राष्ट्रपति मुर्मु का महाराष्ट्र-हरियाणा दौरा: सिंहस्थ कुंभ और हीरक जयंती में शामिल

राष्ट्रपति मुर्मु का महाराष्ट्र-हरियाणा दौरा: सिंहस्थ कुंभ और हीरक जयंती में शामिल

राष्ट्रपति मुर्मु का महाराष्ट्र-हरियाणा दौरा: सिंहस्थ कुंभ और हीरक जयंती में शामिल

राष्ट्रपति मुर्मु का महाराष्ट्र-हरियाणा दौरा: सिंहस्थ कुंभ और हीरक जयंती में शामिल — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का दौरा कार्यक्रम
आरेख: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का दौरा कार्यक्रम

✎ अनुच्छेद 3 के अंतर्गत नए राज्यों के गठन या सीमा-परिवर्तन के लिए संसद विधि बनाती है, और इसके विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक है; हरियाणा का गठन 1 नवंबर 1966 को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 से हुआ।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय संस्कृति (सिंहस्थ महाकुंभ, गुरुकुल शिक्षा परंपरा, भारत की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत)  |  GS Paper I — आधुनिक भारत का इतिहास (स्वामी श्रद्धानंद और आर्य समाज आंदोलन, शिक्षा सुधार, 1919 के बाद का राष्ट्रीय आंदोलन)  |  GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था (राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति, अनुच्छेद 1 और 3 के अंतर्गत राज्यों का गठन, संघवाद)
  • Prelims: राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति: अनुच्छेद 52 (राष्ट्रपति) और अनुच्छेद 74 (मंत्रिपरिषद की सलाह), अनुच्छेद 1 (भारत राज्यों का संघ है) और अनुच्छेद 3 (नए राज्यों का निर्माण और सीमाओं में परिवर्तन), पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 (हरियाणा राज्य का गठन, 1 नवंबर 1966), राज्य पुनर्गठन आयोग (1953) और राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956, सिंहस्थ महाकुंभ: गोदावरी नदी के तट पर नासिक-त्र्यंबकेश्वर में आयोजित, जो बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश से जुड़ा है, कुंभ मेला: यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में वर्ष 2017 में सम्मिलित, गुरुकुल कांगड़ी (हरिद्वार, 1902) और स्वामी श्रद्धानंद का शिक्षा दर्शन, कुरुक्षेत्र: महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता से जुड़ा ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल, हरियाणा में स्थित
  • Essay: भारतीय संघवाद में राज्यों की पहचान और राष्ट्रीय एकता: भाषा, संस्कृति और प्रशासनिक इकाई का संबंध, शिक्षा, परंपरा और आधुनिकता: प्राचीन ज्ञान-परंपरा के पुनर्पाठ की प्रासंगिकता

त्वरित पुनरावृत्ति: अनुच्छेद 3 के अंतर्गत नए राज्यों के गठन या सीमा-परिवर्तन के लिए संसद विधि बनाती है, और इसके विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक है; हरियाणा का गठन 1 नवंबर 1966 को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 से हुआ।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 31 अक्तूबर से 1 नवंबर 2026 तक महाराष्ट्र और हरियाणा के दौरे पर रहेंगी। 31 अक्तूबर को वे नासिक (महाराष्ट्र) में सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वज स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और ध्वजारोहण समारोह में शामिल होंगी तथा एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगी। 1 नवंबर को वे कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में राज्य गठन के 60वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हीरक जयंती’ (Diamond Jubilee) समारोह में भाग लेंगी और गुरुकुल, कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के शताब्दी समारोह से संबंधित वार्षिक उत्सव में सम्मिलित होंगी। यह दौरा राष्ट्रपति की औपचारिक एवं सांस्कृतिक सहभागिता को दर्शाता है, जबकि इसमें राज्य गठन की ऐतिहासिक वर्षगांठ और शिक्षा-परंपरा की शताब्दी दोनों का स्मरण सम्मिलित है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में राज्यों का भाषाई एवं प्रशासनिक पुनर्गठन स्वतंत्रता के बाद राज्य पुनर्गठन आयोग (1953) की सिफारिशों पर आधारित राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 से शुरू हुआ।
  • हरियाणा का गठन 1 नवंबर 1966 को पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत पंजाब राज्य से अलग होकर हुआ; इसी कारण प्रति वर्ष 1 नवंबर को राज्य का स्थापना दिवस मनाया जाता है।
  • स्वामी श्रद्धानंद (मुंशीराम) ने 1902 में हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की थी, जिसने भारतीय परंपरा पर आधारित आधुनिक शिक्षा का प्रयोग किया; उनकी हत्या 1926 में दिल्ली में हुई थी।
  • कुंभ मेला भारत के चार स्थानों (प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन) पर बारी-बारी से आयोजित होता है; सिंहस्थ नाम उस योग से जुड़ा है जिसमें बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करता है।
  • भारत में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं; वे राज्यपालों की नियुक्ति, संसद के सत्र का आह्वान तथा सार्वजनिक समारोहों में राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, और सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह से कार्य करते हैं।

राष्ट्रपति के सार्वजनिक दौरे और उनसे जुड़े संवैधानिक प्रावधान क्या हैं?

  • राष्ट्रपति भारतीय संघ के कार्यपालिका प्रमुख (Head of State) हैं; संविधान के अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति उनमें निहित है, जिसका प्रयोग वे मंत्रिपरिषद की सलाह से करते हैं (अनुच्छेद 74)।
  • राष्ट्रपति के सार्वजनिक दौरे प्रायः राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विरासत और सार्वजनिक सेवा के प्रतीक माने जाते हैं; ये दौरे नीति-निर्माण का हिस्सा नहीं होते, बल्कि संवैधानिक प्रतिनिधित्व की भूमिका निभाते हैं।
  • अनुच्छेद 1 घोषित करता है कि भारत राज्यों का संघ है, जबकि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत संसद विधि द्वारा नए राज्य बना सकती है या राज्यों की सीमाओं, क्षेत्रों और नामों में परिवर्तन कर सकती है।
  • अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्य-सीमा से संबंधित विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से ही संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है, और संबंधित राज्य के विधानमंडल के विचार उनके पास भेजे जाते हैं।
  • सिंहस्थ महाकुंभ गोदावरी नदी के तट पर नासिक-त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होता है; कुंभ मेला को यूनेस्को ने वर्ष 2017 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में सम्मिलित किया।
  • कुरुक्षेत्र का संबंध महाभारत युद्ध और श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश से है, और यहाँ का ब्रह्मसरोवर प्रमुख तीर्थ माना जाता है; यह हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है।
  • स्वामी श्रद्धानंद के गुरुकुल शिक्षा-मॉडल ने संस्कृत, भारतीय दर्शन और आधुनिक विषयों के समन्वय पर बल दिया, जो राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन की धारा से जुड़ा माना जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
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महत्व

सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व

  • सिंहस्थ महाकुंभ और कुंभ मेला संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में वर्ष 2017 में सम्मिलित हुआ था। इसलिए ऐसे आयोजनों में राष्ट्रपति की उपस्थिति इस विरासत के सम्मान का संकेत देती है।
  • स्वामी श्रद्धानंद का शताब्दी उत्सव शिक्षा में भारतीय मूल्यों और गुरुकुल परंपरा के आधुनिक पुनर्पाठ पर विमर्श का अवसर देता है।
  • कुरुक्षेत्र का महाभारत और गीता से जुड़ा ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्थान इस समारोह को सांस्कृतिक स्मृति का केंद्र बनाता है।

संघीय और प्रशासनिक महत्व

  • हरियाणा का 60 वर्ष का गठन-उत्सव राज्यों के पुनर्गठन और राज्य पहचान के प्रश्न को सार्वजनिक चर्चा में लाता है।
  • राष्ट्रपति का राज्य-दौरा केंद्र और राज्यों के बीच सौहार्द्र और सहयोगी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना को प्रतीकात्मक रूप से मजबूत करता है।
  • ऐसे दौरे राज्य प्रशासन, पुलिस और स्थानीय निकायों के समन्वय का व्यावहारिक अभ्यास भी होते हैं, जिससे बड़े आयोजनों के प्रबंधन की क्षमता का परीक्षण होता है।

संवैधानिक और लोकतांत्रिक महत्व

  • भारत में राष्ट्रपति राष्ट्र के प्रमुख और संघ के प्रतीक होते हैं। उनकी सार्वजनिक उपस्थिति इस संवैधानिक प्रतीकात्मकता को व्यवहार में लाती है।
  • संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं, इसलिए ऐसे दौरे सामान्यतः सरकार और राष्ट्रपति सचिवालय के समन्वय से तय होते हैं।

चुनौतियाँ

1. धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन

  • कुंभ जैसे विशाल आयोजनों में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति होती है। वीआईपी उपस्थिति से सुरक्षा और यातायात का दबाव बढ़ता है।
  • भगदड़, आपात चिकित्सा और स्वच्छता जैसे जोखिमों के लिए बहु-स्तरीय योजना आवश्यक होती है।

2. पर्यावरण और नदी-संरक्षण का दबाव

  • गोदावरी तट पर बड़े जन-समूह से जल प्रदूषण, ठोस अपशिष्ट और जैव-विविधता पर दबाव बढ़ता है।
  • आयोजन-स्थल पर अस्थायी निर्माण से तटीय पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।

3. राज्य गठन के बाद के क्षेत्रीय प्रश्न

  • हरियाणा का गठन पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत हुआ। इसके साथ चंडीगढ़ और जल-बंटवारे जैसे विवाद जुड़े रहे हैं, जिनका समाधान संघीय संवाद से होता है।
  • नए राज्यों और पुनर्गठन से जुड़े विषय सामाजिक-आर्थिक असमानता और क्षेत्रीय विकास के प्रश्न भी खड़े करते हैं।

4. शिक्षा में मूल्य और आधुनिकता का संतुलन

  • गुरुकुल परंपरा और आधुनिक औपचारिक शिक्षा के बीच पाठ्यक्रम, मूल्य-शिक्षा और रोज़गार-योग्यता का संतुलन एक चुनौती है।
  • शताब्दी-स्मृति से परंपरागत शिक्षा-संस्थाओं की प्रासंगिकता पर नीतिगत प्रश्न उठते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
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श ि क ् ष ा – म ू ल ् य क ा स ं त ु ल न
प र ं प र ा ग त ग ु र ु क ु ल श ि क ् ष ा औ र आ ध ु न ि क प ा ठ ् य क ् र म क े ब ी च त ा ल म े ल ब न ा न ा ।
प ् र त ी क ा त ् म क त ा ब न ा म न ी त ि – क ् र ि य ा न ् व य न
ऐ स े स म ा र ो ह ो ं क े स ं द े श क ो ठ ो स न ी त ि ग त प र ि ण ा म ो ं म े ं ब द ल न े क ी च ु न ौ त ी ।

आगे की राह

  • बड़े धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ समन्वित भीड़ प्रबंधन योजना को पहले से अंतिम रूप देना चाहिए।
  • कुंभ जैसे आयोजनों में जल-गुणवत्ता निगरानी, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अस्थायी ढांचों के पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
  • अंतरराज्यीय विवादों के समाधान के लिए अंतरराज्यीय परिषद (Inter-State Council) जैसे संस्थागत मंचों का नियमित उपयोग करना चाहिए।
  • पुनर्गठन के बाद के राज्यों में क्षेत्रीय असमानता को कम करने के लिए लक्षित विकास-योजनाओं की समीक्षा की जानी चाहिए।
  • परंपरागत शिक्षा-संस्थाओं को कौशल-विकास और आधुनिक विषयों से जोड़कर उनकी रोज़गार-योग्यता बढ़ानी चाहिए।
  • सांस्कृतिक विरासत के स्थलों के संरक्षण के लिए स्थानीय समुदायों को संरक्षण-प्रक्रिया में भागीदार बनाना चाहिए।
  • सार्वजनिक संवाद में राष्ट्रपति के संदेशों को शिक्षा, पर्यावरण और संघीय सहयोग जैसे नीतिगत विषयों से जोड़कर परीक्षा-उपयोगी विश्लेषण तैयार करना चाहिए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

संवैधानिक प्रमुख (Constitutional Head) · मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह (अनुच्छेद 74) · राज्य पुनर्गठन और नए राज्य का गठन (अनुच्छेद 3 और 4) · पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 · संघवाद (Federalism) · क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 72 और 161) · आधारभूत संरचना सिद्धांत (Basic Structure Doctrine) · न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) · राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत · राष्ट्रपति की प्रतीकात्मक भूमिका बनाम विवेकाधीन शक्तियाँ

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 3: राज्यों का नए राज्यों में गठन और सीमा-परिवर्तन
  • अनुच्छेद 4: पुनर्गठन-विधियों का अनुच्छेद 368 के संशोधन से अलग होना

अवधारणा प्रवाह

पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत हरियाणा का राज्य के रूप में गठन (1 नवंबर, 1966)  →  गठन के 60 वर्ष पूरे होने पर कुरुक्षेत्र में हीरक जयंती समारोह का आयोजन  →  राष्ट्रपति की उपस्थिति से राज्य-गठन की स्मृति और संघीय पहचान का राष्ट्रीय संदेश  →  उसी दौरे में गुरुकुल, कुरुक्षेत्र में स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान शताब्दी का वार्षिक उत्सव, जो शिक्षा और सुधार की विरासत को स्मरण कराता है  →  31 अक्तूबर को नासिक के सिंहस्थ महाकुंभ में ध्वजारोहण और सार्वजनिक संबोधन से धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत का सम्मान  →  इन आयोजनों से राज्य प्रशासन और केंद्र के बीच समन्वय, सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन की व्यावहारिक चुनौतियाँ सामने आती हैं

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य का नाम, सीमा या क्षेत्र बदलने वाला विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफ़ारिश के बिना संसद में पेश नहीं किया जा सकता।
2. अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को मृत्युदंड के मामलों में भी क्षमादान, लघुकरण और दंड-परिहार की शक्ति प्राप्त है।
3. अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल मृत्युदंड की सज़ा को भी क्षमा कर सकता है।
4. संसद विधि द्वारा नया राज्य बना सकती है, और ऐसी विधि को अनुच्छेद 368 के अधीन संविधान संशोधन नहीं माना जाता।

उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. चारों

उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 3 के प्रावधान के अनुसार ऐसे विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफ़ारिश आवश्यक है और उसे संबंधित राज्य विधानमंडल के विचार हेतु भेजा जाता है। कथन 2 सही है: मृत्युदंड के मामलों में क्षमादान की शक्ति अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति को प्राप्त है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल मृत्युदंड को क्षमा नहीं कर सकता, इसीलिए यह शक्ति राष्ट्रपति के पास है। कथन 4 सही है: अनुच्छेद 4 के अनुसार ऐसी विधि को अनुच्छेद 368 के अर्थ में संशोधन नहीं माना जाता।

Q2. निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
सूची I (अनुच्छेद)
1. अनुच्छेद 3
2. अनुच्छेद 61
3. अनुच्छेद 72
4. अनुच्छेद 80

सूची II (विषय)
a. राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया
b. क्षमादान की शक्ति
c. नए राज्यों का निर्माण और सीमाओं का परिवर्तन
d. राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य

सही सुमेल चुनिए:

  1. 1-c, 2-a, 3-b, 4-d
  2. 1-a, 2-c, 3-d, 4-b
  3. 1-b, 2-d, 3-a, 4-c
  4. 1-d, 2-b, 3-c, 4-a

उत्तर: 1-c, 2-a, 3-b, 4-d — अनुच्छेद 3 नए राज्यों के निर्माण और सीमाओं/नामों के परिवर्तन से संबंधित है (1-c)। अनुच्छेद 61 राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया देता है (2-a)। अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति देता है (3-b)। अनुच्छेद 80 राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा बारह सदस्यों के मनोनयन का प्रावधान करता है (4-d)।

Q3. कथन (A): हरियाणा का राज्य दिवस 1 नवंबर को मनाया जाता है।
कारण (R): हरियाणा राज्य का गठन पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत 1 नवंबर, 1966 से प्रभावी हुआ था।

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत हरियाणा 1 नवंबर, 1966 को अस्तित्व में आया, इसी कारण इस तिथि को राज्य स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। अतः कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है। इस वर्ष (2026) इसी अवसर पर कुरुक्षेत्र में हीरक जयंती समारोह आयोजित हो रहा है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के राष्ट्रपति को संविधान के अंतर्गत मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से कार्य करना होता है, इसलिए उनकी भूमिका को प्रायः प्रतीकात्मक माना जाता है। फिर भी राज्य-गठन की विधिक प्रक्रिया (अनुच्छेद 3) और क्षमादान जैसी शक्तियों में उनकी संवैधानिक भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। इस कथन की विवेचनात्मक समीक्षा कीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि यदि राष्ट्रपति किसी विधेयक पर सहमति रोकें या मंत्रिपरिषद की सलाह से असहमत हों, तो संवैधानिक रूप से क्या विकल्प उपलब्ध हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर संरचना: (1) परिचय: अनुच्छेद 52 के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है (अनुच्छेद 53), किंतु अनुच्छेद 74(1) के अनुसार वह मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से कार्य करेगा; 42वें संशोधन (1976) द्वारा यह सलाह बाध्यकारी की गई; अनुच्छेद 74(2) के अंतर्गत सलाह की जाँच न्यायालय में नहीं होती। शमशेर सिंह बनाम पंजाब राज्य (1974) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति/राज्यपाल सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे हैं। (2) प्रतीकात्मक पक्ष: डॉ. भीमराव आंबेडकर का संवैधानिक प्रमुख का विचार; ग्रैनविल ऑस्टिन की ‘कार्यशील संविधान’ अवधारणा; राष्ट्रीय उत्सव, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आयोजनों में राष्ट्रपति की उपस्थिति का सामाजिक-प्रतीकात्मक महत्व। (3) विधिक/संवैधानिक शक्तियाँ: अनुच्छेद 3 और उसके प्रावधान के अंतर्गत राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्र परिवर्तन हेतु राष्ट्रपति की पूर्व सिफ़ारिश और राज्य विधानमंडल को संदर्भ; पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 और जे.सी. शाह आयोग (1966) की सिफ़ारिशों के आधार पर हरियाणा का गठन; अनुच्छेद 72 में मृत्युदंड सहित क्षमादान की शक्ति; अनुच्छेद 111 में विधेयकों पर सहमति। (4) विवेकाधीन शक्ति और उसकी सीमाएँ: विधेयक पर सहमति रोकने के विकल्प (पुनर्विचार हेतु लौटाने का संदर्भ अनुच्छेद 111 के संदर्भ में); मंत्रिपरिषद की सलाह से असहमति पर संवैधानिक परिणाम, जैसे पुनर्विचार का अनुरोध या संसदीय उत्तरदायित्व; अनुच्छेद 61 के अंतर्गत महाभियोग सबसे अंतिम संवैधानिक उपाय है। (5) संघवाद और आधारभूत संरचना: केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में आधारभूत संरचना सिद्धांत; एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) में संघवाद को आधारभूत संरचना का अंग मानना तथा संवैधानिक संस्थाओं की शक्ति पर न्यायिक समीक्षा। (6) संतुलित निष्कर्ष: प्रतीकात्मकता और विवेकाधीन शक्तियों के बीच संतुलन; संवैधानिक मर्यादा, परंपरा और जवाबदेही का समन्वय; सुधार के सुझाव (जैसे सहमति के समय-सीमा संबंधी विमर्श) के साथ संतुलित समापन।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Haryana PCS (HPSC / HCS) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: भारत की राष्ट्रपति द्वारा 31 अक्तूबर से 1 नवंबर, 2026 तक हरियाणा राज्य के दौरे के दौरान निम्नलिखित में से कौन-सा कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है?

  1. हरियाणा राज्य स्थापना दिवस समारोह में शामिल होना
  2. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेना
  3. फरीदाबाद में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का उद्घाटन करना
  4. गुरुग्राम में आयोजित होने वाले सैन्य अभ्यास ‘गगन शक्ति’ का निरीक्षण करना

उत्तर: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भाग लेना — हरियाणा राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर को मनाया जाता है, जबकि राष्ट्रपति के दौरे की तिथि 31 अक्तूबर से 1 नवंबर तक है।

Mains: हरियाणा राज्य में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान राज्य सरकार द्वारा आयोजित किए जाने वाले प्रमुख कार्यक्रमों एवं उनके महत्व पर प्रकाश डालिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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