मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0: सभी लाभार्थियों को मिलेगा पूरक आहार

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत सभी लाभार्थियों को पूरक पोषण उपलब्ध कराने का प्रावधान है — concept mind map

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0: सभी लाभार्थियों को मिलेगा पूरक आहार

✎ मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 एक व्यापक सरकारी पहल है जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों में कुपोषण को दूर करने के लिए पूरक पोषण, आहार विविधता और स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग पर केंद्रित है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय: गरीबी और भूख से संबंधित विषय, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय  |  GS Paper II — शासन: स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय
  • Prelims: मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0, पूरक पोषण कार्यक्रम, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चे, टेक-होम राशन (THR), चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS)
  • Essay: भारत में कुपोषण की चुनौती और इसके समाधान में सरकारी योजनाओं की भूमिका, महिला एवं बाल विकास में पोषण सुरक्षा का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 एक व्यापक सरकारी पहल है जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों में कुपोषण को दूर करने के लिए पूरक पोषण, आहार विविधता और स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग पर केंद्रित है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने हाल ही में लोकसभा में जानकारी दी है कि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत सभी लाभार्थियों को पूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल अनुशंसित आहार भत्ते (RDA) और औसत दैनिक सेवन (ADI) के बीच के अंतर को पाटने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिसमें बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को लक्षित किया गया है। पूरक पोषण घर ले जाने वाले राशन (THR), सुबह के नाश्ते और गर्म पके भोजन के रूप में प्रदान किया जा रहा है, जिसमें आहार विविधता और स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कुपोषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है, जो विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं और किशोरियों को प्रभावित करती है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों से पता चलता है कि बच्चों में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम ऊंचाई), वेस्टिंग (ऊंचाई के हिसाब से कम वजन) और एनीमिया का उच्च प्रसार है।
  • कुपोषण न केवल शारीरिक विकास को बाधित करता है, बल्कि संज्ञानात्मक विकास और सीखने की क्षमता को भी प्रभावित करता है, जिससे मानव पूंजी का नुकसान होता है।
  • सरकार ने विभिन्न योजनाओं जैसे एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना और राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) के माध्यम से कुपोषण से निपटने के लिए प्रयास किए हैं।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013, खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, जिसमें पूरक पोषण भी शामिल है।
  • मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0, इन पूर्ववर्ती पहलों का एक एकीकृत और संशोधित संस्करण है, जिसका उद्देश्य पोषण परिणामों में सुधार करना है।

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 क्या है?

  • यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक अम्ब्रेला योजना है, जिसे 2021 में एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना, पोषण अभियान, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) और किशोरियों के लिए योजना (SAG) को मिलाकर शुरू किया गया था।
  • इसका मुख्य उद्देश्य कुपोषण की चुनौतियों का समाधान करना, स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देना तथा बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है।
  • यह योजना 6 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 14-18 वर्ष की किशोरियों को पूरक पोषण प्रदान करती है।
  • पूरक पोषण घर ले जाने वाले राशन (THR), सुबह के नाश्ते और गर्म पके भोजन के रूप में दिया जाता है, जो लाभार्थियों की विशिष्ट पोषण आवश्यकताओं को पूरा करता है।
  • जनवरी 2023 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की संशोधित अनुसूची-II के अनुसार पोषण मानदंड निर्धारित किए गए हैं, जो कैलोरी के साथ-साथ प्रोटीन, स्वस्थ वसा और सूक्ष्म पोषक तत्वों (कैल्शियम, जिंक, आयरन, आहार फोलेट, विटामिन ए, विटामिन बी6 और विटामिन बी12) पर जोर देते हैं।
  • गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों (6 महीने से 5 वर्ष) को टेक-होम राशन (THR) के रूप में अतिरिक्त पोषण प्रदान किया जाता है।
  • योजना में पूरक पोषण की गुणवत्ता, विविधता और स्वीकार्यता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय खान-पान की आदतों और स्वदेशी सामग्रियों के आधार पर मेनू और व्यंजनों को तैयार करने की छूट दी गई है।
  • 6 से 23 महीने की आयु के बच्चों के पोषण को सुनिश्चित करने के लिए, टेक-होम राशन (THR) आंगनवाड़ी केंद्रों पर चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS) का उपयोग करके बच्चों की माताओं/अभिभावकों को वितरित किया जाता है, जिससे वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पूरक पोषण का प्रावधान अनुशंसित आहार भत्ते (RDA) और औसत दैनिक सेवन (ADI) के बीच के अंतर को पाटना, जिससे लक्षित समूहों में पोषण संबंधी कमियों को दूर किया जा सके।
विस्तृत लाभार्थी समूह बच्चे (6 महीने से 6 वर्ष), गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और किशोरियां (14-18 वर्ष) शामिल हैं, जो देश की पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
वितरण के तरीके घर ले जाने वाला राशन (THR), सुबह का नाश्ता और गर्म पका भोजन, जिससे लाभार्थियों की विभिन्न आवश्यकताओं और परिस्थितियों को पूरा किया जा सके।
चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS) का उपयोग 6 से 23 महीने के बच्चों के लिए THR वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना, जिससे लीकेज को रोका जा सके।
संशोधित पोषण मानदंड जनवरी 2023 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची-II के अनुसार, मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान केंद्रित, आहार विविधता को बढ़ावा देना।
स्थानीय अनुकूलन की छूट राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय खान-पान की आदतों, सांस्कृतिक प्राथमिकताओं और स्वदेशी सामग्रियों के आधार पर मेनू और व्यंजनों को तैयार करने की अनुमति, जिससे स्वीकार्यता और खपत बढ़े।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • कुपोषण (Malnutrition) और अल्पपोषण (Under-nutrition) से निपटने में सहायता, विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में, जो कमजोर वर्ग हैं।
  • बाल मृत्यु दर (Child Mortality Rate) और मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate) को कम करने में अप्रत्यक्ष योगदान, क्योंकि पोषण स्वास्थ्य का आधार है।
  • किशोरियों के स्वास्थ्य में सुधार, जो भविष्य की माताओं के रूप में महत्वपूर्ण हैं, जिससे अंतर-पीढ़ीगत कुपोषण चक्र को तोड़ने में मदद मिलेगी।

आर्थिक महत्व

  • स्वस्थ कार्यबल का निर्माण, जिससे उत्पादकता (Productivity) में वृद्धि होती है और देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
  • स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले व्यय में कमी, क्योंकि बेहतर पोषण बीमारियों की रोकथाम में सहायक होता है।
  • मानव पूंजी (Human Capital) के विकास में निवेश, जो दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान करता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013) के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक, जो भोजन के अधिकार को कानूनी मान्यता देता है।
  • डिजिटल प्रौद्योगिकी (Digital Technology) का उपयोग (जैसे FRS) वितरण प्रणाली में दक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करता है।
  • संघवाद (Federalism) के सिद्धांत का पालन करते हुए राज्यों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रम को अनुकूलित करने की छूट देना।

चुनौतियाँ

1. वितरण और पहुंच

  • दूरदराज के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंच और पूरक पोषण की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना एक चुनौती बनी हुई है।
  • लाभार्थियों की पहचान और पंजीकरण में त्रुटियां या छूटे हुए लाभार्थी कार्यक्रम के कवरेज को प्रभावित कर सकते हैं।

2. गुणवत्ता और विविधता

  • स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग करते हुए भी, निर्धारित पोषण मानदंडों और गुणवत्ता मानकों को लगातार बनाए रखना।
  • पूरक पोषण की स्वीकार्यता और खपत सुनिश्चित करना, विशेषकर जब स्थानीय स्वाद और पसंद अलग हों।

3. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन

  • लाभार्थियों और उनके परिवारों के बीच पोषण के महत्व और पूरक पोषण के सही उपयोग के बारे में जागरूकता की कमी।
  • गलत खान-पान की आदतों और सांस्कृतिक बाधाओं को दूर करना।

4. निगरानी और मूल्यांकन

  • कार्यक्रम के प्रभाव का नियमित और प्रभावी ढंग से मूल्यांकन करना, ताकि कमियों को पहचाना जा सके और सुधार किए जा सकें।
  • डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग में सटीकता सुनिश्चित करना, विशेषकर FRS जैसी नई तकनीकों के साथ।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन दूरदराज के क्षेत्रों तक पोषण सामग्री का समय पर और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करना, खराब होने वाली वस्तुओं का प्रबंधन।
भ्रष्टाचार और लीकेज वितरण प्रणाली में संभावित लीकेज और भ्रष्टाचार को रोकना, जिससे वास्तविक लाभार्थियों तक लाभ पहुंच सके।
कर्मचारियों का प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नए पोषण मानदंडों, FRS के उपयोग और पोषण परामर्श के लिए प्रशिक्षित करना।
पर्याप्त धन का आवंटन कार्यक्रम के व्यापक दायरे और संशोधित पोषण मानदंडों को पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता।
मौसम संबंधी चुनौतियां प्राकृतिक आपदाओं या खराब मौसम की स्थिति में पूरक पोषण की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (Mission Saksham Anganwadi and Poshan 2.0)
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act, 2013)

आगे की राह

  • आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन को मजबूत करना, विशेषकर दूरदराज के और आदिवासी क्षेत्रों में।
  • पोषण शिक्षा और व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC) गतिविधियों को तेज करना, ताकि लाभार्थियों और समुदायों में जागरूकता बढ़े।
  • स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन और खरीद को बढ़ावा देना, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ हो।
  • डिजिटल प्रौद्योगिकियों जैसे FRS का विस्तार और सुदृढीकरण, साथ ही डेटा-आधारित निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली को मजबूत करना।
  • विभिन्न मंत्रालयों और विभागों (जैसे स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास) के बीच अभिसरण (Convergence) को बढ़ावा देना ताकि पोषण संबंधी हस्तक्षेपों को एकीकृत किया जा सके।
  • गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों के लिए विशेष और लक्षित हस्तक्षेपों को और अधिक प्रभावी बनाना।
  • पूरक पोषण के मेनू और व्यंजनों को स्थानीय सांस्कृतिक प्राथमिकताओं और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार नियमित रूप से समीक्षा और अद्यतन करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 · पूरक पोषण · राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 · कुपोषण · महिला एवं बाल विकास मंत्रालय · आहार विविधता · टेक-होम राशन (THR) · पोषण मानदंड · सामुदायिक भागीदारी · सतत विकास लक्ष्य

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21 (Article 21)’, ‘note’: ‘जीवन के अधिकार में स्वस्थ जीवन का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(e) और 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47 (Article 47)’, ‘note’: ‘पोषण स्तर और जीवन स्तर में सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

अनुशंसित आहार भत्ते (RDA) और औसत दैनिक सेवन (ADI) में अंतर  →  मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 का शुभारंभ  →  विभिन्न लाभार्थियों को पूरक पोषण का प्रावधान (THR, नाश्ता, गर्म भोजन)  →  संशोधित पोषण मानदंड और स्थानीय अनुकूलन की छूट  →  पोषण स्तर में सुधार और कुपोषण में कमी  →  मानव पूंजी और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 का उद्देश्य केवल 6 महीने से 6 वर्ष तक के बच्चों को पूरक पोषण उपलब्ध कराना है।
2. गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों को टेक-होम राशन (THR) के रूप में अतिरिक्त पोषण प्रदान किया जाता है।
3. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की संशोधित अनुसूची- II में निहित पोषण मानदंड आहार विविधता के सिद्धांतों पर आधारित हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत बच्चे (6 महीने से 6 वर्ष), गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और किशोरियां (14-18 वर्ष) सभी लाभार्थी हैं। कथन 2 सही है क्योंकि गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों को अतिरिक्त पोषण THR के रूप में दिया जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि संशोधित मानदंड आहार विविधता के सिद्धांतों पर आधारित हैं, जिसमें मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान दिया गया है।

Q2. मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत पूरक पोषण के वितरण में चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS) का उपयोग किस आयु वर्ग के बच्चों के लिए किया जाता है?

  1. 6 महीने से 1 वर्ष
  2. 6 महीने से 23 महीने
  3. 1 वर्ष से 3 वर्ष
  4. 3 वर्ष से 6 वर्ष

उत्तर: 6 महीने से 23 महीने — 6 से 23 महीने की आयु के बच्चों के पोषण को सुनिश्चित करने के लिए, घर ले जाने वाले राशन (THR) आंगनवाड़ी केंद्रों पर चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS) का उपयोग करके बच्चों की माताओं/अभिभावकों को वितरित किया जाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के प्रमुख उद्देश्यों और प्रावधानों पर चर्चा कीजिए। कुपोषण से निपटने में यह योजना किस प्रकार एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित हो सकती है, विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और लक्षित लाभार्थी वर्ग।
2. **प्रमुख उद्देश्य और प्रावधान:**
* अनुशंसित आहार भत्ते (RDA) और औसत दैनिक सेवन (ADI) के बीच के अंतर को पाटना।
* लाभार्थी समूह: बच्चे (6 महीने से 6 वर्ष), गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और किशोरियां (14-18 वर्ष)।
* पोषण वितरण के तरीके: घर ले जाने वाला राशन (THR), सुबह का नाश्ता, गर्म पका भोजन।
* चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS) का उपयोग (6-23 महीने के बच्चों के लिए)।
* जनवरी 2023 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की संशोधित अनुसूची- II के तहत पोषण मानदंड।
* गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण।
* आहार विविधता और गुणवत्ता पर जोर (प्रोटीन, स्वस्थ वसा, सूक्ष्म पोषक तत्व)।
* स्थानीय खान-पान की आदतों और स्वदेशी सामग्रियों के आधार पर मेनू तैयार करने की राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को छूट।
3. **कुपोषण से निपटने में महत्व/उपकरण के रूप में भूमिका:**
* **व्यापक कवरेज:** विभिन्न कमजोर समूहों को शामिल करना।
* **वैज्ञानिक दृष्टिकोण:** संशोधित पोषण मानदंड (कैलोरी-विशिष्ट से आहार विविधता तक)।
* **सूक्ष्म पोषक तत्वों पर ध्यान:** कैल्शियम, जिंक, आयरन, फोलेट, विटामिन ए, बी6, बी12 का प्रावधान।
* **स्थानीयकरण:** स्थानीय खाद्य पदार्थों को शामिल कर स्वीकार्यता और खपत बढ़ाना।
* **प्रौद्योगिकी का उपयोग:** FRS जैसी प्रणालियों से वितरण में पारदर्शिता और दक्षता।
* **गंभीर कुपोषण पर विशेष ध्यान:** SAM बच्चों के लिए अतिरिक्त प्रावधान।
* **दीर्घकालिक प्रभाव:** स्वस्थ विकास और मानव पूंजी निर्माण में योगदान।
4. **निष्कर्ष:** कुपोषण मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में इस मिशन की क्षमता और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ इसका तालमेल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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