12 Aug वित्त आयोग अध्यक्ष काised केरल को नीति चुनाव में सुधार का सुझाव, Vizhinjam पोर्ट पर जोर
✎ वित्त आयोग के अध्यक्ष ने आर्थिक संवृद्धि और विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शहरीकरण को एक महत्वपूर्ण इंजन बताया, जिसके लिए अच्छे नीतिगत विकल्प, विशेषकर भूमि नियमों के सरलीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र के सुधारों की…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था: आर्थिक संवृद्धि एवं विकास, शहरीकरण, आधारभूत संरचना
- Prelims: वित्त आयोग, शहरीकरण, विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह, राजकोषीय संघवाद, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजीकरण
- Essay: शहरीकरण: भारत के विकास का इंजन, विकसित भारत @ 2047: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: वित्त आयोग के अध्यक्ष ने आर्थिक संवृद्धि और विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शहरीकरण को एक महत्वपूर्ण इंजन बताया, जिसके लिए अच्छे नीतिगत विकल्प, विशेषकर भूमि नियमों के सरलीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र के सुधारों की आवश्यकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने केरल को आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए ‘अच्छे नीतिगत विकल्प’ अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने ‘शहरीकरण: विकसित भारत @ 2047 के लिए विकास इंजन’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में ये टिप्पणियाँ कीं, जिसमें शहरीकरण को भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की योजना का एक महत्वपूर्ण घटक बताया गया।
पृष्ठभूमि
- वित्त आयोग (Finance Commission) एक संवैधानिक निकाय है जिसका गठन भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत किया जाता है। इसका मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण के संबंध में सिफारिशें करना है।
- 16वें वित्त आयोग का गठन दिसंबर 2023 में किया गया था और इसके अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया हैं। आयोग को 2026-27 से शुरू होने वाले पांच वर्षों की अवधि के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करनी हैं।
- विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह (Vizhinjam International Seaport) केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित एक गहरे पानी का बंदरगाह है, जिसे भारत के समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- शहरीकरण (Urbanisation) को आर्थिक संवृद्धि और विकास के एक महत्वपूर्ण चालक के रूप में देखा जाता है, क्योंकि शहरी क्षेत्र अक्सर नवाचार, रोजगार सृजन और बेहतर सेवाओं के केंद्र होते हैं।
- भारत सरकार ने ‘विकसित भारत @ 2047’ का लक्ष्य रखा है, जिसके तहत भारत को अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (Public Sector Enterprises) और बैंकों का निजीकरण (Privatisation) सरकार की आर्थिक सुधारों की रणनीति का एक हिस्सा रहा है, जिसका उद्देश्य दक्षता बढ़ाना और राजकोषीय बोझ कम करना है।
शहरीकरण: भारत के विकास में भूमिका
- शहरीकरण को किसी भी विकसित देश की पहचान के रूप में देखा जाता है, जहाँ शहरीकरण के बिना किसी देश के समृद्ध होने का कोई उदाहरण नहीं मिलता।
- यह आर्थिक संवृद्धि का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो व्यापार और रोजगार के अनुकूल वातावरण प्रदान करके विकास को गति देता है।
- शहरीकरण से विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, जैसा कि विझिंजम बंदरगाह के संदर्भ में असेंबली और निर्यात गतिविधियों की क्षमता पर जोर दिया गया।
- शहरीकरण के प्रमुख चुनौतियों में शहरी भूमि की खरीद में कठिनाई, भूमि अधिग्रहण, भवन उप-नियम, अनुत्पादक भूमि और भूमि रूपांतरण नियम शामिल हैं।
- कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने के नियमों को सरल बनाना शहरीकरण की प्रक्रिया को गति देने के लिए आवश्यक माना जाता है।
- भारत में कुल भूमि क्षेत्र का केवल 3.7% ही निर्मित क्षेत्र (शहरी, ग्रामीण और खनन सहित) है, जिससे कृषि को कोई खतरा नहीं है।
- शहरीकरण का लक्ष्य केवल पश्चिमीकरण नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे भारतीय जड़ों, संस्कृति और विचार प्रक्रियाओं के माध्यम से विकसित किया जाना चाहिए।
- रोजगार के इर्द-गिर्द शहरों का निर्माण करके विशेष रोजगार क्षेत्र (Special Employment Regions) बनाना शहरीकरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नीतिगत विकल्प | आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण। |
| विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह | केरल की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की अपार क्षमता, विशेषकर असेंबली और निर्यात गतिविधियों के माध्यम से। |
| शहरीकरण | विकसित राष्ट्र बनने के लिए भारत के लक्ष्य का एक अभिन्न अंग; आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन का इंजन। |
| सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजीकरण | राष्ट्रीय स्तर पर सुधारों को गति देने और दक्षता बढ़ाने के लिए आवश्यक। |
| भूमि संबंधी नियम | शहरीकरण और व्यावसायिक विकास में बाधाएँ; सरलीकरण की आवश्यकता। |
महत्व
आर्थिक संवृद्धि और विकास
- सही नीतिगत विकल्प और विझिंजम बंदरगाह जैसी प्रमुख अवसंरचना का पूर्ण उपयोग राज्यों की आर्थिक संवृद्धि को गति दे सकता है।
- शहरीकरण को बढ़ावा देना, व्यापार-अनुकूल शहर बनाना और रोजगार-केंद्रित क्षेत्र विकसित करना ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
राज्यों के वित्त और नीति निर्माण
- वित्त आयोग (Finance Commission) के अध्यक्ष की सलाह राज्यों के लिए राजकोषीय विवेक और प्रभावी नीति निर्माण के महत्व पर प्रकाश डालती है।
- राज्यों को अपनी विशिष्ट शक्तियों और संसाधनों का लाभ उठाकर आर्थिक विकास के अवसर पैदा करने चाहिए।
राष्ट्रीय सुधार एजेंडा
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और उद्यमों के निजीकरण का सुझाव राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- भूमि अधिग्रहण और रूपांतरण नियमों का सरलीकरण पूरे देश में शहरीकरण और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. शहरी भूमि अधिग्रहण और रूपांतरण
- व्यवसायों के लिए शहरी भूमि खरीदने में कठिनाइयाँ।
- भूमि अधिग्रहण, भवन उप-नियमों और भूमि रूपांतरण नियमों से संबंधित जटिलताएँ।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, शहरीकरण, भूमि सुधार
2. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की दक्षता
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और उद्यमों की अधिक संख्या और उनकी दक्षता को लेकर चिंताएँ।
- निजीकरण के माध्यम से दक्षता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की आवश्यकता।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, सरकारी नीतियाँ
3. नीतिगत विकल्प और कार्यान्वयन
- राज्यों द्वारा प्रभावी नीतिगत विकल्पों को अपनाने और उन्हें कुशलता से लागू करने की चुनौती।
- उद्यमियों को सही गतिविधियों में संलग्न होने के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, राज्य नीतियाँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| शहरी भूमि की उपलब्धता | व्यवसायों के लिए शहरी भूमि की खरीद में कठिनाई और भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया। |
| भूमि रूपांतरण नियम | कृषि से गैर-कृषि उपयोग में भूमि के रूपांतरण से संबंधित जटिल और बोझिल नियम। |
| सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या | सार्वजनिक क्षेत्र में बैंकों की अधिक संख्या, जिससे दक्षता और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है। |
| शहरीकरण की गुणवत्ता | शहरीकरण को केवल पश्चिमीकरण के रूप में देखने के बजाय भारतीय जड़ों और संस्कृति के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता। |
आगे की राह
- राज्यों को अपनी विशिष्ट आर्थिक क्षमता का आकलन करना चाहिए और उसे अधिकतम करने के लिए लक्षित नीतिगत विकल्प अपनाने चाहिए।
- विझिंजम जैसे प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए अभिनव सोच और रणनीतिक योजना विकसित की जानी चाहिए।
- शहरीकरण को गति देने के लिए भारतीय शहरों को व्यापार और रोजगार के अनुकूल स्थान बनाना चाहिए।
- भूमि अधिग्रहण, भवन उप-नियमों और भूमि रूपांतरण नियमों को सरल बनाया जाना चाहिए ताकि व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
- सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और बैंकों में सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए, जिसमें निजीकरण भी शामिल है, ताकि दक्षता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सके।
- शहरीकरण को भारतीय संस्कृति और जड़ों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि यह वास्तविक प्रगति का प्रतीक बन सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वित्त आयोग · राजकोषीय संघवाद · शहरीकरण · आर्थिक संवृद्धि · सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का निजीकरण · नीतिगत विकल्प · विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह · विकसित भारत @ 2047 · भूमि अधिग्रहण · विनियामक सुधार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 280’, ‘note’: ‘वित्त आयोग का गठन और कार्य’}
अवधारणा प्रवाह
नीतिगत विकल्प → उद्यमिता को प्रोत्साहन → आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि → शहरीकरण और रोजगार सृजन → विकसित भारत @ 2047
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण की सिफारिश करता है।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग का गठन किया जाता है।
3. 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि वित्त आयोग वास्तव में एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण पर सिफारिशें करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 280 वित्त आयोग के गठन का प्रावधान करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि अरविंद पनगढ़िया 16वें वित्त आयोग के वर्तमान अध्यक्ष हैं।
Q2. शहरीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन I: शहरीकरण आर्थिक संवृद्धि का एक महत्वपूर्ण घटक है और विकसित राष्ट्रों की एक सामान्य विशेषता है।
कथन II: भारत में कृषि से गैर-कृषि उपयोग में भूमि के रूपांतरण को सरल बनाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि कुल भूमि क्षेत्र का बहुत कम प्रतिशत ही निर्मित क्षेत्र में आता है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं तथा कथन II, कथन I की सही व्याख्या करता है।
- कथन I और कथन II दोनों सही हैं, परन्तु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं करता है।
- कथन I सही है, परन्तु कथन II गलत है।
- कथन I गलत है, परन्तु कथन II सही है।
उत्तर: कथन I सही है, परन्तु कथन II गलत है। — कथन I सही है क्योंकि शहरीकरण को आर्थिक संवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और यह विकसित देशों की एक सामान्य विशेषता है। कथन II गलत है क्योंकि लेख में भूमि रूपांतरण नियमों को सरल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, विशेष रूप से कृषि से गैर-कृषि उपयोग में रूपांतरण के संबंध में, भले ही कुल भूमि क्षेत्र का एक छोटा प्रतिशत ही निर्मित क्षेत्र में आता हो।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में आर्थिक संवृद्धि के लिए शहरीकरण के महत्व पर चर्चा कीजिए। साथ ही, शहरीकरण की प्रक्रिया में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में शहरीकरण को आर्थिक संवृद्धि के इंजन के रूप में समझाना चाहिए, जिसमें विकसित देशों के उदाहरण शामिल हों। शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों जैसे भूमि अधिग्रहण, भूमि रूपांतरण नियम, भवन उपनियम और व्यवसायों के लिए शहरी भूमि की खरीद में कठिनाइयों का उल्लेख करना चाहिए। संभावित समाधानों में भूमि रूपांतरण नियमों का सरलीकरण, व्यापार-अनुकूल शहरी स्थान बनाना और रोजगार-केंद्रित शहर विकसित करना शामिल होना चाहिए। ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य के संदर्भ में शहरीकरण की भूमिका पर भी प्रकाश डाला जाना चाहिए।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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