23 Sep वायुसेना को मिला बड़ा हथियार: ₹811 करोड़ के 160 स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन समझौता
✎ SAT-SAAW एक स्वदेशी रूप से विकसित हवा से जमीन पर मार करने वाला सटीक निर्देशित ग्लाइड बम है, जिसका अधिग्रहण भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाएगा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS पेपर III — आंतरिक सुरक्षा और रक्षा | GS पेपर III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS पेपर III — भारतीय अर्थव्यवस्था (रक्षा विनिर्माण)
- Prelims: SAT-SAAW, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), आत्मनिर्भर भारत, रक्षा अधिग्रहण, बाय (इंडियन – इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड) श्रेणी
- Essay: भारत की रक्षा तैयारियों में स्वदेशीकरण की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत अभियान: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: SAT-SAAW एक स्वदेशी रूप से विकसित हवा से जमीन पर मार करने वाला सटीक निर्देशित ग्लाइड बम है, जिसका अधिग्रहण भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाएगा और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।
यह खबर चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) और संबंधित उपकरणों की खरीद हेतु भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ एक अनुबंध किया है। यह अनुबंध ‘बाय (इंडियन – इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के तहत किया गया है, जो रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण और खरीद को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020, रक्षा खरीद में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न श्रेणियों को परिभाषित करती है, जिसमें ‘बाय (इंडियन – इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ भी शामिल है।
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भारत में सैन्य प्रौद्योगिकी के अनुसंधान, डिजाइन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है जो मिसाइलों और संबंधित रक्षा उपकरणों के निर्माण में विशेषज्ञता रखता है।
- भारतीय वायु सेना अपनी परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने और देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए लगातार आधुनिक हथियारों और प्रणालियों का अधिग्रहण कर रही है।
- रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण न केवल आयात पर निर्भरता कम करता है, बल्कि देश में रोजगार सृजन और तकनीकी उन्नति को भी बढ़ावा देता है।
- SAT-SAAW प्रणाली को DRDO द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है, जिसमें 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा।
- इस प्रणाली की आपूर्ति वर्ष 2027-28 और 2028-29 के बीच निर्धारित की गई है।
- यह अधिग्रहण भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि करेगा, जिससे वह बिना किसी बाधा के अपने अभियानों को जारी रखने में सक्षम होगी।
सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) क्या है?
- SAT-SAAW हवा से जमीन पर मार करने वाला एक सटीक निर्देशित ग्लाइड बम है।
- इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
- यह लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज से दुश्मन के एयरफील्ड (हवाई क्षेत्र) को तबाह करने की क्षमता रखता है।
- इसे जगुआर, हॉक और सुखोई-30 MKi जैसे विभिन्न लड़ाकू विमान प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है।
- इस प्रणाली में इनिशियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज और ट्विन स्टोर कैरियर जैसे उप-प्रणालियों का भी स्वदेशीकरण किया जाएगा।
- यह भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा, जिससे उसे रणनीतिक लक्ष्यों को अधिक सटीकता से निशाना बनाने में मदद मिलेगी।
- इस हथियार प्रणाली में 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप है।
- यह भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और बाहरी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| SAT-SAAW (सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन) | यह हवा से जमीन पर मार करने वाला सटीक निर्देशित ग्लाइड बम है। |
| लॉन्च प्लेटफॉर्म | इसे जगुआर, हॉक और सुखोई-30 एमकेआई जैसे विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। |
| परिचालन क्षमता | यह लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज से दुश्मन के एयरफील्ड को तबाह करने की क्षमता रखता है। |
| स्वदेशी विकास | इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और विकसित किया है। |
| स्वदेशी सामग्री | इसमें 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी, जिसमें उप-प्रणालियों का भी स्वदेशीकरण शामिल है। |
| अनुबंध लागत | 160 SAT-SAAWs की खरीद के लिए ₹810.79 करोड़ का अनुबंध किया गया है। |
महत्व
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
- यह अनुबंध ‘बाय (इंडियन – इंडिजिनसली डिज़ाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के तहत किया गया है, जो रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता (Self-reliance) को बढ़ावा देता है।
- DRDO द्वारा स्वदेशी डिज़ाइन और विकास, साथ ही 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग, भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करता है।
सामरिक महत्व
- SAT-SAAW भारतीय वायु सेना (IAF) की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा, जिससे दुश्मन के एयरफील्ड को लंबी दूरी से निशाना बनाया जा सकेगा।
- यह भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करेगा और संभावित विरोधियों के खिलाफ एक मजबूत निवारक क्षमता प्रदान करेगा।
आर्थिक प्रभाव
- भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ ₹811 करोड़ का अनुबंध घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देगा और रोजगार सृजन में योगदान देगा।
- स्वदेशी उप-प्रणालियों के विकास से अनुसंधान और विकास (R&D) तथा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी आत्मनिर्भरता
- उच्च-तकनीकी रक्षा प्रणालियों के सभी घटकों में पूर्ण स्वदेशीकरण प्राप्त करना एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है।
- विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करने के लिए निरंतर अनुसंधान और विकास निवेश की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – रक्षा प्रौद्योगिकी
2. गुणवत्ता और विश्वसनीयता
- स्वदेशी रूप से विकसित रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
- परीक्षण और प्रमाणन प्रक्रियाओं को मजबूत करना आवश्यक है ताकि परिचालन वातावरण में उपकरणों का प्रदर्शन सुनिश्चित हो सके।
यूपीएससी लिंक: सुरक्षा – रक्षा क्षमताएँ
3. उत्पादन क्षमता और समय-सीमा
- बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता बढ़ाना और निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपकरणों की आपूर्ति सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
- घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और उत्पादन में आने वाली बाधाओं को दूर करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – औद्योगिक नीति
4. अनुसंधान एवं विकास निवेश
- रक्षा अनुसंधान और विकास में पर्याप्त और निरंतर निवेश सुनिश्चित करना ताकि भविष्य की प्रौद्योगिकियों में अग्रणी रहा जा सके।
- निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों को रक्षा अनुसंधान में शामिल करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – नवाचार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तकनीकी अंतर | कुछ विशिष्ट और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों में अभी भी विदेशी निर्भरता बनी हुई है। |
| गुणवत्ता नियंत्रण | स्वदेशी उत्पादों की गुणवत्ता और प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाए रखना। |
| उत्पादन में देरी | घरेलू रक्षा उत्पादन परियोजनाओं में अक्सर समय-सीमा में देरी और लागत में वृद्धि देखी जाती है। |
| निजी क्षेत्र की भागीदारी | रक्षा क्षेत्र में निजी निवेश और नवाचार को पूरी तरह से प्रोत्साहित करने में चुनौतियाँ। |
| निर्यात क्षमता | वैश्विक रक्षा बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- आत्मनिर्भर भारत
आगे की राह
- रक्षा अनुसंधान और विकास (R&D) में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के निवेश को और बढ़ाना।
- घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देना।
- रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक स्पष्ट और दीर्घकालिक नीतिगत ढाँचा तैयार करना।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तक पहुँच प्राप्त करना, साथ ही स्वदेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
- रक्षा उपकरणों के परीक्षण, प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं को मजबूत करना।
- भारतीय वायु सेना और अन्य सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उन्नत प्रौद्योगिकियों का विकास करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
आत्मनिर्भर भारत · रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता · रक्षा अधिग्रहण · स्वदेशी रक्षा उत्पादन · रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) · भारतीय वायु सेना (IAF) · सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) · मेक इन इंडिया · रक्षा आधुनिकीकरण · रणनीतिक स्वायत्तता
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (ज)’, ‘note’: ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सुधार की भावना का विकास’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में रक्षा संबंधी विषय’}
अवधारणा प्रवाह
रक्षा मंत्रालय का अनुबंध → SAT-SAAW की खरीद → DRDO द्वारा स्वदेशी विकास → रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता → IAF की परिचालन क्षमता में वृद्धि → देश की रक्षा तैयारियों को मजबूती
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
2. यह एक हवा से हवा में मार करने वाला मिसाइल प्रणाली है।
3. ‘बाय (इंडियन – इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के तहत रक्षा अधिग्रहण से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि SAT-SAAW को DRDO ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है। कथन 2 गलत है क्योंकि SAT-SAAW हवा से जमीन पर मार करने वाला बम है, हवा से हवा में मार करने वाला मिसाइल नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि यह श्रेणी स्वदेशीकरण को बढ़ावा देती है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. रक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय वायु सेना के लिए 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) की खरीद के लिए किस कंपनी के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं?
- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL)
- भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL)
- मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL)
उत्तर: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) — रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना के लिए SAT-SAAW की खरीद हेतु भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के महत्व का परीक्षण कीजिए। भारतीय वायु सेना के लिए सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) के अधिग्रहण के संदर्भ में इसकी सफलता पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का संक्षिप्त परिचय और रक्षा क्षेत्र में इसके महत्व पर प्रकाश डालना।
2. ‘आत्मनिर्भर भारत’ का महत्व: रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना, स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना, रोजगार सृजन, रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करना, निर्यात क्षमता बढ़ाना।
3. SAT-SAAW अधिग्रहण का संदर्भ: DRDO द्वारा स्वदेशी विकास, ‘बाय (इंडियन – इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के तहत अनुबंध, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) की भूमिका, 60% स्वदेशी सामग्री का लक्ष्य।
4. सफलता का मूल्यांकन: भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि, रक्षा तैयारियों को मजबूती, उप-प्रणालियों (जैसे इनिशियल मेजरमेंट यूनिट, लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज) का स्वदेशीकरण, भविष्य के लिए प्रेरणा।
5. चुनौतियाँ और आगे की राह: अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना, निजी क्षेत्र की भागीदारी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहना।
6. निष्कर्ष: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के दीर्घकालिक लाभों और देश की सुरक्षा के लिए इसके महत्व को रेखांकित करना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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