07 Sep रक्षा मंत्रालय ने 1.10 लाख करोड़ रुपये की पूंजी अधिग्रहण योजनाओं को दी मंजूरी, आत्मनिर्भरता पर जोर
✎ रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए ₹1.10 लाख करोड़ के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंज़ूरी दी है, जिसमें 98% खरीद भारतीय उद्योग से होगी, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
- Prelims: रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC), रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP), आत्मनिर्भर भारत, रक्षा विनिर्माण, मेक इन इंडिया, CBRN रेकी वाहन, अरुद्र रडार, मरीन गैस टर्बाइन
- Essay: भारत की रक्षा क्षमताएँ और राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत: चुनौतियाँ और अवसर, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए ₹1.10 लाख करोड़ के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मंज़ूरी दी है, जिसमें 98% खरीद भारतीय उद्योग से होगी, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए लगभग ₹1.10 लाख करोड़ के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AoN) प्रदान की है। इन स्वीकृतियों में से लगभग 98 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) रक्षा मंत्रालय में निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है, जो सशस्त्र बलों की दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नीतियों और प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देती है।
- भारत सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण (Indigenisation) को बढ़ावा दे रही है, जिसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है।
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure – DAP) 2020, रक्षा खरीद में पारदर्शिता, गति और स्वदेशीकरण को प्राथमिकता देने के लिए डिज़ाइन की गई है।
- हाल ही में स्वीकृत प्रस्तावों में भारतीय सेना के लिए रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) रेकी वाहन, उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (Advanced Light Helicopters – ALHs) और उच्च गतिशीलता वाले वाहन (High Mobility Vehicles – HMVs) शामिल हैं।
- भारतीय नौसेना के लिए अरुद्र रडार और मरीन गैस टर्बाइन (Marine Gas Turbines – MGT) के डिजाइन एवं विकास तथा बाद में उनकी खरीद को मंज़ूरी दी गई है, जिससे विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता कम होगी।
- भारतीय वायु सेना के लिए लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिली है, जिसमें ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पस जैमर (Ground-Based Multi-Purpose Jammer – GBMPJ) और DEFSAC प्रणाली की स्थापना शामिल है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) क्या है?
- रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) का गठन 2001 में कारगिल युद्ध के बाद ‘ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ की सिफारिशों के आधार पर किया गया था।
- यह भारत की रक्षा खरीद प्रक्रिया में सुधार लाने और सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र स्थापित करने के उद्देश्य से स्थापित की गई थी।
- DAC की अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं, और इसमें रक्षा राज्य मंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।
- इसका मुख्य कार्य सशस्त्र बलों की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के लिए पूंजीगत अधिग्रहण (Capital Acquisition) को मंज़ूरी देना है।
- DAC रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) के तहत ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AoN) प्रदान करती है, जो किसी भी खरीद प्रक्रिया का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
- यह रक्षा खरीद में पारदर्शिता, लागत-प्रभावशीलता और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए नीतियां और दिशानिर्देश भी तैयार करती है।
- DAC का लक्ष्य सशस्त्र बलों के लिए आधुनिक उपकरणों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना और देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 1.10 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्ताव | भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देना। |
| 98% खरीद भारतीय उद्योग से | रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) को बढ़ावा देना और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देना। |
| रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) टोही वाहन | CBRN एजेंटों से दूषित क्षेत्रों का पता लगाने, पहचान करने, निगरानी करने और चिह्नित करने की क्षमता। |
| उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (ALH) | भारतीय सेना और वायु सेना के लिए सभी इलाकों और परिचालन स्थितियों में जटिल मिशनों को अंजाम देना। |
| अरुद्र रडार और मरीन गैस टर्बाइन (MGT) | नौसेना वायु स्टेशनों पर मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार को बदलना और विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता कम करना। |
| ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पस जैमर (GBMPJ) | शत्रुओं के रडार के खिलाफ प्रभावी जैमिंग प्रदान करके युद्धक क्षमता बढ़ाना। |
महत्व
सामरिक महत्व
- यह अधिग्रहण भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता (Operational readiness) और युद्धक क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा, जिससे देश की सुरक्षा मजबूत होगी।
- आधुनिक उपकरणों जैसे CBRN टोही वाहन और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर शामिल करने से विभिन्न प्रकार के खतरों और चुनौतीपूर्ण इलाकों में भारतीय सेना की प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा।
- नौसेना के लिए अरुद्र रडार और मरीन गैस टर्बाइन का अधिग्रहण समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करेगा, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
आर्थिक महत्व
- लगभग 98% खरीद भारतीय उद्योग से होने के कारण, यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बढ़ावा देगा और घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन प्रदान करेगा।
- इससे रोजगार सृजन होगा और रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (Research & Development) तथा नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
- विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की आर्थिक संप्रभुता (Economic sovereignty) मजबूत होगी।
तकनीकी महत्व
- मरीन गैस टर्बाइन का स्वदेशी डिजाइन और विकास भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे भविष्य में उन्नत प्रणालियों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
- ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पस जैमर (GBMPJ) और DEFSAC प्रणाली जैसी प्रौद्योगिकियां भारतीय सशस्त्र बलों की तकनीकी श्रेष्ठता और साइबर सुरक्षा को बढ़ाएंगी।
चुनौतियाँ
1. घरेलू विनिर्माण क्षमता
- बड़े पैमाने पर घरेलू खरीद के लिए भारतीय रक्षा उद्योग को गुणवत्ता, मात्रा और समय-सीमा के संदर्भ में इन आवश्यकताओं को पूरा करने की अपनी क्षमता को बढ़ाना होगा।
- उन्नत प्रौद्योगिकियों के उत्पादन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और कुशल कार्यबल की कमी एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: रक्षा विनिर्माण, आत्मनिर्भरता
2. अनुसंधान एवं विकास और नवाचार
- यह सुनिश्चित करना कि भारतीय उद्योग केवल असेंबली से आगे बढ़कर महत्वपूर्ण अनुसंधान और विकास में निवेश करे, ताकि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का स्वदेशी विकास हो सके।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना और उन्हें रक्षा अनुसंधान में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: रक्षा प्रौद्योगिकी, नवाचार
3. गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण
- यह सुनिश्चित करना कि स्वदेशी रूप से निर्मित उपकरण अंतरराष्ट्रीय मानकों और सशस्त्र बलों की कठोर आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
- रक्षा उपकरणों के लिए एक मजबूत गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण तंत्र स्थापित करना।
यूपीएससी लिंक: सुरक्षा: रक्षा अधिग्रहण, गुणवत्ता मानक
4. समय पर वितरण और लागत-प्रभावशीलता
- परियोजनाओं में देरी से बचना और यह सुनिश्चित करना कि अधिग्रहण समय पर और बजटीय सीमाओं के भीतर पूरा हो।
- घरेलू उत्पादन की लागत-प्रभावशीलता बनाए रखना ताकि यह आयातित विकल्पों के साथ प्रतिस्पर्धी हो सके।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: सार्वजनिक खरीद, परियोजना प्रबंधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रौद्योगिकी हस्तांतरण | महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण के लिए विदेशी भागीदारों से प्रभावी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुनिश्चित करना। |
| रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स | स्वदेशी रूप से निर्मित उपकरणों के लिए एक मजबूत रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना। |
| बजटीय आवंटन | रक्षा अधिग्रहण के लिए पर्याप्त और निरंतर बजटीय आवंटन सुनिश्चित करना। |
| निजी क्षेत्र की भागीदारी | रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को और बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतिगत माहौल बनाना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- आत्मनिर्भर भारत अभियान
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure – DAP)
आगे की राह
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को और मजबूत करना।
- घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए एक स्थिर और दीर्घकालिक नीतिगत ढांचा विकसित करना।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
- रक्षा उपकरणों के परीक्षण और प्रमाणन के लिए अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण और संयुक्त विकास को बढ़ावा देना।
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना ताकि परियोजनाओं में देरी और लागत में वृद्धि को रोका जा सके।
- रक्षा क्षेत्र में कौशल विकास और मानव संसाधन को मजबूत करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
रक्षा अधिग्रहण परिषद · पूंजीगत अधिग्रहण · आत्मनिर्भर भारत · रक्षा विनिर्माण · घरेलू उद्योग · रक्षा आधुनिकीकरण · मेक इन इंडिया · सामरिक स्वायत्तता · रक्षा व्यय · सैन्य क्षमताएं · तकनीकी आत्मनिर्भरता · रक्षा अनुसंधान एवं विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में रक्षा का विषय’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 266’, ‘note’: ‘भारत की संचित निधि से व्यय’}
अवधारणा प्रवाह
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की मंजूरी → पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को स्वीकृति → घरेलू उद्योग से 98% खरीद → सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि → रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आर्थिक प्रोत्साहन → राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक मजबूती
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council – DAC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्री करते हैं।
2. यह रक्षा मंत्रालय में पूंजीगत अधिग्रहण की प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
3. ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AoN) DAC द्वारा दी जाने वाली प्रारंभिक प्रशासनिक मंजूरी है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। रक्षा अधिग्रहण परिषद की अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं। कथन 2 सही है। यह रक्षा मंत्रालय में पूंजीगत अधिग्रहण से संबंधित सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। कथन 3 सही है। ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) किसी भी रक्षा खरीद प्रक्रिया में पहला महत्वपूर्ण कदम है, जो परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान करता है।
Q2. हाल ही में समाचारों में रहा ‘अरुद्र रडार’ (Arudhra Radar) निम्नलिखित में से किस रक्षा बल से संबंधित है?
- भारतीय सेना
- भारतीय नौसेना
- भारतीय वायु सेना
- भारतीय तटरक्षक बल
उत्तर: भारतीय नौसेना — अरुद्र रडार भारतीय नौसेना के लिए है। इसका उपयोग विभिन्न नौसेना हवाई अड्डों पर मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार को बदलने के लिए किया जाएगा, जिससे नौसेना की हवाई निगरानी क्षमताएं बढ़ेंगी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ प्राप्त करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा अनुमोदित पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों का महत्व क्या है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य का संक्षिप्त उल्लेख।
मुख्य भाग:
1. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार के कदम:
– रक्षा अधिग्रहण नीति (Defence Acquisition Procedure – DAP) में संशोधन (जैसे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘बाय इंडियन’ श्रेणियों को प्राथमिकता)।
– रक्षा उत्पादन में FDI नीति में बदलाव।
– नकारात्मक आयात सूची (Negative Import List) का विस्तार।
– रक्षा गलियारों (Defence Corridors) की स्थापना।
– रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए पहल (जैसे iDEX, DRDO की भूमिका)।
– निजी क्षेत्र और MSMEs की भागीदारी को प्रोत्साहन।
2. हालिया पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों का महत्व:
– 1.10 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों में से लगभग 98% भारतीय उद्योग से खरीद का लक्ष्य।
– घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा।
– आयात पर निर्भरता में कमी (जैसे मरीन गैस टर्बाइन)।
– सामरिक स्वायत्तता में वृद्धि।
– रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव।
– भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की विशिष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति (जैसे CBRN रेकी वाहन, उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर, अरुद्र रडार)।
– आधुनिक सैन्य क्षमताओं का विकास।
निष्कर्ष: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने में इन कदमों की भूमिका और भविष्य की संभावनाएं।
स्रोत: orissapost.com
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