लोकसभा ने पारित किया बिल, बैंकों को यूपीआई पर शुल्क लगाने की मिलेगी अनुमति

Lok Sabha passes Bill to authorise Govt. to permit banks to levy charges on UPI transactions — concept mind map

लोकसभा ने पारित किया बिल, बैंकों को यूपीआई पर शुल्क लगाने की मिलेगी अनुमति

✎ लोकसभा ने 'भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007' में संशोधन करने वाला विधेयक पारित किया है, जो केंद्र सरकार को बैंकों और सेवा प्रदाताओं को UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार देता है, जिसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था एवं नियोजन, संसाधन जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय।  |  GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
  • Prelims: UPI, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR), डिजिटल भुगतान, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), आयकर अधिनियम, 1961
  • Essay: भारत में डिजिटल क्रांति और इसका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, डिजिटल अर्थव्यवस्था: चुनौतियाँ और अवसर

त्वरित पुनरावृत्ति: लोकसभा ने ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007’ में संशोधन करने वाला विधेयक पारित किया है, जो केंद्र सरकार को बैंकों और सेवा प्रदाताओं को UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार देता है, जिसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

लोकसभा ने ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित किया है, जिसमें ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007’ में संशोधन का प्रावधान है। यह संशोधन केंद्र सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) तथा अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार देता है। यह कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जबकि अभी तक UPI लेनदेन शुल्क-मुक्त थे।

पृष्ठभूमि

  • UPI लेनदेन, RTGS (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) और NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर) के विपरीत, अब तक सेवा शुल्क से मुक्त रहे हैं, जिससे इनकी लोकप्रियता में भारी वृद्धि हुई है।
  • सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान सेवाओं पर उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए एक छोटा शुल्क लगाना है, ताकि बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं (PSPs) और भुगतान अवसंरचना फर्मों के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल सुनिश्चित किया जा सके।
  • यह संशोधन मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाने का प्रयास करता है, जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड पर शुल्क लगाने से रोकता था।
  • यह विधेयक कराधान पर एक व्यापक कानून का हिस्सा है, जिसमें आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में भी संशोधन शामिल हैं।

UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) क्या है?

  • UPI भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित एक त्वरित भुगतान प्रणाली है।
  • यह इंटर-बैंक पीयर-टू-पीयर (P2P) और पीयर-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए एक ही मोबाइल एप्लिकेशन से कई बैंक खातों को शक्ति प्रदान करता है।
  • यह IMPS (तत्काल भुगतान सेवा) अवसंरचना पर निर्मित है और चौबीसों घंटे, सातों दिन उपलब्ध है।
  • UPI का उपयोग करके, उपयोगकर्ता तुरंत धन भेज और प्राप्त कर सकते हैं, बिलों का भुगतान कर सकते हैं और ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं।
  • यह एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) का उपयोग करता है, जिससे बैंक खाता विवरण साझा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
  • UPI ने भारत में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे वित्तीय समावेशन और नकदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन यह संशोधन सरकार को UPI और अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है।
धारा 10A में बदलाव यह बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने से रोकने वाले मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाता है।
कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 का हिस्सा यह व्यापक कराधान कानून का एक हिस्सा है, जो विभिन्न वित्तीय और कराधान प्रावधानों को संशोधित करता है।
छोटे शुल्क लगाने का उद्देश्य इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए डिजिटल भुगतान सेवाओं पर छोटे शुल्क लगाना है, जबकि बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल सुनिश्चित करना है।
डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा यह डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सेवा प्रदाताओं को प्रोत्साहन प्रदान करने में मदद करेगा।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं (PSPs) के लिए राजस्व का एक नया स्रोत खोलेगा, जिससे उन्हें UPI जैसे डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे के रखरखाव और उन्नयन में निवेश करने में मदद मिलेगी।
  • यह डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित करेगा, क्योंकि सेवा प्रदाताओं को अपनी सेवाओं के लिए मुआवजा मिलेगा, जिससे नवाचार और विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
  • छोटे व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर संभावित शुल्क का प्रभाव पड़ सकता है, जिससे डिजिटल लेनदेन की लागत बढ़ सकती है।

शासन और नीतिगत निहितार्थ

  • सरकार को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और शुल्क लगाने के बीच संतुलन बनाना होगा, ताकि वित्तीय समावेशन के लक्ष्य प्रभावित न हों।
  • यह कदम डिजिटल अर्थव्यवस्था में सरकार की भूमिका को दर्शाता है, जहां वह भुगतान प्रणालियों के विनियमन और राजस्व मॉडल को प्रभावित कर सकती है।
  • पारदर्शिता और उचित मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए नियामक तंत्रों को मजबूत करने की आवश्यकता होगी, ताकि उपभोक्ताओं का शोषण न हो।

सामाजिक प्रभाव

  • डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन अपनाने की गति धीमी हो सकती है, जहां लागत संवेदनशीलता अधिक होती है।
  • यह डिजिटल साक्षरता और वित्तीय समावेशन के प्रयासों को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहली बार डिजिटल भुगतान का उपयोग कर रहे हैं।
  • हालांकि, यह डिजिटल भुगतान प्रणालियों की विश्वसनीयता और सुरक्षा में सुधार कर सकता है, क्योंकि सेवा प्रदाताओं के पास बेहतर बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए अधिक संसाधन होंगे।

चुनौतियाँ

1. डिजिटल समावेशन पर प्रभाव

  • छोटे शुल्क भी उन लोगों के लिए डिजिटल भुगतान को कम आकर्षक बना सकते हैं जिनकी आय कम है या जो पहली बार डिजिटल लेनदेन कर रहे हैं।
  • इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान अपनाने की गति धीमी हो सकती है, जहां नकदी का उपयोग अभी भी व्यापक है।

2. उपभोक्ता विश्वास और व्यवहार

  • UPI के ‘मुफ्त’ होने की धारणा के कारण, शुल्क लगाने से उपभोक्ताओं में असंतोष पैदा हो सकता है और वे नकदी लेनदेन की ओर लौट सकते हैं।
  • शुल्क की संरचना और पारदर्शिता महत्वपूर्ण होगी ताकि उपभोक्ता इसे स्वीकार कर सकें।

3. प्रतिस्पर्धा और नवाचार

  • यदि शुल्क बहुत अधिक होते हैं, तो यह नए भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार में प्रवेश करना मुश्किल बना सकता है और नवाचार को बाधित कर सकता है।
  • यह बड़े खिलाड़ियों को लाभ पहुंचा सकता है जिनके पास शुल्क को अवशोषित करने की अधिक क्षमता है।

4. राजस्व मॉडल की स्थिरता

  • शुल्क लगाने से बैंकों और PSPs को राजस्व मिलेगा, लेकिन यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि यह राजस्व मॉडल दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ हो और डिजिटल भुगतान के विकास को बाधित न करे।
  • शुल्क की दरें और उनका विनियमन एक नाजुक संतुलन स्थापित करेगा।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
डिजिटल लेनदेन की लागत में वृद्धि उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए UPI लेनदेन महंगा हो सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान अपनाने की दर प्रभावित हो सकती है।
वित्तीय समावेशन पर प्रभाव कम आय वाले समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को अपनाने में बाधा आ सकती है, जिससे वित्तीय समावेशन के लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।
उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव उपभोक्ता मुफ्त UPI के आदी हो चुके हैं; शुल्क लगने से वे नकदी लेनदेन की ओर वापस लौट सकते हैं।
नियामक चुनौतियाँ शुल्क की दरों का निर्धारण और उनका विनियमन एक जटिल कार्य होगा, जिसमें सभी हितधारकों के हितों को संतुलित करना होगा।
प्रतियोगिता पर प्रभाव छोटे भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार में बने रहना मुश्किल हो सकता है, जिससे प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है।

आगे की राह

  • शुल्क की दरों को न्यूनतम रखा जाए और उन्हें धीरे-धीरे लागू किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को अनुकूलन का समय मिल सके।
  • छोटे लेनदेन (जैसे ₹100 से कम) को शुल्क से मुक्त रखा जाए या उन पर बहुत कम शुल्क लगाया जाए, ताकि छोटे व्यापारियों और दैनिक उपयोगकर्ताओं पर बोझ कम हो।
  • शुल्क से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा डिजिटल साक्षरता और वित्तीय समावेशन कार्यक्रमों में निवेश किया जाए।
  • एक पारदर्शी शुल्क संरचना विकसित की जाए और उपभोक्ताओं को शुल्क के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित किया जाए।
  • सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुल्क दरों की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि बाजार की गतिशीलता और उपभोक्ता प्रतिक्रिया के आधार पर समायोजन किया जा सके।
  • भुगतान सेवा प्रदाताओं को नवाचार और सुरक्षा में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जाए, ताकि डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो सके।
  • वैकल्पिक राजस्व मॉडल की खोज की जाए जो डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ सेवा प्रदाताओं के लिए भी टिकाऊ हों।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 · UPI शुल्क · डिजिटल भुगतान · मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) · वित्तीय समावेशन · डिजिटल अर्थव्यवस्था · भुगतान सेवा प्रदाता (PSP) · राजकोषीय नीति · आयकर अधिनियम, 1961 · संवहनीय राजस्व मॉडल · संसद की विधायी शक्ति · वित्तीय नवाचार

अवधारणा प्रवाह

लोकसभा ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया।  →  इस विधेयक में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन शामिल है।  →  संशोधन धारा 10A को हटाता है जो बैंकों को UPI पर शुल्क लगाने से रोकता था।  →  यह सरकार को बैंकों को UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार देता है।  →  बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता अब UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगा सकते हैं।  →  इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाना है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, बैंकों और प्रणाली प्रदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर कोई शुल्क लगाने से रोकता है।
2. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 269SU, 50 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर वाले बड़े व्यवसायों को विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड स्वीकार करने के लिए अनिवार्य करती है।
3. UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए एक संवहनीय राजस्व मॉडल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि अधिनियम वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर शुल्क लगाने पर रोक लगाता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह धारा बड़े व्यवसायों के लिए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान स्वीकार करना अनिवार्य करती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि विधेयक का उद्देश्य बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए राजस्व मॉडल बनाना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)’ का सबसे सटीक वर्णन करता है?

  1. यह एक शुल्क है जो बैंक ग्राहकों से UPI लेनदेन के लिए लेते हैं।
  2. यह वह शुल्क है जो व्यापारी प्रत्येक डिजिटल लेनदेन के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करते हैं।
  3. यह सरकार द्वारा डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए बैंकों को दी जाने वाली सब्सिडी है।
  4. यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित ब्याज दर है।

उत्तर: यह वह शुल्क है जो व्यापारी प्रत्येक डिजिटल लेनदेन के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करते हैं। — मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो एक व्यापारी प्रत्येक डिजिटल लेनदेन के लिए अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करता है। यह शुल्क लेनदेन को संसाधित करने की लागत को कवर करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में प्रस्तावित संशोधनों के आलोक में, UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की सरकार की अनुमति के निहितार्थों का आलोचनात्मक परीक्षण करें। क्या यह कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगा या वित्तीय समावेशन के प्रयासों को बाधित करेगा? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: परिचय में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में प्रस्तावित संशोधन और UPI शुल्क लगाने की अनुमति के संदर्भ को स्पष्ट करें। मुख्य भाग में, इसके सकारात्मक निहितार्थों पर चर्चा करें, जैसे बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए संवहनीय राजस्व मॉडल, बुनियादी ढांचे में निवेश को प्रोत्साहन, और नवाचार को बढ़ावा। साथ ही, इसके संभावित नकारात्मक निहितार्थों का भी विश्लेषण करें, जैसे उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों पर वित्तीय बोझ, डिजिटल लेनदेन में कमी की संभावना, और वित्तीय समावेशन के प्रयासों पर प्रभाव। विभिन्न हितधारकों (उपभोक्ता, व्यापारी, बैंक, सरकार) के दृष्टिकोण को शामिल करें। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें जो डिजिटल भुगतान के भविष्य और वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत उपायों का सुझाव दे।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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