यूपीएससी के लिए प्रमुख: इंडिया-एआई मिशन से स्वदेशी तकनीक की ताकत बढ़ाने की सरकार की योजना

सरकार ने 'इंडिया-एआई मिशन' और सेमीकंडक्टर पहलों के माध्यम से स्वदेशी एआई अवसंरचना का किया विस्तार — concept mind map

यूपीएससी के लिए प्रमुख: इंडिया-एआई मिशन से स्वदेशी तकनीक की ताकत बढ़ाने की सरकार की योजना

✎ इंडिया-एआई मिशन और सेमीकंडक्टर पहलें भारत को एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने तथा समावेशी तकनीकी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
  • Prelims: इंडिया-एआई मिशन, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, फाउंडेशन मॉडल, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन (NM-ICPS), आत्मनिर्भर भारत
  • Essay: भारत में प्रौद्योगिकी-आधारित विकास और आत्मनिर्भरता का मार्ग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अवसर, चुनौतियाँ और समावेशी विकास में भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: इंडिया-एआई मिशन और सेमीकंडक्टर पहलें भारत को एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने तथा समावेशी तकनीकी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

सरकार ने ‘इंडिया-एआई मिशन’ और ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ जैसी पहलों के माध्यम से स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अवसंरचना के विस्तार की घोषणा की है। इसका उद्देश्य भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करना, आर्थिक और रोजगार के अवसर पैदा करना तथा एआई मूल्य श्रृंखला में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। यह घोषणा सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कंप्यूटिंग अवसंरचना, फाउंडेशनल मॉडल और उन्नत अनुसंधान इकोसिस्टम में सीमित घरेलू क्षमताओं से जुड़े जोखिमों को कम करने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती है।

पृष्ठभूमि

  • प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण प्रौद्योगिकी के उपयोग को सबके लिए सुलभ बनाने और भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करने पर केंद्रित है।
  • सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कंप्यूटिंग अवसंरचना, फाउंडेशनल मॉडल और उन्नत अनुसंधान इकोसिस्टम में घरेलू क्षमताओं की कमी के प्रति सचेत है।
  • एआई मूल्य श्रृंखला में स्वदेशी प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए ‘इंडिया-एआई’ और ‘इंडिया सेमीकंडक्टर’ मिशनों के तहत एक बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है।
  • ‘इंडिया-एआई मिशन’ को 7 मार्च 2024 को 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंज़ूरी दी गई, जिसका लक्ष्य एक मज़बूत और समावेशी एआई इकोसिस्टम बनाना है।
  • ‘इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन’ (NM-ICPS) 3,660 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • आत्मनिर्भर भारत और भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से सेमीकंडक्टर सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विकास के लिए नीतिगत पहलें की गई हैं।

इंडिया-एआई मिशन और संबंधित पहलें क्या हैं?

  • इंडिया-एआई मिशन: यह भारत के विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक मज़बूत और समावेशी एआई इकोसिस्टम बनाने के लिए पाँच वर्षों में 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट के साथ अनुमोदित एक पहल है।
  • स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल: 506 आवेदनों में से 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल प्रस्तावों की पहचान की गई है, जिनमें 12 लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल (LMM) और 8 स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (SLM) शामिल हैं। इनके बौद्धिक संपदा अधिकार आवेदकों के पास रहेंगे।
  • प्रमुख आउटपुट: इसमें ‘सर्वम’ एआई के 30 बिलियन और 105 बिलियन पैरामीटर मॉडल, ‘जीननि.एआई’ का स्पीच-टू-स्पीच मॉडल, ‘भारतजेन’ के बहुभाषी फाउंडेशन मॉडल (परम 2-17 बी, पत्रम- 7 बी और श्रुतम- 2) और ‘अवतार’ एआई का वीडियो जेनरेशन मॉडल शामिल हैं।
  • एआई कंप्यूट क्षमता: चार राउंड में 15 कंप्यूट सेवा प्रदाताओं को शामिल किया गया है। सब्सिडी वाले कंप्यूट सपोर्ट के लिए 237 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और 93.18 लाख GPU घंटे मंज़ूर किए गए हैं। NIC डेटा सेंटर, शास्त्री पार्क, दिल्ली में 1.1 ईएफएलओपीएस की हाई-परफॉर्मेंस एआई कंप्यूट सिस्टम के लिए खरीद का आदेश जारी किया गया है।
  • एप्लिकेशन विकास और उत्कृष्टता केंद्र: 11 राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन/नवाचार चुनौतियाँ शुरू की गई हैं, 62 एआई प्रोटोटाइप विकसित किए गए हैं, और सार्वजनिक क्षेत्र में 20 एआई समाधान तैनात किए गए हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 58 एआई उत्कृष्टता केंद्रों की मंजूरी दी गई है, जिनमें से 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 22 केंद्र शुरू किए जा चुके हैं।
  • सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई: पूर्वाग्रह उन्मूलन, मशीन अनलर्निंग, गोपनीयता-संरक्षित एआई, एल्गोरिदम ऑडिटिंग और व्याख्यात्मकता का समाधान करने वाली 13 परियोजनाओं का चयन किया गया है।
  • इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन (NM-ICPS): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 3,660 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ कार्यान्वित, यह मिशन देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (TIH) स्थापित करता है, जो एआई, रोबोटिक्स, IoT, साइबर सुरक्षा आदि में विशेषज्ञता रखते हैं।
  • घरेलू सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग: सरकार ने सेमीकंडक्टर सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विकास के लिए संरचित और लक्षित नीतिगत पहलों को अपनाया है, जो आत्मनिर्भर भारत और भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने के दृष्टिकोण से प्रेरित है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करने और बौद्धिक संपदा अधिकारों को देश के भीतर बनाए रखने में सहायक।
एआई कंप्यूट क्षमता का विस्तार उच्च-प्रदर्शन एआई कंप्यूट सिस्टम की खरीद और सब्सिडी वाले कंप्यूट सपोर्ट से अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा।
एप्लिकेशन विकास और हैकाथॉन सार्वजनिक क्षेत्र के लिए एआई समाधान विकसित करना और नवाचार को प्रोत्साहित करना।
उत्कृष्टता केंद्र (CoE) राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एआई इकोसिस्टम को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर कौशल विकास।
सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई पूर्वाग्रह उन्मूलन, गोपनीयता-संरक्षण और एल्गोरिदम ऑडिटिंग जैसी महत्वपूर्ण नैतिक चिंताओं का समाधान।
सेमीकंडक्टर विनिर्माण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भरता और वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं का विकास आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा देगा और नए रोजगार के अवसर सृजित करेगा।
  • स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल और कंप्यूट अवसंरचना से भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता (Technological Self-Reliance) बढ़ेगी, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।

सामरिक महत्व

  • एआई और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी।
  • सुरक्षित और विश्वसनीय एआई पर ध्यान देने से डेटा गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

सामाजिक महत्व

  • भारत-केंद्रित एआई समाधानों का विकास कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सामाजिक चुनौतियों का समाधान करेगा।
  • एआई उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना से विभिन्न राज्यों में कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

प्रौद्योगिकी महत्व

  • लार्ज मल्टीमॉडल मॉडल (LMM) और स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (SLM) का विकास अत्याधुनिक एआई अनुसंधान को गति देगा।
  • सेमीकंडक्टर विनिर्माण में निवेश से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का एक वैश्विक केंद्र बनेगा, जो अन्य उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. कुशल मानव संसाधन की कमी

  • एआई और सेमीकंडक्टर जैसे उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञता वाले पेशेवरों की उपलब्धता एक चुनौती है।
  • उच्च-स्तरीय अनुसंधान और विकास के लिए आवश्यक विशिष्ट कौशल सेट का अभाव।

2. उच्च पूंजी निवेश

  • सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाइयों और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूट अवसंरचना की स्थापना के लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है।
  • दीर्घकालिक वित्तीय सहायता और निवेश आकर्षित करना एक चुनौती है।

3. वैश्विक प्रतिस्पर्धा

  • एआई और सेमीकंडक्टर उद्योग में वैश्विक स्तर पर तीव्र प्रतिस्पर्धा है, जिसमें स्थापित खिलाड़ियों का प्रभुत्व है।
  • नवीनतम प्रौद्योगिकियों तक पहुंच और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकरण सुनिश्चित करना।

4. डेटा गोपनीयता और नैतिक चिंताएँ

  • एआई के विकास और उपयोग से जुड़ी डेटा गोपनीयता, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और नैतिक जवाबदेही की चिंताएँ।
  • सुरक्षित और विश्वसनीय एआई के लिए मजबूत नियामक ढाँचे का अभाव।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
सीमित घरेलू क्षमताएँ एआई मूल्य श्रृंखला और सेमीकंडक्टर विनिर्माण में स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास का अभाव।
उच्च तकनीकी निर्भरता उन्नत एआई मॉडल, कंप्यूटिंग अवसंरचना और सेमीकंडक्टर घटकों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता।
बौद्धिक संपदा अधिकार स्वदेशी रूप से विकसित मॉडलों के बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करना।
एआई का नैतिक उपयोग पूर्वाग्रह, गोपनीयता और एल्गोरिथम की व्याख्यात्मकता जैसी नैतिक चुनौतियों का समाधान।
अनुसंधान एवं विकास अंतराल उन्नत एआई और सेमीकंडक्टर अनुसंधान में वैश्विक मानकों के साथ तालमेल बिठाना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • इंडिया-एआई मिशन (India-AI Mission)
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission)
  • इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन (National Mission on Interdisciplinary Cyber-Physical Systems – NM-ICPS)

आगे की राह

  • एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) को मजबूत करना।
  • उच्च शिक्षा संस्थानों में एआई और सेमीकंडक्टर डिजाइन एवं विनिर्माण से संबंधित विशिष्ट पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना।
  • वैश्विक एआई और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देना।
  • डेटा गोपनीयता, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और एआई के नैतिक उपयोग से संबंधित एक मजबूत नियामक और कानूनी ढाँचा विकसित करना।
  • छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) तथा स्टार्टअप्स को एआई और सेमीकंडक्टर नवाचार में भाग लेने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और मेंटरशिप प्रदान करना।
  • एआई कंप्यूट अवसंरचना के लिए ऊर्जा-कुशल समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना और हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाना।
  • विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा) में एआई समाधानों के व्यापक अनुप्रयोग के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समन्वय तंत्र स्थापित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

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अवधारणा प्रवाह

सरकार की एआई और सेमीकंडक्टर पहलें  →  स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल और कंप्यूट अवसंरचना का विकास  →  तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा  →  आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन  →  भारत का वैश्विक प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘इंडिया-एआई मिशन’ का उद्देश्य भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करना और सभी भारतीयों के लिए आर्थिक अवसर पैदा करना है।
2. इस मिशन के तहत, स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल के बौद्धिक संपदा अधिकार आवेदकों के पास ही रहेंगे।
3. ‘इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन’ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा लागू किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि ‘इंडिया-एआई मिशन’ का उद्देश्य भारत-केंद्रित चुनौतियों का समाधान करना और आर्थिक एवं रोजगार के अवसर पैदा करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि मिशन के तहत विकसित स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल के बौद्धिक संपदा अधिकार आवेदकों के पास ही रहेंगे। कथन 3 भी सही है क्योंकि ‘इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन’ को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा लागू किया जा रहा है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘इंडिया-एआई मिशन’ के प्रमुख घटकों में शामिल है/हैं?
1. स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल का विकास
2. एआई कंप्यूट क्षमता का विस्तार
3. एआई उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना
4. सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई पर अनुसंधान
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2, 3 और 4
  3. केवल 1, 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी घटक ‘इंडिया-एआई मिशन’ के प्रमुख भाग हैं। इसमें स्वदेशी मॉडल का विकास, कंप्यूट क्षमता का विस्तार, एप्लिकेशन विकास, उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई पर अनुसंधान शामिल हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा अपनाए गए बहु-आयामी दृष्टिकोण का विश्लेषण कीजिए। इस संदर्भ में, ‘इंडिया-एआई मिशन’ और ‘इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन’ की भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में भारत की एआई रणनीति और प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता के महत्व को संक्षेप में बताएं। मुख्य भाग में, सरकार के बहु-आयामी दृष्टिकोण को विस्तार से समझाएं, जिसमें ‘इंडिया-एआई मिशन’ के विभिन्न घटक (स्वदेशी मॉडल, कंप्यूट क्षमता, एप्लिकेशन विकास, उत्कृष्टता केंद्र, सुरक्षित एआई) और ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ की भूमिका शामिल हो। ‘इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स पर राष्ट्रीय मिशन’ (NM-ICPS) के तहत स्थापित प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों (TIH) और मानव संसाधन विकास के महत्व पर विशेष ध्यान दें। निष्कर्ष में, इन पहलों के माध्यम से भारत की प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनने की क्षमता पर प्रकाश डालें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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