानियाँ, जानिए पूरा हाल

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हौथी-बनाम-सऊदी गठबंधन के भयंकर हमलों में नई जानहानियाँ, जानिए पूरा हाल

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हूती-गठबंधन संघर्ष चक्र

✎ यमन संघर्ष में हूती समूह (अंसार अल्लाह) और सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच हमलों का आदान-प्रदान क्षेत्रीय सुरक्षा, लाल सागर के समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा है, और इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (पश्चिम एशिया, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, भारत के हित)  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा एवं सुरक्षा चुनौतियाँ (समुद्री सुरक्षा, गैर-राज्य कर्ता, ऊर्जा सुरक्षा)
  • Prelims: हूती (Houthi) या अंसार अल्लाह, यमन की राजधानी सनआ और अदन (अंतरिम सरकार का मुख्यालय), लाल सागर और बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य, अदन की खाड़ी (Gulf of Aden), सऊदी अरब की तेल कंपनी सऊदी आरामको (Saudi Aramco), संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2216 (UNSC Resolution 2216), हुदैदा बंदरगाह और स्टॉकहोम समझौता (2018), अरब प्रायद्वीप के देश और उनकी भौगोलिक स्थिति
  • Essay: पश्चिम एशिया में प्रॉक्सी संघर्ष और क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन: यमन संघर्ष का सबक, गैर-राज्य कर्ताओं की बढ़ती भूमिका और अंतरराष्ट्रीय शांति के सामने चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: यमन संघर्ष में हूती समूह (अंसार अल्लाह) और सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच हमलों का आदान-प्रदान क्षेत्रीय सुरक्षा, लाल सागर के समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा है, और इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2216 तथा राजनीतिक वार्ता के ढाँचे में ही संभव है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

यमन में हूती समूह और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच हमलों का आदान-प्रदान तेज़ हो गया है। हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के अनुसार, समूह ने रियाद, यानबू, राबिग, दम्माम, नजरान और खमीस मुशैत सहित सऊदी अरब के कई शहरों में हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाकर प्रक्षेपास्त्र और ड्रोन हमले किए। सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने कई प्रक्षेपास्त्र और एक ड्रोन को मार गिराने का दावा किया। दूसरी ओर, हूती समूह के अनुसार ये हमले पिछले 24 घंटों में सनआ और मोचा सहित हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर हुए लगभग 100 सऊदी हवाई हमलों की प्रतिक्रिया थे। यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन प्राप्त है और उसके सैन्य अभियान “डॉन ऑफ यमन” के तहत हूती ठिकानों पर दबाव बढ़ाया गया है। इस बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, इराक, लेबनान और इज़राइल सहित मध्य पूर्व के कई देशों के लिए यात्रा परामर्श अद्यतन किए हैं।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2014 में हूती समूह ने यमन की राजधानी सनआ और देश के उत्तरी भाग के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया, जिसके बाद देश में गृहयुद्ध की स्थिति बनी।
  • वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन ने यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया, और तब से यह संघर्ष क्षेत्रीय शक्तियों के बीच प्रत्यक्ष टकराव का रूप ले चुका है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2216 (वर्ष 2015) हूती समूह के विरुद्ध हथियार प्रतिबंध से संबंधित है और यमन में राजनीतिक समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता का आधार माना जाता है।
  • वर्ष 2018 का स्टॉकहोम समझौता हुदैदा बंदरगाह क्षेत्र से सैन्य वापसी और मानवीय पहुँच पर केंद्रित था, किंतु इसका पूर्ण क्रियान्वयन सीमित रहा।
  • यमन का संघर्ष मानवीय संकट से भी जुड़ा है, जिसमें नागरिक हताहत, विस्थापन और खाद्य असुरक्षा प्रमुख चिंताएँ हैं। संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए अस्थायी युद्धविराम भी लंबे समय तक स्थायी नहीं रह सके।

हूती (Houthi) आंदोलन क्या है?

  • हूती समूह यमन के उत्तरी भाग में सक्रिय एक सशस्त्र राजनीतिक एवं सैन्य संगठन है, जिसे आधिकारिक रूप से अंसार अल्लाह (Ansar Allah) कहा जाता है।
  • इसकी उत्पत्ति 1990 के दशक में ज़ैदी शिया परंपरा से जुड़े एक धार्मिक-राजनीतिक आंदोलन के रूप में मानी जाती है, जो यमन के उत्तरी क्षेत्र सादा से प्रारंभ हुआ।
  • यमन में सत्ता संरचना, क्षेत्रीय स्वायत्तता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों को लेकर हूती समूह और केंद्रीय सरकार के बीच विवाद रहा है।
  • सनआ पर नियंत्रण के बाद हूती समूह ने देश के बड़े भू-भाग पर प्रशासनिक एवं सैन्य नियंत्रण स्थापित किया, जबकि अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का मुख्यालय अस्थायी रूप से अदन में रहा है।
  • लाल सागर और बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार के महत्वपूर्ण मार्ग हैं, इसलिए यमन का घटनाक्रम समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए भी प्रासंगिक है।
  • सऊदी अरब और यमन की सीमाएँ साझा हैं, इसलिए यमन का संघर्ष सऊदी अरब की सीमा-सुरक्षा और ऊर्जा अवसंरचना से सीधे जुड़ जाता है।
  • यमन अरब प्रायद्वीप का दक्षिण-पश्चिमी देश है, जिसकी सीमाएँ उत्तर में सऊदी अरब और पूर्व में ओमान से लगती हैं तथा पश्चिम में लाल सागर और दक्षिण में अदन की खाड़ी से जुड़ी हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
संघर्ष की पृष्ठभूमि यमन में 2014 से चल रहा गृहयुद्ध, जब हूती विद्रोही (Houthi) ने राजधानी सना और देश के उत्तरी भाग पर नियंत्रण कर लिया था। 2015 में सऊदी-नेतृत्व वाला गठबंधन मान्यता-प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में इस संघर्ष में शामिल हुआ।
परस्पर हमलों का स्वरूप हूती समूह ने सऊदी अरब के रियाद, यानबू, रबीग, दम्माम, नजरान और खमीस मुशैत जैसे शहरों में हवाई अड्डों, तेल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों पर मिसाइल व ड्रोन हमलों का दावा किया। सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने सना, मोखा और हमदान जिले सहित हूती-नियंत्रित क्षेत्रों पर हवाई हमले किए।
सऊदी अरब की सुरक्षा और ऊर्जा ढाँचा सऊदी अरामको (Saudi Aramco) की सुविधाओं और किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (King Khalid International Airport) जैसे ठिकानों पर लक्ष्यीकरण से यह स्पष्ट होता है कि संघर्ष अब सीधे खाड़ी देशों के आर्थिक ढाँचे तक पहुँच गया है।
अदन पर दबाव यमन की सरकार का अस्थायी केंद्र अदन है। वहाँ बैलिस्टिक मिसाइल हमले और तटरक्षक मुख्यालय को निशाना बनाए जाने से शासन-तंत्र और सुरक्षा बलों की स्थिति पर सीधा दबाव पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, इराक, लेबनान और इज़राइल के लिए यात्रा परामर्श अद्यतन किया। यह क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रति वैश्विक चिंता का संकेत है।

महत्व

सामरिक महत्व

  • बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के निकट यमन की स्थिति वैश्विक नौवहन मार्गों की सुरक्षा से जुड़ी है। इस क्षेत्र में अस्थिरता समुद्री व्यापार की लागत बढ़ा सकती है।
  • सऊदी अरब और ईरान-समर्थित समूहों के बीच प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन का केंद्रीय पहलू है, जो पश्चिम एशिया की व्यापक भू-राजनीति को प्रभावित करता है।

आर्थिक महत्व

  • खाड़ी देश वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति के प्रमुख स्रोत हैं। तेल सुविधाओं पर हमले से ऊर्जा बाज़ार में मूल्य-अस्थिरता और आपूर्ति-जोखिम की आशंका बढ़ती है।
  • भारत की कच्चे तेल आयात-निर्भरता और खाड़ी क्षेत्र से होने वाले व्यापार को देखते हुए इस संघर्ष का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था तक पहुँचता है।

मानवीय एवं प्रवासी आयाम

  • आवासीय क्षेत्रों पर हमलों में नागरिकों की मृत्यु और घायल होने की रिपोर्टें मानवीय संकट की गंभीरता को दर्शाती हैं।
  • खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं। इसलिए क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति भारत की प्रवासी-कल्याण नीति से भी जुड़ी है। भारत ने 2015 में यमन से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन राहत (Operation Raahat) चलाया था।

कूटनीतिक एवं अंतरराष्ट्रीय विधि आयाम

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2216 (2015) यमन संघर्ष के राजनीतिक समाधान का प्रमुख ढाँचा माना जाता है, जिसमें हूती समूह से हथियार छोड़ने और सना से पीछे हटने की माँग की गई थी।
  • संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में यमन में राजनीतिक प्रक्रिया और युद्धविराम के प्रयास समय-समय पर होते रहे हैं, किंतु वे स्थायी समाधान तक नहीं पहुँच सके हैं।

चुनौतियाँ

1. युद्धविराम और राजनीतिक समाधान की कठिनाई

  • हूती समूह और मान्यता-प्राप्त यमनी सरकार के बीच सत्ता-वितरण पर मतभेद बने हुए हैं, जिससे किसी स्थायी समझौते की राह अवरुद्ध है।
  • सैन्य अभियानों की तीव्रता से वार्ता के लिए राजनीतिक जगह सिकुड़ती है और दोनों पक्षों के लिए पीछे हटना कठिन हो जाता है।

2. नागरिक हानि और मानवीय संकट

  • आवासीय क्षेत्रों और श्रमिक आवासों पर हमलों से नागरिकों की जान जाती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मानवीय विधि के पालन पर प्रश्न उठते हैं।
  • लंबे संघर्ष से स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य आपूर्ति और विस्थापन की समस्या गहराती है।

3. समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति पर जोखिम

  • लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में अस्थिरता से जहाज़ों के मार्ग-परिवर्तन और बीमा लागत में वृद्धि की आशंका रहती है।
  • तेल सुविधाओं पर हमले से वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला और ऊर्जा मूल्यों पर असर पड़ सकता है।

4. क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन और बाह्य हस्तक्षेप

  • संघर्ष में क्षेत्रीय और बाह्य शक्तियों की भागीदारी से स्थानीय विवाद व्यापक भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन जाता है।
  • हथियारों की आपूर्ति और निगरानी की कमजोरी से संघर्ष के लंबा खिंचने का जोखिम बढ़ता है।

5. प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और भारत की नीति-दुविधा

  • खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और रोज़गार पर संघर्ष का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
  • भारत को सऊदी अरब के साथ रणनीतिक-आर्थिक संबंधों और क्षेत्र में शांति के प्रति अपनी नीति के बीच संतुलन रखना होता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
युद्धविराम का अभाव हूती समूह और यमनी सरकार के बीच वार्ता की प्रगति सीमित होने से संघर्ष के दोबारा भड़कने का खतरा बना रहता है।
मानवीय क्षति आवासीय क्षेत्रों पर हमलों में नागरिकों की मृत्यु और घायल होने से मानवीय विधि के उल्लंघन की चिंता बढ़ती है।
ऊर्जा और नौवहन जोखिम तेल सुविधाओं और समुद्री मार्गों पर अस्थिरता से वैश्विक ऊर्जा मूल्य और व्यापार-लागत प्रभावित होते हैं।
बाह्य शक्तियों की भूमिका क्षेत्रीय और बाह्य शक्तियों के हस्तक्षेप से समाधान जटिल होता है और संघर्ष व्यापक होता है।
प्रवासी सुरक्षा खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और निकासी-तैयारी पर दबाव बढ़ता है।

आगे की राह

  • संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में युद्धविराम को पुनर्जीवित कर राजनीतिक वार्ता के लिए विश्वसनीय मंच तैयार करना आवश्यक है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2216 और अन्य प्रासंगिक प्रस्तावों के आधार पर यमन में शांति-प्रक्रिया को सर्वसम्मति से आगे बढ़ाया जाए।
  • नागरिक आवासों और असैन्य ढाँचे की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय विधि (International Humanitarian Law) के पालन की निगरानी सुदृढ़ की जाए।
  • मानवीय सहायता, खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति के लिए सुरक्षित गलियारे सुनिश्चित किए जाएँ।
  • लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में नौवहन-सुरक्षा हेतु क्षेत्रीय समन्वय और सूचना-साझेदारी बढ़ाई जाए।
  • भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति-विविधीकरण और रणनीतिक भंडारण की नीति को और मजबूत करना उपयोगी होगा।
  • खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय प्रवासियों के लिए सलाह-तंत्र और आपातकालीन निकासी की तैयारी बनाए रखी जाए।
  • क्षेत्रीय संवाद और बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से विश्वास-निर्माण के उपायों को प्रोत्साहित किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पश्चिम एशिया (West Asia) · यमन संघर्ष (Yemen Conflict) · सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन (Saudi-led Coalition) · हूती (Houthi) · बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab-el-Mandeb Strait) · लाल सागर (Red Sea) · नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) · संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन, 1982 (UNCLOS) · ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) · प्रवासी भारतीय सुरक्षा (Diaspora Security) · सामूहिक सुरक्षा (Collective Security) · संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का राज्य-नीति निर्देश

अवधारणा प्रवाह

2014 में हूती समूह द्वारा सना और उत्तरी यमन पर नियंत्रण, जिससे गृहयुद्ध की स्थिति बनी।  →  2015 में सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन का यमनी सरकार के समर्थन में हस्तक्षेप।  →  सरकार-समर्थित ‘Dawn of Yemen’ अभियान और सऊदी हवाई हमलों से हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में नागरिक हानि।  →  हूती समूह द्वारा सऊदी शहरों, हवाई अड्डों और तेल सुविधाओं पर मिसाइल व ड्रोन हमले, साथ ही अदन पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले।  →  क्षेत्रीय असुरक्षा से अमेरिकी यात्रा परामर्श में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय चिंता में वृद्धि।  →  ऊर्जा बाज़ार, नौवहन और मानवीय स्थिति पर प्रभाव, जिससे राजनीतिक समाधान और युद्धविराम की आवश्यकता बढ़ती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है।
2. होरमुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को लाल सागर से जोड़ता है।
3. यमन की तटरेखा लाल सागर, अदन की खाड़ी और अरब सागर, तीनों से लगी है।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. इनमें से कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। कथन 2 गलत है: होरमुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी (अरब सागर) से जोड़ता है, लाल सागर से नहीं। कथन 3 सही है: यमन की तटरेखा लाल सागर, अदन की खाड़ी और अरब सागर से लगी है, इसलिए सही उत्तर ‘केवल दो’ है।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): बाब-अल-मंदेब मार्ग में व्यवधान से यूरोप की ओर जाने वाले कच्चे तेल के परिवहन की लागत बढ़ जाती है।
कारण (R): स्वेज नहर एशिया और यूरोप के बीच सबसे छोटा समुद्री मार्ग देती है, और हिंद महासागर से उसके पास पहुँचने के लिए बाब-अल-मंदेब से होकर गुज़रना पड़ता है।

सही विकल्प चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — स्वेज नहर लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है, इसलिए एशिया-यूरोप व्यापार का मार्ग लाल सागर और बाब-अल-मंदेब से होकर जाता है। इस मार्ग में बाधा से जहाज़ों को लंबे रास्ते (दक्षिण अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप) से जाना पड़ता है, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ते हैं। अतः (R), (A) की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:

सूची-I (जलडमरूमध्य/जलसंधि)
1. बाब-अल-मंदेब
2. होरमुज
3. मलक्का

सूची-II (जोड़ने वाले जल क्षेत्र)
(क) फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी
(ख) लाल सागर और अदन की खाड़ी
(ग) अंडमान सागर और दक्षिण चीन सागर

सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-(क), 2-(ख), 3-(ग)
  2. 1-(ख), 2-(क), 3-(ग)
  3. 1-(क), 2-(ग), 3-(ख)
  4. 1-(ग), 2-(क), 3-(ख)

उत्तर: 1-(ख), 2-(क), 3-(ग) — बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है, अतः 1-(ख)। होरमुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है, अतः 2-(क)। मलक्का अंडमान सागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है, अतः 3-(ग)। इसलिए विकल्प ‘B’ सही है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ पश्चिम एशिया में हूती विद्रोहियों और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जैसे समुद्री मार्गों की सुरक्षा को केंद्र में ला दिया है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के हितों के संदर्भ में इस स्थिति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) के सिद्धांत को व्यवहार में किस प्रकार सुनिश्चित किया जा सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर-संरचना (Model-Answer Skeleton):

1. भूमिका: यमन संघर्ष की पृष्ठभूमि: 2014 में हूती द्वारा राजधानी सना पर नियंत्रण; 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का हस्तक्षेप, जो अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में था। वर्तमान में सीमा-पार मिसाइल और ड्रोन हमलों से संघर्ष का क्षेत्रीय विस्तार।

2. भू-रणनीतिक महत्त्व: बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (लाल सागर–अदन की खाड़ी) और स्वेज नहर के माध्यम से एशिया-यूरोप व्यापार; खाड़ी से कच्चे तेल के निर्यात का मार्ग; होरमुज के साथ इसकी तुलना।

3. भारत के हित: (क) ऊर्जा सुरक्षा: कच्चे तेल और LNG आयात में पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी तथा समुद्री व्यवधान से आपूर्ति और बीमा लागत पर प्रभाव; (ख) प्रवासी भारतीय: खाड़ी और यमन में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक, 2015 के ‘ऑपरेशन राहत’ द्वारा यमन से भारतीयों की निकासी का उदाहरण; (ग) व्यापार मार्ग: भारत-यूरोप व्यापार और समुद्री आपूर्ति शृंखला।

4. कानूनी ढाँचा: संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन, 1982 (UNCLOS) का भाग III: अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए प्रयुक्त जलडमरूमध्यों में पारगमन-मार्ग (Transit Passage) का अधिकार (अनुच्छेद 37–44); संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का संकल्प 2216 (2015) और यमन पर संयुक्त राष्ट्र विशेष दूत की शांति-प्रक्रिया; 2018 का स्टॉकहोम समझौता (हुदैदा बंदरगाह)।

5. भारतीय नौसैनिक प्रयास: 2019 में खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नौसेना का ‘ऑपरेशन संकल्प’ (Operation Sankalp) और समुद्री सुरक्षा के लिए बहुपक्षीय सहयोग; समुद्री डकैती-रोधी प्रयासों से तुलना।

6. संतुलित दृष्टिकोण: (क) सैन्य समाधान बनाम वार्ता-आधारित समाधान; (ख) क्षेत्रीय शक्तियों के हित और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका; (ग) भारत की गुटनिरपेक्ष-संतुलित विदेश नीति और सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की आवश्यकता।

7. नौवहन की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के उपाय: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका; क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे; नौसैनिक सहयोग और सूचना-साझाकरण; मानवीय गलियारे; बीमा और व्यापार-मार्ग विविधीकरण।

8. निष्कर्ष: संवैधानिक-कानूनी मानदंडों (UNCLOS) और व्यावहारिक ऊर्जा-सुरक्षा हितों के बीच संतुलन आवश्यक है; दीर्घकालिक समाधान राजनीतिक वार्ता में निहित है।

स्रोत: orissapost.com


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