06 Nov मुजफ्फरपुर नगर निगम विस्तार: शहरीकरण और स्थानीय स्वशासन
✎ नगरीय सीमा विस्तार राज्य विधान के अंतर्गत होता है, जबकि 74वें संविधान संशोधन के बाद शहरी स्थानीय निकाय संवैधानिक इकाइयां हैं, और नियोजन के लिए अनुच्छेद 243ZD (जिला) तथा 243ZE (महानगर) के अंतर्गत समितियां बनती हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन व्यवस्था (स्थानीय शासन, 74वां संविधान संशोधन, शहरी स्थानीय निकाय, राज्य और स्थानीय सरकारों की भूमिका) | GS Paper I — समाज (नगरीकरण, नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों का परिवर्तन, शहरी-ग्रामीण सातत्य) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (नगरीय आधारभूत संरचना के वित्तपोषण हेतु स्थानीय निकायों के राजस्व स्रोत)
- Prelims: 74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992, अनुच्छेद 243Q (नगरपालिकाओं का गठन), अनुच्छेद 243ZD (जिला योजना समिति) और अनुच्छेद 243ZE (महानगर योजना समिति), बारहवीं अनुसूची (नगरपालिकाओं के 18 कार्य), राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243I और 243Y), राज्य निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 243ZA), जनगणना 2011 में नगरीय क्षेत्र की परिभाषा (सांविधिक नगर, जनगणना नगर), बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007
- Essay: नगरीकरण का विस्तार: शहरी सीमा विस्तार बनाम ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की स्वायत्तता, शहरी स्थानीय शासन को सशक्त करना: वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता की चुनौती
त्वरित पुनरावृत्ति: नगरीय सीमा विस्तार राज्य विधान के अंतर्गत होता है, जबकि 74वें संविधान संशोधन के बाद शहरी स्थानीय निकाय संवैधानिक इकाइयां हैं, और नियोजन के लिए अनुच्छेद 243ZD (जिला) तथा 243ZE (महानगर) के अंतर्गत समितियां बनती हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
बिहार के मुजफ्फरपुर नगर निगम के क्षेत्र विस्तार का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसके अंतर्गत आसपास के 47 गांवों की 16 पंचायतों को नगर निगम क्षेत्र में शामिल करने की योजना है। प्रस्तावित विस्तार के बाद नगर निगम का क्षेत्रफल लगभग 32 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर लगभग 53 वर्ग किलोमीटर और वार्डों की संख्या 49 से बढ़कर 70 से 72 होने की संभावना है। यह प्रस्ताव बीस सूत्री समिति की मंजूरी के बाद अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजा गया है। इसके साथ ही ‘ग्रेटर मुजफ्फरपुर’ योजना के अंतर्गत जिला आयोजना क्षेत्र को 265.71 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 428.29 वर्ग किलोमीटर किया गया है। शहर की आबादी के पांच लाख से अधिक होने का अनुमान है, इसलिए यह मामला नगरीय शासन, नगरीय नियोजन और ग्रामीण क्षेत्रों के नगरीय क्षेत्र में समावेशन से जुड़ा है।
पृष्ठभूमि
- भारत में स्थानीय शासन राज्य सूची का विषय है (सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 5), इसलिए नगर निगम की सीमा निर्धारण और विस्तार का अंतिम अधिकार राज्य विधान के अंतर्गत आता है।
- 74वें संविधान संशोधन (1992) ने शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया, भाग IXA जोड़ा गया और बारहवीं अनुसूची में 18 विषय सम्मिलित किए गए।
- नगर निगम जैसी नगरपालिकाओं का गठन अनुच्छेद 243Q के अंतर्गत होता है, जिसमें नगरपालिकाओं के तीन प्रकार, यथा नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम, बताए गए हैं।
- बिहार में नगरपालिका प्रशासन का मुख्य विधिक आधार बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 है, जिसके अंतर्गत सीमा परिवर्तन की प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा संचालित होती है।
- मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार का प्रमुख शहरी केंद्र है, जहां आबादी वृद्धि और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के शहरी प्रभाव के कारण नगरीय सीमा के पुनर्निर्धारण की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।
नगरीय सीमा विस्तार क्या है?
- नगरीय सीमा विस्तार का अर्थ है किसी नगर निगम या नगरपालिका के भौगोलिक क्षेत्र में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को सम्मिलित करना, जिससे उन्हें नगरीय शासन और सुविधाएं प्राप्त हो सकें।
- ऐसे परिवर्तन के समय पंचायतों का नगरीय क्षेत्र में विलय या समावेशन होता है, जिससे पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका और उनके क्षेत्राधिकार पर प्रभाव पड़ता है। यह प्रक्रिया राज्य विधान के अनुसार पूरी होती है।
- वार्डों का पुनर्गठन होता है और नए वार्डों के लिए निर्वाचन की व्यवस्था राज्य निर्वाचन आयोग के अधीक्षण में की जाती है (अनुच्छेद 243ZA)।
- जिला योजना समिति (अनुच्छेद 243ZD) जिले में पंचायतों और नगरपालिकाओं की योजनाओं को समेकित करती है, जबकि महानगर योजना समिति (अनुच्छेद 243ZE) दस लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजना तैयार करती है।
- नगरीय क्षेत्र की परिभाषा जनगणना में अलग से की जाती है, जिसमें सांविधिक नगर और जनगणना नगर जैसी श्रेणियां होती हैं। जनगणना नगर के लिए न्यूनतम जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व और गैर-कृषि कार्यरत पुरुषों का अनुपात देखा जाता है।
- राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243I और 243Y) स्थानीय निकायों के लिए राजस्व के वितरण की सिफारिश करता है, इसलिए सीमा विस्तार का सीधा प्रभाव करारोपण और अनुदान की व्यवस्था पर पड़ता है।
- बारहवीं अनुसूची के विषय, जैसे नगर नियोजन, जल आपूर्ति, सड़कें और गंदी बस्तियों में सुधार, विस्तारित क्षेत्र पर लागू होते हैं, इसलिए सीमा विस्तार नगर सेवाओं की क्षमता की परीक्षा भी है।
- प्रस्ताव की प्रक्रिया सामान्यतः स्थानीय स्तर पर बैठकों, विभागीय समीक्षा, संबंधित समिति की स्वीकृति और अंत में राज्य सरकार की अधिसूचना से पूरी होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| क्षेत्रफल विस्तार | लगभग 32 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर लगभग 53 वर्ग किलोमीटर करने का प्रस्ताव है, यानी नगरीय क्षेत्र का दायरा लगभग डेढ़ गुना से अधिक होगा। |
| वार्ड संख्या में वृद्धि | वर्तमान 49 वार्ड बढ़कर लगभग 70 से 72 तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें 15 से 20 नए वार्ड जोड़े जाने की योजना है। |
| गांवों और पंचायतों का समावेश | आसपास के 47 गांव और 16 पंचायतें नगर निगम की सीमा में शामिल की जाएंगी, जिससे ग्रामीण और नगरीय प्रशासन की सीमा आपस में मिलेगी। |
| जनसंख्या का अनुमान | शहर की आबादी तीन लाख से अधिक है और विस्तार के बाद लगभग दो लाख जुड़कर कुल आबादी पांच लाख से अधिक होने का अनुमान है। |
| जिला आयोजना क्षेत्र का विस्तार | आयोजना क्षेत्र 265.71 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 428.29 वर्ग किलोमीटर किया गया है, जिसमें कांटी, माधोपुर सुस्ता और मुशहरी प्रखंड के गांव शामिल हैं। |
| स्वीकृति की प्रक्रिया | प्रस्ताव बीस सूत्री समिति की मंजूरी के बाद अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजा गया है। |
महत्व
प्रशासनिक महत्व
- नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र की सीमा का पुनर्निर्धारण शासन के एक ही ढांचे में समन्वय की संभावना बनाता है।
- वार्डों की संख्या बढ़ने से जनता और निर्वाचित प्रतिनिधि के बीच की दूरी घटने की अपेक्षा रहती है।
नियोजन एवं शासन-संरचना
- जिला आयोजना क्षेत्र का विस्तार यह दर्शाता है कि शहरी प्रभाव अब नगर निगम की सीमा से आगे के क्षेत्रों तक फैल चुका है।
- नगरीय आबादी के पांच लाख से अधिक होने पर शहरी नियोजन की जिम्मेदारी और प्रशासनिक क्षमता की मांग बढ़ती है।
आर्थिक महत्व
- विस्तारित क्षेत्र में संपत्ति कर, भवन निर्माण शुल्क और अन्य स्थानीय करों के आधार का विस्तार होने की संभावना है।
- भूमि उपयोग में बदलाव से निर्माण गतिविधि, रियल एस्टेट और सेवा क्षेत्र को गति मिल सकती है।
सामाजिक एवं सेवा-वितरण पक्ष
- ग्रामीण आबादी को जल आपूर्ति, सीवरेज, सड़क और सफाई जैसी नगरीय सेवाओं तक पहुंच मिलने की उम्मीद है।
- सेवा मानकों में सुधार तभी संभव है जब अवसंरचना के निवेश की योजना समानांतर रूप से बने।
चुनौतियाँ
1. वार्ड परिसीमन और प्रतिनिधित्व
- वार्डों की संख्या 49 से बढ़कर 70 से 72 होने पर नए वार्डों की सीमा तय करना जटिल कार्य है।
- पुराने और नए क्षेत्रों के बीच जनसंख्या संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि किसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कम या अधिक न हो।
यूपीएससी लिंक: शासन: स्थानीय स्वशासन में प्रतिनिधित्व और परिसीमन
2. नगरीय वित्त और कर-आधार
- नगर निगम का वित्तीय आधार मुख्यतः स्थानीय करों और राज्य से मिलने वाले अनुदानों पर निर्भर है।
- ग्रामीण क्षेत्र को शामिल करने से सेवा दायित्व बढ़ेगा, जबकि कर-संग्रह की व्यवस्था तत्काल विकसित नहीं हो पाती।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: स्थानीय निकायों का वित्त और कर-अधिकार
3. ग्रामीण पहचान और पंचायत व्यवस्था का संक्रमण
- 16 पंचायतों का नगरीय सीमा में आना पंचायती राज संस्थाओं की शक्तियों और भूमिका को प्रभावित करता है।
- ग्राम सभा की भूमिका, पंचायत निधि और कर्मचारियों की सेवा-शर्तों के हस्तांतरण पर स्पष्ट प्रक्रिया आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: शासन: पंचायती राज और नगरीय स्थानीय निकाय का संबंध
4. अवसंरचना का अंतराल
- ग्रामीण क्षेत्रों में जल, सीवरेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सड़क नेटवर्क अक्सर नगरीय मानकों से पीछे होते हैं।
- सेवाओं को एकसाथ विकसित करने के लिए पूंजीगत निवेश और तकनीकी क्षमता दोनों की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: बुनियादी ढांचा और शहरी सेवाएं
5. अनियोजित शहरीकरण और भूमि उपयोग
- सीमा विस्तार से कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग में तेजी आ सकती है, जिससे अनियोजित बस्तियों का खतरा बढ़ता है।
- मास्टर प्लान और भवन उप-नियमों का प्रभावी लागू होना इस विस्तार की गुणवत्ता तय करेगा।
यूपीएससी लिंक: भूगोल एवं पर्यावरण: शहरीकरण और भूमि उपयोग परिवर्तन
6. आयोजना क्षेत्र और नगर सीमा का समन्वय
- जिला आयोजना क्षेत्र और नगर निगम की सीमा अलग-अलग होने से योजनाओं के क्रियान्वयन में दोहराव या अंतराल हो सकता है।
- जनसंख्या दस लाख से कम होने के कारण यहां महानगर आयोजना समिति का प्रावधान लागू नहीं होता, इसलिए जिला स्तर पर समन्वय की भूमिका अधिक है।
यूपीएससी लिंक: शासन: विकेंद्रीकृत नियोजन और आयोजना समितियां
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| सीमा और वार्ड का पुनर्गठन | नए वार्डों के परिसीमन में पारदर्शिता और जनसंख्या संतुलन सुनिश्चित करना होगा। |
| राजस्व क्षमता | ग्रामीण क्षेत्र जुड़ने से सेवा-दायित्व बढ़ेगा, जबकि कर-आधार धीरे-धीरे विकसित होगा। |
| पंचायत संस्थाओं का हस्तांतरण | पंचायत निधि, परिसंपत्तियों और कर्मचारियों के हस्तांतरण की स्पष्ट प्रक्रिया आवश्यक है। |
| बुनियादी सेवाओं का स्तर | जल, सीवरेज और सड़क जैसी सेवाओं को नगरीय मानकों तक लाने में समय और पूंजी लगेगी। |
| भूमि उपयोग नियंत्रण | कृषि भूमि के अनियंत्रित रूपांतरण और अवैध निर्माण की आशंका बनी रहती है। |
आगे की राह
- विस्तार से पहले सभी प्रभावित गांवों और पंचायतों की विस्तृत सीमा-रेखा, भूमि-अभिलेख और जनसंख्या का सत्यापन किया जाए।
- नए वार्डों का परिसीमन जनसंख्या के आधार पर पारदर्शी प्रक्रिया से हो और उसकी सार्वजनिक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए।
- पंचायतों से नगर निगम में जाने वाली परिसंपत्तियों, निधियों और कर्मचारियों के हस्तांतरण के लिए स्पष्ट वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया बनाई जाए।
- कर-आधार के विस्तार के लिए संपत्ति कर का नया सर्वेक्षण, डिजिटल संपत्ति रजिस्टर और कर-वसूली की क्षमता बढ़ाई जाए।
- जिला आयोजना क्षेत्र और नगर निगम की योजनाओं के बीच समन्वय के लिए एक एकीकृत मास्टर प्लान और नियमित समीक्षा व्यवस्था बनाई जाए।
- जल, सीवरेज और सड़क जैसी सेवाओं के लिए चरणबद्ध अवसंरचना योजना बने, जिसमें प्राथमिकता वाले क्षेत्र पहले लिए जाएं।
- कृषि भूमि के रूपांतरण पर भूमि उपयोग नियंत्रण और भवन निर्माण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो।
- नागरिक भागीदारी के लिए नए वार्डों में वार्ड स्तरीय परामर्श और शिकायत निवारण तंत्र सक्रिय किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नगर निगम (Municipal Corporation) · नगरीकरण (Urbanisation) · परिधीय क्षेत्र (Peri-urban Areas) · 73वां और 74वां संविधान संशोधन (73rd and 74th Constitutional Amendment) · बारहवीं अनुसूची (Twelfth Schedule) · जिला योजना समिति (District Planning Committee) · राजकोषीय विकेंद्रीकरण (Fiscal Decentralisation) · वार्ड परिसीमन (Ward Delimitation) · जनगणना नगर (Census Town) · शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies) · स्थानीय शासन (Local Governance) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 243Q: नगरपालिकाओं का गठन और संरचना
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं की शक्तियां और दायित्व
- अनुच्छेद 243X: नगरपालिकाओं के कर लगाने की शक्ति
- अनुच्छेद 243Y: वित्त आयोग द्वारा नगरपालिकाओं की समीक्षा
- अनुच्छेद 243ZD: जिला योजना समिति का गठन
- अनुच्छेद 243ZA: नगरपालिका चुनावों पर राज्य निर्वाचन आयोग का अधीक्षण
अवधारणा प्रवाह
राज्य सरकार के समक्ष नगर निगम के क्षेत्र-विस्तार का प्रस्ताव तैयार होना → प्रस्ताव में 47 गांवों और 16 पंचायतों को शामिल करने तथा क्षेत्रफल 32 से 53 वर्ग किलोमीटर करने का प्रावधान → बीस सूत्री समिति की मंजूरी के बाद प्रस्ताव का राज्य सरकार को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाना → वार्डों की संख्या 49 से बढ़कर 70 से 72 होने की प्रक्रिया और शहरी आबादी का पांच लाख से ऊपर जाने का अनुमान → जिला आयोजना क्षेत्र का 265.71 से 428.29 वर्ग किलोमीटर होना, जिससे आसपास के क्षेत्र नियोजन के दायरे में आएं → नगरीय सेवाओं, कर-आधार और भूमि उपयोग पर प्रभाव, जिसके लिए अवसंरचना और प्रशासनिक क्षमता का विकास आवश्यक
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 243Q राज्यों में नगरपालिकाओं के गठन का प्रावधान करता है, जिनके तीन प्रकार हैं: नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम।
2. राज्य निर्वाचन आयोग की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
3. अनुच्छेद 243ZD जिला योजना समिति के गठन का प्रावधान करता है, जो पंचायतों और नगरपालिकाओं द्वारा तैयार योजनाओं को समेकित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 243Q में नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम के रूप में तीन प्रकार की नगरपालिकाओं का उल्लेख है। कथन 2 गलत है: राज्य निर्वाचन आयोग की नियुक्ति राज्यपाल करता है (अनुच्छेद 243K), राष्ट्रपति नहीं। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 243ZD जिला योजना समिति का प्रावधान करता है।
Q2. निम्नलिखित कथनों में दो कथन दिए गए हैं: अभिकथन (A) और कारण (R)।
अभिकथन (A): किसी नगर निगम के क्षेत्र में परिधीय ग्रामों को शामिल करने से उस नगर निगम के कर-आधार (Tax Base) का विस्तार हो सकता है।
कारण (R): संविधान का अनुच्छेद 243X राज्य विधानमंडल को यह अधिकार देता है कि वह नगरपालिकाओं को कर, शुल्क, टोल और फीस लगाने, संग्रह करने और विनियोजित करने के लिए प्राधिकृत कर सके।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अभिकथन सही है, क्योंकि क्षेत्र विस्तार से कर-योग्य संपत्तियां और गतिविधियां नगर निगम के दायरे में आती हैं। कारण भी सही है: अनुच्छेद 243X राज्य को नगरपालिकाओं को कर-अधिकार सौंपने की शक्ति देता है। कारण इसी संवैधानिक प्रावधान से अभिकथन की व्याख्या करता है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची-I (संवैधानिक प्रावधान)
1. अनुच्छेद 243Q
2. अनुच्छेद 243R
3. अनुच्छेद 243X
4. अनुच्छेद 243ZD
सूची-II (विषय)
i. नगरपालिकाओं का गठन
ii. नगरपालिकाओं की संरचना
iii. नगरपालिकाओं द्वारा कर अधिरोपण की शक्ति
iv. जिला योजना समिति
सही मिलान का विकल्प चुनिए:
- 1-i, 2-ii, 3-iii, 4-iv
- 1-ii, 2-i, 3-iii, 4-iv
- 1-i, 2-iii, 3-ii, 4-iv
- 1-iv, 2-i, 3-iii, 4-ii
उत्तर: 1-i, 2-ii, 3-iii, 4-iv — अनुच्छेद 243Q नगरपालिकाओं के गठन से, अनुच्छेद 243R उनकी संरचना (सदस्यों के निर्वाचन और आरक्षण) से, अनुच्छेद 243X कर अधिरोपण की शक्ति से और अनुच्छेद 243ZD जिला योजना समिति से संबंधित है। अतः केवल पहला विकल्प सही मिलान है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में नगरीकरण के दबाव के बीच नगर निगमों की सीमाओं का विस्तार अक्सर परिधीय ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी प्रशासन में समाहित करने का प्रमुख उपाय बन रहा है। स्थानीय शासन के संवैधानिक ढांचे के संदर्भ में इस प्रवृत्ति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि ग्राम पंचायतों को नगर निगम क्षेत्र में शामिल किए जाने पर उनकी स्वायत्तता, वित्तीय स्रोतों और जनप्रतिनिधित्व पर क्या प्रभाव पड़ते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा (Model-Answer Skeleton):
1. भूमिका: मुजफ्फरपुर नगर निगम का विस्तार (क्षेत्रफल 32 से लगभग 53 वर्ग किलोमीटर, वार्ड 49 से लगभग 70-72, 47 गांव और 16 पंचायतें शामिल, अनुमानित आबादी पांच लाख से अधिक) को उदाहरण के रूप में लें। जिला योजना क्षेत्र का 265.71 से 428.29 वर्ग किलोमीटर तक विस्तार भी उल्लेख करें।
2. संवैधानिक ढांचा: 74वां संविधान संशोधन (1992) — अनुच्छेद 243P (परिभाषाएं), 243Q (नगरपालिकाओं का गठन: नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम), 243R (संरचना और प्रत्यक्ष निर्वाचन), 243S (वार्ड समितियां), 243T (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण), 243U (कार्यकाल), 243K (राज्य निर्वाचन आयोग, राज्यपाल द्वारा नियुक्त)। बारहवीं अनुसूची के 18 नगरपालिका विषय।
3. विस्तार की प्रक्रिया: सीमा निर्धारण और वार्ड परिसीमन राज्य कानून के अंतर्गत; प्रस्ताव का अनुमोदन बीस सूत्री समिति के बाद राज्य सरकार को; अंतिम स्वीकृति राज्य स्तर पर। इस प्रक्रिया में राज्य के नगरपालिका अधिनियम और राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका का उल्लेख।
4. पक्ष में तर्क: शहरी सेवाओं (जल, सीवरेज, सड़क, अपशिष्ट प्रबंधन) का विस्तार; नियोजित विकास; कर-आधार में वृद्धि (अनुच्छेद 243X); अनियोजित परिधीय विकास (urban sprawl) पर नियंत्रण; जनगणना में परिभाषित शहरी प्रवृत्तियों के अनुरूप प्रशासनिक ढांचा।
5. विपक्ष में तर्क और चिंताएं: पंचायतों की संवैधानिक स्वायत्तता का क्षरण (अनुच्छेद 243G और ग्यारहवीं अनुसूची के 29 विषय); ग्रामीण पहचान और सामुदायिक संस्थाओं पर प्रभाव; राजकोषीय असंतुलन (राज्य वित्त आयोग, अनुच्छेद 243I और 243Y के अंतर्गत हस्तांतरण); पर्याप्त संसाधन और क्षमता के बिना सेवा-वितरण की चुनौती; जनप्रतिनिधित्व में दूरी।
6. समन्वय का ढांचा: जिला योजना समिति (अनुच्छेद 243ZD) और यदि लागू हो तो महानगर योजना समिति (अनुच्छेद 243ZE) द्वारा शहरी-ग्रामीण योजनाओं का समेकन; द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की 15वीं रिपोर्ट (स्थानीय शासन) की सिफारिशें, जिनमें स्पष्ट कार्य-वितरण और वित्तीय सशक्तिकरण पर बल दिया गया।
7. संतुलित निष्कर्ष: विस्तार को केवल भौगोलिक प्रसार न मानकर सहभागी और संसाधन-संपन्न शासन का अवसर बनाना आवश्यक है। ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के बीच सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप सह-अस्तित्व का मॉडल सुझाएं।
स्रोत: amarujala.com
Bihar PCS (BPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: हाल ही में बिहार के किस नगर निगम का दायरा बढ़ाने की तैयारी तेज की गई है, जिसमें 47 गांवों की 16 पंचायतों को शामिल करने का प्रस्ताव है?
- A. पटना नगर निगम
- B. भागलपुर नगर निगम
- C. मुजफ्फरपुर नगर निगम
- D. दरभंगा नगर निगम
उत्तर: C. मुजफ्फरपुर नगर निगम — मुजफ्फरपुर नगर निगम का दायरा बढ़ाने की तैयारी चल रही है, जिसमें 47 गांवों की 16 पंचायतों को शामिल किया जाएगा।
Mains: मुजफ्फरपुर नगर निगम के दायरे के विस्तार के प्रस्ताव के प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख करते हुए, इसके संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डालिए। (लगभग 100 शब्द)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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