27 Jul यूपीएससी के लिए ‘कारपोरेट मित्र योजना’: अरुणाचल में युवाओं के लिए अवसर
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, विकास प्रक्रियाएँ और विकास उद्योग | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, योजना, संसाधन जुटाना, संवृद्धि और विकास
- Prelims: कॉर्पोरेट मित्र योजना, भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA), कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), विकसित भारत@2047, पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER)
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में एमएसएमई की भूमिका और उन्हें सशक्त बनाने के उपाय, पूर्वोत्तर क्षेत्र का समावेशी विकास: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: कॉर्पोरेट मित्र योजना एमएसएमई को अनुपालन और व्यावसायिक सहायता प्रदान करके सशक्त बनाती है, साथ ही युवा स्नातकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करती है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र में।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA), शिलॉन्ग ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के युवाओं, छात्रों, एमएसएमई, पेशेवरों और उद्यमों के बीच ‘कॉर्पोरेट मित्र योजना’ के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक वेबिनार का आयोजन किया। यह वेबिनार पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) के लिए ‘कॉर्पोरेट मित्र योजना’ जागरूकता अभियान का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के एमएसएमई को ‘विकसित भारत@2047’ के विजन में अपनी भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाना है।
पृष्ठभूमि
- भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है, जो रोजगार सृजन, निर्यात और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में अहम भूमिका निभाता है।
- हालांकि, एमएसएमई को अक्सर नियामक अनुपालन, वित्तीय सहायता तक पहुंच और विशेषज्ञ व्यावसायिक सलाह प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- इन चुनौतियों के कारण एमएसएमई की वृद्धि और विस्तार बाधित होता है, जिससे उनकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता।
- सरकार ने ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने की आवश्यकता को पहचाना है।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र में, भौगोलिक बाधाओं और सीमित बुनियादी ढांचे के कारण एमएसएमई को विशेष चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे इस क्षेत्र में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।
- कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) ने इन चुनौतियों का समाधान करने और एमएसएमई के लिए एक सहायक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बनाने के उद्देश्य से ‘कॉर्पोरेट मित्र योजना’ की शुरुआत की है।
कॉर्पोरेट मित्र योजना क्या है?
- यह कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की एक पहल है जिसका उद्देश्य एमएसएमई को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण अनुपालन (Compliance) तथा व्यावसायिक सहायता सेवाएं प्रदान करना है।
- योजना ‘कॉर्पोरेट मित्रों’ नामक योग्य, मान्यता प्राप्त और भरोसेमंद पैरा-पेशेवरों का एक समूह तैयार करती है, जो एमएसएमई को विभिन्न गैर-मुख्य व्यावसायिक पहलुओं में सहायता प्रदान करते हैं।
- इन सेवाओं में नियामक, अनुपालन, वित्तीय, कराधान, लेखांकन और शासन से जुड़ी आवश्यकताएं शामिल हैं, जिससे एमएसएमई अपने मुख्य व्यवसाय और नवाचार पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
- यह योजना युवा स्नातकों को उद्योग-प्रासंगिक जानकारी और व्यावहारिक कौशल से प्रशिक्षित करके रोजगार के अवसर भी पैदा करती है।
- प्रारंभिक चरण में पूरे भारत में 2000 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है, जिसमें से 200 प्रतिभागी विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र से होंगे।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए पाठ्यक्रम शुल्क में 50% की छूट प्रदान की जाएगी, ताकि इस क्षेत्र में भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके।
- भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA), शिलॉन्ग को पूर्वोत्तर क्षेत्र में योजना के कार्यान्वयन और विस्तार के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है।
- योजना का लक्ष्य एक औपचारिक, वित्तीय रूप से सुदृढ़ और समृद्ध एमएसएमई क्षेत्र के विजन को साकार करना है, जो ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा दे।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| लक्ष्य समूह | टियर-2 और टियर-3 शहरों के MSME तथा युवा स्नातक। |
| मुख्य उद्देश्य | MSME को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण अनुपालन तथा व्यावसायिक सहायता सेवाएँ प्रदान करना। |
| पैरा-पेशेवर | योग्य, मान्यता प्राप्त और भरोसेमंद ‘कॉर्पोरेट मित्र’ तैयार करना। |
| प्रशिक्षण | युवा स्नातकों को उद्योग-प्रासंगिक जानकारी और व्यावहारिक कौशल से प्रशिक्षित करना। |
| विशेष प्रावधान | पूर्वोत्तर क्षेत्र के उम्मीदवारों के लिए शुल्क में 50% की छूट। |
| नोडल एजेंसी | भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA), शिलांग, पूर्वोत्तर क्षेत्र में योजना के क्रियान्वयन के लिए। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- MSME क्षेत्र को सशक्त बनाना: यह योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को नियामक, अनुपालन, वित्तीय, कराधान, लेखांकन और शासन से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए सस्ती एवं सुलभ पेशेवर सहायता प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाएगी।
- रोजगार सृजन: ‘कॉर्पोरेट मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित पैरा-पेशेवरों का एक समूह तैयार करके, यह पहल विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देगी।
- औपचारिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: MSME को औपचारिक रूप से सुदृढ़ और समृद्ध बनाने के विजन को साकार करने में मदद मिलेगी, जिससे अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण बढ़ेगा।
- व्यवसाय करने में सुगमता (Ease of Doing Business): MSME को नियामक आवश्यकताओं को आसानी से पूरा करने में सहायता मिलेगी, जिससे वे नवाचार, विस्तार और विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
सामाजिक महत्व
- युवा सशक्तिकरण: युवा स्नातकों को उद्योग-प्रासंगिक जानकारी और व्यावहारिक कौशल से प्रशिक्षित करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
- क्षेत्रीय विकास: पूर्वोत्तर क्षेत्र जैसे विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने से क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी।
शासनिक महत्व
- नियामक अनुपालन में सुधार: MSME के लिए नियामक और सचिवीय अनुपालन को आसान बनाकर समग्र अनुपालन स्तर में सुधार होगा।
- विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में योगदान: यह योजना MSME को ‘विकसित भारत@2047’ के बड़े विजन में अपनी भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाकर राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों में योगदान देगी।
चुनौतियाँ
1. MSME के समक्ष अनुपालन का बोझ
- MSME अक्सर नियामक और सचिवीय अनुपालन की जटिलताओं तथा बढ़ते बोझ का सामना करते हैं।
- उन्हें किफायती व्यावसायिक परामर्श और सहायता प्रदान करने वाले पेशेवरों की कमी होती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय।
2. कुशल पैरा-पेशेवरों की कमी
- विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में, MSME को सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित और योग्य पैरा-पेशेवरों की उपलब्धता कम है।
- युवा स्नातकों के पास अक्सर उद्योग-प्रासंगिक व्यावहारिक कौशल की कमी होती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन: मानव संसाधनों का विकास।
3. क्षेत्रीय असमानताएँ
- पूर्वोत्तर क्षेत्र जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में व्यावसायिक सहायता सेवाओं और रोजगार के अवसरों की कमी अधिक गंभीर है।
- इन क्षेत्रों में MSME को विकास और विस्तार में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: भूगोल: भारत में क्षेत्रीय विकास।
4. जागरूकता और पहुँच का अभाव
- संभावित लाभार्थियों, विशेषकर MSME और युवाओं के बीच ऐसी योजनाओं के बारे में जागरूकता की कमी हो सकती है।
- दूरदराज के क्षेत्रों में योजना की पहुँच सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप।
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| नियामक अनुपालन | MSME के लिए जटिल और महंगा। |
| पेशेवर सहायता | किफायती और सुलभ सेवाओं की कमी। |
| युवा रोजगार | उद्योग-प्रासंगिक कौशल की कमी के कारण बेरोजगारी। |
| क्षेत्रीय विकास | पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्रों में MSME के विकास में बाधाएँ। |
| जागरूकता | योजना के लाभों के बारे में जानकारी का अभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- कॉर्पोरेट मित्र योजना
आगे की राह
- योजना के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, विशेषकर टियर-2, टियर-3 शहरों और पूर्वोत्तर क्षेत्र में।
- प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को नियमित रूप से अद्यतन किया जाए ताकि यह उद्योग की बदलती आवश्यकताओं और नियामक परिवर्तनों के अनुरूप रहे।
- प्रशिक्षित ‘कॉर्पोरेट मित्रों’ के लिए एक मजबूत नेटवर्क और मंच विकसित किया जाए, जिससे वे MSME को प्रभावी ढंग से सेवाएँ प्रदान कर सकें।
- योजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन किया जाए, जिसमें MSME के अनुपालन स्तर में सुधार और रोजगार सृजन पर इसके प्रभाव का आकलन शामिल हो।
- राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, उद्योग निकायों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय को और मजबूत किया जाए ताकि योजना की पहुँच और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके।
- MSME को ‘कॉर्पोरेट मित्रों’ की सेवाओं का लाभ उठाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन या सब्सिडी प्रदान करने पर विचार किया जा सकता है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए ताकि पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके और प्रशिक्षण सामग्री को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचाया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कारपोरेट मित्र योजना · सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) · विकसित भारत@2047 · भारतीय कारपोरेट कार्य संस्थान (IICA) · पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) · नियामकीय अनुपालन · व्यावसायिक सहायता सेवाएँ · रोजगार सृजन · पैरा-पेशेवर · ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस
अवधारणा प्रवाह
MSME को नियामक अनुपालन में कठिनाई और पेशेवर सहायता की कमी → युवा स्नातकों में उद्योग-प्रासंगिक कौशल और रोजगार के अवसरों का अभाव → ‘कॉर्पोरेट मित्र योजना’ का शुभारंभ (IICA के नेतृत्व में) → युवाओं को ‘कॉर्पोरेट मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित करना (नियामक, वित्तीय, लेखांकन सहायता) → प्रशिक्षित ‘कॉर्पोरेट मित्रों’ द्वारा MSME को सस्ती और सुलभ सहायता प्रदान करना → MSME का सशक्तिकरण, व्यवसाय करने में सुगमता और रोजगार सृजन → औपचारिक, वित्तीय रूप से सुदृढ़ MSME क्षेत्र का विकास और ‘विकसित भारत@2047’ में योगदान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. कारपोरेट मित्र योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का उद्देश्य मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों के MSME को सशक्त बनाना है।
2. यह योजना केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए व्यावसायिक सहायता सेवाएँ प्रदान करती है।
3. भारतीय कारपोरेट कार्य संस्थान (IICA), शिलांग को पूर्वोत्तर क्षेत्र में इस योजना के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के MSME को सशक्त बनाना है। कथन 2 गलत है क्योंकि योजना का उद्देश्य MSME को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण कम्प्लायंस तथा व्यावसायिक सहायता सेवाएँ प्रदान करना है, न कि केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए। कथन 3 सही है क्योंकि IICA, शिलांग को पूर्वोत्तर क्षेत्र में योजना के क्रियान्वयन एवं विस्तार के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है।
Q2. कारपोरेट मित्र योजना के तहत ‘कारपोरेट मित्रों’ की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘कारपोरेट मित्र’ MSME को नियामक, अनुपालन, वित्तीय और कराधान संबंधी सहायता प्रदान करेंगे।
2. ‘कारपोरेट मित्र’ युवा स्नातकों को उद्योग-प्रासंगिक जानकारी और व्यावहारिक कौशल से प्रशिक्षित करेंगे।
3. इस योजना के तहत ‘कारपोरेट मित्र’ केवल बड़े निगमों को सलाह देंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि ‘कारपोरेट मित्र’ MSME को नियामक, अनुपालन, वित्तीय, कराधान, लेखांकन और शासन से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए सहायता प्रदान करेंगे। कथन 2 गलत है क्योंकि ‘कारपोरेट मित्र’ स्वयं प्रशिक्षित पैरा-पेशेवर होंगे, न कि वे युवा स्नातकों को प्रशिक्षित करेंगे। कथन 3 गलत है क्योंकि ‘कारपोरेट मित्र’ मुख्य रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सहायता प्रदान करेंगे।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कारपोरेट मित्र योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए एक मजबूत सहायक इकोसिस्टम बनाने में किस प्रकार सहायक है? ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में यह योजना कैसे योगदान दे सकती है? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, कारपोरेट मित्र योजना के मुख्य उद्देश्यों और MSME को प्रदान की जाने वाली विभिन्न प्रकार की सहायता सेवाओं का उल्लेख करें, जैसे नियामक अनुपालन, वित्तीय सहायता, कराधान और लेखांकन। दूसरे भाग में, ‘विकसित भारत@2047’ के व्यापक दृष्टिकोण के साथ योजना को जोड़ें, यह बताते हुए कि कैसे MSME के सशक्तिकरण से आर्थिक संवृद्धि, रोजगार सृजन और ‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’ में सुधार होगा, जो अंततः राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र के संदर्भ में इसके महत्व को भी संक्षेप में शामिल करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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