02 Oct लखनऊ में ‘ऑपरेशन जागृति’: युवाओं को नशे से बचाने का अभियान
✎ ऑपरेशन जागृति केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा मादक पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को नशा मुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु चलाया गया एक महत्वपूर्ण अभियान है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, सामाजिक मुद्दे | GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
- Prelims: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), ऑपरेशन जागृति, मादक पदार्थों का दुरुपयोग, नशा मुक्त भारत अभियान, वित्त मंत्रालय, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985
- Essay: मादक पदार्थों का दुरुपयोग: एक सामाजिक चुनौती और समाधान, युवा और नशा मुक्ति: राष्ट्र निर्माण में भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ऑपरेशन जागृति केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा मादक पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को नशा मुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु चलाया गया एक महत्वपूर्ण अभियान है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (Central Bureau of Narcotics – CBN) के लखनऊ स्थित डीएनसी कार्यालय ने ‘ऑपरेशन जागृति’ के अंतर्गत ए. पी. सेन मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज, लखनऊ में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग और इसकी लत के बारे में एक जागरूकता अभियान का आयोजन किया। इस अभियान में छात्रों को मादक पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई और उन्हें नशे से दूर रहने तथा समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
पृष्ठभूमि
- भारत में मादक पदार्थों का दुरुपयोग एक गंभीर सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों पर विनाशकारी प्रभाव डालता है।
- सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न नीतियां और कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें आपूर्ति में कमी (supply reduction), मांग में कमी (demand reduction) और नुकसान में कमी (harm reduction) के दृष्टिकोण शामिल हैं।
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985, भारत में मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है।
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत कार्य करता है और NDPS अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ जैसे राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने पर केंद्रित हैं।
- युवा आबादी को मादक पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति संवेदनशील माना जाता है, इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाना महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) और ऑपरेशन जागृति
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन एक केंद्रीय एजेंसी है।
- इसका मुख्य कार्य नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के प्रावधानों को लागू करना और देश में मादक पदार्थों की तस्करी को रोकना है।
- CBN अफीम पोस्त की खेती के पर्यवेक्षण, अवैध मादक पदार्थों की पहचान और जब्ती, तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से मादक पदार्थों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- ‘ऑपरेशन जागृति’ CBN द्वारा शुरू किया गया एक जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग और इसकी लत के हानिकारक प्रभावों के बारे में जनता, विशेषकर युवाओं को शिक्षित करना है।
- यह अभियान मादक पदार्थों के सेवन को रोकने के लिए व्यावहारिक तरीके सुझाता है और व्यक्तियों को नशे से दूर रहने तथा अपने समुदायों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- ऑपरेशन जागृति ‘नशा मुक्त भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर देता है, उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ऑपरेशन जागृति | मादक पदार्थों के दुरुपयोग और लत के प्रति जागरूकता फैलाने का एक विशेष अभियान। |
| केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) | भारत में मादक पदार्थों के नियंत्रण और प्रवर्तन के लिए जिम्मेदार प्रमुख एजेंसी। |
| युवाओं पर ध्यान | छात्रों को लक्षित कर भविष्य की पीढ़ियों को नशे से बचाने का प्रयास। |
| सामुदायिक भागीदारी | चिकित्सा पेशेवरों और सरकारी अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी। |
| नशा मुक्त भारत का लक्ष्य | राष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों के सेवन को समाप्त करने की दिशा में एक कदम। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- मादक पदार्थों का दुरुपयोग समाज में अपराध, हिंसा और स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाता है। जागरूकता अभियान इन सामाजिक बुराइयों को कम करने में मदद करते हैं।
- युवाओं को नशे से दूर रखकर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाता है, जिससे वे राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान दे सकें।
स्वास्थ्य महत्व
- मादक पदार्थों की लत गंभीर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है, जैसे एचआईवी/एड्स, हेपेटाइटिस, अवसाद और मनोविकृति। जागरूकता इन जोखिमों को कम करती है।
- नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों के उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता को कम करने में सहायक।
आर्थिक महत्व
- मादक पदार्थों के दुरुपयोग से उत्पादकता में कमी आती है, स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च बढ़ता है और कानून प्रवर्तन पर बोझ पड़ता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जागरूकता इन लागतों को कम करने में मदद करती है।
- नशे से मुक्त युवा कार्यबल देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
शासन और कानून-व्यवस्था
- मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री संगठित अपराधों को बढ़ावा देती है। जागरूकता अभियान कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रयासों को पूरक बनाते हैं।
- केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो जैसी एजेंसियों के प्रयासों से देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती है।
चुनौतियाँ
1. मादक पदार्थों की उपलब्धता
- अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के पार से मादक पदार्थों की तस्करी एक बड़ी चुनौती है।
- देश के भीतर भी अवैध रूप से मादक पदार्थों का उत्पादन और वितरण होता है।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन
2. युवाओं में बढ़ती लत
- पीयर प्रेशर, तनाव और जिज्ञासा जैसे कारक युवाओं को मादक पदार्थों की ओर धकेलते हैं।
- इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से मादक पदार्थों की जानकारी और उपलब्धता आसान हो गई है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, मानव संसाधन
3. पुनर्वास और उपचार की कमी
- नशे की लत से पीड़ित लोगों के लिए पर्याप्त पुनर्वास केंद्रों और उपचार सुविधाओं का अभाव है।
- सामाजिक कलंक के कारण लोग मदद मांगने से कतराते हैं।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय
4. कानूनी और प्रवर्तन संबंधी चुनौतियाँ
- मादक पदार्थ तस्करों के जटिल नेटवर्क को तोड़ना मुश्किल है।
- कानूनी प्रक्रियाओं में देरी और सबूतों की कमी अक्सर अपराधियों को दंडित करने में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, कानून-व्यवस्था
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सीमा पार तस्करी | भारत की लंबी और छिद्रपूर्ण सीमाएँ मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील हैं। |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग | ऑनलाइन माध्यमों से मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री और प्रचार। |
| जागरूकता की कमी | विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में मादक पदार्थों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जानकारी का अभाव। |
| सामाजिक स्वीकृति | कुछ समुदायों में कुछ मादक पदार्थों के प्रति ढीला रवैया या सांस्कृतिक स्वीकृति। |
| अपर्याप्त डेटा | मादक पदार्थों के दुरुपयोग की व्यापकता और पैटर्न पर विश्वसनीय और अद्यतन डेटा की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नशा मुक्त भारत अभियान (Nasha Mukt Bharat Abhiyaan)
आगे की राह
- अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करना, जिसमें केंद्रीय और राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां शामिल हों, ताकि मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सके।
- स्कूलों और कॉलेजों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना, जिसमें मादक पदार्थों के दुरुपयोग के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिणामों पर जोर दिया जाए।
- नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों के लिए सुलभ और किफायती उपचार और पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाना, साथ ही उनके सामाजिक पुन: एकीकरण पर ध्यान केंद्रित करना।
- समुदाय-आधारित पहलों को बढ़ावा देना, जिसमें स्थानीय नेता, धार्मिक संगठन और गैर-सरकारी संगठन (NGO) शामिल हों, ताकि जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाई जा सके।
- मादक पदार्थों के दुरुपयोग के पैटर्न, तस्करी मार्गों और नए पदार्थों की पहचान के लिए अनुसंधान और डेटा संग्रह को मजबूत करना।
- मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ लड़ाई में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना, विशेष रूप से सीमावर्ती देशों के साथ सूचना साझाकरण और संयुक्त अभियानों के माध्यम से।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मादक पदार्थों का दुरुपयोग · नशा मुक्ति अभियान · केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो · ऑपरेशन जागृति · युवाओं में जागरूकता · सामाजिक उत्तरदायित्व · नशा मुक्त भारत · स्वास्थ्य और कल्याण · नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट · सामुदायिक भागीदारी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 47: राज्य का कर्तव्य स्वास्थ्य में सुधार करना
अवधारणा प्रवाह
मादक पदार्थों का सेवन → शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव → सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ → जागरूकता अभियान और प्रवर्तन → नशा मुक्त समाज का निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करता है।
2. यह नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के प्रावधानों को लागू करने के लिए जिम्मेदार है।
3. ऑपरेशन जागृति, जिसका उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, CBN द्वारा शुरू किया गया एक अभियान है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्य करता है। कथन 2 सही है। CBN भारत में NDPS एक्ट, 1985 के तहत मादक पदार्थों की खेती, उत्पादन, व्यापार और उपभोग को नियंत्रित करने वाली प्रमुख एजेंसी है। कथन 3 सही है। ऑपरेशन जागृति CBN द्वारा मादक पदार्थों के दुरुपयोग और लत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चलाया गया एक अभियान है, जैसा कि हालिया समाचार में बताया गया है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा अधिनियम भारत में मादक पदार्थों के नियंत्रण और विनियमन से संबंधित है?
- औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940
- नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985
- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006
- बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986
उत्तर: नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 — नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 भारत में मादक पदार्थों के उत्पादन, कब्ज़े, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण और/या उपभोग को प्रतिबंधित करता है। अन्य अधिनियम अन्य संबंधित क्षेत्रों से संबंधित हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की बढ़ती समस्या पर चर्चा कीजिए और इस चुनौती से निपटने में सरकार तथा नागरिक समाज की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग की वर्तमान स्थिति और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का संक्षिप्त विवरण।
मुख्य भाग:
1. मादक पदार्थों के दुरुपयोग की समस्या के कारण: सीमा पार से तस्करी, आसान उपलब्धता, सामाजिक-आर्थिक दबाव, बेरोजगारी, मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे, जागरूकता की कमी।
2. मादक पदार्थों के दुरुपयोग के प्रभाव: व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव, परिवार पर बोझ, अपराध में वृद्धि, उत्पादकता में कमी, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा।
3. सरकार की भूमिका:
• विधायी उपाय: नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 और इसके संशोधन।
• प्रवर्तन एजेंसियां: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की भूमिका।
• जागरूकता अभियान: ‘नशा मुक्त भारत अभियान’, ‘ऑपरेशन जागृति’ जैसे कार्यक्रम।
• पुनर्वास और उपचार: नशा मुक्ति केंद्र, परामर्श सेवाएं।
• अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: अन्य देशों के साथ समन्वय।
4. नागरिक समाज की भूमिका:
• जागरूकता फैलाना: शिक्षा संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और सामुदायिक समूहों द्वारा अभियान।
• रोकथाम कार्यक्रम: युवाओं को लक्षित करने वाले कार्यक्रम।
• सहायता और पुनर्वास: पीड़ित परिवारों को सहायता, नशा मुक्ति में सहयोग।
• सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय स्तर पर रोकथाम और निगरानी में योगदान।
निष्कर्ष: मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के लिए सरकार और नागरिक समाज के बीच समन्वित और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Uttar Pradesh PCS (UPPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: उत्तर प्रदेश में ‘ऑपरेशन जागृति’ के संदर्भ में, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) और डीएनसी कार्यालय द्वारा चलाए गए मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं लत के प्रति जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- A. मादक पदार्थों के अवैध व्यापार को पूर्णतः समाप्त करना
- B. युवाओं एवं समाज में मादक पदार्थों के दुरुपयोग और उसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाना
- C. पुलिस अधिकारियों को मादक पदार्थों की पहचान एवं निस्तारण में प्रशिक्षित करना
- D. मादक पदार्थों के उत्पादन केंद्रों को बंद कराना
उत्तर: B. युवाओं एवं समाज में मादक पदार्थों के दुरुपयोग और उसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाना — ऑपरेशन जागृति का मुख्य उद्देश्य समाज विशेषकर युवाओं में मादक पदार्थों के दुरुपयोग और उसके गंभीर परिणामों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
Mains: उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थों के दुरुपयोग और लत की समस्या को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले प्रमुख कदमों का वर्णन कीजिए। साथ ही, ‘ऑपरेशन जागृति’ जैसे अभियानों की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर क्या उपाय किए जा सकते हैं?
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- इंदिरा गांधी प्राणी उद्यान में वन्यजीव सप्ताह का शुभारंभ, जानिए मुख्य गतिविधियां - October 3, 2026
- Sharam Samvad: Govt’s PR Campaign for Labour Codes in Delhi-NCR & Uttarakhand - October 2, 2026
- खादी उत्पादों पर 20% तक छूट: गांधी जयंती पर KVIC की पहल - October 2, 2026

No Comments