विशेष अभियान 6: डीएफपीडी में लंबित मामलों में 70% कमी, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार

विशेष अभियान 6: डीएफपीडी में लंबित मामलों में 70% कमी, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार

विशेष अभियान 6: डीएफपीडी में लंबित मामलों में 70% कमी, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार

विशेष अभियान 6: डीएफपीडी में लंबित मामलों में 70% कमी, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार — विशेष अभियान 6 के अंतर्गत मध्य अभियान प्रगति
आरेख: विशेष अभियान 6 के अंतर्गत मध्य अभियान प्रगति

✎ विशेष अभियान 6 (2–31 अक्टूबर 2026) सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने, अभिलेख प्रबंधन सुधारने और लंबित मामलों में कमी लाने का प्रशासनिक अभियान है, जिसकी निगरानी DARPG के समन्वय में होती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन (Governance): सरकारी कार्यालयों में दक्षता, ई-गवर्नेंस और सार्वजनिक शिकायत निवारण  |  GS Paper II — शासन: अभिलेख प्रबंधन, पारदर्शिता और सूचना का अधिकार
  • Prelims: विशेष अभियान 6 (Special Campaign 6) और इसकी अवधि (2–31 अक्टूबर 2026), स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) और स्वच्छता को संस्थागत रूप देना, DARPG (लोक प्रशासन एवं शिकायत निवारण विभाग) की समन्वय भूमिका, CPGRAMS (केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली), लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993), ई-ऑफिस (e-Office) और भौतिक एवं ई-फाइलों का अंतर, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (Public Sector Undertakings) और अधीनस्थ व संलग्न कार्यालय
  • Essay: प्रशासनिक दक्षता और नागरिक-केंद्रित शासन: लंबित मामलों की समस्या का समाधान, सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन: पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन की दिशा में

त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6 (2–31 अक्टूबर 2026) सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने, अभिलेख प्रबंधन सुधारने और लंबित मामलों में कमी लाने का प्रशासनिक अभियान है, जिसकी निगरानी DARPG के समन्वय में होती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) द्वारा 2 से 31 अक्टूबर 2026 के बीच चलाए जा रहे विशेष अभियान 6 की मध्य अवधि की प्रगति 16 अक्टूबर 2026 को PIB द्वारा जारी की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देना और अभिलेख प्रबंधन में सुधार करना है। विभाग ने 15 अक्टूबर 2026 तक 1,10,600 लक्ष्य वाली फाइलों में से 35,743 भौतिक फाइलों की समीक्षा की तथा 7,040 ई-फाइलें बंद कीं। सांसदों के संदर्भ, सार्वजनिक शिकायतों और सार्वजनिक शिकायत अपीलों के निपटान में भी प्रगति दर्ज हुई। साथ ही, अप्रचलित सामग्री की बिक्री जैसी गतिविधियों से 10,76,262 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ और 23,843 वर्ग फुट स्थान खाली हुआ। यह समाचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रशासनिक सुधार को मापने योग्य लक्ष्यों और आंकड़ों के माध्यम से दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

  • स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी। इसके बाद सरकारी कार्यालयों में समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जाते रहे हैं, जिनका उद्देश्य कार्यस्थल पर स्वच्छता, अनावश्यक सामग्री के निपटान और फाइलों की सफाई को बढ़ावा देना है।
  • लोक प्रशासन एवं शिकायत निवारण विभाग (DARPG) इन अभियानों के समन्वय और निगरानी में प्रमुख भूमिका निभाता है। इसी का एक अंग CPGRAMS है, जिसके माध्यम से नागरिकों की शिकायतों का ऑनलाइन पंजीकरण, अनुवर्ती कार्रवाई और निगरानी होती है।
  • भारत में केंद्र सरकार के अभिलेखों के प्रबंधन का मुख्य विधिक आधार लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 है। इसके अंतर्गत अभिलेखों के रखरखाव, उनके नष्ट करने और अभिलेखागार में सौंपने से संबंधित प्रावधान हैं।
  • सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस जैसे डिजिटल प्रशासन के उपकरणों के प्रसार से भौतिक फाइलों पर निर्भरता घटाने और फाइलों के इलेक्ट्रॉनिक प्रबंधन को बढ़ावा दिया गया है। इससे फाइलों की खोज, निगरानी और निपटान अधिक व्यवस्थित हुआ है।
  • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के बाद सार्वजनिक प्राधिकरणों के लिए अभिलेखों को व्यवस्थित रखना एक विधिक दायित्व बन गया, क्योंकि सूचना की मांग पर समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।

विशेष अभियान 6 क्या है?

  • विशेष अभियान 6 सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, अभिलेख प्रबंधन और लंबित मामलों के निपटान के लिए चलाया गया एक समयबद्ध प्रशासनिक अभियान है। इसकी अवधि 2 से 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
  • इस अभियान के अंतर्गत लंबित मामलों की समीक्षा, अभिलेखों का डिजिटलीकरण, अप्रचलित फाइलों को हटाना और अभिलेख प्रबंधन में सुधार जैसे कार्य किए जाते हैं।
  • भौतिक फाइलों की समीक्षा और ई-फाइलों को समीक्षा के लिए रखने या बंद करने जैसे लक्ष्य मापनीय संकेतकों के रूप में निर्धारित होते हैं, ताकि प्रगति की नियमित निगरानी संभव हो।
  • सांसदों के संदर्भ, सार्वजनिक शिकायतों और सार्वजनिक शिकायत अपीलों का निपटान इस अभियान के प्रशासनिक लक्ष्यों में शामिल है, जिससे नागरिक-सेवा से जुड़े मामलों में गति आती है।
  • अप्रचलित सामग्री के निपटान से प्राप्त राजस्व को सरकारी राजस्व में जोड़ा जाता है, जबकि खाली हुए स्थान का उपयोग कार्यालय सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन में होता है।
  • अभियान का समन्वय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, अधीनस्थ कार्यालयों और संलग्न कार्यालयों के साथ मिलकर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाता है।
  • स्वच्छ भारत मिशन के व्यापक ढांचे में इस तरह के अभियान स्वच्छता को अल्पकालिक गतिविधि के बजाय दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन के रूप में स्थापित करने का प्रयास करते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
अभियान की अवधि और उद्देश्य: विशेष अभियान 6 (Special Campaign 6) 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है और इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देना है। यह स्वच्छता को किसी एक दिन की गतिविधि के बजाय नियमित कार्य-संस्कृति में बदलने का प्रयास है। इसका संबंध स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Mission) की भावना से है।
लंबित मामलों की समीक्षा: सांसदों के संदर्भ, सार्वजनिक शिकायतें, सार्वजनिक शिकायत अपील और भौतिक तथा ई-फाइलों की समीक्षा को लक्ष्य बनाया गया है। प्रशासनिक दक्षता का मापन लंबितता (Pendency) के आधार पर होता है। इससे नागरिक-सेवा की गति और जवाबदेही दोनों प्रभावित होती हैं।
अभिलेख प्रबंधन: अप्रचलित फाइलों को हटाना, अभिलेखों का डिजिटलीकरण और छंटनी (Weeding) के माध्यम से अभिलेख प्रबंधन सुधारा जा रहा है। सरकारी अभिलेख का व्यवस्थित प्रबंधन सूचना तक पहुँच, पारदर्शिता और भविष्य में प्रशासनिक निर्णयों के लिए आवश्यक है।
संस्थागत निगरानी: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, अधीनस्थ कार्यालयों और संलग्न कार्यालयों के समन्वय से वरिष्ठ अधिकारी प्रगति की नियमित निगरानी कर रहे हैं। अभियान को विभागीय स्तर पर लक्ष्य-आधारित और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे कार्यान्वयन की जवाबदेही तय होती है।
राजस्व और स्थान की प्राप्ति: अभियान गतिविधियों से 10,76,262 रुपये का राजस्व मिला और 23,843 वर्ग फुट स्थान खाली हुआ। अनुपयोगी सामग्री की बिक्री और स्थान के बेहतर उपयोग से कार्यालय संसाधनों का कुशल प्रबंधन होता है।

महत्व

प्रशासनिक सुधार

  • लंबित मामलों में कमी से नागरिकों की शिकायतों और अपीलों के निपटारे में तेज़ी आने की संभावना रहती है।
  • फाइलों की नियमित समीक्षा से निर्णय-प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता बढ़ती है।
  • ई-फाइलों का बंद होना कार्यालय-कार्य के डिजिटल रूपांतरण की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।

अभिलेख प्रबंधन और पारदर्शिता

  • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005) के तहत अभिलेखों की सुलभता के लिए व्यवस्थित अभिलेख आवश्यक हैं।
  • लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) के अंतर्गत सरकारी अभिलेखों के संरक्षण और निपटान की प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है, इसलिए छंटनी सावधानी से होनी चाहिए।
  • डिजिटलीकरण से अभिलेखों की सुरक्षा, खोज-क्षमता और दीर्घकालिक संरक्षण बेहतर होता है।

आर्थिक और संसाधन प्रबंधन

  • अनुपयोगी सामग्री की बिक्री से प्राप्त राजस्व सरकारी राजस्व में जुड़ता है, यद्यपि यह राशि अपेक्षाकृत छोटी है।
  • खाली हुए 23,843 वर्ग फुट स्थान का उपयोग कार्यालय-सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन में हो सकता है।
  • भौतिक भंडारण की लागत और स्थान की बर्बादी में कमी से सार्वजनिक धन की बचत होती है।

संवैधानिक और शासन-संरचना से जुड़ाव

  • भारत सरकार के कार्य-संचालन के लिए अनुच्छेद 77 के अंतर्गत बनाए गए नियम ही फाइलों के प्रवाह और निर्णय-दस्तावेज़ीकरण की आधारभूत व्यवस्था देते हैं।
  • संसद सदस्यों के संदर्भों का समय पर निपटारा संसदीय जवाबदेही और मंत्रालयों के उत्तरदायित्व से जुड़ा है।

चुनौतियाँ

1. लंबितता की गहरी समस्या

  • अभियान के 15 अक्टूबर 2026 तक के आँकड़ों में सार्वजनिक शिकायतों की उपलब्धि लगभग 48 प्रतिशत और शिकायत अपीलों की उपलब्धि लगभग 21 प्रतिशत रही, जो दर्शाता है कि लक्ष्य अभी पूरे नहीं हुए हैं।
  • लंबितता की जड़ें प्रक्रियागत विलंब, कर्मचारियों की कमी और अभिलेखों के असंगठित संग्रह में हैं, जिन्हें केवल अभियान से स्थायी रूप से दूर नहीं किया जा सकता।

2. अभिलेख छंटनी और ऐतिहासिक महत्व का जोखिम

  • अप्रचलित फाइलों को हटाते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ऐतिहासिक, विधिक या शोध-मूल्य के अभिलेख नष्ट न हों।
  • लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के अनुरूप छंटनी की प्रक्रिया, अवधारण-अवधि और निपटान के मानक स्पष्ट होने चाहिए।

3. भौतिक से डिजिटल संक्रमण की चुनौतियाँ

  • ई-फाइलों का बंद होना तभी सार्थक है जब डिजिटल अभिलेख सुरक्षित, प्रमाणिक और दीर्घकालिक रूप से सुलभ हों।
  • डिजिटलीकरण के दौरान डेटा की गुणवत्ता, साइबर सुरक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण संबंधी कमियाँ सामने आ सकती हैं।

4. अभियान-आधारित सुधारों की स्थायित्व समस्या

  • विशेष अभियान प्रायः एक निश्चित अवधि के लिए होते हैं, इसलिए उनके परिणाम अवधि समाप्त होने के बाद बने रहें, यह सुनिश्चित करना कठिन होता है।
  • स्वच्छता को संस्थागत रूप देने के लिए व्यवहार-परिवर्तन (Behavioural Change) आवश्यक है, जो केवल लक्ष्य-आधारित आँकड़ों से नहीं मापा जा सकता।

5. समन्वय और उत्तरदायित्व का प्रश्न

  • विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, अधीनस्थ और संलग्न कार्यालयों के बीच समन्वय बनाए रखना बहु-स्तरीय संरचना में कठिन होता है।
  • लक्ष्य-प्राप्ति की रिपोर्टिंग में संख्यात्मक उपलब्धि पर अधिक ज़ोर होने से गुणात्मक सुधार की उपेक्षा का खतरा रहता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
लंबितता का स्तर सार्वजनिक शिकायतों (लगभग 48 प्रतिशत) और शिकायत अपीलों (लगभग 21 प्रतिशत) में लक्ष्य से अभी काफी अंतर है।
अभिलेख की छंटनी ऐतिहासिक या विधिक महत्व के अभिलेख गलती से नष्ट होने का जोखिम रहता है।
डिजिटलीकरण की गुणवत्ता ई-फाइलों की प्रमाणिकता, सुरक्षा और दीर्घकालिक पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
अभियान की स्थायिता अवधि समाप्त होने के बाद भी सुधार बने रहें, इसके लिए नियमित व्यवस्था चाहिए।
लक्ष्य बनाम गुणवत्ता संख्यात्मक लक्ष्यों पर अधिक बल से निर्णय-गुणवत्ता और नागरिक-संतुष्टि की अनदेखी हो सकती है।
आँकड़ों की व्याख्या मध्य-अभियान आँकड़े अंतिम परिणाम नहीं हैं, इसलिए इन्हें सावधानी से पढ़ना चाहिए।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Mission)

आगे की राह

  • छंटनी से पहले अभिलेखों के वर्गीकरण के लिए स्पष्ट मानक बनाए जाएँ, ताकि ऐतिहासिक और विधिक महत्व के अभिलेख सुरक्षित रहें।
  • लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप अभिलेख-निपटान की प्रक्रिया को दस्तावेज़ीकृत किया जाए।
  • भौतिक फाइलों के डिजिटलीकरण के साथ डेटा-गुणवत्ता जाँच, साइबर सुरक्षा और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाए।
  • सार्वजनिक शिकायतों और अपीलों के निपटारे के लिए समय-सीमा तय कर उसकी नियमित समीक्षा की जाए।
  • अभियान के परिणामों को अवधि के बाद भी बनाए रखने के लिए स्वच्छता और अभिलेख प्रबंधन को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए।
  • लक्ष्य-आधारित आँकड़ों के साथ कार्यालय-स्तर पर गुणात्मक मूल्यांकन, जैसे नागरिक-संतुष्टि और कार्य-प्रक्रिया में सुधार, भी दर्ज किए जाएँ।
  • विभागों के बीच समन्वय-तंत्र को मजबूत किया जाए, ताकि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अधीनस्थ कार्यालयों की प्रगति एक समान रूप से आगे बढ़े।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

अभिलेख प्रबंधन (Records Management) · लंबितता (Pendency) · ई-ऑफिस (e-Office) · सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 (Public Records Act, 1993) · सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005) · सार्वजनिक शिकायत निवारण (Public Grievance Redressal) · CPGRAMS · स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) · प्रशासनिक दक्षता (Administrative Efficiency) · डिजिटल शासन (Digital Governance) · व्यवहार परिवर्तन (Behavioural Change) · कार्यालय संसाधनों का उपयोग (Optimal Use of Office Resources)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 77: सरकारी कार्य-संचालन और नियमों का आधार
  • अनुच्छेद 19(1)(क): सूचना-अधिकार की संवैधानिक पृष्ठभूमि

अवधारणा प्रवाह

विशेष अभियान 6 की घोषणा (2 से 31 अक्टूबर 2026) और कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने का उद्देश्य तय होता है।  →  वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मंत्रालय और विभाग के स्तर पर कार्य-योजना की समीक्षा और निगरानी होती है।  →  लंबित सांसदों के संदर्भ, सार्वजनिक शिकायतें, शिकायत अपीलें और फाइलें चिन्हित और समीक्षित की जाती हैं।  →  अप्रचलित भौतिक फाइलों की छंटनी और ई-फाइलों की समीक्षा व बंदी से लंबितता घटती है।  →  अभिलेखों के डिजिटलीकरण और स्थान खाली होने से कार्यालय-दक्षता तथा संसाधन-उपयोग बेहतर होता है।  →  राजस्व की प्राप्ति और सुधरी कार्य-संस्कृति से स्वच्छता का व्यवहार-परिवर्तन दीर्घकाल में स्थायी होने की दिशा में बढ़ता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 केंद्रीय सरकार और संघ राज्य क्षेत्रों के अभिलेखों पर लागू होता है, जबकि राज्य सरकारों के अभिलेख इसके दायरे में स्वतः नहीं आते।
2. CPGRAMS का संचालन इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
3. स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ वर्ष 2014 में 2 अक्टूबर को किया गया था।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 केंद्र और संघ राज्य क्षेत्रों के अभिलेखों पर लागू होता है; राज्यों के लिए उनके अपने अभिलेख कानून हैं। कथन 2 गलत है: CPGRAMS का नोडल विभाग प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) है, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय नहीं। कथन 3 सही है: स्वच्छ भारत मिशन का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2014 को हुआ था।

Q2. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक अभिकथन (A) और एक कारण (R) है।

अभिकथन (A): सरकारी कार्यालयों में अभिलेखों का डिजिटलीकरण और सूचीकरण लंबितता कम करने में सहायक होता है।
कारण (R): सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(a) के अंतर्गत लोक प्राधिकारियों से अपेक्षित है कि वे अपने अभिलेखों का उचित सूचीकरण और अनुक्रमणिका करें तथा उन्हें एक युक्तिसंगत समय-सीमा में कंप्यूटरीकृत करें।

नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
  2. (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
  3. (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है
  4. (A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है

उत्तर: (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अभिकथन सत्य है, क्योंकि डिजिटल और सूचीबद्ध अभिलेख शीघ्र उपलब्ध होते हैं, जिससे निर्णय में विलंब घटता है। कारण भी सत्य है, क्योंकि RTI अधिनियम की धारा 4(1)(a) लोक प्राधिकारियों पर अभिलेखों के सूचीकरण, अनुक्रमणिका और कंप्यूटरीकरण की बाध्यता डालती है। यह कारण अभिकथन की सीधी व्याख्या है, अतः विकल्प (a) सही है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सरकारी कार्यालयों में अभिलेख प्रबंधन, फाइलों की समीक्षा और लंबितता में कमी को प्रशासनिक दक्षता का आधार माना जाता है। इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या केवल डिजिटलीकरण और फाइलों की छंटनी से प्रशासनिक सुधार पर्याप्त हैं? इसकी सीमाओं और इसके लिए आवश्यक संस्थागत उपायों की भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर संरचना: (1) भूमिका: विशेष अभियान 6 (2–31 अक्टूबर 2026) का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देना और लंबितता घटाना है; इसमें 35,743 भौतिक फाइलों की समीक्षा और 7,040 ई-फाइलों की बंदी जैसे आँकड़े दिए गए हैं। (2) कानूनी ढाँचा: सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम, 1993 (केंद्र और संघ राज्य क्षेत्र); सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)(a); पुराने अभिलेखों के निपटान के लिए अभिलेख-निपटान सूचियाँ और राष्ट्रीय अभिलेखागार की भूमिका। (3) प्रशासनिक आयाम: मैक्स वेबर की नौकरशाही संबंधी अवधारणा में नियम-आधारित और दस्तावेज़-आधारित कार्य-प्रणाली; ई-ऑफिस जैसी इलेक्ट्रॉनिक फाइल प्रणाली से निर्णय-प्रक्रिया की गति और जवाबदेही; द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2007) की नागरिक-केंद्रित प्रशासन संबंधी सिफारिशें। (4) सकारात्मक पक्ष: लंबित सांसद-संदर्भों, सार्वजनिक शिकायतों और अपीलों के निपटान में प्रगति; कार्यालय स्थान का मुक्त होना और राजस्व प्राप्ति जैसे परिणाम; CPGRAMS के साथ शिकायत निवारण का समन्वय। (5) सीमाएँ और चुनौतियाँ: केवल फाइल बंद करने से नीतिगत लंबितता या संरचनात्मक विलंब दूर नहीं होता; डिजिटल विभाजन और प्रशिक्षण की कमी; साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023) के प्रश्न; अभिलेखों को हटाने में ऐतिहासिक महत्व की हानि का जोखिम। (6) संतुलित दृष्टिकोण: स्वच्छता अभियान को व्यवहार परिवर्तन से जोड़ना आवश्यक है, केवल एक-बार की सफाई पर्याप्त नहीं; स्वच्छ भारत मिशन की निरंतरता और निगरानी तंत्र की भूमिका। (7) निष्कर्ष: डिजिटलीकरण और अभिलेख प्रबंधन आवश्यक उपकरण हैं, परंतु स्थायी दक्षता के लिए प्रक्रिया-सरलीकरण, जवाबदेही तंत्र और मानव संसाधन क्षमता-निर्माण के साथ इनका समन्वय आवश्यक है।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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