युवा सहकार एवं स्वयं शक्ति योजना: सहकारी समितियों को मिल रहा लाभ, जानिए कैसे?

युवा सहकार एवं स्वयं शक्ति योजना: सहकारी समितियों को मिल रहा लाभ, जानिए कैसे? — युवा सहकार और स्वयं शक्ति सहकार योजना की कार्यप्रणाली

युवा सहकार एवं स्वयं शक्ति योजना: सहकारी समितियों को मिल रहा लाभ, जानिए कैसे?

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय  |  GS Paper III — समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय
  • Prelims: युवा सहकार योजना, स्वयं शक्ति सहकार योजना, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), सहकारिता मंत्रालय, स्वयं सहायता समूह (SHG), महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास, सहकारी समितियाँ
  • Essay: भारत में समावेशी विकास के लिए सहकारी समितियों की भूमिका, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता में स्वयं सहायता समूहों का योगदान

त्वरित पुनरावृत्ति: युवा सहकार योजना नवस्थापित सहकारी समितियों में नवाचार को बढ़ावा देती है, जबकि स्वयं शक्ति सहकार योजना महिला स्वयं सहायता समूहों सहित निर्धन वर्गों को वित्तीय सेवाएँ प्रदान कर स्थायी आजीविका को सुगम बनाती है, दोनों का कार्यान्वयन और वित्तपोषण राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा किया जाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में युवा सहकार और स्वयं शक्ति सहकार योजनाओं के कार्यान्वयन और लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये योजनाएँ राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा कार्यान्वित और वित्तपोषित हैं, जिनका उद्देश्य नवस्थापित सहकारी समितियों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना और महिला स्वयं सहायता समूहों सहित निर्धन वर्गों को वित्तीय सेवाएँ प्रदान करना है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में सहकारिता आंदोलन का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को एक साथ लाकर उनके हितों की रक्षा करना है।
  • सहकारी समितियाँ (Cooperative Societies) ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेषकर कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन और हथकरघा जैसे क्षेत्रों में।
  • वर्ष 2021 में एक अलग सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य देश में सहकारी आंदोलन को मजबूत करना और ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को साकार करना है।
  • राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) एक सांविधिक संगठन है जो सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए योजनाएँ बनाता है और उन्हें वित्तपोषित करता है।
  • महिला स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups – SHG) ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण और गरीबी उन्मूलन के लिए एक प्रभावी उपकरण साबित हुए हैं।
  • सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहकारी क्षेत्र और स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन प्रदान करती है ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।

युवा सहकार और स्वयं शक्ति सहकार योजनाएँ क्या हैं?

  • ये दोनों योजनाएँ सहकारिता मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा कार्यान्वित और पूर्णतः वित्तपोषित हैं।
  • **युवा सहकार योजना:** इसका मुख्य उद्देश्य नवस्थापित सहकारी समितियों को नए और/या नवोन्मेषी विचारों के साथ प्रोत्साहित करना है। यह योजना युवा उद्यमियों को सहकारी मॉडल के माध्यम से नवाचार करने और आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर प्रदान करती है।
  • **स्वयं शक्ति सहकार योजना:** इस योजना का लक्ष्य निर्धन व्यक्तियों, विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को किफायती, लागत-प्रभावी और विश्वसनीय वित्तीय सेवाओं तक पहुँच प्रदान करना है। इसका उद्देश्य स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने के लिए सामान्य/सामूहिक सामाजिक-आर्थिक कार्यकलापों को अपनाने में उनकी सहायता करना है।
  • NCDC परियोजना के आधार पर वित्तपोषण प्रदान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि वित्तीय सहायता लक्षित उद्देश्यों के लिए प्रभावी ढंग से उपयोग की जाए।
  • NCDC अपने 19 क्षेत्रीय कार्यालयों और 9 उप-कार्यालयों के माध्यम से इन योजनाओं के कार्यान्वयन की सक्रिय रूप से निगरानी करता है।
  • योजनाओं के अंतर्गत ऋण संवितरण की उचित निगरानी के लिए समय-समय पर क्षेत्र दौरों/निरीक्षणों का आयोजन किया जाता है, विशेषकर महिला सहकारी समितियों को समय पर ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु।
  • इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और सहकारी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
युवा सहकार योजना नवस्थापित सहकारी समितियों को नए और/या नवोन्मेषी विचारों के साथ प्रोत्साहित करना।
स्वयं शक्ति सहकार योजना निर्धन, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) शामिल हैं, को किफायती, लागत-प्रभावी और विश्वसनीय वित्तीय सेवाओं तक पहुंच सुगम बनाना।
वित्तपोषण और समर्थन दोनों योजनाएँ राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित और समर्थित हैं।
कार्यान्वयन एजेंसी सहकारिता मंत्रालय के अधीन सांविधिक संगठन, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा कार्यान्वित।
निगरानी तंत्र एनसीडीसी अपने 19 क्षेत्रीय कार्यालयों और 9 उप-कार्यालयों के माध्यम से योजनाओं के कार्यान्वयन की सक्रिय रूप से निगरानी करता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को वित्तीय सेवाओं तक पहुंच प्रदान करके महिला सशक्तिकरण और उनकी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा मिलता है।
  • नवीन विचारों और उद्यमों को समर्थन देकर रोजगार सृजन और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलता है।

सामाजिक महत्व

  • निर्धन और वंचित वर्गों को वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के दायरे में लाकर सामाजिक असमानता को कम करने में सहायता मिलती है।
  • सामूहिक सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर समुदाय आधारित विकास और आत्मनिर्भरता की भावना को बल मिलता है।
  • महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सामाजिक पूंजी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे सामुदायिक एकजुटता बढ़ती है।

शासनिक महत्व

  • सहकारिता मंत्रालय के अधीन एनसीडीसी जैसी सांविधिक संस्थाओं द्वारा योजनाओं का कार्यान्वयन सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
  • क्षेत्रीय कार्यालयों और उप-कार्यालयों के माध्यम से योजनाओं की सक्रिय निगरानी और क्षेत्र दौरे पारदर्शिता और प्रभावी वितरण में सहायक होते हैं।
  • सरकार की ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को साकार करने में ये योजनाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

चुनौतियाँ

1. जागरूकता और पहुंच का अभाव

  • योजनाओं के लाभों और आवेदन प्रक्रिया के बारे में लक्षित लाभार्थियों, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में, पर्याप्त जानकारी का अभाव हो सकता है।
  • हरियाणा के हिसार लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कोई प्रस्ताव प्राप्त न होना इस बात का संकेत है कि जागरूकता अभी भी एक चुनौती है।

2. प्रस्ताव तैयार करने की क्षमता

  • छोटी सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों में परियोजना प्रस्ताव (Project Proposal) तैयार करने की तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता का अभाव हो सकता है, जिससे वे वित्तपोषण के लिए आवेदन नहीं कर पाते।
  • जटिल आवेदन प्रक्रियाएँ या दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकताएँ भी बाधा बन सकती हैं।

3. वित्तीय समावेशन की चुनौतियाँ

  • निर्धन और वंचित समूहों के लिए विश्वसनीय वित्तीय सेवाओं तक पहुंच अभी भी एक चुनौती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ बैंकिंग और वित्तीय बुनियादी ढाँचा कमजोर है।
  • ऋण के लिए आवश्यक संपार्श्विक (Collateral) या अन्य शर्तों को पूरा करने में कठिनाई हो सकती है।

4. निगरानी और मूल्यांकन की प्रभावशीलता

  • योजनाओं की निगरानी के लिए क्षेत्रीय दौरे और निरीक्षण महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता और नियमितता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
  • ऋण संवितरण के बाद उसके उपयोग और प्रभाव का गुणात्मक मूल्यांकन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
योजनाओं की कम पहुंच हरियाणा के हिसार जैसे क्षेत्रों से प्रस्तावों की अनुपस्थिति लक्षित लाभार्थियों तक पहुँचने में कमी दर्शाती है।
क्षमता निर्माण का अभाव सहकारी समितियों और एसएचजी में परियोजना प्रस्ताव तैयार करने की विशेषज्ञता की कमी।
जागरूकता की कमी योजनाओं के लाभों और आवेदन प्रक्रिया के बारे में पर्याप्त जानकारी का प्रसार न होना।
वित्तीय समावेशन की बाधाएँ वंचित समूहों के लिए ऋण तक पहुँचने में दस्तावेज़ीकरण या संपार्श्विक संबंधी समस्याएँ।
निगरानी की गुणवत्ता क्षेत्रीय दौरों और निरीक्षणों की प्रभावशीलता और उनके परिणामों का वास्तविक मूल्यांकन।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • युवा सहकार योजना
  • स्वयं शक्ति सहकार योजना

आगे की राह

  • योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाए जाएँ, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए परियोजना प्रस्ताव तैयार करने और आवेदन प्रक्रिया को समझने हेतु क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँ।
  • आवेदन प्रक्रिया को सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाए, जिसमें स्थानीय भाषाओं का उपयोग और डिजिटल माध्यमों का अधिकतम उपयोग शामिल हो।
  • एनसीडीसी के क्षेत्रीय कार्यालयों और उप-कार्यालयों को अधिक स्वायत्तता और संसाधन प्रदान किए जाएँ ताकि वे स्थानीय स्तर पर बेहतर सहायता प्रदान कर सकें।
  • महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए आउटरीच कार्यक्रम शुरू किए जाएँ ताकि उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।
  • ऋण संवितरण के बाद परियोजनाओं के प्रभाव का नियमित और गुणात्मक मूल्यांकन किया जाए ताकि योजनाओं की प्रभावशीलता का आकलन हो सके।
  • स्थानीय प्रशासन और पंचायती राज संस्थाओं को योजनाओं के प्रचार और लाभार्थियों की पहचान में शामिल किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

युवा सहकार योजना · स्वयं शक्ति सहकार योजना · राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) · सहकारिता मंत्रालय · सहकारी समितियाँ · महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) · वित्तीय समावेशन · नवोन्मेषी विचार · स्थायी आजीविका · सामूहिक सामाजिक-आर्थिक कार्यकलाप

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(c)’, ‘note’: ‘सहकारी समितियाँ बनाने का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43B’, ‘note’: ‘सहकारी समितियों के संवर्धन का राज्य दायित्व’}

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा सहकारी समितियों को प्रोत्साहन  →  युवा सहकार और स्वयं शक्ति सहकार योजनाओं का शुभारंभ  →  एनसीडीसी द्वारा योजनाओं का वित्तपोषण और कार्यान्वयन  →  नवस्थापित सहकारी समितियों और महिला एसएचजी को वित्तीय सहायता  →  आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. युवा सहकार और स्वयं शक्ति सहकार योजनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये योजनाएं सहकारिता मंत्रालय द्वारा सीधे वित्तपोषित और कार्यान्वित की जाती हैं।
2. युवा सहकार योजना का उद्देश्य नवस्थापित सहकारी समितियों को नए और नवोन्मेषी विचारों के साथ प्रोत्साहित करना है।
3. स्वयं शक्ति सहकार योजना महिला स्वयं सहायता समूहों सहित निर्धन लोगों के लिए वित्तीय सेवाओं तक पहुँच को सुगम बनाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि ये योजनाएं राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) द्वारा वित्तपोषित और समर्थित हैं, जो सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक संगठन है। कथन 2 और 3 सही हैं, जो क्रमशः युवा सहकार और स्वयं शक्ति सहकार योजनाओं के उद्देश्यों को सही ढंग से बताते हैं।

Q2. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक संगठन है।
2. यह युवा सहकार और स्वयं शक्ति सहकार योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करता है।
3. यह केवल कृषि क्षेत्र में सहकारी समितियों को वित्तपोषण प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। NCDC सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक सांविधिक संगठन है और युवा सहकार तथा स्वयं शक्ति सहकार योजनाओं के कार्यान्वयन की सक्रिय रूप से निगरानी करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि NCDC विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी समितियों को वित्तपोषण प्रदान करता है, न कि केवल कृषि क्षेत्र में।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में सहकारी आंदोलन को बढ़ावा देने में ‘युवा सहकार’ और ‘स्वयं शक्ति सहकार’ जैसी योजनाओं की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। ये योजनाएँ किस प्रकार सामाजिक-आर्थिक समावेशन और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने में सहायक हो सकती हैं? (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, युवा सहकार और स्वयं शक्ति सहकार योजनाओं के उद्देश्यों और कार्यान्वयन तंत्र का संक्षेप में उल्लेख करें। फिर, इन योजनाओं के माध्यम से सहकारी आंदोलन को मिलने वाले प्रोत्साहन, जैसे नवोन्मेषी विचारों को बढ़ावा देना और वित्तीय सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना, पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, इन योजनाओं के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक समावेशन (विशेषकर महिला स्वयं सहायता समूहों के संदर्भ में) और स्थायी आजीविका के निर्माण में उनकी क्षमता का विश्लेषण करें। चुनौतियों और सुधार के सुझावों के साथ निष्कर्ष निकालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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