रेयालसीमा में गहराता जलसंकट: एल नीनो के कारण बारिश में 78% तक कमी

Rayalaseema faces severe water crisis amid strengthening El Nino — diagram

रेयालसीमा में गहराता जलसंकट: एल नीनो के कारण बारिश में 78% तक कमी

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Rayalaseema water crisis drivers

✎ अल नीनो एक जलवायु घटना है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि से उत्पन्न होती है और भारत में अक्सर कमजोर मानसून तथा सूखे से जुड़ी होती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (भारत एवं विश्व का भौतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल)  |  GS Paper III — पर्यावरण (पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन), आपदा प्रबंधन (आपदा और आपदा प्रबंधन)
  • Prelims: अल नीनो, ला नीना, भारतीय मानसून, दक्षिण-पश्चिम मानसून, कृषि संकट, भूजल स्तर, रायसीमा क्षेत्र, फसल विविधीकरण
  • Essay: जलवायु परिवर्तन और भारत की खाद्य सुरक्षा: चुनौतियाँ एवं समाधान, जल संकट: एक बहुआयामी चुनौती और सतत विकास के मार्ग

त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो एक जलवायु घटना है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि से उत्पन्न होती है और भारत में अक्सर कमजोर मानसून तथा सूखे से जुड़ी होती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

सितंबर के पहले सप्ताह तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रायलसीमा क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विफलता के कारण गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है। अल नीनो (El Niño) की स्थिति के मजबूत होने से यह शुष्क दौर और भी बदतर होने की आशंका है, जिससे क्षेत्र के किसानों के लिए दीर्घकालिक कृषि संकट पैदा हो सकता है। अन्नामय्या जिले में सामान्य से 78.3% कम वर्षा दर्ज की गई है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • रायसीमा आंध्र प्रदेश का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है जो अक्सर कम वर्षा और सूखे की स्थिति का सामना करता है।
  • अल नीनो एक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी है, जिसका वैश्विक मौसम पैटर्न पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
  • भारत में, अल नीनो की स्थिति अक्सर दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करती है, जिससे देश के कई हिस्सों में कम वर्षा और सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • कम वर्षा के कारण सतही जल स्रोतों (नदियों, नहरों, जलाशयों) में पानी की कमी हो जाती है, जिससे सिंचाई और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है।
  • भूजल स्तर में गिरावट एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह क्षेत्र सिंचाई और पेयजल के लिए बोरवेल पर अत्यधिक निर्भर है।
  • कृषि क्षेत्र, विशेष रूप से मूंगफली, कपास, मक्का और लाल चना जैसी फसलें, सूखे के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है।
  • सरकार और स्थानीय प्रशासन को पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देनी पड़ती है, जिससे कृषि के लिए पानी की उपलब्धता और कम हो जाती है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम पैटर्न में अनिश्चितता बढ़ रही है, जिससे अल नीनो जैसी घटनाओं का प्रभाव और अधिक तीव्र हो सकता है।
  • कृषि विविधीकरण और जल-कुशल सिंचाई पद्धतियाँ (जैसे ड्रिप सिंचाई) ऐसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अल नीनो क्या है?

  • अल नीनो एक जटिल मौसम पैटर्न है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि से उत्पन्न होता है।
  • यह घटना अनियमित अंतराल पर, आमतौर पर हर 2 से 7 साल में होती है, और कुछ महीनों से लेकर एक वर्ष से अधिक समय तक चल सकती है।
  • अल नीनो ‘अल नीनो-दक्षिणी दोलन’ (ENSO) नामक एक बड़े चक्र का गर्म चरण है, जबकि इसका ठंडा चरण ला नीना (La Niña) कहलाता है।
  • यह व्यापारिक पवनों (Trade Winds) के कमजोर पड़ने से जुड़ा है, जिससे गर्म पानी पश्चिमी प्रशांत से पूर्वी प्रशांत की ओर बढ़ता है।
  • अल नीनो का वैश्विक मौसम पर व्यापक प्रभाव पड़ता है, जिसमें कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़, जबकि अन्य में सूखा और जंगल की आग शामिल है।
  • भारत में, अल नीनो का संबंध आमतौर पर कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और कम वर्षा से होता है, जिससे कृषि उत्पादन और जल सुरक्षा प्रभावित होती है।
  • यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित करता है, जिससे मछली पकड़ने वाले उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • अल नीनो की तीव्रता और अवधि भिन्न हो सकती है, और इसके प्रभाव क्षेत्र-विशिष्ट होते हैं।
  • मौसम विज्ञान विभाग (IMD) जैसी एजेंसियां अल नीनो की निगरानी करती हैं और इसके संभावित प्रभावों के बारे में पूर्वानुमान जारी करती हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
अल नीनो का प्रभाव यह एक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी है, जिससे वैश्विक मौसम पैटर्न प्रभावित होते हैं। भारत में, यह अक्सर दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करता है, जिससे वर्षा में कमी आती है।
रायलसीमा में वर्षा की कमी सितंबर के पहले सप्ताह तक, रायलसीमा क्षेत्र में वर्षा में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जिसमें अन्नामय्या जिले में 78.3% की कमी सबसे अधिक है। यह कृषि और जल सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
भूजल स्तर में गिरावट श्री सत्य साई, अन्नामय्या और अनंतपुर जैसे जिलों में भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में कई मीटर गहरा हो गया है। यह पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
कृषि संकट कम वर्षा और गिरते भूजल स्तर के कारण मूंगफली, कपास, मक्का और लाल चना जैसी प्रमुख फसलों को नुकसान हो रहा है, जिससे किसानों के लिए दीर्घकालिक कृषि संकट की आशंका है।
सिंचाई नहरों का कम प्रवाह KC नहर जैसी महत्वपूर्ण सिंचाई प्रणालियों में पानी का प्रवाह कम हो गया है, जिससे लाखों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। तुंगभद्रा और श्रीशैलम जलाशयों में भी कमजोर प्रवाह देखा गया है।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं का क्षेत्रीय मौसम पैटर्न पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे वर्षा की कमी और सूखे जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं।
  • भूजल स्तर में गिरावट पारिस्थितिक संतुलन को बाधित करती है और भविष्य में जल उपलब्धता के लिए गंभीर चुनौतियाँ पेश करती है।

आर्थिक महत्व

  • कृषि क्षेत्र पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे फसल उत्पादन में कमी आती है और किसानों की आय प्रभावित होती है।
  • जल संकट से उद्योगों और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है जो पानी पर निर्भर हैं।

सामाजिक महत्व

  • पेयजल की कमी से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आबादी प्रभावित होती है, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
  • कृषि संकट ग्रामीण आजीविका को खतरे में डालता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और वितरण के लिए सरकारों पर दबाव बढ़ता है।
  • जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और शमन रणनीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देता है।

चुनौतियाँ

1. जल सुरक्षा

  • रायलसीमा क्षेत्र में वर्षा की भारी कमी और भूजल स्तर में लगातार गिरावट से पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
  • अल नीनो के मजबूत होने से भविष्य में सूखे की स्थिति और बिगड़ने की आशंका है, जिससे जल संकट गहरा सकता है।

2. कृषि संकट

  • कम वर्षा और अपर्याप्त सिंचाई के कारण मूंगफली, कपास, मक्का और लाल चना जैसी प्रमुख खरीफ फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।
  • फसल उत्पादन में गिरावट से किसानों की आय प्रभावित होगी और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

3. भूजल प्रबंधन

  • भूजल स्तर में तेजी से गिरावट चिंता का विषय है, खासकर अर्ध-शुष्क और ऊपरी इलाकों में, जहाँ बोरवेल पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी हो गई है।
  • अवैज्ञानिक भूजल दोहन और अपर्याप्त पुनर्भरण तंत्र इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं।

4. जलवायु परिवर्तन अनुकूलन

  • अल नीनो जैसी चरम मौसमी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को दर्शाती है।
  • किसानों और कृषि क्षेत्र को इन बदलती परिस्थितियों के अनुकूल बनाने के लिए प्रभावी रणनीतियों की कमी एक बड़ी चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
वर्षा में कमी रायलसीमा में औसत से 55.2% कम वर्षा, अन्नामय्या जिले में 78.3% की कमी।
भूजल स्तर में गिरावट श्री सत्य साई में 10.14 मीटर, अन्नामय्या में 7.07 मीटर और अनंतपुर में 5.46 मीटर की गिरावट।
फसल क्षति मूंगफली, कपास, मक्का और लाल चना जैसी खरीफ फसलों को नुकसान, जिससे कृषि संकट।
सिंचाई जल की कमी KC नहर और तुंगभद्रा/श्रीशैलम जलाशयों में कमजोर प्रवाह, जिससे सिंचाई प्रभावित।
तापमान वृद्धि कुर्नूल, कडप्पा और तिरुपति के कुछ हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री अधिक।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
  • अटल भूजल योजना (Atal Bhujal Yojana)

आगे की राह

  • जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा देना, विशेषकर अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में।
  • सूखा प्रतिरोधी फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देना।
  • सिंचाई दक्षता में सुधार के लिए सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) प्रणालियों जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर का व्यापक उपयोग।
  • भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharging) संरचनाओं का निर्माण और मौजूदा जल निकायों का जीर्णोद्धार।
  • किसानों को जलवायु-स्मार्ट कृषि (Climate-Smart Agriculture) तकनीकों और मौसम पूर्वानुमानों के बारे में शिक्षित करना।
  • अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों को सुलझाने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना और जल बँटवारे पर सहयोग बढ़ाना।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और अनुकूलन के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों का विकास और कार्यान्वयन।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अल नीनो प्रभाव · जल संकट · दक्षिण-पश्चिम मानसून · कृषि संकट · भूजल स्तर · जलवायु परिवर्तन · सूखा प्रबंधन · फसल विविधीकरण · सिंचाई प्रणाली · जल संरक्षण · मौसम संबंधी आपदाएँ · क्षेत्रीय असमानता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों में शक्तियों का वितरण, जिसमें जल राज्य सूची का विषय है।
  • अनुच्छेद 262: अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों से संबंधित जल विवादों का न्यायनिर्णयन।

अवधारणा प्रवाह

अल नीनो का मजबूत होना  →  दक्षिण-पश्चिम मानसून का कमजोर होना  →  रायलसीमा में वर्षा में भारी कमी  →  भूजल स्तर में गिरावट और सिंचाई जल की कमी  →  कृषि संकट और किसानों की आजीविका पर प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. अल नीनो प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है।
2. भारत में अल नीनो का संबंध आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा में कमी से होता है।
3. ला नीना की स्थिति में, प्रशांत महासागर का सतही जल सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है, जिससे भारत में अधिक वर्षा होती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जो पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने का वर्णन करता है। कथन 2 सही है। अल नीनो अक्सर भारत में कमजोर मानसून और सूखे से जुड़ा होता है। कथन 3 सही है। ला नीना अल नीनो के विपरीत है, जिसमें प्रशांत महासागर का सतही जल सामान्य से अधिक ठंडा होता है, और यह आमतौर पर भारत में मजबूत मानसून से जुड़ा होता है।

Q2. भारत में सूखा प्रबंधन के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) सूखा प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश जारी करता है।
  2. राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) वर्षा-सिंचित कृषि के विकास के लिए कार्य करता है।
  3. सूखा राहत कोष सीधे केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को वितरित किया जाता है।
  4. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) का उद्देश्य ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ प्राप्त करना है।

उत्तर: सूखा राहत कोष सीधे केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को वितरित किया जाता है। — सूखा राहत कोष (अब राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष – SDRF और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष – NDRF के तहत) केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक निर्धारित अनुपात में साझा किया जाता है, न कि सीधे केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वितरित किया जाता है। अन्य सभी कथन सही हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ अल नीनो की बढ़ती तीव्रता के कारण रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में उत्पन्न गंभीर जल संकट के संदर्भ में, भारत में कृषि पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, ऐसे संकटों से निपटने के लिए सरकार द्वारा अपनाई जा सकने वाली प्रभावी रणनीतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: अल नीनो और रायलसीमा में वर्तमान जल संकट की संक्षिप्त व्याख्या।
2. अल नीनो के कृषि पर दीर्घकालिक प्रभाव: फसल उत्पादन में कमी, भूजल स्तर में गिरावट, मृदा नमी में कमी, किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव, खाद्य सुरक्षा पर खतरा, पशुधन पर प्रभाव, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव।
3. सरकार द्वारा अपनाई जा सकने वाली प्रभावी रणनीतियाँ:
क. जल संरक्षण और प्रबंधन: वर्षा जल संचयन, सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर), जल-कुशल फसलों को बढ़ावा देना।
ख. जलवायु-लचीली कृषि: सूखा-प्रतिरोधी किस्मों का विकास और उपयोग, फसल विविधीकरण, कृषि-वानिकी।
ग. भूजल पुनर्भरण: चेक डैम, तालाबों का निर्माण, रिचार्ज पिट्स।
घ. पूर्व चेतावनी प्रणाली: IMD और अन्य एजेंसियों द्वारा सटीक मौसम पूर्वानुमान, किसानों तक समय पर जानकारी का प्रसार।
ङ. नीतिगत हस्तक्षेप: फसल बीमा योजनाएँ (जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में स्थिरता, ऋण राहत।
च. आधारभूत संरचना विकास: नहरों का आधुनिकीकरण, अंतर्राज्यीय नदी जल विवादों का समाधान।
छ. अनुसंधान और विकास: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन, नई प्रौद्योगिकियों का विकास।
4. निष्कर्ष: एक समग्र और समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी हो।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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