24 Aug यूपीएससी/पीसीएस के लिए: 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन विनिर्माण योजना से देश को मिलेगा पहला स्वदेशी ब्रांड
✎ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) का उद्देश्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाना, घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाना और भारतीय मोबाइल ब्रांडों को तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, योजना, संसाधन जुटाना, संवृद्धि एवं विकास | GS Paper III — विनिर्माण क्षेत्र, औद्योगिक नीति, निवेश मॉडल | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – स्वदेशीकरण, प्रौद्योगिकी का विकास
- Prelims: मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS), उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI), घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA), मेक इन इंडिया, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, बौद्धिक संपदा
- Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका, भारत में तकनीकी नवाचार और आर्थिक संवृद्धि के लिए नीतियां
त्वरित पुनरावृत्ति: मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) का उद्देश्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाना, घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाना और भारतीय मोबाइल ब्रांडों को तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने हाल ही में 62,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (MPMS) की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर उत्पादन के माध्यम से वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) को बढ़ावा देना और भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा बौद्धिक संपदा के विकास में सहायता करना है। यह घोषणा भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में सात गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में ग्यारह गुना वृद्धि हुई है, जिसमें मोबाइल फोन की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
- भारत अब संख्या के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है और देश में उपयोग किए जाने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन ‘मेड इन इंडिया’ हैं।
- वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत से निर्यात होने वाली सबसे बड़ी उत्पाद श्रेणी बन गए, जिसने पारंपरिक निर्यात वस्तुओं को पीछे छोड़ दिया।
- बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए शुरू की गई ‘उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना’ (PLI-LSEM) ने भारत को मोबाइल फोन विनिर्माण और निर्यात के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई।
- MPMS को PLI-LSEM की सफलता को आगे बढ़ाने और इस क्षेत्र में विकास की गति को बनाए रखने के लिए अधिसूचित किया गया है।
मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) क्या है?
- यह इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा घोषित एक नई योजना है जिसका कुल बजट 62,500 करोड़ रुपये है।
- योजना का प्राथमिक उद्देश्य बड़े पैमाने पर उत्पादन के माध्यम से वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और मोबाइल विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला में अधिक घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) को बढ़ावा देना है।
- MPMS भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, आर्थिक मूल्य सृजित करने और डिजाइन तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्र में भारतीय पेटेंट को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
- इस योजना से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने और कुल उत्पादन लगभग 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| बजट | 62,500 करोड़ रुपये का आवंटन, जो योजना के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को दर्शाता है। |
| लक्ष्य वर्ग | दो वर्ग: मोबाइल फोन विनिर्माण को बढ़ावा देना (TS1) और भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को सहयोग देना (TS2)। |
| योजना अवधि | वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पाँच वर्ष। |
| प्रोत्साहन दरें | TS1 के लिए 2.25% से 5% तक, जबकि TS2 के तहत भारतीय ब्रांडों को 5% का प्रोत्साहन। |
| घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) | आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और स्थानीय विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर। |
| बौद्धिक संपदा | भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल ब्रांड, बौद्धिक संपदा और डिजाइन के विकास पर विशेष ध्यान। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को लाभ होगा।
- कुल उत्पादन लगभग 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे देश की GDP में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
- घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
सामरिक महत्व
- भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में देश की स्थिति मजबूत होगी।
- भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल ब्रांडों और बौद्धिक संपदा के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
- डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और भारतीय पेटेंट को प्रोत्साहन मिलेगा, जो नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक महत्व
- रोजगार सृजन से आय में वृद्धि होगी और जीवन स्तर में सुधार होगा, खासकर दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में।
- महिलाओं और युवा पुरुषों के लिए विनिर्माण क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे, जिससे समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- तकनीकी कौशल के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे कार्यबल की क्षमता बढ़ेगी।
चुनौतियाँ
1. वैश्विक प्रतिस्पर्धा
- अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्थापित खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना।
- लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना और गुणवत्ता मानकों को पूरा करना।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीति
2. अनुसंधान एवं विकास निवेश
- डिजाइन और बौद्धिक संपदा के विकास के लिए पर्याप्त अनुसंधान एवं विकास निवेश की आवश्यकता।
- नवीनता को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाने की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार
3. आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण
- घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने के लिए स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और घटकों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना।
- गुणवत्ता और मात्रा दोनों में स्थानीय उत्पादन की क्षमता बढ़ाना।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास
4. कौशल विकास
- विनिर्माण क्षेत्र में आवश्यक तकनीकी कौशल वाले कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- निरंतर प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन कार्यक्रमों की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कौशल विकास
5. नीतिगत स्थिरता
- निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक और स्थिर नीतिगत ढांचा सुनिश्चित करना।
- योजना के कार्यान्वयन में निरंतरता और दक्षता बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: शासन, सार्वजनिक नीति
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी निर्भरता | महत्वपूर्ण घटकों और प्रौद्योगिकियों के लिए अभी भी विदेशी स्रोतों पर निर्भरता। |
| बौद्धिक संपदा का स्वामित्व | यह सुनिश्चित करना कि बौद्धिक संपदा का स्वामित्व वास्तव में भारतीय संस्थाओं के पास हो। |
| पर्याप्त निवेश | अनुसंधान एवं विकास और विनिर्माण क्षमता विस्तार के लिए पर्याप्त निजी निवेश आकर्षित करना। |
| बुनियादी ढाँचा | विनिर्माण इकाइयों के लिए आवश्यक विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचे का विकास और रखरखाव। |
| निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता | वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लागत और गुणवत्ता में सुधार। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS)
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI-LSEM)
आगे की राह
- अनुसंधान एवं विकास में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को मजबूत करना।
- घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन करना और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना।
- निर्यात बाजारों में भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों की पहुंच बढ़ाने के लिए व्यापार समझौतों और कूटनीतिक प्रयासों का लाभ उठाना।
- बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के संरक्षण और प्रवर्तन के लिए मजबूत कानूनी ढांचा सुनिश्चित करना।
- योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना ताकि चुनौतियों का समय पर समाधान किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) · उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) · घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) · मेक इन इंडिया · इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण · आत्मनिर्भर भारत · बौद्धिक संपदा · निर्यात संवर्धन · रोजगार सृजन · वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 19(1)(g): व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता
- अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा
- अनुच्छेद 39: आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार
अवधारणा प्रवाह
सरकार की घोषणा → मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) → MPMS का उद्देश्य → वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाना → परिणाम → रोजगार सृजन और उत्पादन में वृद्धि → दीर्घकालिक प्रभाव → भारतीय ब्रांडों और बौद्धिक संपदा का विकास → अंतिम लक्ष्य → भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में उदय
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत को मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बनाना है।
2. यह योजना भारतीय मोबाइल ब्रांडों को डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में भारतीय पेटेंट को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
3. इस योजना की अवधि पांच वर्ष है, जो वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि भारत पहले से ही संख्या के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। योजना का उद्देश्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है। कथन 2 सही है क्योंकि योजना का एक लक्ष्य भारतीय स्वामित्व वाले मोबाइल ब्रांड, बौद्धिक संपदा और डिजाइन के विकास को बढ़ावा देना है। कथन 3 सही है, योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्ष निर्धारित की गई है।
Q2. कथन (A): भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
कारण (R): प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
- कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
- कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।
- कथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।
उत्तर: कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। — कथन (A) सही है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में सात गुना और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में ग्यारह गुना वृद्धि हुई है। कारण (R) भी सही है क्योंकि ‘मेक इन इंडिया’ और PLI योजनाएं इस वृद्धि के प्रमुख कारक रही हैं। कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र के विकास में ‘उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना’ (PLI) की भूमिका का परीक्षण कीजिए। ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (MPMS) किस प्रकार इस गति को बनाए रखने और घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने में सहायक होगी? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में PLI योजना की सफलता, उसके उद्देश्यों (जैसे निर्यात संवर्धन, वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापना) और परिणामों (जैसे दूसरा सबसे बड़ा निर्माता, ‘मेड इन इंडिया’ फोन का उच्च प्रतिशत) का उल्लेख होना चाहिए। फिर MPMS के उद्देश्यों (वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, घरेलू मूल्य संवर्धन, भारतीय ब्रांडों को समर्थन, बौद्धिक संपदा का विकास), इसकी मुख्य विशेषताओं (दो लक्षित वर्ग, प्रोत्साहन दरें, अवधि) और PLI की निरंतरता के रूप में इसकी भूमिका पर चर्चा करें। अंत में, यह भी बताएं कि MPMS कैसे तकनीकी आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन में योगदान देगी।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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