लोकसभा में पारित टैक्स संशोधन बिल: जानिए यूपीआई लेनदेन और ऑफशोर फंड नियमों में क्या बदलाव

Tax amendment bill passed in Lok Sabha: What changes for UPI transactions, offshore fund norms — concept mind map

लोकसभा में पारित टैक्स संशोधन बिल: जानिए यूपीआई लेनदेन और ऑफशोर फंड नियमों में क्या बदलाव

✎ कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करके सरकार को UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति देता है, जिसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था: संसद और राज्य विधायिका—संरचना, कार्यप्रणाली, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय। सरकारी बजटिंग।
  • Prelims: भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, UPI (एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस), मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR), डिजिटल भुगतान, राजकोषीय नीति
  • Essay: भारत में डिजिटल क्रांति: अवसर और चुनौतियाँ, समावेशी विकास में प्रौद्योगिकी की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करके सरकार को UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति देता है, जिसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, लोकसभा ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। इस विधेयक में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन का प्रस्ताव है, जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI सहित अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति दे सकता है। यह कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाने और भारत को वैश्विक पूंजी, विनिर्माण तथा व्यवसाय के लिए अधिक आकर्षक स्थान बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पृष्ठभूमि

  • भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 भारत में भुगतान और निपटान प्रणालियों के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
  • वर्तमान में, UPI लेनदेन पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगता है, जिससे ये उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए निःशुल्क हैं।
  • रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) जैसे अन्य भुगतान माध्यमों पर सेवा शुल्क लगता है।
  • शून्य MDR नीति का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था, लेकिन इससे बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए राजस्व हानि हुई है।
  • संशोधन का उद्देश्य बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाना है, ताकि वे डिजिटल भुगतान बुनियादी ढाँचे में निवेश जारी रख सकें।
  • यह विधेयक आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में भी संशोधन करता है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक पूंजी के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है?

  • मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो एक व्यापारी अपने ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करता है।
  • यह शुल्क आमतौर पर लेनदेन मूल्य के प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है।
  • MDR बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए डिजिटल भुगतान बुनियादी ढाँचे को बनाए रखने और उन्नत करने के लिए राजस्व का एक स्रोत है।
  • भारत में, सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए UPI लेनदेन पर MDR को समाप्त कर दिया था, जिसे ‘शून्य MDR’ नीति के रूप में जाना जाता है।
  • प्रस्तावित संशोधन सरकार को UPI लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति देता है, जिससे बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को राजस्व प्राप्त हो सकेगा।
  • MDR शुल्क अंततः व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है, जिससे डिजिटल लेनदेन की लागत प्रभावित हो सकती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन यह संशोधन बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI सहित अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति देता है। यह डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाने में मदद करेगा।
MDR पर मौजूदा कानूनी प्रावधानों को हटाना पहले, बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता UPI लेनदेन पर MDR शुल्क नहीं ले सकते थे। इस प्रावधान को हटाने से उन्हें शुल्क लगाने का अधिकार मिलेगा, जिससे उनकी परिचालन लागत की वसूली हो सकेगी।
उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव वर्तमान में, UPI लेनदेन उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क हैं। हालांकि, यह विधेयक सरकार को भविष्य में इस ढांचे को संशोधित करने का अधिकार देता है, जिससे नीतिगत निर्णयों के आधार पर शुल्क लग सकते हैं।
व्यापारियों पर प्रभाव MDR शुल्क लगने की संभावना से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है, जिससे उनके मूल्य निर्धारण और उपभोक्ता व्यवहार पर असर पड़ सकता है।
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम को आयकर अधिनियम से अलग करना यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम को आयकर अधिनियम से अलग करता है, जिससे सरकार को प्रत्यक्ष विधायी समायोजन के बिना शून्य-MDR ढांचे को संशोधित करने का कानूनी अधिकार मिलता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह संशोधन बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल सुनिश्चित करके भारत में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के विकास और निरंतरता को बढ़ावा देगा।
  • MDR शुल्क की अनुमति से वित्तीय संस्थानों को UPI जैसे डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे के रखरखाव और उन्नयन में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे नवाचार और दक्षता बढ़ेगी।
  • यह विधेयक भारत को वैश्विक पूंजी, विनिर्माण और व्यवसाय के लिए एक अधिक आकर्षक और अनुमानित स्थान बनाने में मदद करेगा, जिससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

शासन और नीतिगत महत्व

  • सरकार को शून्य-MDR ढांचे को संशोधित करने का कानूनी अधिकार मिलने से डिजिटल भुगतान नीतियों में अधिक लचीलापन आएगा, जिससे बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार समायोजन किया जा सकेगा।
  • यह कदम डिजिटल भुगतान क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप के दायरे को स्पष्ट करता है, जिससे नियामक निश्चितता बढ़ती है और हितधारकों के लिए भविष्य की नीतियों का अनुमान लगाना आसान होता है।
  • विधेयक का उद्देश्य भारत के वित्तीय कानूनों को आधुनिक बनाना और उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप लाना है, विशेष रूप से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए कर छूट के प्रावधानों के संबंध में।

सामाजिक महत्व

  • हालांकि वर्तमान में उपभोक्ताओं के लिए UPI लेनदेन निःशुल्क हैं, भविष्य में शुल्क लगने की संभावना से डिजिटल भुगतान अपनाने की दर पर असर पड़ सकता है, खासकर ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग के लोगों के बीच।
  • व्यापारियों पर MDR शुल्क का बोझ अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि के माध्यम से उपभोक्ताओं पर डाला जा सकता है, जिससे दैनिक लेनदेन की लागत बढ़ सकती है।
  • डिजिटल भुगतान के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगा, जिससे अधिक लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाया जा सकेगा।

चुनौतियाँ

1. उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ

  • यदि भविष्य में UPI लेनदेन पर शुल्क लगाया जाता है, तो यह उपभोक्ताओं, विशेषकर छोटे लेनदेन करने वालों के लिए एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ बन सकता है।
  • शुल्क लगने से डिजिटल भुगतान अपनाने की गति धीमी हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां नकदी का उपयोग अभी भी व्यापक है।

2. व्यापारियों की लागत में वृद्धि

  • MDR शुल्क लगने से छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों (MSMEs) के लिए परिचालन लागत बढ़ जाएगी, जिससे उनके लाभ मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • बढ़ी हुई लागत को उपभोक्ताओं पर पारित किया जा सकता है, जिससे मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है।

3. डिजिटल भुगतान अपनाने में बाधा

  • शून्य-MDR ढांचे को हटाने से डिजिटल भुगतान के प्रति उपभोक्ताओं और व्यापारियों का उत्साह कम हो सकता है, जिससे सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को चुनौती मिल सकती है।
  • शुल्क के कारण नकदी लेनदेन की ओर वापसी की प्रवृत्ति देखी जा सकती है।

4. पारदर्शिता और नियामक ढांचा

  • शुल्क लगाने के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी नियामक ढांचा स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि मनमानी शुल्क वसूली से बचा जा सके।
  • यह सुनिश्चित करना कि शुल्क उचित और तर्कसंगत हों, ताकि डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता बनी रहे।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
UPI लेनदेन पर शुल्क यह उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ा सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान अपनाने की दर प्रभावित हो सकती है।
MDR का प्रभाव MDR शुल्क लागू होने से व्यापारियों की परिचालन लागत बढ़ेगी, जो अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि का कारण बन सकती है।
डिजिटल समावेशन पर असर यदि शुल्क बहुत अधिक होते हैं, तो यह ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग के लोगों के लिए डिजिटल भुगतान को कम आकर्षक बना सकता है, जिससे वित्तीय समावेशन के प्रयासों को धक्का लग सकता है।
नियामक अनिश्चितता सरकार द्वारा भविष्य में शुल्क ढांचे को संशोधित करने की शक्ति से बाजार में कुछ अनिश्चितता पैदा हो सकती है, जब तक कि स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नहीं किए जाते।
प्रतिस्पर्धा पर प्रभाव MDR शुल्क का परिचय विभिन्न भुगतान प्रदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है, खासकर यदि छोटे खिलाड़ियों के लिए लागत अधिक हो।

आगे की राह

  • सरकार को UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने से पहले एक व्यापक प्रभाव मूल्यांकन (Impact Assessment) करना चाहिए, जिसमें उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया जाए।
  • एक बहु-स्तरीय शुल्क संरचना पर विचार किया जा सकता है, जहां छोटे लेनदेन को शुल्क से छूट दी जाए या न्यूनतम शुल्क लगाया जाए, जबकि बड़े लेनदेन पर उचित शुल्क लगाया जाए।
  • डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में सभी हितधारकों (बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता, व्यापारी और उपभोक्ता) के साथ परामर्श करके एक संतुलित और न्यायसंगत शुल्क मॉडल विकसित किया जाना चाहिए।
  • डिजिटल भुगतान के लाभों और संभावित शुल्कों के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं और व्यापारियों को सूचित निर्णय लेने में मदद मिल सके।
  • MDR शुल्क से प्राप्त राजस्व का उपयोग डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे के उन्नयन, सुरक्षा सुविधाओं को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किया जाना चाहिए।
  • यह सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए कि शुल्क संबंधी विवादों का त्वरित और प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके।
  • सरकार को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वैकल्पिक प्रोत्साहन योजनाओं पर विचार करना चाहिए, जैसे कि छोटे व्यापारियों के लिए सब्सिडी या कर लाभ, ताकि MDR शुल्क के बोझ को कम किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 · UPI लेनदेन · मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) · डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र · राजस्व मॉडल · वित्तीय समावेशन · आर्थिक संवृद्धि · कर संशोधन विधेयक, 2026 · डिजिटल इंडिया · नीतिगत निर्णय · बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता · शून्य-MDR ढाँचा

अवधारणा प्रवाह

भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन  →  बैंकों को UPI पर MDR लगाने की अनुमति  →  डिजिटल भुगतान प्रदाताओं के लिए राजस्व मॉडल  →  व्यापारियों की परिचालन लागत में वृद्धि  →  उपभोक्ताओं पर संभावित शुल्क/मूल्य वृद्धि  →  डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र का दीर्घकालिक विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने से रोकता है।
2. हाल ही में पारित कर संशोधन विधेयक, 2026, सरकार को UPI लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति देता है।
3. वर्तमान में, UPI लेनदेन उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क हैं, लेकिन भविष्य में शुल्क लगाने की संभावना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीनों
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 गलत है क्योंकि अधिनियम में संशोधन से पहले यह प्रावधान था कि बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता MDR नहीं लगा सकते थे। अब यह प्रावधान हटाया जा रहा है। कथन 2 सही है क्योंकि विधेयक सरकार को MDR लगाने की अनुमति देता है। कथन 3 सही है क्योंकि वर्तमान में UPI लेनदेन उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क हैं, लेकिन विधेयक भविष्य में शुल्क लगाने की नीतिगत स्वतंत्रता देता है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)’ का सबसे सटीक वर्णन करता है?

  1. यह एक शुल्क है जो बैंक ग्राहकों से UPI लेनदेन के लिए लेते हैं।
  2. यह वह दर है जिस पर RBI बैंकों को ऋण देता है।
  3. यह एक शुल्क है जो व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देना होता है।
  4. यह सरकार द्वारा डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए दी जाने वाली सब्सिडी है।

उत्तर: यह एक शुल्क है जो व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को देना होता है। — मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो एक व्यापारी (मर्चेंट) डिजिटल भुगतान (जैसे कार्ड या UPI) स्वीकार करने के लिए अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भुगतान करता है। यह ग्राहक पर नहीं, बल्कि व्यापारी पर लगाया जाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हाल ही में पारित कर संशोधन विधेयक, 2026 के संदर्भ में, UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति देने के निहितार्थों का आलोचनात्मक परीक्षण करें। यह भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र और वित्तीय समावेशन को कैसे प्रभावित कर सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कर संशोधन विधेयक, 2026 और भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन का संक्षिप्त परिचय, जिसमें UPI लेनदेन पर MDR लगाने की अनुमति का उल्लेख हो।
2. **MDR लगाने की अनुमति के निहितार्थ (सकारात्मक):**
* **राजस्व मॉडल:** बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल का निर्माण, जिससे डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन और नवाचार के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
* **इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास:** डिजिटल भुगतान इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा।
* **प्रतियोगिता:** भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा।
* **प्रणाली की स्थिरता:** लंबे समय में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और विकास सुनिश्चित करना।
3. **MDR लगाने की अनुमति के निहितार्थ (नकारात्मक/चुनौतियाँ):**
* **व्यापारियों पर बोझ:** छोटे और मध्यम व्यापारियों (MSMEs) पर अतिरिक्त लागत का बोझ, जिससे उनके लाभ मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
* **उपभोक्ता व्यवहार:** यदि MDR का बोझ अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर डाला जाता है (जैसे वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि), तो UPI के उपयोग में कमी आ सकती है।
* **डिजिटल अपनाने में बाधा:** डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति धीमी हो सकती है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
* **वित्तीय समावेशन पर प्रभाव:** उन लोगों के लिए डिजिटल लेनदेन महंगा हो सकता है जो अभी-अभी डिजिटल भुगतान से जुड़े हैं, जिससे वित्तीय समावेशन के प्रयासों को झटका लग सकता है।
4. **डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र और वित्तीय समावेशन पर प्रभाव:**
* **डिजिटल इंडिया मिशन:** सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ और कैशलेस अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों पर संभावित प्रभाव।
* **संतुलन की आवश्यकता:** राजस्व सृजन और डिजिटल अपनाने को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता।
* **नियामक की भूमिका:** भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार की भूमिका, विशेष रूप से छोटे लेनदेन के लिए शुल्क को विनियमित करने और सब्सिडी प्रदान करने में।
5. **निष्कर्ष:** एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें, जिसमें MDR के माध्यम से प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करने और साथ ही उपभोक्ताओं व छोटे व्यापारियों पर बोझ कम करने के लिए नीतिगत उपायों की आवश्यकता पर बल दिया जाए।

स्रोत: Mint


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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