रेरा के कार्यान्वयन में राज्य सरकारों की भूमिका और चुनौतियाँ: UPSC के लिए महत्वपूर्ण

रेरा के कार्यान्वयन में राज्य सरकारों की भूमिका और चुनौतियाँ: UPSC के लिए महत्वपूर्ण

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय संविधान: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघवाद से संबंधित मुद्दे एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण तथा उसकी चुनौतियाँ।  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
  • Prelims: रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा), सातवीं अनुसूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची, रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण, केंद्रीय सलाहकार परिषद (CAC), फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र, प्रमोटर, घर खरीदार
  • Essay: भारत में शहरीकरण और आवास: चुनौतियाँ एवं समाधान, सुशासन और नियामक ढाँचा: आर्थिक विकास में भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए घर खरीदारों के हितों का संरक्षण करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) के कार्यान्वयन की स्थिति और इससे संबंधित विभिन्न उपायों की जानकारी दी है। मंत्रालय ने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में प्रोजेक्टों के पंजीकरण के दौरान आने वाली चुनौतियों के समाधान तथा रेरा के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक समिति का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट सभी रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरणों के साथ साझा की गई है। यह जानकारी रेरा के तहत घर खरीदारों के हितों के संरक्षण और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची-II (राज्य सूची) की प्रविष्टि 18 के अनुसार ‘भूमि’ तथा ‘उपनिवेशन’ राज्य के विषय हैं।
  • हालांकि, संसद ने सातवीं अनुसूची की सूची-III (समवर्ती सूची) की प्रविष्टि 6, 7 तथा 46 से प्राप्त शक्तियों के आधार पर रेरा अधिनियमित किया।
  • रेरा का मुख्य उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना और घर खरीदारों के हितों का संरक्षण करना है।
  • अधिनियम के तहत किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या बिक्री से पहले नियामक प्राधिकरण के साथ पंजीकरण अनिवार्य है।
  • प्रमोटरों को घर खरीदारों से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत एक पृथक बैंक खाते में जमा करना होता है, जिसका उपयोग केवल भूमि लागत और प्रोजेक्ट निर्माण के लिए किया जा सकता है।
  • रेरा में फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र का प्रावधान है, जिसके अंतर्गत मामलों के निपटारे के लिए 60 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) क्या है?

  • रेरा भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र को विनियमित करने और बढ़ावा देने के लिए संसद द्वारा अधिनियमित एक कानून है।
  • इसका प्राथमिक लक्ष्य घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट उद्योग में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित करना है।
  • अधिनियम के तहत, प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) और एक अपीलीय अधिकरण स्थापित करना अनिवार्य है।
  • किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का विज्ञापन, बुकिंग या बिक्री करने से पहले प्रमोटरों के लिए नियामक प्राधिकरण के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य है।
  • प्रमोटरों को प्रोजेक्ट से संबंधित सभी आवश्यक विवरण और स्वीकृतियों का प्रकटीकरण करना होता है, जिसमें प्रोजेक्ट का लेआउट, निर्माण अनुसूची और सभी आवश्यक सरकारी स्वीकृतियाँ शामिल हैं।
  • घर खरीदारों से प्राप्त राशि का कम से कम 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाते में जमा करना होता है, जिसका उपयोग केवल संबंधित प्रोजेक्ट के निर्माण और भूमि लागत के लिए किया जा सकता है।
  • अधिनियम में विवादों के त्वरित निपटान के लिए एक तंत्र का प्रावधान है, जिसमें नियामक प्राधिकरण और अपीलीय अधिकरण द्वारा 60 दिनों के भीतर मामलों का निपटान करना शामिल है।
  • रेरा की धारा 41 के अनुसार, आवासन और शहरी कार्य मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय सलाहकार परिषद (CAC) का गठन किया गया है, जो अधिनियम के कार्यान्वयन से संबंधित विषयों पर केंद्र सरकार को सलाह देती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पंजीकरण अनिवार्यता रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विज्ञापन, मार्केटिंग या बिक्री से पहले नियामक प्राधिकरण (Regulatory Authority) के साथ पंजीकरण अनिवार्य। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और धोखाधड़ी को रोकता है।
पृथक बैंक खाता घर खरीदारों से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य। यह राशि केवल भूमि लागत और प्रोजेक्ट निर्माण के लिए उपयोग की जा सकती है, जिससे धन के दुरुपयोग पर रोक लगती है।
सूचना का प्रकटीकरण प्रमोटरों के लिए प्रोजेक्ट से संबंधित सभी आवश्यक विवरण और स्वीकृतियों का खुलासा करना अनिवार्य। इससे घर खरीदारों को सूचित निर्णय लेने में मदद मिलती है।
तीव्र विवाद निपटान तंत्र रेरा में 60 दिनों की समय-सीमा के साथ विवादों के निपटान का प्रावधान। यह घर खरीदारों को त्वरित न्याय सुनिश्चित करता है।
जुर्माना और वसूली प्रावधानों के उल्लंघन पर प्रमोटर पर प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत के 10 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। देय ब्याज, जुर्माना या प्रतिकर की वसूली भू-राजस्व के बकाये के रूप में की जा सकती है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा: पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, जिससे इस क्षेत्र में अधिक पूंजी निवेश आकर्षित होता है।
  • आर्थिक संवृद्धि में योगदान: रियल एस्टेट क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालकों में से एक है। रेरा के प्रभावी कार्यान्वयन से इस क्षेत्र की संवृद्धि को बढ़ावा मिलता है, जिससे रोजगार सृजन होता है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि होती है।

सामाजिक महत्व

  • घर खरीदारों के हितों का संरक्षण: यह अधिनियम घर खरीदारों को धोखाधड़ी और देरी से बचाता है, जिससे उनके निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करके यह उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है और उन्हें सशक्त बनाता है।

शासनिक महत्व

  • नियमन और मानकीकरण: यह रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक समान नियामक ढांचा प्रदान करता है, जिससे पूरे देश में एकरूपता आती है।
  • विवाद समाधान: तीव्र विवाद निपटान तंत्र के माध्यम से यह न्यायपालिका पर बोझ कम करता है और विवादों का त्वरित और प्रभावी समाधान प्रदान करता है।

चुनौतियाँ

1. राज्यों द्वारा कार्यान्वयन में असमानता

  • चूंकि ‘भूमि’ और ‘उपनिवेशन’ राज्य सूची के विषय हैं, इसलिए राज्यों द्वारा रेरा के कार्यान्वयन में भिन्नता देखी जाती है। कुछ राज्यों ने अभी तक पूरी तरह से नियमों को अधिसूचित नहीं किया है या नियामक प्राधिकरणों को पर्याप्त शक्तियां नहीं दी हैं।
  • राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में प्रोजेक्टों के पंजीकरण के दौरान आने वाली चुनौतियों का समाधान करना और पात्र प्रोजेक्टों का पंजीकरण सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।

2. नियामक प्राधिकरणों की स्वायत्तता और क्षमता

  • कई राज्यों में नियामक प्राधिकरणों को कार्यात्मक और प्रशासनिक स्वायत्तता की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके प्रभावी कामकाज में बाधा आती है।
  • परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार पर्याप्त कार्मिकों की तैनाती सुनिश्चित करना एक चुनौती है, जिससे मामलों के निपटान में देरी हो सकती है।

3. प्रमोटरों द्वारा अनुपालन

  • कुछ प्रमोटर अभी भी अधिनियम के प्रावधानों, जैसे कि पृथक बैंक खाते में 70 प्रतिशत राशि जमा करना और सभी विवरणों का प्रकटीकरण, का पूर्णतः पालन नहीं करते हैं।
  • जुर्माना लगाने और वसूली की प्रक्रिया में भी चुनौतियां आती हैं, खासकर जब प्रमोटर सहयोग नहीं करते।

4. जागरूकता और शिक्षा का अभाव

  • घर खरीदारों और यहां तक कि कुछ प्रमोटरों के बीच भी रेरा के प्रावधानों और उनके अधिकारों/दायित्वों के बारे में जागरूकता की कमी है।
  • यह जागरूकता की कमी अधिनियम के पूर्ण लाभों को प्राप्त करने में बाधा डालती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
राज्यों द्वारा कार्यान्वयन में असमानता कुछ राज्यों में नियमों का अपूर्ण अधिसूचना या नियामक प्राधिकरणों को अपर्याप्त शक्तियां।
नियामक प्राधिकरणों की स्वायत्तता कार्यात्मक और प्रशासनिक स्वायत्तता की कमी, पर्याप्त कार्मिकों की अनुपलब्धता।
प्रमोटरों द्वारा अनुपालन पृथक बैंक खाते के प्रावधानों और सूचना प्रकटीकरण का पूर्णतः पालन न करना।
विवाद निपटान में देरी संसाधनों की कमी या प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण 60-दिवसीय समय-सीमा का पालन न हो पाना।
जागरूकता का अभाव घर खरीदारों और प्रमोटरों के बीच रेरा के प्रावधानों और अधिकारों के बारे में कम जानकारी।

आगे की राह

  • राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में रेरा के नियमों को पूरी तरह से अधिसूचित करने और नियामक प्राधिकरणों को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा निरंतर प्रोत्साहन और सहयोग प्रदान किया जाए।
  • नियामक प्राधिकरणों की कार्यात्मक और प्रशासनिक स्वायत्तता को सुदृढ़ किया जाए तथा परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार पर्याप्त और प्रशिक्षित कार्मिकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
  • रेरा के प्रावधानों, विशेषकर पृथक बैंक खाते में राशि जमा करने और सूचना प्रकटीकरण संबंधी आवश्यकताओं के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रमोटरों पर सख्त निगरानी रखी जाए।
  • घर खरीदारों और प्रमोटरों दोनों के बीच रेरा के अधिकारों और दायित्वों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएं।
  • विवाद निपटान तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों और प्रक्रियाओं को सुदृढ़ किया जाए, ताकि 60 दिनों की समय-सीमा का पालन सुनिश्चित हो सके।
  • केंद्रीय सलाहकार परिषद (CAC) की भूमिका को मजबूत किया जाए ताकि अधिनियम के कार्यान्वयन से संबंधित सभी विषयों पर केंद्र सरकार को प्रभावी सलाह और अनुशंसाएं मिल सकें।
  • हितधारकों, जैसे कि घर खरीदार संघों और रियल एस्टेट डेवलपर्स के साथ नियमित विचार-विमर्श जारी रखा जाए ताकि अधिनियम में आवश्यक संशोधनों और सुधारों की पहचान की जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) · घर खरीदारों का संरक्षण · रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता · जवाबदेही · राज्य सूची · समवर्ती सूची · फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र · केंद्रीय सलाहकार परिषद (सीएसी) · नियामक प्राधिकरण · प्रमोटर के दायित्व

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 246: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों के तहत कानून बनाने की संसद और राज्य विधानमंडलों की शक्ति।
  • सातवीं अनुसूची, सूची-II (राज्य सूची), प्रविष्टि 18: ‘भूमि’ तथा ‘उपनिवेशन’ राज्य के विषय।
  • सातवीं अनुसूची, सूची-III (समवर्ती सूची), प्रविष्टि 6: ‘संविदा’ से संबंधित विषय।
  • सातवीं अनुसूची, सूची-III (समवर्ती सूची), प्रविष्टि 7: ‘कार्यवाहियां’ से संबंधित विषय।
  • सातवीं अनुसूची, सूची-III (समवर्ती सूची), प्रविष्टि 46: ‘न्याय प्रशासन’ से संबंधित विषय।

अवधारणा प्रवाह

भूमि और उपनिवेशन राज्य सूची के विषय हैं।  →  संसद ने समवर्ती सूची की शक्तियों का उपयोग कर रेरा अधिनियमित किया।  →  रेरा का उद्देश्य रियल एस्टेट में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है।  →  प्रमोटरों के लिए पंजीकरण, पृथक खाता और प्रकटीकरण अनिवार्य है।  →  यह घर खरीदारों के हितों की रक्षा करता है और विवादों का त्वरित निपटान करता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेरा के अंतर्गत, किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विज्ञापन या बिक्री से पहले नियामक प्राधिकरण के साथ पंजीकरण अनिवार्य है।
2. प्रमोटर को घर खरीदारों से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत एक पृथक बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है, जिसका उपयोग केवल भूमि लागत और प्रोजेक्ट निर्माण के लिए किया जा सकता है।
3. रेरा में विवादों के निपटारे के लिए 60 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। रेरा के तहत, किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या बिक्री से पहले उसका नियामक प्राधिकरण के साथ पंजीकरण अनिवार्य है।
कथन 2 सही है। रेरा प्रमोटरों के लिए घर खरीदारों से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य करता है, जिसका उपयोग केवल भूमि लागत और प्रोजेक्ट निर्माण के लिए किया जा सकता है।
कथन 3 सही है। रेरा में फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान तंत्र का प्रावधान है, जिसके अंतर्गत मामलों के निपटारे के लिए 60 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) के उद्देश्यों को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता/दर्शाते है/हैं?
1. रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
2. घर खरीदारों के हितों का संरक्षण करना।
3. रियल एस्टेट प्रमोटरों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. केवल 1 और 2
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। रेरा का प्राथमिक उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, जिससे घर खरीदारों के हितों का संरक्षण किया जा सके। यह प्रमोटरों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए नहीं है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) के प्रमुख प्रावधानों का विश्लेषण कीजिए। यह अधिनियम भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने में कितना सफल रहा है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: रेरा अधिनियम, 2016 का संक्षिप्त परिचय, इसके अधिनियमन का उद्देश्य (घर खरीदारों और प्रमोटरों के बीच संविदात्मक संबंधों का विनियमन, पारदर्शिता और जवाबदेही)।
2. प्रमुख प्रावधान: निम्नलिखित बिंदुओं को विस्तार से समझाएँ:
क. अनिवार्य पंजीकरण: प्रोजेक्ट के विज्ञापन/बिक्री से पहले नियामक प्राधिकरण के साथ पंजीकरण।
ख. प्रमोटर के दायित्व: आवश्यक विवरणों का प्रकटीकरण, स्वीकृतियों की जानकारी, घर खरीदारों से प्राप्त राशि का 70% पृथक बैंक खाते में जमा करना (उपयोग केवल भूमि लागत और निर्माण के लिए)।
ग. विवाद निपटान तंत्र: फास्ट-ट्रैक विवाद निपटान (60 दिनों की समय-सीमा)।
घ. वसूली तंत्र: देय ब्याज, जुर्माना या प्रतिकर की भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूली (धारा 40)।
ङ. केंद्रीय सलाहकार परिषद (सीएसी): आवास और शहरी कार्य मंत्री की अध्यक्षता में, अधिनियम के कार्यान्वयन पर सलाह (धारा 41)।
च. उल्लंघन पर दंड: अनुमानित लागत के 10% तक का जुर्माना।
3. सफलता का मूल्यांकन: रेरा की सफलता का विश्लेषण निम्नलिखित पहलुओं पर करें:
क. पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि: पंजीकरण, प्रकटीकरण और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से।
ख. घर खरीदारों के हितों का संरक्षण: विलंब, धोखाधड़ी और अनुचित प्रथाओं से बचाव।
ग. विवाद समाधान में सुधार: फास्ट-ट्रैक तंत्र का प्रभाव।
घ. चुनौतियों और सीमाओं पर चर्चा: राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में कार्यान्वयन में असमानता, नियामक प्राधिकरणों की कार्यात्मक स्वायत्तता और पर्याप्त कार्मिकों की कमी, समिति की रिपोर्ट और सिफारिशें।
4. निष्कर्ष: रेरा के महत्व को दोहराते हुए, इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निरंतर प्रयासों और हितधारकों के साथ संवाद की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment