यूपीएससी/पीसीएस परीक्षा: लंपी स्किन रोग से निपटने के लिए डीएएचडी के कदम, जानें पूरी रणनीति

पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने लंपी स्किन (शरीर पर गांठ) बीमारी को रोकने के लिए निगरानी, टीकाकरण और रोग-नियंत्रण उप — labelled illustration

यूपीएससी/पीसीएस परीक्षा: लंपी स्किन रोग से निपटने के लिए डीएएचडी के कदम, जानें पूरी रणनीति

✎ लंपी स्किन रोग (LSD) मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करने वाला एक विषाणुजनित रोग है, जो कैप्रिपोक्स वायरस के कारण होता है और इसके नियंत्रण के लिए टीकाकरण तथा जैव सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण हैं।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था, पशुधन और संबंधित मुद्दे  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (पशु चिकित्सा विज्ञान)
  • Prelims: लंपी स्किन रोग (LSD), कैप्रिपोक्स वायरस, आर्थ्रोपोड वैक्टर, पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD), रिंग वैक्सीनेशन, ICAR-NIHSAD भोपाल
  • Essay: पशुधन क्षेत्र का भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान और चुनौतियाँ, भारत में पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन: चुनौतियाँ और आगे की राह

त्वरित पुनरावृत्ति: लंपी स्किन रोग (LSD) मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करने वाला एक विषाणुजनित रोग है, जो कैप्रिपोक्स वायरस के कारण होता है और इसके नियंत्रण के लिए टीकाकरण तथा जैव सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण हैं।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने देश में लंपी स्किन रोग (LSD) की रोकथाम, निगरानी और नियंत्रण को मजबूत करने के लिए सक्रिय उपाय किए हैं। विभाग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर रोग की स्थिति का आकलन कर रहा है और टीकाकरण तथा अन्य रोग-नियंत्रण उपायों के समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित कर रहा है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठकों में राज्यों को टीकाकरण, आवाजाही पर नियंत्रण, बीमार जानवरों को अलग रखने और स्वच्छता जैसे उपायों को सुदृढ़ करने की सलाह दी गई है।

पृष्ठभूमि

  • लंपी स्किन रोग (LSD) एक विषाणुजनित रोग है जो मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करता है।
  • यह कैप्रिपोक्स वायरस (Capripox virus) के कारण होता है और मुख्य रूप से आर्थ्रोपोड वैक्टरों (Arthropod vectors) जैसे मच्छर, मक्खी और टिक्स के माध्यम से फैलता है।
  • इस बीमारी में बुखार आता है और त्वचा पर गांठें बन जाती हैं, हालांकि इसमें मृत्यु दर आमतौर पर कम होती है।
  • भारत में LSD के मामले सबसे पहले सितंबर 2019 में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सामने आए थे।
  • जुलाई 2026 से मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और कुछ अन्य राज्यों में LSD के छिटपुट मामले सामने आए हैं।
  • विभाग ने टीकाकरण, प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 36.18 करोड़ से अधिक मवेशियों को LSD प्रतिरोधी टीका लग चुका है या दोबारा टीका लगाया गया है।

लंपी स्किन रोग (LSD) क्या है?

  • लंपी स्किन रोग (LSD) मवेशियों और भैंसों में होने वाला एक संक्रामक वायरल रोग है, जो कैप्रिपोक्स वायरस के कारण होता है।
  • यह रोग मुख्य रूप से रक्त-चूसने वाले कीड़ों जैसे मच्छर, मक्खी और टिक्स (ticks) के माध्यम से फैलता है।
  • संक्रमित जानवरों में बुखार, दूध उत्पादन में कमी, त्वचा पर गांठें (विशेषकर सिर, गर्दन, पीठ और जननांगों पर) और लिम्फ नोड्स (lymph nodes) में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
  • यद्यपि मृत्यु दर आमतौर पर कम होती है, यह बीमारी पशुधन की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है।
  • रोग के नियंत्रण के लिए रिंग वैक्सीनेशन (Ring Vaccination), बीमार जानवरों को अलग रखना (Isolation), वेक्टर नियंत्रण (Vector Control), जैव सुरक्षा उपाय (Biosecurity Measures) और प्रभावित क्षेत्रों में जानवरों की आवाजाही पर नियंत्रण आवश्यक है।
  • भारत में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD) भोपाल, LSD के निदान और अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी सलाह, टीकाकरण सहायता और वित्तीय मदद प्रदान करके इस रोग के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
लंपी स्किन रोग (LSD) मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करने वाला विषाणुजनित रोग, कैप्रिपोक्स वायरस के कारण होता है।
संचरण मुख्य रूप से आर्थ्रोपोड वैक्टरों (जैसे मच्छर, मक्खी, टिक्स) के माध्यम से फैलता है।
लक्षण बुखार और त्वचा पर गांठें, आमतौर पर मृत्यु दर कम होती है।
नियंत्रण उपाय टीकाकरण, रिंग वैक्सीनेशन, आवाजाही पर नियंत्रण, बीमार जानवरों को अलग करना, वेक्टर नियंत्रण, कीटाणुशोधन और साफ-सफाई।
सरकारी पहल पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) द्वारा निगरानी, टीकाकरण और रोग-नियंत्रण उपायों को सुदृढ़ करना।
वर्तमान स्थिति देश में LSD की स्थिति नियंत्रण में है, संक्रमण की गंभीरता और मृत्यु दर में कमी आई है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • पशुधन भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, और यह लाखों किसानों की आजीविका का आधार है।
  • पशुधन रोगों से दूध उत्पादन, मांस उत्पादन और कृषि आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर होती है।
  • LSD जैसे रोगों का प्रभावी नियंत्रण पशुधन क्षेत्र की स्थिरता और किसानों की आय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

खाद्य सुरक्षा और पोषण

  • पशुधन भारत में प्रोटीन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का एक प्रमुख स्रोत है, जो खाद्य सुरक्षा और पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • पशुधन रोगों के कारण दूध और मांस की उपलब्धता में कमी आ सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा और पोषण संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य

  • हालांकि LSD मनुष्यों को सीधे प्रभावित नहीं करता है, पशुधन रोगों का प्रबंधन ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण का हिस्सा है, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के अंतर्संबंध को पहचानता है।
  • पशुधन स्वास्थ्य की निगरानी और नियंत्रण से भविष्य में ज़ूनोटिक (Zoonotic) रोगों के उभरने के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

शासन और नीति

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और सहयोग पशुधन रोगों के प्रभावी नियंत्रण के लिए आवश्यक है, विशेषकर जब रोग कई राज्यों में फैलते हैं।
  • समय पर रिपोर्टिंग, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत शासन और नीति कार्यान्वयन को दर्शाते हैं।

चुनौतियाँ

1. टीकाकरण कवरेज

  • बड़े पशुधन आबादी को कवर करने के लिए पर्याप्त टीकों की उपलब्धता और उनका प्रभावी वितरण सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों और आवारा पशुओं तक टीकाकरण अभियान पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती है।

2. रोग निगरानी और रिपोर्टिंग

  • बीमारी की घटनाओं की समय पर और पारदर्शी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से, कठिन हो सकता है।
  • बीमारी के शुरुआती चरणों में पहचान और पुष्टि के लिए मजबूत प्रयोगशाला नेटवर्क और प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होती है।

3. किसानों में जागरूकता

  • किसानों को LSD के लक्षणों, संचरण के तरीकों और रोकथाम के उपायों के बारे में शिक्षित करना महत्वपूर्ण है, ताकि वे समय पर कार्रवाई कर सकें।
  • जैव सुरक्षा (Bio-security) उपायों और बीमार जानवरों को अलग रखने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

4. संसाधन और बुनियादी ढांचा

  • पशु चिकित्सा कर्मचारियों की कमी, प्रयोगशाला सुविधाओं का अभाव और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की अनुपलब्धता प्रभावी रोग नियंत्रण में बाधा डाल सकती है।
  • वेक्टर नियंत्रण और स्वच्छता उपायों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता होती है।

5. अंतर-राज्यीय समन्वय

  • चूंकि पशुधन एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाया जा सकता है, इसलिए रोग के प्रसार को रोकने के लिए राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय और सूचना साझाकरण महत्वपूर्ण है।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में नियंत्रण उपायों को सुदृढ़ करना आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
टीकाकरण की गति बड़ी पशुधन आबादी के लिए त्वरित और व्यापक टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित करना।
ग्रामीण पहुंच दूरदराज के और दुर्गम क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं और टीकाकरण तक पहुंच सुनिश्चित करना।
किसानों का अनुपालन किसानों द्वारा जैव सुरक्षा उपायों और बीमार पशुओं को अलग रखने के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना।
संसाधन उपलब्धता पर्याप्त पशु चिकित्सा कर्मियों, प्रयोगशाला सुविधाओं और वित्तीय सहायता की कमी।
सूचना का प्रसार रोग की स्थिति और नियंत्रण उपायों के बारे में सटीक और समय पर जानकारी का प्रसार।
अंतर-राज्यीय सहयोग रोग के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय।

आगे की राह

  • टीकाकरण अभियान को और तेज करना, विशेषकर बछियों और युवा मवेशियों पर ध्यान केंद्रित करना, ताकि अधिकतम कवरेज सुनिश्चित हो सके।
  • रिंग वैक्सीनेशन (Ring Vaccination) रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करना, विशेष रूप से प्रभावित और सीमावर्ती क्षेत्रों में।
  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में रोग निगरानी प्रणाली को मजबूत करना और बीमारी की घटनाओं की समय पर और पारदर्शी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना।
  • किसानों और पशुपालकों के बीच LSD के लक्षणों, संचरण और रोकथाम उपायों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
  • पशु चिकित्सा प्रयोगशाला के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और रोग निदान और परीक्षण क्षमता को बढ़ाना।
  • पशु चिकित्सा कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करना ताकि वे रोग नियंत्रण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
  • राज्यों के बीच समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देना ताकि पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण और रोग के प्रसार को रोका जा सके।
  • आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए प्रभावी नीतियां और कार्यक्रम विकसित करना, क्योंकि वे रोग के प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

लंपी स्किन रोग (LSD) · पशुधन स्वास्थ्य · महामारी नियंत्रण · टीकाकरण रणनीति · पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) · जैव-सुरक्षा उपाय · राज्य-केंद्र समन्वय · पशुधन अर्थव्यवस्था

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘राज्य सूची में पशुधन और पशु चिकित्सा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य: पशुधन का संरक्षण और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

कैप्रिपोक्स वायरस का प्रसार  →  मवेशियों और भैंसों में LSD संक्रमण  →  बुखार और त्वचा पर गांठें  →  पशुधन स्वास्थ्य और उत्पादकता पर प्रभाव  →  आर्थिक नुकसान और खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएं  →  सरकार द्वारा निगरानी, टीकाकरण और नियंत्रण उपाय  →  रोग नियंत्रण और पशुधन स्वास्थ्य में सुधार

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. लंपी स्किन रोग (LSD) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एक विषाणुजनित रोग है जो केवल मवेशियों को प्रभावित करता है।
2. यह मुख्य रूप से आर्थ्रोपोड वैक्टरों के माध्यम से फैलता है।
3. भारत में LSD के मामले सबसे पहले सितंबर 2019 में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सामने आए थे।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि यह मवेशियों और भैंसों दोनों को प्रभावित करता है। कथन 2 सही है, यह आर्थ्रोपोड वैक्टरों से फैलता है। कथन 3 सही है, भारत में LSD के मामले सबसे पहले सितंबर 2019 में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सामने आए थे।

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा विभाग भारत में लंपी स्किन रोग (LSD) की रोकथाम, निगरानी और नियंत्रण के लिए सक्रिय उपाय कर रहा है?

  1. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
  2. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय
  3. पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD)
  4. ग्रामीण विकास मंत्रालय

उत्तर: पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) — पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत आता है और देश में लंपी स्किन रोग (LSD) की रोकथाम, निगरानी और नियंत्रण के लिए सक्रिय उपाय कर रहा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ लंपी स्किन रोग (LSD) जैसी पशुधन बीमारियों के प्रभावी प्रबंधन में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय की भूमिका का परीक्षण कीजिए। भारत में पशुधन स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अपनाई जा सकने वाली प्रमुख रणनीतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत लंपी स्किन रोग (LSD) का संक्षिप्त परिचय देते हुए करें। इसके बाद, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय के महत्व पर प्रकाश डालें, जिसमें सूचना साझाकरण, टीकाकरण अभियान, वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन जैसे बिंदु शामिल हों। पशुधन स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अपनाई जा सकने वाली रणनीतियों में टीकाकरण कार्यक्रम, जैव-सुरक्षा उपाय, रोग निगरानी प्रणाली, पशु चिकित्सा बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण, पशु चिकित्सकों का प्रशिक्षण, और किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाना शामिल करें। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) जैसे अन्य क्षेत्रों में भी केंद्र-राज्य समन्वय के उदाहरणों का उल्लेख किया जा सकता है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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