04 Aug मैसूर को वैश्विक पर्यटन मिशन में शामिल करने के लिए केंद्र से मांग
✎ मैसूरु को 'भारत में 50 विश्व-स्तरीय प्रतिस्पर्धी पर्यटन स्थलों के विकास के लिए राष्ट्रीय मिशन' में शामिल करने का प्रस्ताव इसकी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और आर्थिक संवृद्धि को गति देने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति, भूगोल | GS Paper II — संघवाद, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन क्षेत्र, अवसंरचना
- Prelims: राष्ट्रीय मिशन: 50 विश्व-स्तरीय पर्यटन स्थल, मैसूरु दशहरा, UNESCO मान्यता, विकसित भारत 2047, पर्यटन अवसंरचना, सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय अर्थव्यवस्था
- Essay: पर्यटन: आर्थिक संवृद्धि और सांस्कृतिक संरक्षण का वाहक, भारत की विरासत का संरक्षण और संवर्धन: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: मैसूरु को ‘भारत में 50 विश्व-स्तरीय प्रतिस्पर्धी पर्यटन स्थलों के विकास के लिए राष्ट्रीय मिशन’ में शामिल करने का प्रस्ताव इसकी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और आर्थिक संवृद्धि को गति देने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
मैसूरु-कोडागु के सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की है। उन्होंने केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित ‘भारत में 50 विश्व-स्तरीय प्रतिस्पर्धी पर्यटन स्थलों के विकास के लिए राष्ट्रीय मिशन’ में मैसूरु शहर को शामिल करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इस पहल का उद्देश्य मैसूरु को एक विश्व-स्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करना है, जो इसकी अद्वितीय सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को उजागर करेगा।
पृष्ठभूमि
- मैसूरु अपनी समृद्ध विरासत, शाही विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।
- मैसूरु पैलेस भारत के सबसे अधिक देखे जाने वाले विरासत स्मारकों में से एक है।
- मैसूरु दशहरा उत्सव को अपनी सांस्कृतिक महत्व के लिए UNESCO से मान्यता प्राप्त है।
- यह शहर योग और कल्याण के केंद्र के रूप में एक अद्वितीय स्थान रखता है, साथ ही अपनी पारंपरिक हस्तशिल्प और जीवंत कला के लिए भी जाना जाता है।
- मैसूरु में सड़क, रेल और हवाई संपर्क की अच्छी सुविधा है, जो इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनाती है।
- यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है।
भारत में 50 विश्व-स्तरीय प्रतिस्पर्धी पर्यटन स्थलों के विकास के लिए राष्ट्रीय मिशन क्या है?
- यह मिशन केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित किया गया था।
- इसका मुख्य उद्देश्य भारत में 50 प्रमुख पर्यटन स्थलों को विश्व-स्तरीय गंतव्यों के रूप में विकसित करना है।
- मिशन का लक्ष्य पर्यटन अवसंरचना (Tourism Infrastructure) में सुधार करना और आगंतुक सुविधाओं को बढ़ाना है।
- यह विरासत स्थलों के संरक्षण, सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) को बढ़ावा देने और सार्वजनिक तथा निजी निवेश को आकर्षित करने पर केंद्रित है।
- इस पहल से रोजगार सृजन, स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को बढ़ावा देने तथा छोटे व्यवसायों और आतिथ्य क्षेत्र (Hospitality Sector) को मजबूत करने की उम्मीद है।
- मिशन का उद्देश्य पर्यटन पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका में सुधार करना भी है।
- यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समृद्ध विरासत और शाही परंपरा | मैसूरु पैलेस, मैसूरु दशहरा जैसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त आकर्षणों का केंद्र। |
| सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व | यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त मैसूरु दशहरा त्योहार और भारत के सर्वाधिक देखे जाने वाले विरासत स्मारकों में से एक मैसूरु पैलेस। |
| योग और कल्याण केंद्र | स्वास्थ्य और कल्याण पर्यटन के लिए अद्वितीय स्थिति। |
| पारंपरिक हस्तशिल्प और कला | स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को बढ़ावा देने तथा सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करने की क्षमता। |
| उत्कृष्ट कनेक्टिविटी | सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा होना, पर्यटकों की पहुँच को सुगम बनाता है। |
| घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों का आकर्षण | प्रतिवर्ष लाखों पर्यटकों को आकर्षित करने वाला भारत के प्रमुख विरासत शहरों में से एक। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- पर्यटन अवसंरचना (Tourism Infrastructure) के विकास से सार्वजनिक और निजी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय कलाकारों, कारीगरों, छोटे व्यवसायों और आतिथ्य क्षेत्र (Hospitality Sector) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका में सुधार होगा।
सांस्कृतिक महत्व
- मैसूरु की समृद्ध विरासत, शाही परंपराओं और सांस्कृतिक महत्व को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
- विरासत स्थलों के संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
सामाजिक महत्व
- पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय आबादी को लाभ होगा।
- स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार होगा और समावेशी विकास (Inclusive Development) को बढ़ावा मिलेगा।
रणनीतिक महत्व
- मैसूरु को विश्व स्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने से ‘विकसित भारत 2047’ (Viksit Bharat 2047) के दृष्टिकोण को साकार करने में मदद मिलेगी।
- भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर देश की स्थिति मजबूत होगी।
चुनौतियाँ
1. अवसंरचनात्मक बाधाएँ
- पर्यटन के बढ़ते प्रवाह को संभालने के लिए मौजूदा अवसंरचना (सड़कें, परिवहन, आवास) को उन्नत करने की आवश्यकता।
- पर्याप्त पर्यटक सुविधाओं (शौचालय, सूचना केंद्र, सुरक्षा) की कमी।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा और विकास
2. स्थिरता और संरक्षण
- पर्यटन के पर्यावरणीय और सांस्कृतिक प्रभावों को कम करते हुए सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) को बढ़ावा देना।
- विरासत स्थलों के संरक्षण और रखरखाव के लिए पर्याप्त धन और विशेषज्ञता सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण और विरासत
3. निधि और निवेश
- मिशन के तहत आवश्यक बड़े पैमाने पर विकास के लिए पर्याप्त सार्वजनिक और निजी निवेश आकर्षित करना।
- परियोजनाओं के लिए धन के आवंटन और उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: सरकारी बजट और वित्त
4. समन्वय और कार्यान्वयन
- केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ विभिन्न हितधारकों (Stakeholders) के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
- परियोजनाओं के समयबद्ध और कुशल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: संघवाद और शासन
5. मानव संसाधन विकास
- पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल (Skilled Workforce) का विकास करना।
- स्थानीय समुदायों को पर्यटन से संबंधित कौशल में प्रशिक्षित करना।
यूपीएससी लिंक: कौशल विकास और रोजगार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पर्यटक स्थलों पर भीड़भाड़ | विरासत स्थलों पर अत्यधिक दबाव और पर्यटक अनुभव में कमी। |
| स्थानीय संस्कृति का क्षरण | पर्यटन के कारण स्थानीय परंपराओं और जीवन शैली पर नकारात्मक प्रभाव। |
| अपशिष्ट प्रबंधन | पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण उत्पन्न होने वाले कचरे का प्रभावी प्रबंधन। |
| सुरक्षा और संरक्षा | पर्यटकों, विशेषकर अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना। |
| मौसम संबंधी चुनौतियाँ | जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम की घटनाओं का पर्यटन पर संभावित प्रभाव। |
आगे की राह
- मैसूरु के अद्वितीय सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए एक व्यापक और प्रतिस्पर्धी प्रस्ताव तैयार करना।
- पर्यटन अवसंरचना को उन्नत करने, कनेक्टिविटी में सुधार करने और आगंतुक सुविधाओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना।
- मैसूरु पैलेस और दशहरा जैसे प्रमुख आकर्षणों के साथ-साथ योग, कल्याण और हस्तशिल्प जैसे विशिष्ट पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देना।
- स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास प्रक्रिया में शामिल करना और उनके लिए रोजगार तथा आय के अवसर सृजित करना।
- सतत पर्यटन प्रथाओं को अपनाना, जिसमें विरासत स्थलों का संरक्षण और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना शामिल है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को प्रोत्साहित करना ताकि पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिल सके।
- पर्यटन क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन विकसित करने के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों को लागू करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पर्यटन संवर्धन · सांस्कृतिक विरासत संरक्षण · स्थानीय अर्थव्यवस्था · रोजगार सृजन · सतत पर्यटन · बुनियादी ढांचा विकास · वैश्विक पर्यटन गंतव्य · विकसित भारत 2047 · संघवाद · राज्य-केंद्र समन्वय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 29’, ‘note’: ‘अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 49’, ‘note’: ‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण’}
अवधारणा प्रवाह
मैसूरु को वैश्विक पर्यटन मिशन में शामिल करने का प्रस्ताव → पर्यटन अवसंरचना और सुविधाओं का विकास → पर्यटकों की संख्या में वृद्धि → आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन → स्थानीय आजीविका में सुधार और सांस्कृतिक संरक्षण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा ‘राष्ट्रीय मिशन फॉर द डेवलपमेंट ऑफ 50 ग्लोबली कॉम्पिटिटिव टूरिस्ट डेस्टिनेशंस इन इंडिया’ योजना शुरू की गई है।
2. यह मिशन केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित किया गया था।
3. मैसूरु दशहरा उत्सव को UNESCO द्वारा सांस्कृतिक महत्व के लिए मान्यता प्राप्त है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई भी नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि यह मिशन पर्यटन मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है जिसका उद्देश्य भारत में 50 विश्व स्तरीय पर्यटन स्थलों का विकास करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह मिशन केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित किया गया था। कथन 3 भी सही है क्योंकि मैसूरु दशहरा उत्सव को UNESCO द्वारा सांस्कृतिक महत्व के लिए मान्यता प्राप्त है।
Q2. अभिकथन (A): मैसूरु को ‘राष्ट्रीय मिशन फॉर द डेवलपमेंट ऑफ 50 ग्लोबली कॉम्पिटिटिव टूरिस्ट डेस्टिनेशंस इन इंडिया’ में शामिल करने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
कारण (R): पर्यटन क्षेत्र में वृद्धि से रोजगार सृजन होता है और छोटे व्यवसायों को मजबूती मिलती है।
सही विकल्प चुनें:
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि पर्यटन मिशन में मैसूरु के शामिल होने से पर्यटन बुनियादी ढांचे का विकास होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। कारण (R) भी सही है क्योंकि पर्यटन में वृद्धि से स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को बढ़ावा मिलता है, छोटे व्यवसायों और आतिथ्य क्षेत्र को मजबूती मिलती है, और हजारों परिवारों की आजीविका में सुधार होता है, जो रोजगार सृजन से जुड़ा है। R, A की सही व्याख्या भी है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में पर्यटन क्षेत्र के विकास में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय के महत्व का परीक्षण कीजिए। ‘राष्ट्रीय मिशन फॉर द डेवलपमेंट ऑफ 50 ग्लोबली कॉम्पिटिटिव टूरिस्ट डेस्टिनेशंस इन इंडिया’ जैसी पहलों के संदर्भ में, इस समन्वय को और प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में पर्यटन क्षेत्र की क्षमता और इसके बहुआयामी लाभों (आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक) पर प्रकाश डालते हुए केंद्र-राज्य समन्वय की आवश्यकता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. केंद्र-राज्य समन्वय का महत्व: पर्यटन नीति निर्माण, बुनियादी ढांचा विकास, विरासत संरक्षण, विपणन और संवर्धन, सुरक्षा और नियामक ढांचे में समन्वय की भूमिका का वर्णन। उदाहरण के तौर पर, मैसूरु जैसे शहरों के विकास में राज्य के प्रस्ताव और केंद्र की स्वीकृति का उल्लेख।
3. ‘राष्ट्रीय मिशन फॉर द डेवलपमेंट ऑफ 50 ग्लोबली कॉम्पिटिटिव टूरिस्ट डेस्टिनेशंस इन इंडिया’ का संदर्भ: इस मिशन के उद्देश्यों (विश्व स्तरीय गंतव्य बनाना, सतत पर्यटन को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना) और इसमें केंद्र-राज्य सहयोग की अनिवार्यता पर चर्चा।
4. प्रभावी समन्वय के लिए कदम:
क. संयुक्त कार्य समूह और अंतर-मंत्रालयी समितियां: पर्यटन मंत्रालय (केंद्र) और राज्य पर्यटन विभागों के बीच नियमित संवाद और योजना निर्माण।
ख. डेटा साझाकरण और अनुसंधान: पर्यटन से संबंधित आंकड़ों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान।
ग. क्षमता निर्माण: राज्य स्तर पर पर्यटन पेशेवरों और हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।
घ. वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन: केंद्र द्वारा राज्यों को वित्तीय सहायता और निवेश आकर्षित करने के लिए संयुक्त प्रोत्साहन।
ङ. एकीकृत विपणन रणनीति: ‘अतुल्य भारत’ (Incredible India) अभियान के तहत राज्य-विशिष्ट पर्यटन को बढ़ावा देना।
च. स्थानीय समुदायों की भागीदारी: पर्यटन विकास में स्थानीय लोगों और पंचायती राज संस्थाओं को शामिल करना।
5. निष्कर्ष: ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में पर्यटन की भूमिका और इसके लिए मजबूत केंद्र-राज्य समन्वय की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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