08 Aug मुख्यमंत्री मोदी को पत्र: इथेनॉल नीति पर दृढ़ रहें, किसानों का हित सुनिश्चित करें
✎ एथेनॉल सम्मिश्रण नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसका लक्ष्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और हरित ईंधन को बढ़ावा देना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- Prelims: एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, गन्ना, कच्चा तेल, विदेशी मुद्रा, पर्यावरण-अनुकूल ईंधन
- Essay: कृषि क्षेत्र में नवाचार और किसानों की आय दोगुनी करने की चुनौतियाँ, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में जैव ईंधन की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: एथेनॉल सम्मिश्रण नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसका लक्ष्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और हरित ईंधन को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
मैसूरु के गन्ना उत्पादकों के एक संगठन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एथेनॉल सम्मिश्रण नीति (Ethanol Blending Policy) को जारी रखने का आग्रह किया है। किसानों ने इस नीति को किसानों के कल्याण और देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण बताया है और विपक्षी दलों तथा विभिन्न संगठनों की आलोचना को नजरअंदाज करने का अनुरोध किया है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम शुरू किया है।
- इस कार्यक्रम के तहत, पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण किया जाता है, जिसका उत्पादन गन्ना, चावल, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से होता है।
- सरकार ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण (E20) का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- एथेनॉल को ‘हरित ईंधन’ (Green Fuel) माना जाता है क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करता है।
- विभिन्न हितधारकों द्वारा एथेनॉल सम्मिश्रण नीति के लाभों और चुनौतियों पर बहस जारी है, जिसमें वाहन इंजनों पर इसके प्रभाव और खाद्य सुरक्षा पर चिंताएं शामिल हैं।
- किसानों का मानना है कि एथेनॉल उत्पादन से उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिलता है और उनकी आय में वृद्धि होती है।
एथेनॉल सम्मिश्रण नीति क्या है?
- एथेनॉल सम्मिश्रण नीति भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल को मिलाकर जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करना है।
- एथेनॉल एक जैव-ईंधन है जिसे मुख्य रूप से गन्ना, मक्का, चावल और अन्य स्टार्च-युक्त या चीनी-युक्त कृषि उत्पादों से किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया द्वारा उत्पादित किया जाता है।
- इस नीति का प्राथमिक लक्ष्य कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना है, जिससे विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की बचत होती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
- यह नीति किसानों को उनकी कृषि उपज के लिए एक वैकल्पिक बाजार प्रदान करके उनकी आय बढ़ाने में मदद करती है, विशेषकर गन्ना किसानों को।
- एथेनॉल के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे वायु प्रदूषण नियंत्रित होता है और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- भारत ने 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण (E20) का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसके लिए एथेनॉल उत्पादन क्षमता में वृद्धि की जा रही है।
- राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) 2018 इस कार्यक्रम को दिशा प्रदान करती है, जिसमें जैव ईंधन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के प्रावधान हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| गन्ने से एथेनॉल उत्पादन | किसानों की आय में वृद्धि और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिरता |
| चावल, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से एथेनॉल | कच्चे माल की विविधता सुनिश्चित करना और खाद्य सुरक्षा पर दबाव कम करना |
| ईंधन में एथेनॉल मिश्रण | कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और विदेशी मुद्रा बचाना |
| पर्यावरण के अनुकूल ईंधन | कार्बन उत्सर्जन में कमी और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण |
| ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा | कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करना और किसानों को सशक्त बनाना |
महत्व
आर्थिक महत्व
- एथेनॉल उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि होती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होने से देश की लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है, जिससे व्यापार घाटा कम होगा।
- बची हुई विदेशी मुद्रा का उपयोग सार्वजनिक अवसंरचना और सेवाओं में निवेश के लिए किया जा सकता है, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- चीनी मिलों के लिए एथेनॉल उत्पादन एक अतिरिक्त राजस्व स्रोत प्रदान करता है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार होता है और गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होता है।
सामरिक महत्व
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करके भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) बढ़ा सकता है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशीलता कम होगी।
- स्वदेशी एथेनॉल उत्पादन से देश की आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) बढ़ती है और भू-राजनीतिक दबावों का सामना करने की क्षमता में सुधार होता है।
पर्यावरणीय महत्व
- एथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है जो पेट्रोल की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करता है, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है।
- यह पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देता है, जो सतत विकास (Sustainable Development) लक्ष्यों के अनुरूप है।
सामाजिक महत्व
- किसानों के कल्याण को प्राथमिकता देकर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक असमानता को कम करने में मदद कर सकती है।
- कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलता है, जिससे किसानों को विभिन्न फसलों से आय अर्जित करने का अवसर मिलता है।
चुनौतियाँ
1. खाद्य सुरक्षा बनाम ईंधन
- गन्ना, चावल और मक्का जैसी खाद्य फसलों का उपयोग एथेनॉल उत्पादन के लिए करने से खाद्य सुरक्षा पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है, खासकर जब इन फसलों की कीमतें बढ़ती हैं या उपलब्धता कम होती है।
- खाद्य फसलों को ईंधन उत्पादन की ओर मोड़ने से गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए खाद्य पदार्थों की पहुंच प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और संबंधित चुनौतियाँ
2. तकनीकी और अवसंरचनात्मक चुनौतियाँ
- एथेनॉल मिश्रण के लिए मौजूदा वाहन इंजनों में कुछ संशोधनों की आवश्यकता हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ सकती है।
- एथेनॉल के भंडारण, परिवहन और वितरण के लिए आवश्यक अवसंरचना (Infrastructure) का विकास अभी भी एक चुनौती है, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, रेलवे
3. पानी की खपत
- गन्ना जैसी फसलों की खेती के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, जिससे जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पानी की कमी है।
- एथेनॉल उत्पादन प्रक्रिया में भी पानी का उपयोग होता है, जिससे जल प्रबंधन की चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
यूपीएससी लिंक: जल संसाधन, सिंचाई और जल प्रबंधन
4. नीतिगत स्थिरता और कार्यान्वयन
- विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों के विरोध के कारण एथेनॉल नीति की स्थिरता पर सवाल उठ सकते हैं, जिससे निवेशकों का विश्वास कम हो सकता है।
- नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और किसानों, उद्योगों तथा उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| खाद्य फसलों का उपयोग | खाद्य सुरक्षा पर संभावित प्रभाव और खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि |
| इंजन संगतता | वाहनों में एथेनॉल मिश्रण के लिए आवश्यक संशोधन और रखरखाव लागत |
| जल उपयोग | गन्ने जैसी फसलों की खेती और एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक जल खपत |
| अवसंरचना का अभाव | एथेनॉल के भंडारण, परिवहन और वितरण के लिए पर्याप्त सुविधाओं की कमी |
| नीतिगत विरोध | विपक्षी दलों और संगठनों द्वारा नीति पर सवाल उठाना और अस्थिरता का डर |
आगे की राह
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए एथेनॉल उत्पादन के लिए गैर-खाद्य बायोमास और दूसरी पीढ़ी के फीडस्टॉक (जैसे कृषि अपशिष्ट) के उपयोग को बढ़ावा देना।
- एथेनॉल उत्पादन के लिए जल-कुशल कृषि पद्धतियों और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों को अपनाना, विशेषकर गन्ना उत्पादन में।
- एथेनॉल मिश्रण के लिए वाहन इंजनों की संगतता सुनिश्चित करने हेतु अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश करना तथा उपभोक्ताओं को जानकारी प्रदान करना।
- एथेनॉल के भंडारण, परिवहन और वितरण के लिए आवश्यक अवसंरचना का तेजी से विकास करना, जिसमें पाइपलाइन और समर्पित डिपो शामिल हैं।
- एथेनॉल नीति के लाभों और चुनौतियों के बारे में जनता, किसानों और हितधारकों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करना ताकि नीति का प्रभावी और सुसंगत कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
- किसानों को एथेनॉल उत्पादन के लिए आवश्यक फसलों की खेती के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
एथेनॉल सम्मिश्रण नीति · गन्ना किसान कल्याण · कच्चे तेल का आयात · विदेशी मुद्रा बचत · पर्यावरण अनुकूल ईंधन · कृषि विविधीकरण · आत्मनिर्भर भारत · जैव ईंधन नीति · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · ऊर्जा सुरक्षा
अवधारणा प्रवाह
एथेनॉल नीति पर सरकार का जोर → गन्ना, चावल, मक्का से एथेनॉल उत्पादन → ईंधन में एथेनॉल मिश्रण में वृद्धि → कच्चे तेल के आयात में कमी → विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों की आय में वृद्धि → आर्थिक आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. एथेनॉल सम्मिश्रण नीति का उद्देश्य भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करना है।
2. एथेनॉल का उत्पादन केवल गन्ने से ही किया जा सकता है।
3. एथेनॉल को पर्यावरण अनुकूल ईंधन माना जाता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि एथेनॉल सम्मिश्रण नीति का एक प्रमुख लक्ष्य कच्चे तेल के आयात को कम करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन गन्ना, चावल, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से भी किया जा सकता है। कथन 3 सही है क्योंकि एथेनॉल को एक स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन माना जाता है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. अभिकथन (A): भारत सरकार एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है।
कारण (R): एथेनॉल उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि होती है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सरकार एथेनॉल उत्पादन को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। कारण (R) भी सही है क्योंकि एथेनॉल उत्पादन से किसानों को उनके कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलता है और कच्चे तेल के आयात में कमी से विदेशी मुद्रा की बचत होती है, जो सरकार के नीतिगत उद्देश्यों के अनुरूप है। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की एथेनॉल सम्मिश्रण नीति (Ethanol Blending Policy) के प्रमुख उद्देश्यों का परीक्षण कीजिए। यह नीति किसानों के कल्याण और देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता में किस प्रकार योगदान दे सकती है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** एथेनॉल सम्मिश्रण नीति का संक्षिप्त परिचय और इसका महत्व।
2. **प्रमुख उद्देश्य:**
* कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना (लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचत का लक्ष्य)।
* पर्यावरण प्रदूषण कम करना (स्वच्छ ईंधन के रूप में एथेनॉल)।
* किसानों की आय बढ़ाना (गन्ना, चावल, मक्का आदि के लिए वैकल्पिक बाजार)।
* चीनी अधिशेष की समस्या का समाधान।
* ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना।
3. **किसानों के कल्याण में योगदान:**
* कृषि उत्पादों का लाभकारी मूल्य।
* आय का स्थिरीकरण और वृद्धि।
* कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहन।
* ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती।
4. **आर्थिक आत्मनिर्भरता में योगदान:**
* विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना।
* भुगतान संतुलन में सुधार।
* पेट्रोलियम उत्पादों के आयात बिल में कमी।
* ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक।
* सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सेवाओं में निवेश के लिए अधिक संसाधन।
5. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** (संक्षेप में)
* खाद्य सुरक्षा बनाम ईंधन उत्पादन का संतुलन।
* तकनीकी चुनौतियाँ और वाहन इंजन पर प्रभाव संबंधी चिंताएँ।
* नीतिगत स्थिरता और कार्यान्वयन।
6. **निष्कर्ष:** नीति के दीर्घकालिक लाभों और सतत विकास में इसकी भूमिका पर बल।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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