06 Aug लोकसभा ने पारित किया कराधान विधेयक, यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर की अनुमति
✎ यह विधेयक भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करने, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने और UPI तथा RuPay कार्ड भुगतानों पर MDR के संबंध में नीतिगत लचीलापन लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, निवेश मॉडल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में विकास
- Prelims: कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, UPI, RuPay कार्ड, MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट), इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक, डेटा सेंटर
- Essay: डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन: भारत की प्रगति और चुनौतियाँ, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: यह विधेयक भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करने, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने और UPI तथा RuPay कार्ड भुगतानों पर MDR के संबंध में नीतिगत लचीलापन लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक लोकसभा में बिना चर्चा के पारित हो गया है। इस विधेयक का उद्देश्य भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को समर्थन देना और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग आसान बनाना है। इसके अतिरिक्त, यह विधेयक UPI और RuPay कार्ड भुगतानों के लिए मौजूदा शून्य-MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) व्यवस्था में बदलाव करने हेतु एक कानूनी ढांचा भी प्रदान करता है।
पृष्ठभूमि
- यह विधेयक कराधान और अन्य कानूनों में संशोधन करता है, जिसका मुख्य लक्ष्य भारत को वैश्विक विनिर्माण और डिजिटल सेवाओं का केंद्र बनाना है।
- विधेयक का एक महत्वपूर्ण प्रावधान भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में संशोधन करना है, ताकि UPI और RuPay डेबिट कार्ड भुगतानों पर MDR लगाने का कानूनी आधार मिल सके।
- वर्तमान में, बैंक और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को UPI और RuPay डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क लगाने से प्रतिबंधित किया गया है (शून्य-MDR व्यवस्था)।
- यह विधेयक 5 जून को जारी अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसने सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors) द्वारा अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट प्रदान की थी।
- यह विधेयक फंड प्रबंधकों को भारत में स्थानांतरित करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे उनके वैश्विक आय पर देश में कर लगने से रोकने के लिए आवश्यक शर्तों की संख्या कम हो जाती है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए, विधेयक भारत में अनुबंध निर्माताओं (contract manufacturers) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली विदेशी कंपनियों के लिए मौजूदा आयकर छूट को 2040-41 तक बढ़ाता है।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है?
- मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है जो एक व्यापारी (मर्चेंट) अपने ग्राहकों से डिजिटल भुगतान (जैसे डेबिट/क्रेडिट कार्ड या UPI) स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करता है।
- यह शुल्क आमतौर पर लेनदेन मूल्य के प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है।
- MDR का उद्देश्य भुगतान अवसंरचना (जैसे POS मशीनें, भुगतान गेटवे) स्थापित करने और बनाए रखने की लागत को कवर करना है।
- वर्तमान में, भारत में UPI और RuPay डेबit कार्ड भुगतानों पर शून्य MDR लागू है, जिसका अर्थ है कि व्यापारियों को इन भुगतानों को स्वीकार करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है।
- शून्य MDR व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देना और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ाना था।
- प्रस्तावित विधेयक केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह अधिसूचना के माध्यम से उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान विधियों या लेनदेन को निर्दिष्ट कर सके जो शुल्क-मुक्त रहेंगे, जिससे MDR व्यवस्था में बदलाव की संभावना बनती है।
- RBI गवर्नर ने पहले सुझाव दिया था कि UPI लेनदेन पर MDR लगाने की लागत किसी को वहन करनी होगी, खासकर ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में संशोधन | UPI और RuPay कार्ड पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) शुल्क लगाने का कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, जिससे डिजिटल भुगतान प्रणालियों की स्थिरता सुनिश्चित हो सकेगी। |
| विदेशी पूंजी आकर्षित करना | इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डेटा केंद्रों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कराधान संबंधी बाधाओं को कम करता है। |
| घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा | अनुबंध निर्माताओं (contract manufacturers) के माध्यम से भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट को 2040-41 तक बढ़ाता है। |
| डेटा केंद्र और क्लाउड सेवाएँ | विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करने हेतु नियामक ढांचे को सरल बनाता है, जिससे प्रक्रिया निश्चितता (process certainty) बढ़ती है। |
| विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors – FPIs) को प्रोत्साहन | सरकारी प्रतिभूतियों से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट प्रदान करता है, जिससे भारत में निवेश आकर्षित होता है। |
| फंड प्रबंधकों का भारत में स्थानांतरण | भारत में फंड प्रबंधकों के स्थानांतरण को सुगम बनाने के लिए शर्तों को कम करता है, जिससे उनकी वैश्विक आय पर कराधान से बचा जा सके। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह विधेयक भारत में विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डेटा केंद्र क्षेत्रों में, एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करेगा।
- MDR प्रावधानों में बदलाव से डिजिटल भुगतान प्रणालियों के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल तैयार हो सकता है, जिससे उनके बुनियादी ढांचे के विकास और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
- घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को प्रोत्साहन मिलने से ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Self-Reliant India) पहल को बल मिलेगा और रोजगार सृजन में वृद्धि होगी।
रणनीतिक महत्व
- डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं के लिए नियामक ढांचे को सरल बनाने से भारत वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
- विदेशी फंड प्रबंधकों को भारत में स्थानांतरित करने की सुविधा से भारत एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में उभर सकता है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के प्रावधान भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
शासनिक महत्व
- यह विधेयक सरकार को डिजिटल भुगतान के विभिन्न तरीकों पर शुल्क लगाने या छूट देने की शक्ति प्रदान करता है, जिससे नीति निर्माण में लचीलापन आता है।
- नियामक निश्चितता (regulatory certainty) प्रदान करके, यह विधेयक विदेशी निवेशकों और कंपनियों के लिए भारत में व्यापार करना आसान बनाता है।
- अध्यादेश को विधेयक से बदलने का प्रावधान विधायी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करता है।
चुनौतियाँ
1. MDR का उपभोक्ताओं पर प्रभाव
- UPI लेनदेन पर MDR लगाने से उपभोक्ताओं, विशेषकर छोटे व्यापारियों और निम्न-आय वर्ग के लोगों पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है।
- डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति धीमी हो सकती है यदि शुल्क बहुत अधिक हो या इसे स्पष्ट रूप से संप्रेषित न किया जाए।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन
2. विदेशी निवेश पर निर्भरता
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए विदेशी कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता दीर्घकालिक स्थिरता के लिए चुनौतियाँ पैदा कर सकती है।
- वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव विदेशी निवेश प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे घरेलू उत्पादन लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश मॉडल, औद्योगिक नीति
3. नियामक जटिलताएँ
- MDR शुल्क लगाने के लिए विभिन्न भुगतान मोड और लेनदेन प्रकारों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया जटिल हो सकती है।
- डेटा स्थानीयकरण (data localization) और डेटा सुरक्षा (data security) से संबंधित मुद्दों को विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए सरल नियामक ढांचे के साथ संतुलित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: नियामक ढाँचा, ई-शासन
4. राजकोषीय प्रभाव
- विदेशी कंपनियों और निवेशकों को दी जाने वाली व्यापक आयकर छूट से सरकार के राजस्व संग्रह पर दबाव पड़ सकता है।
- दीर्घकालिक कर छूटों का मूल्यांकन और उनका प्रभाव राजकोषीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: राजकोषीय नीति, कराधान
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| UPI पर MDR | छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ने की संभावना, डिजिटल लेनदेन की वृद्धि दर पर नकारात्मक प्रभाव। |
| विदेशी निवेश का आकर्षण | वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेश प्रवाह में अस्थिरता का जोखिम, घरेलू क्षमताओं के विकास की आवश्यकता। |
| इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला | चीन जैसे देशों पर घटकों के लिए अत्यधिक निर्भरता, भू-राजनीतिक तनावों से आपूर्ति बाधित होने का जोखिम। |
| डेटा केंद्र विनियमन | डेटा सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करते हुए विदेशी कंपनियों के लिए नियामक ढांचे को सरल बनाने में संतुलन बनाना। |
| राजस्व पर प्रभाव | व्यापक कर छूटों के कारण सरकार के राजस्व संग्रह पर संभावित दबाव और राजकोषीय घाटे पर इसका असर। |
| विधायी प्रक्रिया | विपक्ष के विरोध के कारण बिना चर्चा के विधेयक पारित होना, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जवाबदेही पर सवाल। |
आगे की राह
- MDR शुल्क के कार्यान्वयन के लिए एक चरणबद्ध दृष्टिकोण अपनाना, जिसमें छोटे लेनदेन को छूट दी जाए और बड़े लेनदेन पर न्यूनतम शुल्क लगाया जाए।
- डिजिटल भुगतान प्रणालियों के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल विकसित करना जो नवाचार को बढ़ावा दे और उपभोक्ताओं पर अनुचित बोझ न डाले।
- घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना।
- विदेशी निवेश के साथ-साथ घरेलू कंपनियों को भी प्रोत्साहन देना ताकि आत्मनिर्भरता और लचीलापन सुनिश्चित हो सके।
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करते हुए डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी नियामक ढाँचा विकसित करना।
- कर छूटों के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना और यह सुनिश्चित करना कि वे वांछित आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त कर रहे हैं।
- संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श सुनिश्चित करना ताकि लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक · इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण · विदेशी पूंजी · भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम · UPI लेनदेन · मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) · शून्य-MDR व्यवस्था · डिजिटल भुगतान · राजकोषीय नीतियां · आर्थिक संवृद्धि · मेक इन इंडिया · डेटा केंद्र
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में कराधान’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 265’, ‘note’: ‘कानून के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 110’, ‘note’: ‘धन विधेयक की परिभाषा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 117’, ‘note’: ‘वित्त विधेयकों के संबंध में विशेष प्रावधान’}
अवधारणा प्रवाह
कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित हुआ → भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन → UPI/RuPay पर MDR लगाने का कानूनी ढाँचा → इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन → डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं का सरलीकरण → भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह और आर्थिक विकास
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026, का उद्देश्य भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना है।
2. यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करता है ताकि सरकार को UPI और RuPay कार्ड भुगतानों के लिए मौजूदा शून्य-MDR व्यवस्था को बदलने का कानूनी ढाँचा मिल सके।
3. यह विधेयक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट प्रदान करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक का एक प्रमुख उद्देश्य भारत में विदेशी पूंजी को आकर्षित करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन करके MDR व्यवस्था में बदलाव का प्रावधान करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह विधेयक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित आय पर आयकर छूट प्रदान करता है।
Q2. मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. MDR वह शुल्क है जो एक व्यापारी अपने ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देता है।
2. वर्तमान में, UPI और RuPay डेबिट कार्ड के माध्यम से किए गए भुगतानों पर कोई MDR नहीं लगता है।
3. कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026, सरकार को कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड को शुल्क-मुक्त रखने के लिए अधिकृत करता है।
उपरोक्त में से कौन से कथन सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि MDR वह लागत है जो व्यापारी डिजिटल लेनदेन के लिए वहन करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि वर्तमान में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर शून्य-MDR व्यवस्था लागू है। कथन 3 भी सही है क्योंकि विधेयक सरकार को यह अधिकार देता है कि वह अधिसूचना के माध्यम से कुछ भुगतान मोड को शुल्क-मुक्त घोषित कर सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने में किस प्रकार सहायक होगा? साथ ही, UPI लेनदेन पर MDR के संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: विधेयक के मुख्य उद्देश्यों का संक्षिप्त विवरण – इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और विदेशी पूंजी आकर्षित करना।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के उपाय:
क. विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट का विस्तार (2040-41 तक)।
ख. सीमा शुल्क-बंधुआ गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक घटकों के भंडारण पर 15-वर्षीय आयकर छूट।
ग. विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक ढांचे का सरलीकरण और भारतीय डेटा केंद्रों के उपयोग को बढ़ावा देना।
घ. ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत पहल से संबंध।
3. विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उपाय:
क. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित आय पर आयकर छूट।
ख. फंड प्रबंधकों के भारत में स्थानांतरण को सुगम बनाना।
ग. ‘प्रक्रिया निश्चितता’ (process certainty) प्रदान करना।
4. UPI लेनदेन पर MDR के संभावित प्रभाव:
क. MDR का अर्थ और वर्तमान शून्य-MDR व्यवस्था।
ख. MDR लागू होने के संभावित सकारात्मक प्रभाव: भुगतान प्रणाली प्रदाताओं और बैंकों के लिए राजस्व वृद्धि, नवाचार को प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचे में निवेश।
ग. MDR लागू होने के संभावित नकारात्मक प्रभाव: डिजिटल लेनदेन की लागत में वृद्धि, छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर बोझ, डिजिटल भुगतान अपनाने की गति पर प्रभाव, वित्तीय समावेशन पर असर।
घ. सरकार की भूमिका: कुछ लेनदेन को शुल्क-मुक्त रखने की शक्ति का उपयोग।
5. निष्कर्ष: विधेयक के समग्र आर्थिक प्रभावों का संतुलन और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य पर MDR के प्रभाव का संक्षिप्त सारांश।
स्रोत: Times of India
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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