23 Jul लोकसभा अध्यक्ष ने लोकमान्य तिलक को दी श्रद्धांजलि: जानिए उनके योगदान और विचार
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, महत्वपूर्ण व्यक्तित्व | GS Paper II — भारतीय संविधान, संसद
- Prelims: बाल गंगाधर तिलक, लोकमान्य, स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, गरम दल, मराठा और केसरी, होमरूल लीग, संविधान सदन
- Essay: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रवाद का उदय और जन-भागीदारी, स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्श और आधुनिक भारत
त्वरित पुनरावृत्ति: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता थे जिन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा!’ के नारे के साथ जन-जागरण किया और स्वदेशी व आत्मनिर्भरता के सिद्धांतों का प्रचार किया।
यह खबर चर्चा में क्यों?
लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने 23 जुलाई 2026 को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर संसद सदस्यों, पूर्व सदस्यों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी लोकमान्य तिलक को श्रद्धांजलि दी। यह आयोजन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके अमूल्य योगदान और उनके प्रेरक विचारों को स्मरण करने का अवसर था।
पृष्ठभूमि
- बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था।
- उन्हें ‘लोकमान्य’ की उपाधि से सम्मानित किया गया, जिसका अर्थ है ‘लोगों द्वारा स्वीकार्य नेता’।
- तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ‘गरम दल’ (Extremist Faction) के प्रमुख नेताओं में से एक थे, जिसमें लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल भी शामिल थे (जिन्हें ‘लाल-बाल-पाल’ के नाम से जाना जाता है)।
- उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा!’ का प्रसिद्ध नारा दिया, जिसने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
- तिलक ने स्वदेशी (Swadeshi) और आत्मनिर्भरता (Self-reliance) के सिद्धांतों का प्रचार किया और ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उनके चित्र का अनावरण संविधान सदन (तत्कालीन संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में 28 जुलाई 1956 को तत्कालीन प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया था, जो राष्ट्र के प्रति उनके असाधारण योगदान का सम्मान था।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का योगदान
- तिलक एक प्रखर राष्ट्रवादी, दूरदर्शी नेता, समाज सुधारक और विद्वान थे जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी।
- उन्होंने ‘मराठा’ (अंग्रेजी में) और ‘केसरी’ (मराठी में) नामक समाचार पत्रों का संपादन किया, जिनके माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश नीतियों की आलोचना की और राष्ट्रवादी विचारों का प्रसार किया।
- तिलक ने गणेश उत्सव और शिवाजी जयंती जैसे सार्वजनिक उत्सवों को राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक चेतना जगाने के माध्यम के रूप में पुनर्जीवित किया।
- उन्होंने 1916 में एनी बेसेंट के साथ मिलकर अखिल भारतीय होमरूल लीग (All India Home Rule League) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर स्वशासन प्राप्त करना था।
- तिलक ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी (Deccan Education Society) की स्थापना में मदद की।
- उनके लेखन और भाषणों ने भारतीय राष्ट्रवाद की नींव रखी और आने वाली पीढ़ियों के स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया।
- वे ‘गीता रहस्य’ नामक पुस्तक के लेखक भी थे, जिसे उन्होंने मांडले जेल में अपने कारावास के दौरान लिखा था।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| प्रखर राष्ट्रवादी | भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रवाद की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। |
| दूरदर्शी नेता | भविष्य की भारत की परिकल्पना की और उसके लिए संघर्ष किया। |
| समाज सुधारक | सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई और समाज में सुधार लाने का प्रयास किया। |
| विद्वान | ज्ञान और शिक्षा के महत्व को समझा तथा अनेक ग्रंथों की रचना की। |
| स्वराज के प्रबल समर्थक | “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा!” के नारे के माध्यम से स्वतंत्रता की अलख जगाई। |
| जन-जागृति | आम जनता को राजनीतिक रूप से जागरूक किया और उन्हें स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा। |
महत्व
ऐतिहासिक महत्व
- लोकमान्य तिलक ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (Indian Freedom Struggle) को जन-आंदोलन में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उनके विचारों और नारों ने लाखों भारतीयों को औपनिवेशिक शासन (Colonial Rule) के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।
- उन्होंने स्वदेशी (Swadeshi) और आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया, जो आज भी प्रासंगिक हैं।
राजनीतिक महत्व
- तिलक ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के भीतर गरम दल (Extremist Faction) का नेतृत्व किया, जिसने अधिक आक्रामक और सीधी कार्रवाई की वकालत की।
- उनका “स्वराज” का आह्वान भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के लक्ष्य को स्पष्ट करने वाला पहला प्रमुख आह्वान था।
- उन्होंने राजनीतिक चेतना को शहरों से निकालकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाया।
सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व
- तिलक ने गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) और शिवाजी जयंती (Shivaji Jayanti) जैसे त्योहारों को सार्वजनिक मंचों में बदलकर राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक लामबंदी के उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया।
- उन्होंने शिक्षा और पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक सुधारों की वकालत की और लोगों को शिक्षित करने का प्रयास किया।
- उनके लेखन और भाषणों ने भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति गर्व की भावना को बढ़ावा दिया।
चुनौतियाँ
1. स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को बनाए रखना
- लोकमान्य तिलक जैसे नेताओं के बलिदान और आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना।
- राष्ट्रवाद की सही भावना को बढ़ावा देना, जो समावेशी हो और विभाजनकारी न हो।
यूपीएससी लिंक: भारतीय इतिहास: स्वतंत्रता संग्राम
2. सामाजिक समरसता का अभाव
- जाति, धर्म और क्षेत्र के आधार पर समाज में व्याप्त विभाजन को दूर करना।
- तिलक के सामाजिक सुधारों के दृष्टिकोण को आधुनिक संदर्भ में लागू करना।
यूपीएससी लिंक: भारतीय समाज: सामाजिक मुद्दे
3. आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का क्रियान्वयन
- वैश्वीकरण (Globalization) के युग में स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करना।
- आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) के साथ-साथ स्थानीय उत्पादन और उपभोग को प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था: आर्थिक विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| ऐतिहासिक व्यक्तियों की विरासत | विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं द्वारा ऐतिहासिक हस्तियों की विरासत की व्याख्या में भिन्नता। |
| राष्ट्रवाद की परिभाषा | आधुनिक संदर्भ में राष्ट्रवाद की समावेशी और विकासोन्मुखी परिभाषा को बनाए रखना। |
| सामाजिक सुधारों की गति | आज भी समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता, जातिगत भेदभाव जैसी कुरीतियों को दूर करने में धीमी प्रगति। |
| स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा | वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच स्वदेशी उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार हिस्सेदारी बढ़ाना। |
आगे की राह
- शैक्षणिक पाठ्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को व्यापक रूप से शामिल करना।
- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करना।
- स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों को मजबूत करना।
- सामाजिक समरसता और समानता के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाना।
- युवाओं को लोकमान्य तिलक जैसे नेताओं के आदर्शों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित करना।
- संसद और अन्य सार्वजनिक मंचों पर राष्ट्रीय महत्व के व्यक्तियों को सम्मान देना जारी रखना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बाल गंगाधर तिलक · भारतीय स्वतंत्रता संग्राम · स्वराज · राष्ट्रवाद · समाज सुधारक · गरम दल · मराठा · केसरी · होमरूल लीग · गणेश उत्सव · शिवाजी उत्सव · पुणे सार्वजनिक सभा
अवधारणा प्रवाह
लोकमान्य तिलक की जयंती पर पुष्पांजलि → उनके योगदान का स्मरण → स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका → स्वराज, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का आह्वान → वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. बाल गंगाधर तिलक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा!’ का प्रसिद्ध नारा दिया था।
2. उन्होंने ‘मराठा’ और ‘केसरी’ नामक समाचार पत्रों का संपादन किया था।
3. वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदारवादी दल से संबंधित थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 और 2 सही हैं। बाल गंगाधर तिलक ने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा!’ का नारा दिया था और ‘मराठा’ (अंग्रेजी में) तथा ‘केसरी’ (मराठी में) समाचार पत्रों का संपादन किया था। कथन 3 गलत है क्योंकि वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गरम दल के प्रमुख नेता थे, न कि उदारवादी दल के।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी संस्था/गतिविधि बाल गंगाधर तिलक से संबंधित है/हैं?
1. दक्कन शिक्षा सोसायटी
2. गणेश उत्सव का सार्वजनिक उत्सव
3. होमरूल लीग आंदोलन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — बाल गंगाधर तिलक दक्कन शिक्षा सोसायटी के संस्थापकों में से एक थे। उन्होंने महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव की शुरुआत की थी ताकि लोगों को एकजुट किया जा सके। वे एनी बेसेंट के साथ होमरूल लीग आंदोलन से भी जुड़े थे, जिसकी उन्होंने 1916 में स्थापना की थी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ बाल गंगाधर तिलक को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख राष्ट्रवादी और दूरदर्शी नेता के रूप में देखा जाता है। उनके योगदानों का विश्लेषण कीजिए जिन्होंने आमजन में राजनीतिक चेतना जागृत करने में अग्रणी भूमिका निभाई और स्वराज के विचार को लोकप्रिय बनाया।
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में बाल गंगाधर तिलक के परिचय से शुरुआत करें, जिसमें उन्हें राष्ट्रवादी, दूरदर्शी नेता और समाज सुधारक के रूप में वर्णित किया जाए। दूसरे भाग में उनके प्रमुख योगदानों पर विस्तार से चर्चा करें, जैसे ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा, ‘मराठा’ और ‘केसरी’ जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से जन जागरण, सार्वजनिक गणेश उत्सव और शिवाजी उत्सव का आयोजन, तथा होमरूल लीग आंदोलन में उनकी भूमिका। यह भी बताएं कि कैसे इन प्रयासों ने आमजन में राजनीतिक चेतना को बढ़ावा दिया और स्वराज के विचार को लोकप्रिय बनाया। अंत में, उनके योगदान के महत्व और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर उनके स्थायी प्रभाव का सार प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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