12 Aug लोकसभा में पेश होगी जस्टिस वर्मा मामले की जांच रिपोर्ट, सरकार FCRA बिल JPC भेजने को तैयार
✎ संयुक्त संसदीय समिति (JPC) संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से बनी एक तदर्थ समिति है, जिसका गठन किसी विशेष विधेयक की गहन जांच या किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए किया जाता है, ताकि विधेयक पर व्यापक सहमति बन सके…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान – संसद और राज्य विधायिका – संरचना, कार्य-संचालन, शक्तियों और विशेषाधिकार एवं इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।
GS Paper II — विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से उत्पन्न विषय।
GS Paper II — गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भूमिका। - Prelims: FCRA अधिनियम, 2010, संयुक्त संसदीय समिति (JPC), धन विधेयक, साधारण विधेयक, संसदीय सत्र, अध्यादेश, लोकसभा, राज्यसभा
- Essay: भारतीय लोकतंत्र में संसद की भूमिका और कार्यप्रणाली, गैर-सरकारी संगठनों का विनियमन: संतुलन की आवश्यकता, विधायी प्रक्रिया में विपक्ष की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: संयुक्त संसदीय समिति (JPC) संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से बनी एक तदर्थ समिति है, जिसका गठन किसी विशेष विधेयक की गहन जांच या किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए किया जाता है, ताकि विधेयक पर व्यापक सहमति बन सके और उसकी कमियों को दूर किया जा सके।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान, सरकार ने घोषणा की कि वह विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (Joint Parliamentary Committee – JPC) के पास भेजने के लिए तैयार है। यह विधेयक इस वर्ष 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और इसका उद्देश्य देश में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) तथा विदेशी फंडिंग पर सरकार की निगरानी को और कड़ा करना है। संसद में विधायी प्रक्रिया और विभिन्न विधेयकों पर चर्चा के अभाव में पारित होने को लेकर भी निरंतर हंगामा देखा गया है, जिससे संसदीय कार्यप्रणाली पर बहस छिड़ गई है।
पृष्ठभूमि
- संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ और 13 अगस्त को समाप्त होगा। सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही लगातार बाधित रही है।
- विपक्ष दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर गृह मंत्री के जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सरकार इस पर चर्चा के लिए तैयार है।
- यह विधेयक देश में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और विदेशी फंडिंग पर सरकार की कड़ी निगरानी का प्रस्ताव करता है।
- सत्र के दौरान ‘वंदे मातरम्’ बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली है, जिससे राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
- हंगामे के बीच लोकसभा ने केरल का नाम ‘केरलम’ करने और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से जुड़े दो बिल बिना चर्चा के पारित किए हैं, जिससे विधायी प्रक्रिया में चर्चा के महत्व पर सवाल उठे हैं।
संयुक्त संसदीय समिति (JPC) क्या है?
- संयुक्त संसदीय समिति (JPC) एक तदर्थ समिति (ad hoc committee) है जिसका गठन किसी विशेष विधेयक या वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए किया जाता है।
- इसका गठन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सदस्यों को मिलाकर किया जाता है।
- JPC का गठन आमतौर पर तब किया जाता है जब किसी विधेयक पर व्यापक सहमति बनाने या किसी जटिल मुद्दे की गहन जांच की आवश्यकता होती है।
- इसके सदस्यों की संख्या और संरचना संसद द्वारा तय की जाती है, जिसमें सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों के सदस्य शामिल होते हैं।
- JPC को संबंधित मंत्रालयों, अधिकारियों और विशेषज्ञों से जानकारी मांगने का अधिकार होता है।
- यह अपनी जांच पूरी करने के बाद संसद को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करती है, जिसमें विधेयक में संशोधन या मामले पर सिफारिशें शामिल होती हैं।
- JPC की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होती हैं, लेकिन उनका अत्यधिक महत्व होता है और अक्सर सरकार उन पर विचार करती है।
- विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को JPC को भेजने का निर्णय विधेयक पर व्यापक विचार-विमर्श और सहमति बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Bill, 2026) | यह विधेयक देश में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और विदेशी फंडिंग पर सरकार की कड़ी निगरानी का प्रस्ताव करता है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। |
| संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा जाना | किसी विधेयक को JPC को भेजने से उस पर गहन विचार-विमर्श, विभिन्न हितधारकों की राय और विस्तृत अध्ययन सुनिश्चित होता है, जिससे कानून की गुणवत्ता में सुधार होता है। |
| ‘वंदे मातरम्’ बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी | यह राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे इसके अपमान या गायन में बाधा डालने पर दंड का प्रावधान है। |
| संसद में गतिरोध | विपक्ष के हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही बाधित हुई है, जिससे महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पा रही और विधायी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। |
| बिना चर्चा के विधेयकों का पारित होना | यह विधायी प्रक्रिया की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, क्योंकि विधेयकों पर पर्याप्त बहस और जांच के बिना कानून बन जाते हैं। |
महत्व
शासन और पारदर्शिता
- FCRA विधेयक का उद्देश्य विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले NGOs के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
- JPC को विधेयक भेजने का निर्णय सरकार की ओर से विधेयक पर व्यापक सहमति बनाने और उसकी बारीकियों पर विचार करने की इच्छा को दर्शाता है।
विधायी प्रक्रिया
- संसद में विधेयकों पर चर्चा के बिना उनका पारित होना लोकतांत्रिक विधायी प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह कानून बनाने में जनता के प्रतिनिधियों की भूमिका को कमजोर करता है।
- JPC को विधेयक भेजना संसदीय लोकतंत्र में विचार-विमर्श और जांच के महत्व को रेखांकित करता है, विशेषकर जटिल और संवेदनशील मुद्दों पर।
राष्ट्रीय प्रतीक और भावनाएँ
- ‘वंदे मातरम्’ बिल राष्ट्रीय गीत के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, जो देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- यह बिल राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बनाए रखने और उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
चुनौतियाँ
1. संसदीय कार्यवाही में व्यवधान
- विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही बाधित हो रही है, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्य और सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है।
- यह संसद के समय और संसाधनों की बर्बादी का कारण बनता है तथा सरकार को बिना पर्याप्त चर्चा के विधेयक पारित करने के लिए मजबूर करता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था – संसद और राज्य विधानमंडल
2. विधेयकों पर अपर्याप्त चर्चा
- कई महत्वपूर्ण विधेयक बिना किसी सार्थक चर्चा के पारित किए जा रहे हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
- यह कानून बनाने की प्रक्रिया में गहन जांच और विचार-विमर्श के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जिससे संभावित रूप से त्रुटिपूर्ण कानून बन सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था – संसद की कार्यप्रणाली
3. FCRA के तहत NGOs का विनियमन
- FCRA संशोधन विधेयक NGOs की विदेशी फंडिंग पर कड़ी निगरानी का प्रस्ताव करता है, जो कुछ वर्गों द्वारा नागरिक समाज के कामकाज को बाधित करने के रूप में देखा जा सकता है।
- सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और NGOs के स्वतंत्र संचालन के बीच संतुलन बनाना होगा ताकि नागरिक समाज के महत्वपूर्ण कार्यों को बाधित न किया जा सके।
यूपीएससी लिंक: शासन – गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका
4. सरकार-विपक्ष संबंध
- सरकार और विपक्ष के बीच संवाद और सहयोग की कमी संसद में गतिरोध का एक प्रमुख कारण है।
- यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए हानिकारक है और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर आम सहमति बनाने में बाधा डालता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था – संसद में विपक्ष की भूमिका
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संसदीय गतिरोध | विधायी कार्यों में बाधा, सार्वजनिक धन की बर्बादी, महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का अभाव। |
| बिना चर्चा के विधेयक पारित करना | कानूनों की गुणवत्ता पर समझौता, लोकतांत्रिक सिद्धांतों का हनन, जनता के प्रति जवाबदेही में कमी। |
| FCRA विधेयक में प्रस्तावित कड़े प्रावधान | नागरिक समाज संगठनों (CSOs) की स्वायत्तता पर संभावित प्रभाव, विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले NGOs के कामकाज में बाधा। |
| सरकार और विपक्ष के बीच संवादहीनता | संसदीय लोकतंत्र के सुचारू संचालन में बाधा, राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आम सहमति बनाने में विफलता। |
आगे की राह
- सरकार और विपक्ष के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने के लिए पहल की जानी चाहिए ताकि संसद में गतिरोध को समाप्त किया जा सके।
- विधेयकों को पर्याप्त चर्चा और जांच के लिए संसदीय समितियों (जैसे JPC) को भेजने की प्रथा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
- संसद के नियमों और प्रक्रियाओं का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि व्यवधानों को कम किया जा सके और विधायी कार्य सुचारू रूप से चल सके।
- FCRA जैसे संवेदनशील विधेयकों पर व्यापक हितधारक परामर्श आयोजित किया जाना चाहिए ताकि सभी चिंताओं को दूर किया जा सके और एक संतुलित कानून बनाया जा सके।
- संसद के सत्रों की अवधि और उत्पादकता बढ़ाने के लिए उपाय किए जाने चाहिए ताकि सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त समय दिया जा सके।
- अध्यक्ष/सभापति को सदन में अनुशासन बनाए रखने और सदस्यों को नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) · संयुक्त संसदीय समिति (JPC) · लोकसभा · गैर-सरकारी संगठन (NGO) · विदेशी फंडिंग · संसदीय कार्यवाही · विधेयक पारित होना · लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका · संसदीय समितियाँ · संसद का मानसून सत्र
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 79’, ‘note’: ‘संसद के गठन से संबंधित’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 107’, ‘note’: ‘विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 118’, ‘note’: ‘संसद की प्रक्रिया के नियम बनाने की शक्ति’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 122’, ‘note’: ‘न्यायालयों द्वारा संसद की कार्यवाही की जांच न किया जाना’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा FCRA विधेयक पेश किया गया। → विपक्ष ने विधेयक को JPC को भेजने की मांग की। → सरकार JPC को विधेयक भेजने पर सहमत हुई। → JPC विधेयक पर गहन विचार-विमर्श और जांच करेगी। → JPC की रिपोर्ट के आधार पर विधेयक पर संसद में चर्चा होगी। → संसद द्वारा विधेयक पर मतदान और पारित किया जाना। → राष्ट्रपति की सहमति के बाद विधेयक का कानून बनना।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) का उद्देश्य भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा विदेशी अंशदान की प्राप्ति और उपयोग को विनियमित करना है।
2. संयुक्त संसदीय समिति (JPC) एक तदर्थ समिति है जिसे किसी विशिष्ट विधेयक की विस्तृत जांच या किसी विशेष मामले की जांच के लिए गठित किया जाता है।
3. FCRA विधेयक, 2026 को लोकसभा में 25 मार्च, 2023 को पेश किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीनों — कथन 1 और 2 सही हैं। FCRA का मुख्य उद्देश्य विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। JPC एक अस्थायी समिति है जो विशिष्ट उद्देश्यों के लिए बनाई जाती है। कथन 3 गलत है क्योंकि विधेयक 2026 में पेश नहीं किया जा सकता, यह एक काल्पनिक वर्ष है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के संबंध में सही नहीं है?
- JPC का गठन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से होता है।
- यह एक स्थायी समिति है जो पूरे संसदीय कार्यकाल के लिए कार्य करती है।
- इसका गठन किसी विशिष्ट विधेयक की जांच या किसी विशेष मामले की जांच के लिए किया जाता है।
- इसकी सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होती हैं, लेकिन उनका उच्च सम्मान किया जाता है।
उत्तर: यह एक स्थायी समिति है जो पूरे संसदीय कार्यकाल के लिए कार्य करती है। — JPC एक स्थायी समिति नहीं है, बल्कि एक तदर्थ (ad hoc) समिति है जिसे किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए अस्थायी रूप से गठित किया जाता है और उसका कार्य पूरा होने पर समाप्त हो जाती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के विनियमन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अधिनियम के प्रमुख उद्देश्यों और प्रावधानों की चर्चा कीजिए। साथ ही, FCRA विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने के निहितार्थों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** FCRA का संक्षिप्त परिचय और इसका महत्व।
2. **FCRA के प्रमुख उद्देश्य:** राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकना।
3. **FCRA के प्रमुख प्रावधान:** विदेशी अंशदान की प्राप्ति, उपयोग, पंजीकरण/पूर्व अनुमति, वार्षिक रिपोर्टिंग, खातों का ऑडिट, निषिद्ध प्राप्तकर्ता, और सरकार की निगरानी शक्तियाँ (जैसे गृह मंत्रालय की भूमिका)।
4. **FCRA विधेयक को JPC को भेजने के निहितार्थ:**
* **संसदीय प्रक्रिया में महत्व:** विधेयक की गहन जांच, विभिन्न हितधारकों के विचारों को शामिल करना, विपक्ष की चिंताओं को दूर करना।
* **लोकतांत्रिक जवाबदेही:** विधेयक पर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास, पारदर्शिता बढ़ाना।
* **विधेयक की गुणवत्ता:** विशेषज्ञों और सांसदों के इनपुट से विधेयक में सुधार की संभावना।
* **सरकार की मंशा:** विपक्ष के साथ सहयोग करने और गतिरोध को तोड़ने का संकेत।
* **चुनौतियाँ:** JPC की रिपोर्ट में देरी, राजनीतिक मतभेद।
5. **निष्कर्ष:** FCRA के महत्व और JPC प्रक्रिया के माध्यम से एक संतुलित और प्रभावी कानून बनाने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: bhaskar.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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