मिशन कर्मयोगी: पहली क्षेत्रीय कार्यशाला विजयवाड़ा में संपन्न, जानें मुख्य बिंदु

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मिशन कर्मयोगी: पहली क्षेत्रीय कार्यशाला विजयवाड़ा में संपन्न, जानें मुख्य बिंदु

मिशन कर्मयोगी कार्यान्वयन प्रक्रियामिशन आरंभसितंबर 2020CBC स्थापनाकार्यान्वयन हेतुक्षेत्रीय कार्यशालासाधना श्रृंखलासंस्थान परिवर्तनप्रशिक्षण से क्षमताडिजिटल प्लेटफार्मiGOT एवं उन्नतिदक्षता वृद्धिनागरिक सेवा
मिशन कर्मयोगी कार्यान्वयन प्रक्रिया

✎ मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों के लिए एक राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य उन्हें 'नागरिक देवो भव' के सिद्धांत पर आधारित भूमिका-आधारित और योग्यता-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार करना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, सिविल सेवाओं की भूमिका  |  GS Paper IV — लोक प्रशासन में नैतिकता
  • Prelims: मिशन कर्मयोगी, क्षमता निर्माण आयोग (CBC), साधना श्रृंखला, उन्नति प्लेटफॉर्म, iGOT कर्मयोगी, प्रशिक्षण संस्थान परिवर्तन ढाँचा
  • Essay: सिविल सेवाओं में सुधार और सुशासन, प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास का संगम

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों के लिए एक राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य उन्हें ‘नागरिक देवो भव’ के सिद्धांत पर आधारित भूमिका-आधारित और योग्यता-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार करना है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

क्षमता निर्माण आयोग (CBC) द्वारा मिशन कर्मयोगी के तहत ‘साधना श्रृंखला’ की पहली क्षेत्रीय कार्यशाला हाल ही में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में संपन्न हुई। इस दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य विषय ‘प्रशिक्षण संस्थानों से क्षमता निर्माण संस्थानों की ओर’ था, जिसमें सात राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य सिविल सेवा प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और अधिकारियों को नागरिक-केंद्रित शासन के लिए तैयार करना था।

पृष्ठभूमि

  • मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi) भारत में सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसे सितंबर 2020 में शुरू किया गया था।
  • इसका लक्ष्य सिविल सेवकों को भविष्य के लिए तैयार करना, उन्हें अधिक रचनात्मक, कल्पनाशील, सक्रिय, पेशेवर, प्रगतिशील, ऊर्जावान, परिवर्तनकारी और सक्षम बनाना है।
  • क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission – CBC) मिशन कर्मयोगी के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो प्रशिक्षण संस्थानों को क्षमता निर्माण संस्थानों में बदलने पर केंद्रित है।
  • साधना (Strengthening Adaptive Development And Human Aptitude Or National Advancement) श्रृंखला क्षेत्रीय परामर्श बैठकों की एक देशव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाकर प्रशिक्षण संस्थान परिवर्तन ढाँचा सह-विकसित करना है।
  • इस श्रृंखला की कार्यशालाएँ ‘उन्नति’ नामक डिजिटल सक्षमकर्ता का उपयोग करती हैं, जो संसाधन साझाकरण और संस्थागत सुधार के लिए 900 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ता है।
  • iGOT कर्मयोगी (Integrated Government Online Training) प्लेटफॉर्म मिशन कर्मयोगी का एक प्रमुख घटक है, जो सिविल सेवकों के लिए ऑनलाइन शिक्षण सामग्री और पाठ्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।

मिशन कर्मयोगी क्या है?

  • मिशन कर्मयोगी, जिसे ‘राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ (National Programme for Civil Services Capacity Building – NPCSCB) के नाम से भी जाना जाता है, भारत सरकार द्वारा सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण के लिए शुरू किया गया एक व्यापक सुधार कार्यक्रम है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य सिविल सेवकों को उनकी भूमिकाओं के अनुरूप सही दृष्टिकोण, कौशल और ज्ञान से लैस करना है, ताकि वे ‘नागरिक देवो भव’ के सिद्धांत के साथ प्रभावी ढंग से सेवा कर सकें।
  • यह कार्यक्रम सिविल सेवा प्रशिक्षण के पारंपरिक, नियम-आधारित दृष्टिकोण से हटकर भूमिका-आधारित और योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण पर केंद्रित है।
  • iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म इस मिशन का एक डिजिटल आधारशिला है, जो सिविल सेवकों को किसी भी समय, कहीं भी सीखने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे निरंतर सीखने की संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।
  • क्षमता निर्माण आयोग (CBC) मिशन के तहत क्षमता निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र पर्यवेक्षण, समन्वय और मानकीकरण के लिए जिम्मेदार है।
  • यह सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों को केवल प्रशिक्षण प्रदान करने वाले निकायों से बदलकर रणनीतिक क्षमता निर्माण केंद्रों में बदलने पर जोर देता है।
  • मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य सिविल सेवकों को सार्वजनिक सेवा वितरण में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए आवश्यक व्यवहारिक, कार्यात्मक और डोमेन दक्षताओं से लैस करना है।
  • यह कार्यक्रम प्रौद्योगिकी के उपयोग, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एकीकरण को बढ़ावा देता है, ताकि शासन को अधिक कुशल और प्रतिक्रियाशील बनाया जा सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
साधना श्रृंखला क्षेत्रीय परामर्श बैठकों की देशव्यापी श्रृंखला, क्षमता निर्माण आयोग (CBC) द्वारा आयोजित।
विजयवाड़ा कार्यशाला मिशन कर्मयोगी पर पहली क्षेत्रीय कार्यशाला, ‘प्रशिक्षण संस्थानों से क्षमता निर्माण संस्थानों की ओर’ विषय पर केंद्रित।
उन्नति (UNNATI) मंच एक डिजिटल सक्षमकर्ता जो 900 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ता है, संसाधन साझाकरण और संस्थागत सुधार का समर्थन करता है।
iGOT कर्मयोगी सरकारी अधिकारियों के लिए संरचित शिक्षण प्रदान करने वाला ऑनलाइन मंच, भौतिक प्रशिक्षण का पूरक।
क्षमता निर्माण आयोग (CBC) मिशन कर्मयोगी के तहत सिविल सेवकों की क्षमताओं को बढ़ाने और प्रशिक्षण संस्थानों को बदलने के लिए जिम्मेदार।

महत्व

शासन और लोक सेवा वितरण

  • मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य सिविल सेवकों को ‘नागरिक देवो भव’ के सिद्धांत के अनुरूप नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाना है।
  • प्रशिक्षण संस्थानों को क्षमता निर्माण संस्थानों में बदलने से सरकारी संगठनों को उनकी भूमिकाओं के लिए आवश्यक दक्षताओं को विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे प्रभावी नीति कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा।
  • प्रौद्योगिकी और डेटा के उपयोग के माध्यम से शासन में सुधार, जिसमें रियल-टाइम डेटा, विभागों के बीच डेटा एकीकरण और AI-सक्षम निगरानी शामिल है, समय पर कार्रवाई और बेहतर निर्णय लेने में सहायक होगा।

मानव संसाधन विकास

  • सिविल सेवकों के लिए निरंतर सीखने और कौशल उन्नयन पर जोर, विशेष रूप से तेजी से बदलती तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संदर्भ में।
  • यह पहल सिविल सेवकों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और गतिशील शासन आवश्यकताओं के अनुकूल होने के लिए तैयार करती है।
  • प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करने से पूरे भारत में सिविल सेवा प्रशिक्षण इकोसिस्टम में सुधार होगा, जिससे मानव पूंजी का बेहतर विकास होगा।

संस्थागत सुधार

  • साधना श्रृंखला जैसी क्षेत्रीय कार्यशालाएं हितधारकों को प्रशिक्षण संस्थान परिवर्तन ढांचे को सह-विकसित करने और मान्य करने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं।
  • उन्नति जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों का एकीकरण प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग, संसाधन साझाकरण और डेटा-सूचित संस्थागत सुधार को बढ़ावा देता है।
  • यह दृष्टिकोण प्रशिक्षण से प्रदर्शन-संबंधित शासन की ओर बदलाव को मजबूत करता है, जिससे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता में वृद्धि होती है।

चुनौतियाँ

1. प्रशिक्षण संस्थानों का आधुनिकीकरण

  • पारंपरिक प्रशिक्षण पद्धतियों से योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण की ओर बदलाव में संसाधनों और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
  • देश भर में 900 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को ‘उन्नति’ जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों पर एकीकृत करना और उन्हें अद्यतन तकनीकों से लैस करना एक बड़ी चुनौती है।

2. तकनीकी एकीकरण और अनुकूलन

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एकीकरण जैसी नई तकनीकों को सिविल सेवा प्रशिक्षण में प्रभावी ढंग से शामिल करना।
  • सिविल सेवकों को इन तकनीकों का उपयोग करने और शासन में उनके अनुप्रयोगों को समझने के लिए प्रशिक्षित करना।

3. निरंतर सीखने की संस्कृति

  • सिविल सेवकों के बीच निरंतर सीखने और कौशल उन्नयन की संस्कृति को बढ़ावा देना, विशेष रूप से उनके व्यस्त कार्यसूची के साथ।
  • ऑनलाइन और भौतिक प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाना ताकि अधिकतम प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।

4. क्षमता निर्माण का मानकीकरण

  • विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए एक समान मानक और सर्वोत्तम प्रथाओं को सुनिश्चित करना।
  • विभिन्न प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों (ATI) और अकादमियों के बीच गुणवत्ता और सामग्री में एकरूपता बनाए रखना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
संस्थागत जड़ता पारंपरिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक क्षमता निर्माण केंद्रों में बदलने में प्रतिरोध या धीमी गति।
डिजिटल साक्षरता सभी सिविल सेवकों और प्रशिक्षण संकाय सदस्यों के बीच ‘उन्नति’ और ‘iGOT कर्मयोगी’ जैसे प्लेटफार्मों के प्रभावी उपयोग के लिए आवश्यक डिजिटल कौशल का अभाव।
संसाधन आवंटन प्रशिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता संकाय के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की उपलब्धता।
हितधारक समन्वय केंद्र और राज्य सरकारों, विभिन्न विभागों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना।
मूल्यांकन और प्रभाव क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के वास्तविक प्रभाव का मापन और यह सुनिश्चित करना कि वे शासन और लोक सेवा वितरण में मूर्त सुधार लाएं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi)

आगे की राह

  • प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक क्षमता निर्माण केंद्रों में बदलने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध रोडमैप विकसित करना।
  • सभी स्तरों पर सिविल सेवकों के लिए डिजिटल साक्षरता और तकनीकी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करना।
  • क्षमता निर्माण आयोग (CBC) द्वारा क्षेत्रीय कार्यशालाओं और परामर्शों की आवृत्ति बढ़ाना ताकि हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
  • iGOT कर्मयोगी और उन्नति जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों को लगातार अद्यतन और विस्तारित करना ताकि वे नवीनतम तकनीकों को शामिल कर सकें।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना और फीडबैक के आधार पर सुधार करना।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को और गहरा करना ताकि क्षमता निर्माण प्रयासों में एकरूपता और समन्वय सुनिश्चित हो सके।
  • सिविल सेवकों के लिए निरंतर सीखने और व्यक्तिगत विकास योजनाओं को प्रोत्साहित करने वाली एक संस्कृति को बढ़ावा देना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मिशन कर्मयोगी · क्षमता निर्माण आयोग (CBC) · साधना श्रृंखला · उन्नति मंच · iGOT कर्मयोगी · सिविल सेवा सुधार · प्रशिक्षण संस्थान · योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण · नागरिक-केंद्रित शासन · डिजिटल सक्षमता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 309’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तें’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 312’, ‘note’: ‘अखिल भारतीय सेवाओं का प्रावधान’}

अवधारणा प्रवाह

मिशन कर्मयोगी की शुरुआत  →  क्षमता निर्माण आयोग (CBC) की स्थापना  →  साधना श्रृंखला क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन  →  प्रशिक्षण संस्थानों का क्षमता निर्माण संस्थानों में परिवर्तन  →  iGOT कर्मयोगी और उन्नति प्लेटफार्मों का उपयोग  →  सिविल सेवकों की दक्षता और लोक सेवा वितरण में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. मिशन कर्मयोगी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इसका उद्देश्य सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण करना है ताकि वे अधिक रचनात्मक, कल्पनाशील, नवाचारी, सक्रिय, प्रगतिशील, पेशेवर, ऊर्जावान, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-सक्षम बन सकें।
2. ‘उन्नति’ एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो 900 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को संसाधन साझा करने और सहयोग के लिए जोड़ता है।
3. क्षमता निर्माण आयोग (CBC) मिशन कर्मयोगी के कार्यान्वयन की देखरेख करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मिशन कर्मयोगी का मुख्य उद्देश्य सिविल सेवकों की कार्यक्षमता और दक्षता में सुधार करना है। कथन 2 सही है, ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ने और क्षमता निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल सक्षमकर्ता है। कथन 3 सही है, क्षमता निर्माण आयोग (CBC) को मिशन कर्मयोगी के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए क्षमता निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार की देखरेख करने का कार्य सौंपा गया है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘साधना श्रृंखला’ का/के उद्देश्य है/हैं?
1. क्षेत्रीय परामर्श बैठकों के माध्यम से प्रशिक्षण संस्थान परिवर्तन ढांचे का सह-विकास करना।
2. प्रशिक्षण संस्थानों को क्षमता निर्माण संस्थानों में बदलना।
3. ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म का उपयोग करके निरंतर, डेटा-सूचित संस्थागत सुधार का समर्थन करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — साधना श्रृंखला का उद्देश्य क्षेत्रीय परामर्शों के माध्यम से प्रशिक्षण संस्थान परिवर्तन ढांचे का सह-विकास करना और इसे कार्रवाई योग्य प्राथमिकताओं में बदलना है। इसका कार्यान्वयन ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा, जो संसाधन साझा करने और निरंतर संस्थागत सुधार का समर्थन करता है। इस प्रकार, तीनों कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मिशन कर्मयोगी सिविल सेवा क्षमता निर्माण में एक परिवर्तनकारी पहल है। इस कथन के आलोक में, ‘प्रशिक्षण संस्थानों से क्षमता निर्माण संस्थानों की ओर’ बदलाव के महत्व और इसके कार्यान्वयन में ‘उन्नति’ तथा iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय: मिशन कर्मयोगी का संक्षिप्त परिचय और इसका मुख्य उद्देश्य।
मुख्य भाग:
1. ‘प्रशिक्षण संस्थानों से क्षमता निर्माण संस्थानों की ओर’ बदलाव का महत्व: नागरिक-केंद्रित शासन, बदलती प्रौद्योगिकियों (जैसे AI) के साथ तालमेल, योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण की आवश्यकता, प्रदर्शन-संबंधित शासन।
2. ‘उन्नति’ प्लेटफॉर्म की भूमिका: 900 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ना, संसाधन साझाकरण, सहयोग, डेटा-सूचित संस्थागत सुधार, परिवर्तन ढांचे का डिजिटल सक्षमकर्ता।
3. iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म की भूमिका: संरचित ऑनलाइन शिक्षण प्रदान करना, बड़े पैमाने पर ऑनलाइन क्षमता निर्माण को सक्षम करना, भौतिक प्रशिक्षण का पूरक।
4. क्षमता निर्माण आयोग (CBC) की भूमिका: मिशन कर्मयोगी के कार्यान्वयन की देखरेख, क्षेत्रीय कार्यशालाओं का आयोजन (जैसे साधना श्रृंखला)।
निष्कर्ष: सिविल सेवा सुधार और सुशासन में मिशन कर्मयोगी के समग्र प्रभाव और भविष्य की संभावनाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित ‘मिशन कर्मयोगी’ पर पहली क्षेत्रीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्या था?

  1. A. राज्य सरकार के अधिकारियों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना
  2. B. केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राज्य स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षित करना
  3. C. राज्य में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चलाना
  4. D. राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत केंद्र सरकार के अधिकारियों को प्रशिक्षित करना

उत्तर: B. केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत राज्य स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षित करना — ‘मिशन कर्मयोगी’ केंद्र सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण करना है। विजयवाड़ा में आयोजित कार्यशाला राज्य स्तरीय अधिकारियों को इस मिशन के तहत प्रशिक्षित करने के लिए थी।

Mains: आंध्र प्रदेश राज्य में ‘मिशन कर्मयोगी’ के कार्यान्वयन के संदर्भ में, राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों एवं चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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