लोकसभा ने पारित किया कराधान विधेयक, यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर का प्रावधान

Taxation bill clears Lok Sabha, allows provision for MDR on UPI transactions — concept mind map

लोकसभा ने पारित किया कराधान विधेयक, यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर का प्रावधान

✎ कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य विदेशी पूंजी आकर्षित करना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और UPI लेनदेन पर MDR के प्रावधान की अनुमति देकर डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित करना है।

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UPI/RuPay MDR Amendment

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय  |  GS Paper III — निवेश मॉडल  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव
  • Prelims: कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR), एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI), RuPay कार्ड, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), प्रत्यक्ष विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI), इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, डेटा केंद्र
  • Essay: भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था का भविष्य: चुनौतियाँ और अवसर, आर्थिक विकास में कराधान नीतियों की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य विदेशी पूंजी आकर्षित करना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और UPI लेनदेन पर MDR के प्रावधान की अनुमति देकर डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक (Taxation and Other Laws (Amendment) Bill) लोकसभा में पारित किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारत में स्थित डेटा केंद्रों का उपयोग करना आसान बनाना है। इसके अतिरिक्त, यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में संशोधन करता है और सरकार को UPI तथा RuPay कार्ड भुगतानों के लिए मौजूदा शून्य-MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) व्यवस्था को बदलने के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।

पृष्ठभूमि

  • वर्तमान में, बैंक और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को UPI और RuPay डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क लगाने से प्रतिबंधित किया गया है।
  • प्रस्तावित परिवर्तनों के तहत, केंद्र सरकार को एक अधिसूचना के माध्यम से उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान विधियों या लेनदेन को निर्दिष्ट करने का अधिकार होगा जो शुल्क-मुक्त रहेंगे।
  • यह विधेयक 5 जून, 2020 को जारी अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसने सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors – FPI) द्वारा अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट प्रदान की थी।
  • यह विधेयक फंड प्रबंधकों को भारत में स्थानांतरित करने की सुविधा भी प्रदान करता है, जिससे उनके वैश्विक आय पर देश में कर लगने से रोकने के लिए आवश्यक शर्तों की संख्या कम हो जाती है।
  • घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए, विधेयक उन विदेशी कंपनियों के लिए मौजूदा आयकर छूट को 2040-41 तक बढ़ाता है जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने के लिए अनुबंध निर्माताओं (contract manufacturers) को नियुक्त करती हैं।

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है?

  • मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो एक व्यापारी (merchant) अपने ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करता है।
  • यह शुल्क आमतौर पर लेनदेन मूल्य के प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है।
  • MDR का उद्देश्य भुगतान अवसंरचना (payment infrastructure) के रखरखाव और उन्नयन की लागत को कवर करना है, जिसमें पॉइंट-ऑफ-सेल (PoS) टर्मिनल, नेटवर्क कनेक्टिविटी और धोखाधड़ी की रोकथाम शामिल है।
  • भारत में, सरकार ने डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देने के लिए UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR को शून्य कर दिया था।
  • शून्य MDR नीति का अर्थ है कि व्यापारियों को इन भुगतानों को स्वीकार करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है, जिससे डिजिटल लेनदेन अधिक आकर्षक हो जाते हैं।
  • हालांकि, शून्य MDR बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए राजस्व हानि का कारण बनता है, जिससे उन्हें अपनी सेवाओं को बनाए रखने और विस्तारित करने में चुनौती आती है।
  • प्रस्तावित विधेयक सरकार को UPI और RuPay लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति देने के लिए एक कानूनी आधार प्रदान करता है, जिससे भविष्य में शुल्क लगाने का विकल्प खुल जाएगा।
  • MDR का पुनरुद्धार डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित करने और नवाचार को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है, लेकिन यह व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर लागत का बोझ भी डाल सकता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में संशोधन UPI और RuPay कार्ड भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors – FPIs) के लिए आयकर छूट सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर छूट, जिससे विदेशी पूंजी आकर्षित होगी।
फंड प्रबंधकों का भारत में स्थानांतरण भारत में फंड प्रबंधकों को आकर्षित करने के लिए शर्तों में कमी, जिससे देश में वित्तीय गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के लिए आयकर छूट का विस्तार विदेशी कंपनियों के लिए 2040-41 तक आयकर छूट, जो भारत में अनुबंध निर्माताओं (contract manufacturers) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाती हैं।
कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक घटकों के भंडारण के लिए आयकर छूट इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) को मजबूत करने के लिए 15 साल की छूट।
विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक ढाँचे का सरलीकरण भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करने के लिए मौजूदा अनुमोदन और अधिसूचना आवश्यकताओं को हटाना।

महत्व

आर्थिक संवृद्धि और निवेश

  • विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाता है।
  • MDR प्रावधानों में बदलाव से डिजिटल भुगतान प्रणालियों के लिए राजस्व मॉडल को मजबूत करने में मदद मिल सकती है, जिससे उनके विस्तार और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देता है, जिससे रोजगार सृजन और तकनीकी उन्नति होती है।
  • कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउस के लिए छूट से भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र

  • UPI और RuPay पर MDR का संभावित कार्यान्वयन भुगतान सेवा प्रदाताओं और बैंकों के लिए स्थिरता ला सकता है, जिससे वे अपनी सेवाओं में और निवेश कर सकें।
  • सरकार को यह तय करने की शक्ति कि कौन से भुगतान मोड शुल्क-मुक्त रहेंगे, यह सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय समावेशन (financial inclusion) और छोटे लेनदेन प्रभावित न हों।

नियामक सरलीकरण

  • विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए नियामक आवश्यकताओं को सरल बनाने से भारत में डेटा केंद्रों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे डिजिटल बुनियादी ढाँचा मजबूत होगा।
  • फंड प्रबंधकों के स्थानांतरण को सुगम बनाने से भारत एक वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में उभर सकता है।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल भुगतान पर MDR का प्रभाव

  • UPI और RuPay पर MDR लागू होने से छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है, जिससे डिजिटल लेनदेन की स्वीकार्यता प्रभावित हो सकती है।
  • यह वित्तीय समावेशन के प्रयासों को धीमा कर सकता है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहाँ नकदी लेनदेन अभी भी प्रमुख है।

2. विदेशी निवेश पर निर्भरता

  • विदेशी पूंजी पर अत्यधिक निर्भरता वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के प्रति देश की अर्थव्यवस्था को संवेदनशील बना सकती है।
  • घरेलू उद्योगों को भी समान प्रोत्साहन और समर्थन की आवश्यकता है ताकि वे विदेशी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें।

3. राजकोषीय प्रभाव

  • विभिन्न क्षेत्रों में दी गई आयकर छूट से सरकार के राजस्व पर दबाव पड़ सकता है, जिससे राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) बढ़ सकता है।
  • इन छूटों की प्रभावशीलता और लागत-लाभ विश्लेषण (cost-benefit analysis) का नियमित मूल्यांकन आवश्यक है।

4. प्रक्रियात्मक अनिश्चितता

  • कानून में संशोधन के माध्यम से सरकार को MDR दरों को अधिसूचित करने की शक्ति देने से नीतिगत अनिश्चितता बनी रह सकती है, क्योंकि दरें भविष्य में बदल सकती हैं।
  • स्थिर और पूर्वानुमेय नीतिगत ढाँचा निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक होता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
UPI/RuPay पर MDR छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ, डिजिटल लेनदेन की वृद्धि पर संभावित नकारात्मक प्रभाव।
राजस्व हानि विभिन्न आयकर छूटों के कारण सरकार के राजस्व में कमी, राजकोषीय स्थिरता पर दबाव।
नीतिगत अनिश्चितता MDR दरों को अधिसूचित करने की सरकारी शक्ति से भविष्य में दरों में बदलाव की संभावना, निवेशकों के लिए अनिश्चितता।
घरेलू बनाम विदेशी उद्योग विदेशी कंपनियों को दिए गए व्यापक प्रोत्साहन से घरेलू विनिर्माताओं के लिए समान अवसर की कमी का मुद्दा।
वित्तीय समावेशन MDR के कारण कम मूल्य वाले लेनदेन पर शुल्क लगने से वित्तीय समावेशन के प्रयासों में बाधा।

आगे की राह

  • MDR लागू करते समय छोटे लेनदेन और निम्न-आय वर्ग के उपभोक्ताओं को शुल्क से छूट देने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि वित्तीय समावेशन प्रभावित न हो।
  • डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के सभी हितधारकों (बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता, व्यापारी) के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल विकसित किया जाना चाहिए।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में घरेलू कंपनियों को भी समान प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान किया जाना चाहिए ताकि वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
  • आयकर छूटों के राजकोषीय प्रभाव का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए और आवश्यकतानुसार समायोजन किए जाने चाहिए।
  • MDR दरों और शुल्क-मुक्त लेनदेन के संबंध में एक स्पष्ट और पारदर्शी नीतिगत ढाँचा स्थापित किया जाना चाहिए ताकि नीतिगत अनिश्चितता कम हो।
  • डेटा केंद्रों और क्लाउड सेवाओं के लिए नियामक सरलीकरण को और बढ़ाया जाना चाहिए ताकि भारत को एक वैश्विक डिजिटल हब बनाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक · UPI लेनदेन · मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) · भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 · इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण · प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) · राजकोषीय नीति · डिजिटल भुगतान · आर्थिक संवृद्धि · कर छूट · डेटा केंद्र · विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला

अवधारणा प्रवाह

कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित।  →  भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन।  →  सरकार को UPI/RuPay पर MDR लगाने का कानूनी ढाँचा मिला।  →  इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और विदेशी निवेश को प्रोत्साहन हेतु आयकर छूट।  →  डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य भारत में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना है।
2. यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करता है।
3. वर्तमान में, UPI और RuPay डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं पर बैंक और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं द्वारा कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक का एक प्रमुख उद्देश्य भारत में विदेशी पूंजी को आकर्षित करना और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन का प्रावधान करता है ताकि UPI और RuPay कार्ड भुगतान के लिए मौजूदा शून्य-MDR व्यवस्था को बदलने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान किया जा सके। कथन 3 भी सही है क्योंकि वर्तमान में, UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर कोई MDR शुल्क नहीं लगाया जाता है, जिससे यह उपयोगकर्ताओं के लिए निःशुल्क है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रावधान कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 में शामिल है/हैं?
1. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट।
2. भारत में फंड प्रबंधकों के स्थानांतरण को सुगम बनाना।
3. भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने के लिए अनुबंध निर्माताओं को शामिल करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट का विस्तार।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि विधेयक जून में जारी अध्यादेश का स्थान लेता है जिसने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट दी थी। कथन 2 भी सही है क्योंकि विधेयक फंड प्रबंधकों को भारत में स्थानांतरित करने के लिए शर्तों की संख्या को कम करके इसे सुगम बनाना चाहता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि विधेयक उन विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट को 2040-41 तक बढ़ाता है जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने के लिए अनुबंध निर्माताओं को शामिल करती हैं।

Q3. मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे सटीक रूप से इसकी व्याख्या करता है?

  1. यह वह शुल्क है जो बैंक ATM से नकद निकासी पर लगाते हैं।
  2. यह वह कमीशन है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करते हैं।
  3. यह वह ब्याज दर है जो केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों से उधार लेने पर वसूलता है।
  4. यह वह कर है जो सरकार ऑनलाइन लेनदेन पर लगाती है।

उत्तर: यह वह कमीशन है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करते हैं। — MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वह शुल्क है जो व्यापारी क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या UPI जैसे डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करते हैं। यह डिजिटल लेनदेन को संसाधित करने की लागत को कवर करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधानों की चर्चा करें। यह विधेयक भारत में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे प्रभावित कर सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** विधेयक का संक्षिप्त परिचय, इसके मुख्य उद्देश्य (विदेशी पूंजी आकर्षित करना, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा देना) का उल्लेख।
2. **विधेयक के प्रमुख प्रावधान:**
* **MDR पर प्रावधान:** भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन, UPI और RuPay कार्ड भुगतान पर MDR लागू करने की सरकार की शक्ति।
* **विदेशी पूंजी और निवेश:** विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी प्रतिभूतियों से आय पर आयकर छूट।
* **फंड प्रबंधकों का स्थानांतरण:** भारत में फंड प्रबंधकों के स्थानांतरण को सुगम बनाने के लिए शर्तों में कमी।
* **इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण को बढ़ावा:**
* अनुबंध निर्माताओं के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली विदेशी कंपनियों के लिए आयकर छूट का विस्तार (2040-41 तक)।
* कस्टम-बॉन्डेड गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक घटकों के भंडारण के लिए 15 साल की आयकर छूट।
* **क्लाउड सेवा प्रदाता:** भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करने के लिए नियामक ढांचे का सरलीकरण।
3. **इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण पर प्रभाव:**
* **सकारात्मक:** प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि, घरेलू विनिर्माण क्षमता का विस्तार, रोजगार सृजन, आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण, ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा।
* **चुनौतियाँ:** वैश्विक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता।
4. **डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव:**
* **MDR का प्रभाव:**
* **सकारात्मक:** भुगतान सेवा प्रदाताओं और बैंकों के लिए राजस्व मॉडल में सुधार, नवाचार को प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचे में निवेश।
* **नकारात्मक:** छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर संभावित बोझ, UPI की ‘निःशुल्क’ प्रकृति पर प्रभाव, डिजिटल लेनदेन की वृद्धि दर पर संभावित असर।
* **सरकार की भूमिका:** विशिष्ट लेनदेन को शुल्क-मुक्त रखने की शक्ति का महत्व।
5. **निष्कर्ष:** विधेयक के समग्र आर्थिक संवृद्धि और डिजिटल इंडिया लक्ष्यों के लिए महत्व का सारांश, संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कि यह कैसे निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा दे सकता है, जबकि डिजिटल भुगतान की पहुंच और सामर्थ्य को बनाए रखने की चुनौती भी है।

स्रोत: Times of India


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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