06 Sep संयुक्त राष्ट्र में भारत का योगदान: बाल विवाह मुक्ति हेतु अंतर्राष्ट्रीय दिवस की घोषणा
✎ भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 27 नवंबर को 'बाल, शीघ्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के रूप में घोषित करने वाले प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है, जो इस वैश्विक सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — समाज और सामाजिक मुद्दे | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध, सामाजिक न्याय, शासन | GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा (महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा)
- Prelims: बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA), बाल विवाह मुक्त भारत अभियान, मानवाधिकार, लैंगिक समानता, सतत विकास लक्ष्य (SDGs)
- Essay: लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण, बाल विवाह: एक सामाजिक अभिशाप और विकास में बाधा, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकारों का संरक्षण
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 27 नवंबर को ‘बाल, शीघ्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के रूप में घोषित करने वाले प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है, जो इस वैश्विक सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है, जिसमें 27 नवंबर को ‘बाल, शीघ्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (International Day for the Elimination of Child, Early and Forced Marriage) के रूप में घोषित किया गया है। यह प्रस्ताव सिएरा लियोन के नेतृत्व में सर्वसम्मति से अपनाया गया, जो बाल विवाह जैसी हानिकारक प्रथा को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों को मजबूत करेगा। भारत का यह कदम देश में बाल विवाह को समाप्त करने के अपने राष्ट्रीय अभियान ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के अनुरूप है, जिसे 27 नवंबर, 2024 को शुरू किया गया था।
पृष्ठभूमि
- बाल विवाह एक वैश्विक समस्या है जो लड़कियों और लड़कों दोनों को प्रभावित करती है, लेकिन लड़कियों पर इसका असमान रूप से अधिक प्रभाव पड़ता है। यह उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है और उनके स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आर्थिक अवसरों को गंभीर रूप से बाधित करता है।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 27 नवंबर को ‘बाल, शीघ्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के रूप में घोषित करने वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से अपनाया।
- सिएरा लियोन ने लगभग 70 देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, के समर्थन से इस प्रस्ताव का नेतृत्व किया।
- भारत में, ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान 27 नवंबर, 2024 को शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य 2026 तक बाल विवाह की व्यापकता को 10 प्रतिशत कम करना और 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाना है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस सरकारों, नागरिक समाज, धार्मिक नेताओं, स्कूलों, समुदायों और बच्चों द्वारा एकीकृत कार्रवाई के लिए जवाबदेही की वैश्विक याद दिलाएगा।
- यह प्रस्ताव सदस्य देशों को बाल, शीघ्र और जबरन विवाह को समाप्त करने के लिए समग्र, बहु-क्षेत्रीय राष्ट्रीय रणनीतियों और कार्य योजनाओं को विकसित करने तथा लागू करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
बाल विवाह (Child Marriage) क्या है?
- बाल विवाह एक ऐसी प्रथा है जिसमें 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे का विवाह कर दिया जाता है। भारत में, ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006’ (Prohibition of Child Marriage Act, 2006) के अनुसार, विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है।
- यह प्रथा मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है, विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों का, और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आर्थिक सशक्तिकरण से वंचित करती है।
- बाल विवाह के कई नकारात्मक परिणाम होते हैं, जिनमें कम उम्र में गर्भावस्था, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में वृद्धि, घरेलू हिंसा और शिक्षा से वंचित होना शामिल है।
- संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals – SDGs) के लक्ष्य 5.3 में 2030 तक बाल, शीघ्र और जबरन विवाह को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
- अंतर्राष्ट्रीय दिवस का उद्देश्य इस हानिकारक प्रथा के बारे में जागरूकता बढ़ाना, सरकारों को व्यापक कानून और राष्ट्रीय कार्य योजनाएं विकसित करने के लिए प्रेरित करना तथा सभी हितधारकों को एकजुट कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित करना है।
- यह लड़कियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में निवेश करने और महिलाओं व लड़कियों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने पर भी जोर देता है, जिसे बाल विवाह की रोकथाम के लिए एक प्रमुख रणनीति माना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा प्रस्ताव | बाल विवाह, प्रारंभिक और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| 27 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय दिवस | यह दिन बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देगा। |
| भारत का सह-प्रायोजक होना | बाल विवाह को समाप्त करने के भारत के अपने प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इसकी वकालत को रेखांकित करता है। |
| सर्वसम्मति से अपनाया गया | इस गंभीर मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और सहयोग को दर्शाता है। |
| बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का संदर्भ | भारत के घरेलू अभियान को वैश्विक मंच से जोड़ता है और उसके लक्ष्यों को सुदृढ़ करता है। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- यह प्रस्ताव बाल विवाह को एक हानिकारक प्रथा के रूप में मान्यता देता है जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है, विशेषकर महिलाओं और लड़कियों को असमान रूप से प्रभावित करती है।
- यह लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सदस्य देशों को प्रोत्साहित करता है, जो सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- यह वैश्विक स्तर पर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक मानदंडों को बदलने में मदद करेगा।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- भारत का इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजक होना मानवाधिकारों और लैंगिक समानता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है, जिससे वैश्विक मंच पर उसकी छवि बेहतर होती है।
- यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद का एक उदाहरण है, जहां विभिन्न देश एक साझा सामाजिक बुराई से लड़ने के लिए एकजुट हुए हैं।
- यह भारत को बाल विवाह उन्मूलन के क्षेत्र में एक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
शासन और नीति
- यह प्रस्ताव सदस्य देशों को बाल विवाह को समाप्त करने के लिए समग्र, बहु-क्षेत्रीय राष्ट्रीय रणनीतियों और कार्य योजनाओं को विकसित करने और लागू करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- यह सरकारों से व्यापक कानूनों, बजटीय राष्ट्रीय कार्य योजनाओं और जवाबदेह संस्थानों के माध्यम से निर्णायक कार्रवाई करने का आह्वान करता है।
- यह बच्चों को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल करने और समुदाय, धार्मिक नेताओं तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने पर जोर देता है।
चुनौतियाँ
1. सामाजिक मानदंड और परंपराएँ
- कई समुदायों में बाल विवाह को सांस्कृतिक या धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है, जिससे इसे समाप्त करना मुश्किल हो जाता है।
- सामाजिक दबाव और रूढ़िवादी सोच अक्सर कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय समाज, सामाजिक मुद्दे
2. गरीबी और शिक्षा का अभाव
- आर्थिक असुरक्षा वाले परिवारों में लड़कियों को अक्सर बोझ माना जाता है और कम उम्र में उनकी शादी कर दी जाती है।
- शिक्षा की कमी बाल विवाह के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता को कम करती है और लड़कियों के सशक्तिकरण में बाधा डालती है।
यूपीएससी लिंक: गरीबी और विकासात्मक मुद्दे, शिक्षा
3. कानूनों का कमजोर प्रवर्तन
- मौजूदा कानूनों के बावजूद, बाल विवाह के मामलों की रिपोर्टिंग और अपराधियों को दंडित करने में अक्सर चुनौतियाँ आती हैं।
- पुलिस और न्यायिक प्रणाली में संवेदनशीलता और क्षमता की कमी प्रभावी प्रवर्तन को बाधित कर सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सामाजिक न्याय
4. डेटा की कमी और निगरानी
- बाल विवाह के वास्तविक प्रसार और पैटर्न पर विश्वसनीय डेटा की कमी प्रभावी नीतियों और हस्तक्षेपों को डिजाइन करने में बाधा डालती है।
- कार्यान्वित कार्यक्रमों की निगरानी और मूल्यांकन की कमी उनकी प्रभावशीलता को मापने में चुनौती पेश करती है।
यूपीएससी लिंक: शासन, सामाजिक संकेतक
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| बाल विवाह की व्यापकता | भारत में अभी भी बड़ी संख्या में बाल विवाह होते हैं, खासकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में। |
| लैंगिक असमानता | बाल विवाह लड़कियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसरों से वंचित करके लैंगिक असमानता को बढ़ाता है। |
| स्वास्थ्य संबंधी जोखिम | कम उम्र में गर्भावस्था और प्रसव से लड़कियों और उनके बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम होते हैं। |
| कानूनी और सामाजिक जागरूकता | बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act, 2006) जैसे कानूनों के बारे में जागरूकता की कमी और सामाजिक स्वीकृति एक बड़ी बाधा है। |
| अंतर-राज्यीय भिन्नता | भारत के विभिन्न राज्यों में बाल विवाह की दर में काफी भिन्नता है, जिससे लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता होती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- बाल विवाह मुक्त भारत अभियान
आगे की राह
- बाल विवाह के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक जन अभियान चलाए जाएँ, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
- लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच और गुणवत्ता में सुधार किया जाए, जिसमें विवाहित लड़कियों को भी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
- गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता और वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएँ ताकि वे अपनी बेटियों की शादी कम उम्र में न करें।
- सामुदायिक नेताओं, धार्मिक गुरुओं और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में शामिल किया जाए।
- बाल विवाह के मामलों की रिपोर्टिंग और निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाए तथा डेटा संग्रह में सुधार किया जाए।
- किशोरियों को सशक्त बनाने वाले कार्यक्रमों में निवेश किया जाए, जिससे उन्हें अपने अधिकारों के बारे में जानकारी हो और वे अपने जीवन के बारे में निर्णय ले सकें।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बाल विवाह उन्मूलन · संयुक्त राष्ट्र महासभा · अंतर्राष्ट्रीय दिवस · महिला एवं बाल विकास · मानवाधिकार · लैंगिक समानता · सतत विकास लक्ष्य · बाल विवाह निषेध अधिनियम · सामाजिक कुप्रथा · राष्ट्रीय कार्य योजना · शिक्षा का अधिकार · बाल संरक्षण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21A’, ‘note’: ‘शिक्षा का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 23’, ‘note’: ‘मानव दुर्व्यापार और बलात् श्रम का निषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 24’, ‘note’: ‘बाल श्रम का निषेध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(f)’, ‘note’: ‘बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर’}
अवधारणा प्रवाह
बाल विवाह एक हानिकारक प्रथा है → यह मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है → लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य प्रभावित होते हैं → संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव अपनाया → 27 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित → वैश्विक जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा मिलेगा → बाल विवाह उन्मूलन की दिशा में प्रगति
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को बाल, शीघ्र और जबरन विवाह उन्मूलन के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया है।
2. भारत ने इस प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है।
3. ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान का लक्ष्य 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को बाल, शीघ्र और जबरन विवाह उन्मूलन के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया है। कथन 2 सही है क्योंकि भारत इस प्रस्ताव के सह-प्रायोजकों में से एक था। कथन 3 सही है क्योंकि ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाना है।
Q2. बाल विवाह से संबंधित निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. बाल विवाह मुख्य रूप से महिलाओं और लड़कियों को असमान रूप से प्रभावित करता है।
2. बाल विवाह शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों को बाधित करता है।
3. भारत में बाल विवाह को रोकने के लिए ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006’ लागू है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि बाल विवाह एक हानिकारक प्रथा है जो महिलाओं और लड़कियों को असमान रूप से प्रभावित करती है। कथन 2 सही है क्योंकि यह उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक संभावनाओं को गंभीर रूप से बाधित करता है। कथन 3 सही है क्योंकि भारत में बाल विवाह को रोकने के लिए ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006’ एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुप्रथा है जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा डालती है। इस संदर्भ में, बाल विवाह के उन्मूलन हेतु अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों और भारत के योगदान पर चर्चा कीजिए। साथ ही, भारत में इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए आवश्यक व्यापक रणनीतियों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: बाल विवाह को एक मानवाधिकार उल्लंघन और सामाजिक कुप्रथा के रूप में परिभाषित करें, इसके वैश्विक और राष्ट्रीय निहितार्थों पर संक्षिप्त प्रकाश डालें।
2. अंतर्राष्ट्रीय प्रयास: संयुक्त राष्ट्र महासभा के हालिया प्रस्ताव (27 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित करना) का उल्लेख करें, सिएरा लियोन की भूमिका और वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर चर्चा करें। सतत विकास लक्ष्यों (SDG 5.3) के साथ इसके संबंध को भी इंगित करें।
3. भारत का योगदान: संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के सह-प्रायोजक के रूप में भारत की भूमिका पर प्रकाश डालें। ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान (2024 में शुरू, 2030 तक लक्ष्य) का उल्लेख करें।
4. भारत में उन्मूलन हेतु व्यापक रणनीतियाँ:
a. कानूनी ढाँचा: बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 और संबंधित कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन।
b. शिक्षा और जागरूकता: लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना, बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता अभियान चलाना।
c. आर्थिक सशक्तिकरण: महिलाओं और लड़कियों के लिए आर्थिक अवसरों का सृजन।
d. संस्थागत तंत्र: पुलिस, न्यायपालिका और बाल संरक्षण सेवाओं की भूमिका को मजबूत करना।
e. सामुदायिक भागीदारी: धार्मिक नेताओं, सामुदायिक नेताओं और बच्चों को स्वयं इस प्रक्रिया में शामिल करना।
f. बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण: स्वास्थ्य, शिक्षा, न्याय और सामाजिक कल्याण मंत्रालयों के बीच समन्वय।
5. निष्कर्ष: बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण के लिए एक समग्र, सतत और भागीदारीपूर्ण दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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