19 Sep यूपीएससी तैयारी: बेलगावी में सहकारी सोसाइटी के नए मुख्यालय का उद्घाटन, जानें पूरा अपडेट
✎ सहकारिता क्षेत्र, 'सहकार से समृद्धि' के विजन के साथ, भारत के समावेशी विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार
- Prelims: सहकारिता मंत्रालय, बहु-राज्य सहकारी समितियाँ, प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS), शहरी सहकारी बैंक, सहकार से समृद्धि, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय
- Essay: सहकारिता: समावेशी विकास का आधार, भारत के ग्रामीण और शहरी विकास में सहकारिता की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: सहकारिता क्षेत्र, ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के साथ, भारत के समावेशी विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने कर्नाटक के बेलगावी में श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के नए प्रधान कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘सहकार से समृद्धि’ के प्रधानमंत्री के विजन और सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों पर प्रकाश डाला, जिसमें नए मंत्रालय का गठन, PACS का कम्प्यूटरीकरण और नई राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों की स्थापना शामिल है।
पृष्ठभूमि
- भारत में सहकारिता का एक लंबा इतिहास रहा है, जो मुख्य रूप से कृषि, डेयरी और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है।
- जुलाई 2021 में, केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को एक नई दिशा देने और इसे मजबूत करने के उद्देश्य से एक अलग सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) का गठन किया।
- मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि’ (Prosperity through Cooperation) के विजन को साकार करना और सहकारी आंदोलन को जमीनी स्तर तक मजबूत करना है।
- देश में वर्तमान में 8.5 लाख से अधिक सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 32 करोड़ सदस्य हैं, जो देश की लगभग आधी आबादी को किसी न किसी रूप में सहकारिता से जोड़ते हैं।
- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र में 160 से अधिक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए गए हैं।
- प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कम्प्यूटरीकरण के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये का कार्य शुरू किया गया है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता आएगी।
सहकारिता क्या है?
- सहकारिता एक ऐसा संगठन है जहाँ व्यक्ति स्वेच्छा से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक साथ आते हैं।
- यह ‘प्रत्येक के लिए, सभी के लिए’ (Each for all, all for each) के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ सदस्य मिलकर काम करते हैं और लाभ साझा करते हैं।
- भारत में सहकारी समितियाँ मुख्य रूप से कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, हथकरघा, आवास और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
- सहकारी समितियाँ सदस्यों के लोकतांत्रिक नियंत्रण में कार्य करती हैं, जहाँ प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता है, चाहे उसकी शेयरधारिता कितनी भी हो।
- बहु-राज्य सहकारी समितियाँ (Multi-State Cooperative Societies) वे समितियाँ हैं जिनका कार्यक्षेत्र एक से अधिक राज्यों में फैला होता है और वे बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत होती हैं।
- ‘त्रिभुवन’ सहकारी विश्वविद्यालय (Tribhuvan Cooperative University) सहकारिता क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
- शहरी सहकारी बैंकों (Urban Cooperative Banks) के लिए अम्ब्रेला ऑर्गनाइजेशन और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ‘सहकार सारथी’ प्लेटफॉर्म जैसे कदम सहकारी बैंकिंग को मजबूत कर रहे हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना | सहकारिता क्षेत्र को व्यापकता और महत्व प्रदान करना, निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाना। |
| PACS का कम्प्यूटरीकरण | लगभग 80 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना। |
| तीन राष्ट्रीय स्तर की मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियों का गठन | लगभग 70 हजार सहकारी संस्थाओं को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना। |
| ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ‘सहकार सारथी’ प्लेटफॉर्म | सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करना और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना। |
| त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय | सहकारिता क्षेत्र के लिए आवश्यक प्रशिक्षित मानव संसाधन (लगभग 17 लाख) तैयार करना। |
| नए उपक्रम (श्वेत क्रांति, सहकार बीमा, भारत टैक्सी) | सहकारिता के दायरे का विस्तार करना और नए व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सहकारिता क्षेत्र देश की लगभग आधी आबादी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जोड़ता है, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
- प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कम्प्यूटरीकरण से कृषि ऋण वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता आती है, जिससे किसानों को समय पर और सुलभ ऋण प्राप्त होता है।
- शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों को मजबूत करने से वित्तीय समावेशन बढ़ता है और छोटे व्यवसायों तथा व्यक्तियों को ऋण तक पहुंच मिलती है।
सामाजिक महत्व
- सहकारी समितियां सदस्यों के बीच आत्मनिर्भरता और सामूहिक भावना को बढ़ावा देती हैं, जिससे सामाजिक एकजुटता मजबूत होती है।
- महिलाओं और कमजोर वर्गों को सहकारी समितियों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिलता है, जिससे उनका सशक्तिकरण होता है।
- सहकारिता क्षेत्र रोजगार के अवसर पैदा करता है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जिससे पलायन कम होता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
शासन और नीतिगत महत्व
- स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना ने इस क्षेत्र को एक विशिष्ट पहचान और नीतिगत फोकस प्रदान किया है, जिससे इसके विकास के लिए प्रभावी नीतियां बनाई जा रही हैं।
- ‘सहकार से समृद्धि’ का दृष्टिकोण सहकारी आंदोलन को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित करता है, जिससे इसके समग्र विकास को गति मिलती है।
- सहकारी संस्थाओं के कम्प्यूटरीकरण और आधुनिकीकरण से शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है, जिससे भ्रष्टाचार कम होता है।
चुनौतियाँ
1. वित्तीय और प्रबंधकीय चुनौतियाँ
- कई सहकारी समितियों को पूंजी की कमी, खराब ऋण प्रबंधन और पेशेवर प्रबंधन की कमी का सामना करना पड़ता है।
- कुछ सहकारी बैंकों में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) का उच्च स्तर उनकी वित्तीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था: नियोजन, संसाधन, वृद्धि
2. राजनीतिक हस्तक्षेप
- सहकारी समितियों के चुनावों और कामकाज में अक्सर राजनीतिक हस्तक्षेप देखा जाता है, जिससे उनकी स्वायत्तता और दक्षता प्रभावित होती है।
- यह हस्तक्षेप समितियों के पेशेवर संचालन में बाधा डालता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय राजव्यवस्था: संघ और राज्य संबंध
3. जागरूकता और शिक्षा का अभाव
- सहकारिता के सिद्धांतों और लाभों के बारे में सदस्यों और संभावित सदस्यों के बीच जागरूकता की कमी है।
- प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए ‘त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय’ जैसी पहल महत्वपूर्ण हैं।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: मानव संसाधन का विकास
4. प्रौद्योगिकी का सीमित उपयोग
- कई छोटी सहकारी समितियां अभी भी पुरानी कार्यप्रणालियों का उपयोग करती हैं, जिससे उनकी दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता कम होती है।
- कम्प्यूटरीकरण की प्रक्रिया धीमी हो सकती है और सभी समितियों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: सूचना प्रौद्योगिकी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पूंजी और ऋण प्रबंधन | कई सहकारी समितियों में पर्याप्त पूंजी का अभाव और ऋण वसूली में चुनौतियाँ। |
| पेशेवर प्रबंधन का अभाव | कुशल और प्रशिक्षित प्रबंधकों की कमी से समितियों के प्रभावी संचालन में बाधा। |
| राजनीतिकरण | सहकारी संस्थाओं के कामकाज में बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप से स्वायत्तता का हनन। |
| नियामक ढांचा | सहकारी समितियों के लिए एक मजबूत और प्रभावी नियामक ढांचे की आवश्यकता। |
| सदस्यों की भागीदारी | कुछ समितियों में सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता का निम्न स्तर। |
| प्रौद्योगिकी अपनाने की गति | छोटी सहकारी समितियों द्वारा नई तकनीकों को अपनाने में धीमी गति। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सहकार से समृद्धि
आगे की राह
- सहकारी समितियों को वित्तीय रूप से मजबूत करने के लिए पूंजी तक पहुंच बढ़ाना और सुदृढ़ ऋण प्रबंधन प्रणालियों को लागू करना।
- सहकारी क्षेत्र में पेशेवर प्रबंधन और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को तेज करना।
- सहकारी समितियों के कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करने और उनकी स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी और नियामक सुधार करना।
- प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना, विशेषकर छोटे और ग्रामीण सहकारी समितियों में, ताकि दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
- सहकारिता के सिद्धांतों और लाभों के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और सदस्यों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- नए व्यावसायिक क्षेत्रों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा, जैविक खेती और डिजिटल सेवाओं में सहकारी समितियों के प्रवेश को सुगम बनाना।
- सहकारी शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ‘त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय’ जैसी संस्थाओं को मजबूत करना और उनका विस्तार करना।
- शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए नियामक ढांचे को और मजबूत करना ताकि उनकी वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सहकारिता मंत्रालय · सहकार से समृद्धि · सहकारी समितियाँ · प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) · शहरी सहकारी बैंक · ग्रामीण सहकारी बैंक · त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय · सहकारी संघवाद · आर्थिक संवृद्धि · समावेशी विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 19(1)(c)’: ‘संघ या सहकारी समितियां बनाने का अधिकार’}
- {‘अनुच्छेद 43B’: ‘सहकारी समितियों के संवर्धन के लिए राज्य का प्रयास’}
- {‘भाग IXB’: ‘सहकारी समितियों से संबंधित प्रावधान’}
अवधारणा प्रवाह
सहकारिता मंत्रालय की स्थापना → नीतिगत निर्णय और योजनाएं (जैसे PACS का कम्प्यूटरीकरण) → सहकारी संस्थाओं का सशक्तिकरण और आधुनिकीकरण → ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूती → वित्तीय समावेशन और सामाजिक सशक्तिकरण → राष्ट्रीय ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य की प्राप्ति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में सहकारिता क्षेत्र कृषि मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
2. प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कम्प्यूटरीकरण का उद्देश्य सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता लाना है।
3. ‘सहकार से समृद्धि’ का दृष्टिकोण देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने से संबंधित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। भारत में सहकारिता क्षेत्र अब एक स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, जिसकी स्थापना 2021 में की गई थी। कथन 2 सही है। PACS के कम्प्यूटरीकरण से उनके कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता आएगी। कथन 3 सही है। ‘सहकार से समृद्धि’ प्रधानमंत्री का एक दृष्टिकोण है जिसका उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से देश की समृद्धि सुनिश्चित करना है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के संदर्भ में सही है/हैं?
1. इसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
2. यह मिशन केवल औद्योगिक उपयोग के लिए हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1 और न ही 2
उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। कथन 2 गलत है। यह मिशन केवल औद्योगिक उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, ऊर्जा भंडारण और अन्य क्षेत्रों में भी हरित हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देता है।
Q3. अभिकथन (A): भारत में सहकारिता क्षेत्र देश की आधी आबादी को किसी न किसी रूप में जोड़ता है।
कारण (R): सहकारिता क्षेत्र में कृषि, बैंकिंग, बीमा और अन्य व्यावसायिक गतिविधियाँ शामिल हैं।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है, क्योंकि सहकारिता क्षेत्र में लगभग 32 करोड़ सदस्य हैं और 20-25 करोड़ परिवार सीधे तौर पर जुड़े हैं, जिससे देश की लगभग आधी आबादी इससे जुड़ी हुई है। कारण (R) भी सही है, क्योंकि सहकारिता क्षेत्र का दायरा कृषि, बैंकिंग, बीमा, चीनी कारखानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों तक फैला हुआ है, जो इसकी व्यापकता का कारण है। अतः, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में सहकारिता आंदोलन के पुनरुत्थान में सहकारिता मंत्रालय की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में इसकी चुनौतियों और संभावनाओं पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत में सहकारिता आंदोलन के ऐतिहासिक संदर्भ और हाल ही में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना का उल्लेख करें। ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को संक्षिप्त में परिभाषित करें।
2. **सहकारिता मंत्रालय की भूमिका (सकारात्मक पक्ष):**
* **स्वतंत्र मंत्रालय का गठन:** सहकारिता क्षेत्र को मुख्यधारा में लाने और नीति निर्माण में प्राथमिकता देने का महत्व।
* **PACS का कम्प्यूटरीकरण:** लगभग 80,000 PACS के कम्प्यूटरीकरण पर ₹3,000 करोड़ का निवेश, पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि।
* **राष्ट्रीय स्तर की मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियाँ:** लगभग 70,000 सहकारी संस्थाओं का जुड़ाव और उनके माध्यम से व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार (जैसे जैविक उत्पाद, बीज उत्पादन)।
* **सहकारी बैंकिंग को मजबूती:** शहरी सहकारी बैंकों के लिए अम्ब्रेला ऑर्गनाइजेशन और ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ‘सहकार सारथी’ प्लेटफॉर्म।
* **मानव संसाधन विकास:** ‘त्रिभुवन’ सहकारी विश्वविद्यालय जैसी पहलें, अगले 10 वर्षों में 17 लाख प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता को पूरा करना।
* **नए उपक्रम:** श्वेत क्रांति, सहकार बीमा, भारत टैक्सी जैसे क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार।
3. **चुनौतियाँ:**
* **वित्तीय स्थिरता:** कई सहकारी संस्थाओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, वित्तीय अस्थिरता और कुप्रबंधन की समस्या।
* **शासन और पारदर्शिता:** राजनीतिक हस्तक्षेप, भाई-भतीजावाद और जवाबदेही की कमी।
* **प्रौद्योगिकी का अभाव:** छोटे और दूरदराज के सहकारी संगठनों में आधुनिक तकनीक अपनाने में चुनौतियाँ।
* **जागरूकता और शिक्षा:** सदस्यों और प्रबंधन के बीच सहकारिता के सिद्धांतों और आधुनिक व्यावसायिक प्रथाओं के बारे में जागरूकता की कमी।
* **प्रतिस्पर्धा:** निजी क्षेत्र से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना।
4. **संभावनाएँ:**
* **समावेशी विकास:** ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और हाशिए पर पड़े वर्गों को सशक्त बनाने की क्षमता।
* **रोजगार सृजन:** कृषि, डेयरी, हस्तशिल्प और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर।
* **स्थानीय आत्मनिर्भरता:** ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान।
* **डिजिटल एकीकरण:** कम्प्यूटरीकरण और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाओं का विस्तार।
5. **निष्कर्ष:** सहकारिता मंत्रालय की पहलों की सराहना करते हुए, चुनौतियों का समाधान करने और ‘सहकार से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासों, नीतिगत समर्थन और जनभागीदारी की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Karnataka PCS (KPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: कर्नाटक के बेलगावी में श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के नए प्रधान कार्यालय का उद्घाटन किसके द्वारा किया गया था?
- A. मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई
- B. केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल
- C. राज्यपाल थावरचंद गहलोत
- D. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
उत्तर: B. केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल — केंद्रीय सहकारिता एवं नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने बेलगावी में श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के नए प्रधान कार्यालय का उद्घाटन किया।
Mains: कर्नाटक में सहकारी संस्थाओं के विकास में केंद्र एवं राज्य सरकार की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। राज्य के सहकारी क्षेत्र में नवीनतम सुधारों एवं उनके प्रभावों पर प्रकाश डालिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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