19 Sep राजस्थान हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट प्रतिबंध पर राज्य सरकार से पूछा जवाब
✎ राजस्थान उच्च न्यायालय का ई-सिगरेट प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन पर राज्य सरकार से जवाब मांगना, जन स्वास्थ्य की रक्षा और विधि के शासन को बनाए रखने में न्यायिक सक्रियता के महत्व को दर्शाता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, संविधान और राजव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: ई-सिगरेट (E-cigarette), इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS), उत्पादन, व्यापार, भंडारण और विज्ञापन का प्रतिषेध अधिनियम, 2019, जनहित याचिका (PIL), न्यायिक सक्रियता, अनुच्छेद 226, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
- Essay: जन स्वास्थ्य और विधि का शासन: चुनौतियाँ और समाधान, न्यायिक सक्रियता: लोकतंत्र में संतुलनकारी शक्ति
त्वरित पुनरावृत्ति: राजस्थान उच्च न्यायालय का ई-सिगरेट प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन पर राज्य सरकार से जवाब मांगना, जन स्वास्थ्य की रक्षा और विधि के शासन को बनाए रखने में न्यायिक सक्रियता के महत्व को दर्शाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य में ई-सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध के बावजूद इसकी धड़ल्ले से उपलब्धता पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने राज्य सरकार से जयपुर में ई-सिगरेट कारोबारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और अधिकारियों को कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला केंद्र सरकार द्वारा 2019 में लगाए गए प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य की कथित विफलता को उजागर करता है।
पृष्ठभूमि
- केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में ‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (उत्पादन, व्यापार, भंडारण और विज्ञापन) प्रतिषेध अधिनियम, 2019’ (Prohibition of Electronic Cigarettes (Production, Trade, Storage and Advertisement) Act, 2019) लागू किया था।
- इस अधिनियम के तहत ई-सिगरेट के उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
- इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य युवाओं और बच्चों को निकोटीन की लत से बचाना था, क्योंकि ई-सिगरेट को पारंपरिक सिगरेट का एक ‘सुरक्षित’ विकल्प बताकर प्रचारित किया जा रहा था।
- स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare) ने ई-सिगरेट को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया था, जिसमें निकोटीन और अन्य हानिकारक रसायन होते हैं।
- जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) के माध्यम से न्यायालय का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया कि प्रतिबंध के बावजूद ई-सिगरेट आसानी से उपलब्ध है और नाबालिग भी इसका सेवन कर रहे हैं।
- उच्च न्यायालय ने पिछली सुनवाई में भी राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए थे, जिसमें विशेष टीमों का गठन और जिला स्तर पर प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति शामिल थी।
ई-सिगरेट और संबंधित कानून
- ई-सिगरेट (E-cigarette) या इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (Electronic Nicotine Delivery Systems – ENDS) ऐसे उपकरण हैं जो निकोटीन युक्त तरल को गर्म करके वाष्प में बदलते हैं, जिसे उपयोगकर्ता साँस के साथ अंदर लेते हैं।
- इनमें निकोटीन, प्रोपलीन ग्लाइकोल, ग्लिसरीन और विभिन्न फ्लेवर जैसे रसायन होते हैं, जिनमें से कई स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
- ई-सिगरेट को अक्सर पारंपरिक तंबाकू उत्पादों की तुलना में ‘कम हानिकारक’ के रूप में विपणन किया जाता है, लेकिन अध्ययनों से पता चला है कि इनके अपने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जोखिम हैं, खासकर युवाओं के लिए।
- इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (उत्पादन, व्यापार, भंडारण और विज्ञापन) प्रतिषेध अधिनियम, 2019 (Prohibition of Electronic Cigarettes (Production, Trade, Storage and Advertisement) Act, 2019) का उल्लंघन करने पर पहली बार में एक वर्ष तक का कारावास या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
- बार-बार अपराध करने पर तीन वर्ष तक का कारावास और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
- अधिनियम के तहत, किसी भी ई-सिगरेट के स्टॉक को रखने वाले व्यक्ति को उसे निकटतम पुलिस स्टेशन में जमा करना होता है।
- न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जहाँ कार्यपालिका या विधायिका अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहती है, जिससे जनहित प्रभावित होता है। उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ई-सिगरेट पर प्रतिबंध | वर्ष 2019 में केंद्र सरकार द्वारा ई-सिगरेट के निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। |
| राजस्थान उच्च न्यायालय की सख्ती | प्रतिबंध के बावजूद ई-सिगरेट की बिक्री पर राज्य सरकार से कार्रवाई रिपोर्ट तलब की गई। |
| जनहित याचिका (PIL) | अधिवक्ता प्रियांशा गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किए। |
| नाबालिगों द्वारा सेवन | याचिका में बताया गया कि नाबालिग खुलेआम ई-सिगरेट का सेवन कर रहे हैं, जो कानून के अप्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। |
| विशेष टीम का गठन | पुलिस महानिदेशक को कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए विशेष टीम गठित करने के निर्देश। |
| जिला स्तर पर प्राधिकृत अधिकारी | मुख्य सचिव को प्रत्येक जिला स्तर पर जिलाधिकारी या उप जिलाधिकारी स्तर के प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा: ई-सिगरेट के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों से नागरिकों, विशेषकर युवाओं और नाबालिगों को बचाना महत्वपूर्ण है।
- निकोटीन की लत पर नियंत्रण: ई-सिगरेट में निकोटीन होता है, जो अत्यधिक व्यसनकारी है। इस पर प्रतिबंध से निकोटीन की लत के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है।
कानूनी और शासन संबंधी महत्व
- न्यायिक सक्रियता: उच्च न्यायालय का यह कदम सरकार को कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जवाबदेह ठहराने में न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) को दर्शाता है।
- कानून के शासन की स्थापना: प्रतिबंध के बावजूद अवैध बिक्री पर अंकुश लगाकर कानून के शासन (Rule of Law) को मजबूत करना।
- केंद्र-राज्य समन्वय: केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून को राज्य स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने में राज्य सरकार की भूमिका।
नैतिक महत्व
- युवाओं का भविष्य: नाबालिगों को ई-सिगरेट के सेवन से बचाना उनके स्वस्थ भविष्य और राष्ट्र के मानव संसाधन के विकास के लिए आवश्यक है।
चुनौतियाँ
1. कानून का अप्रभावी क्रियान्वयन
- केंद्र सरकार द्वारा 2019 में प्रतिबंध के बावजूद, ई-सिगरेट पूरे राज्य में आसानी से उपलब्ध है।
- राज्य सरकार द्वारा कानून के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने में ढिलाई।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. नाबालिगों तक पहुंच
- याचिका में बताया गया कि नाबालिग खुलेआम ई-सिगरेट का सेवन करते नजर आते हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
- खुदरा विक्रेताओं द्वारा आयु सत्यापन मानदंडों का उल्लंघन।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्ग
3. प्रवर्तन तंत्र की कमी
- जिला स्तर पर प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति और विशेष टीमों के गठन में देरी।
- अवैध बिक्री और वितरण नेटवर्क को तोड़ने में पुलिस और प्रशासन की अक्षमता।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, कानून और व्यवस्था
4. सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम
- ई-सिगरेट के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में जागरूकता की कमी।
- निकोटीन की लत का बढ़ता खतरा, विशेषकर युवाओं में।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य, मानव संसाधन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| प्रतिबंध के बावजूद बिक्री | कानून के शासन का उल्लंघन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा। |
| प्रवर्तन में कमी | राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न। |
| नाबालिगों तक पहुंच | युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव। |
| जागरूकता का अभाव | ई-सिगरेट के हानिकारक प्रभावों के बारे में जनता में पर्याप्त जानकारी नहीं। |
| अवैध व्यापार | संगठित अपराध और कालाबाजारी को बढ़ावा। |
आगे की राह
- कानून का सख्त क्रियान्वयन: ई-सिगरेट के निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण पर लगे प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाए।
- प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना: जिला स्तर पर प्राधिकृत अधिकारियों की तत्काल नियुक्ति की जाए और पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित विशेष टीमों को सक्रिय किया जाए।
- जागरूकता अभियान: ई-सिगरेट के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं, विशेषकर युवाओं और माता-पिता के बीच।
- निगरानी और रिपोर्टिंग: नियमित अंतराल पर ई-सिगरेट की अवैध बिक्री पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार की जाए और सार्वजनिक की जाए।
- अंतर-विभागीय समन्वय: स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि प्रतिबंध को प्रभावी बनाया जा सके।
- विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई: अवैध रूप से ई-सिगरेट बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं और वितरकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
- सीमा पार तस्करी पर नियंत्रण: ई-सिगरेट के अवैध आयात को रोकने के लिए सीमा शुल्क और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को सतर्क किया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ई-सिगरेट प्रतिबंध · जनहित याचिका · न्यायिक सक्रियता · राज्य सरकार की जवाबदेही · सार्वजनिक स्वास्थ्य · नाबालिगों पर प्रभाव · अधिनियम का क्रियान्वयन · उच्च न्यायालय के निर्देश · विधायी ढाँचा · नशीले पदार्थों का सेवन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21: जीवन का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा, जिसमें स्वस्थ जीवन का अधिकार भी शामिल है।
- अनुच्छेद 47: राज्य का कर्तव्य है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करे और मादक पेय तथा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक औषधियों के उपभोग पर प्रतिबंध लगाए।
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा ई-सिगरेट पर प्रतिबंध (2019) → प्रतिबंध के बावजूद राज्य में ई-सिगरेट की अवैध बिक्री → नाबालिगों द्वारा ई-सिगरेट का सेवन → अधिवक्ता द्वारा जनहित याचिका दायर → राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार से जवाब-तलब और कार्रवाई रिपोर्ट की मांग → कानून के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विशेष टीमों और अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. ई-सिगरेट (E-cigarette) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में ई-सिगरेट के निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध ‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019’ के तहत लगाया गया है।
2. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ई-सिगरेट पारंपरिक सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक होती है।
3. ई-सिगरेट में निकोटीन (Nicotine) होता है, जो अत्यधिक व्यसनकारी पदार्थ है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। भारत सरकार ने 2019 में एक कानून बनाकर ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया था। कथन 2 गलत है। WHO ने ई-सिगरेट को हानिकारक माना है और इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त की है, यह पारंपरिक सिगरेट से कम हानिकारक है, ऐसा कोई निश्चित प्रमाण नहीं है। कथन 3 सही है। अधिकांश ई-सिगरेट में निकोटीन होता है, जो एक व्यसनकारी रसायन है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद उच्च न्यायालयों को जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) स्वीकार करने का अधिकार देता है?
- अनुच्छेद 32
- अनुच्छेद 226
- अनुच्छेद 136
- अनुच्छेद 142
उत्तर: अनुच्छेद 226 — अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन और किसी अन्य उद्देश्य के लिए रिट जारी करने का अधिकार देता है, जिसके तहत जनहित याचिकाएँ भी दायर की जा सकती हैं। अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय को यह शक्ति देता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ई-सिगरेट पर प्रतिबंध के बावजूद इसकी निरंतर उपलब्धता सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। इस संदर्भ में, ‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019’ के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और इन चुनौतियों से निपटने में न्यायपालिका की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ई-सिगरेट और ‘इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019’ का संक्षिप्त परिचय तथा प्रतिबंध के बावजूद उपलब्धता की समस्या का उल्लेख।
2. अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में चुनौतियाँ:
क. प्रवर्तन एजेंसियों की कमी और क्षमता का अभाव।
ख. ऑनलाइन बिक्री और सीमा पार तस्करी।
ग. जागरूकता की कमी और सामाजिक स्वीकृति।
घ. नाबालिगों तक आसान पहुँच।
ङ. राज्य सरकारों की इच्छाशक्ति और संसाधनों की कमी।
च. नए उत्पादों और तकनीकी बदलावों के साथ कानून का तालमेल।
3. न्यायपालिका की भूमिका:
क. जनहित याचिकाओं के माध्यम से सरकार को जवाबदेह ठहराना (जैसे राजस्थान उच्च न्यायालय का मामला)।
ख. कार्यकारी अधिकारियों को कानून का सख्ती से पालन करने के निर्देश देना।
ग. विशेष टीमों के गठन और जिला स्तर पर प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश देना।
घ. सार्वजनिक स्वास्थ्य के अधिकार (अनुच्छेद 21) की रक्षा करना।
ङ. कानून के उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना।
4. निष्कर्ष: सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए विधायी, कार्यकारी और न्यायिक प्रयासों के समन्वय की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: amarujala.com
Rajasthan PCS (RPSC / RAS) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा ई-सिगरेट की बिक्री पर राज्य सरकार से जवाब-तलब करते हुए कौन-सी कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है?
- ई-सिगरेट के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई
- ई-सिगरेट की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई
- ई-सिगरेट के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई
- ई-सिगरेट के विज्ञापन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई
उत्तर: ई-सिगरेट की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई — राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से ई-सिगरेट की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने संबंधी कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
Mains: राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा ई-सिगरेट की बिक्री पर राज्य सरकार से जवाब-तलब करते हुए उठाए गए कदमों का विश्लेषण करते हुए, राज्य में ई-सिगरेट के नियंत्रण एवं निगरानी के लिए अपनाई जाने वाली नीति का उल्लेख कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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