24 Sep संयुक्त राष्ट्र में समुद्र तल वृद्धि: जलवायु संकट का बड़ा खतरा
✎ समुद्र-स्तर में वृद्धि जलवायु परिवर्तन का एक गंभीर परिणाम है, जो तटीय समुदायों और छोटे द्वीप राष्ट्रों के लिए अस्तित्वगत खतरा पैदा करती है, जिसके लिए वैश्विक सहयोग और अनुकूलन रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भौतिक भूगोल, विश्व का भूगोल) | GS Paper III — पर्यावरण और आपदा प्रबंधन | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध (अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, संधियाँ और समझौते)
- Prelims: समुद्र-स्तर में वृद्धि, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, तटीय क्षेत्र, छोटे द्वीप विकासशील राज्य (SIDS), अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC), संयुक्त राष्ट्र घोषणा, टुवालू
- Essay: जलवायु परिवर्तन के सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: समुद्र-स्तर में वृद्धि जलवायु परिवर्तन का एक गंभीर परिणाम है, जो तटीय समुदायों और छोटे द्वीप राष्ट्रों के लिए अस्तित्वगत खतरा पैदा करती है, जिसके लिए वैश्विक सहयोग और अनुकूलन रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, विश्व के नेताओं ने समुद्र-स्तर में वृद्धि से निपटने के लिए एक संयुक्त राष्ट्र घोषणा को मंजूरी दी है। यह बैठक उन कमजोर निम्न-तटीय राष्ट्रों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और समर्थन को मजबूत करने के तरीकों पर बहस करने के लिए आयोजित की गई थी, जो इस गंभीर पर्यावरणीय खतरे से सबसे अधिक प्रभावित हैं। समुद्र-स्तर में वृद्धि वैश्विक तापन (Global Warming) के सबसे दृश्यमान परिणामों में से एक है और कुछ देशों के लिए यह एक आसन्न अस्तित्वगत खतरा बन गया है।
पृष्ठभूमि
- समुद्र-स्तर में वृद्धि वैश्विक तापन के कारण होती है, जिससे ध्रुवीय बर्फ और ग्लेशियर पिघलते हैं तथा समुद्र के पानी का थर्मल विस्तार होता है।
- संयुक्त राष्ट्र अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC) के अनुसार, वैश्विक औसत समुद्र-स्तर बढ़ रहा है और इसकी गति तेज हो रही है।
- दुनिया भर में लगभग 770 मिलियन लोग तटीय क्षेत्रों में रहते हैं जो समुद्र-स्तर में वृद्धि से प्रभावित हैं।
- इस सदी के अंत तक समुद्र-स्तर में केवल आधा मीटर की वृद्धि से 150 मिलियन से 300 मिलियन लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ सकता है।
- टुवालू जैसे कुछ छोटे द्वीप राष्ट्र (Small Island States) पहले से ही समुद्र में समा जाने की योजना बना रहे हैं, टुवालू दुनिया का पहला “डिजिटल राष्ट्र” बनने की दिशा में अग्रसर है।
- वे राष्ट्र जो जलवायु परिवर्तन के परिणामों, जैसे समुद्र-स्तर में वृद्धि, में सबसे कम योगदान करते हैं, उन्हें इसका सबसे बुरा प्रभाव झेलना पड़ रहा है।
समुद्र-स्तर में वृद्धि क्या है?
- समुद्र-स्तर में वृद्धि से तात्पर्य समुद्र के औसत स्तर में दीर्घकालिक वृद्धि से है, जो मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन के कारण होती है।
- इसके दो प्रमुख कारण हैं: पहला, ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों का पिघलना, जिससे महासागरों में पानी की मात्रा बढ़ जाती है।
- दूसरा कारण थर्मल विस्तार है, जहाँ महासागरों का पानी गर्म होने पर फैलता है, जिससे उसका आयतन बढ़ जाता है।
- यह वृद्धि तटीय क्षेत्रों में बाढ़, भूमि का क्षरण, खारे पानी की घुसपैठ और तटीय पारिस्थितिक तंत्रों को नुकसान पहुँचाती है।
- छोटे द्वीप विकासशील राज्य (SIDS) और निम्न-तटीय क्षेत्र इस घटना से सबसे अधिक असुरक्षित हैं, क्योंकि उनकी भूमि का एक बड़ा हिस्सा समुद्र-स्तर से थोड़ा ही ऊपर है।
- समुद्र-स्तर में वृद्धि के दीर्घकालिक प्रभाव में कृषि भूमि का नुकसान, पेयजल स्रोतों का दूषित होना और बड़े पैमाने पर जनसंख्या का विस्थापन शामिल है।
- वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रहती है, तो 21वीं सदी के अंत तक समुद्र-स्तर में और अधिक वृद्धि होगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समुद्र स्तर में वृद्धि | वैश्विक तापन (Global Warming) के सबसे प्रत्यक्ष परिणामों में से एक, जो तटीय क्षेत्रों के लिए एक आसन्न खतरा है। |
| अस्तित्वगत खतरा | कई छोटे द्वीपीय राष्ट्रों (Small Island States) और निचले तटीय क्षेत्रों के लिए यह एक अस्तित्वगत संकट है, जिससे उनके भूभाग और संस्कृति के लुप्त होने का खतरा है। |
| मानवीय विस्थापन | समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण लाखों लोगों के विस्थापित होने की आशंका है, जिससे बड़े पैमाने पर आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन की समस्या उत्पन्न होगी। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग | इस वैश्विक समस्या से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र घोषणा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है। |
| जलवायु न्याय | जो राष्ट्र जलवायु परिवर्तन में सबसे कम योगदान करते हैं, वे इसके सबसे बुरे प्रभावों का सामना कर रहे हैं, जिससे जलवायु न्याय (Climate Justice) का मुद्दा उठता है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- समुद्र स्तर में वृद्धि तटीय पारिस्थितिक तंत्रों, जैसे मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) को गंभीर रूप से प्रभावित करती है, जिससे जैव विविधता (Biodiversity) का नुकसान होता है।
- यह ताजे पानी के स्रोतों में खारे पानी के प्रवेश (Saline Intrusion) का कारण बनती है, जिससे कृषि और पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है।
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- तटीय समुदायों की आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ता है, विशेषकर मत्स्य पालन और पर्यटन पर निर्भर लोगों के लिए।
- बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) जैसे बंदरगाह, सड़कें और आवासीय क्षेत्र जलमग्न होने के खतरे में हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
- मानवीय विस्थापन से सामाजिक अशांति और संघर्ष की संभावना बढ़ सकती है, साथ ही विस्थापितों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन की चुनौती भी उत्पन्न होती है।
भू-राजनीतिक महत्व
- छोटे द्वीपीय राष्ट्रों का अस्तित्व खतरे में है, जिससे उनकी संप्रभुता (Sovereignty) और अंतर्राष्ट्रीय पहचान पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूत करने की आवश्यकता है, विशेषकर उन देशों की जो इसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।
चुनौतियाँ
1. वैज्ञानिक अनिश्चितता और मॉडलिंग की जटिलता
- समुद्र स्तर में वृद्धि की सटीक दर और क्षेत्रीय भिन्नताओं का अनुमान लगाना जटिल है, जिससे अनुकूलन रणनीतियों (Adaptation Strategies) की योजना बनाना मुश्किल हो जाता है।
- विभिन्न जलवायु मॉडल और परिदृश्यों में भिन्नताएँ नीति निर्माताओं के लिए चुनौती प्रस्तुत करती हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी: जलवायु परिवर्तन
2. वित्तपोषण और तकनीकी हस्तांतरण
- विकासशील और छोटे द्वीपीय राष्ट्रों के पास समुद्र स्तर में वृद्धि के प्रभावों से निपटने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन और तकनीकी क्षमता का अभाव है।
- विकसित देशों से पर्याप्त जलवायु वित्त (Climate Finance) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) का अभाव एक बड़ी बाधा है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध: जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय समझौते
3. शासन और नीतिगत समन्वय
- समुद्र स्तर में वृद्धि एक बहु-क्षेत्रीय समस्या है जिसके लिए विभिन्न सरकारी विभागों और स्तरों पर समन्वित नीतियों की आवश्यकता होती है।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावी समन्वय और सहयोग का अभाव अक्सर प्रगति में बाधा डालता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: विकास प्रक्रियाएँ और नीतियाँ
4. सामाजिक-सांस्कृतिक चुनौतियाँ
- समुदायों को उनके पैतृक भूमि से विस्थापित करना उनकी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करता है।
- पुनर्वास और पुनर्स्थापन की प्रक्रियाएँ अक्सर जटिल और संवेदनशील होती हैं, जिससे सामाजिक प्रतिरोध उत्पन्न हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय समाज: सामाजिक सशक्तिकरण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| तटीय कटाव और भूमि का नुकसान | कृषि योग्य भूमि, आवास और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे का समुद्र में समा जाना, जिससे लाखों लोग बेघर हो सकते हैं। |
| खारे पानी का प्रवेश | ताजे पानी के एक्वीफरों (Aquifers) और कृषि भूमि में खारे पानी का प्रवेश, जिससे पेयजल संकट और खाद्य सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होता है। |
| चरम मौसमी घटनाएँ | समुद्र स्तर में वृद्धि तूफानी लहरों (Storm Surges) और तटीय बाढ़ की तीव्रता और आवृत्ति को बढ़ाती है, जिससे जान-माल का अधिक नुकसान होता है। |
| पारिस्थितिक तंत्र का विनाश | मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियों और आर्द्रभूमि (Wetlands) जैसे महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिक तंत्रों का नुकसान, जो तटीय सुरक्षा और जैव विविधता के लिए आवश्यक हैं। |
| मानवीय विस्थापन और जलवायु शरणार्थी | बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन, जिससे जलवायु शरणार्थियों (Climate Refugees) की समस्या उत्पन्न होती है और अंतर्राष्ट्रीय कानून व नीति के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी होती हैं। |
आगे की राह
- जलवायु परिवर्तन शमन (Mitigation) प्रयासों को तेज करना: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करना और उन्हें प्राप्त करना।
- तटीय अनुकूलन रणनीतियों (Coastal Adaptation Strategies) को मजबूत करना: तटीय क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना, मैंग्रोव रोपण जैसे प्राकृतिक सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देना और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems) को विकसित करना।
- जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में वृद्धि: विकसित देशों को विकासशील और छोटे द्वीपीय राष्ट्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करनी चाहिए।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नीतिगत समन्वय को बढ़ावा देना: समुद्र स्तर में वृद्धि पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा जैसे अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी ढंग से लागू करना और वैश्विक स्तर पर समन्वित नीतियों को बढ़ावा देना।
- समुदायों की भागीदारी और क्षमता निर्माण: स्थानीय समुदायों को अनुकूलन और शमन प्रयासों में शामिल करना, उनकी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का उपयोग करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना।
- जलवायु न्याय के सिद्धांतों को लागू करना: उन राष्ट्रों को प्राथमिकता देना जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं, लेकिन इसके लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं।
- अनुसंधान और विकास में निवेश: समुद्र स्तर में वृद्धि के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने और अभिनव समाधान विकसित करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
समुद्र स्तर में वृद्धि · जलवायु परिवर्तन · वैश्विक तापन · छोटे द्वीपीय विकासशील राज्य · तटीय क्षेत्र · संयुक्त राष्ट्र · जलवायु अनुकूलन · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · सतत विकास लक्ष्य · पर्यावरणीय प्रवास
अवधारणा प्रवाह
मानवीय गतिविधियाँ (जीवाश्म ईंधन का दहन) → ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि → वैश्विक तापन (पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि) → ध्रुवीय बर्फ और ग्लेशियरों का पिघलना → समुद्र के पानी का तापीय विस्तार (Thermal Expansion) → समुद्र स्तर में वृद्धि → तटीय क्षेत्रों में बाढ़, कटाव और विस्थापन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समुद्र स्तर में वृद्धि वैश्विक तापन (Global Warming) के सबसे प्रत्यक्ष परिणामों में से एक है।
2. संयुक्त राष्ट्र अंतर-सरकारी पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) के अनुसार, वैश्विक औसत समुद्र स्तर बढ़ रहा है और इसकी गति तेज हो रही है।
3. तुवालू जैसे छोटे द्वीपीय देश समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण सबसे अधिक खतरे में हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि समुद्र स्तर में वृद्धि वास्तव में वैश्विक तापन के कारण ध्रुवीय बर्फ पिघलने और समुद्री जल के थर्मल विस्तार का सीधा परिणाम है। कथन 2 भी सही है, IPCC की रिपोर्टें लगातार समुद्र स्तर में वृद्धि की दर में तेजी की पुष्टि करती हैं। कथन 3 भी सही है, तुवालू जैसे निम्न-ऊंचाई वाले छोटे द्वीपीय देश समुद्र स्तर में वृद्धि से सबसे अधिक प्रभावित हैं और उनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
Q2. समुद्र स्तर में वृद्धि के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से संभावित परिणाम है/हैं?
1. तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का विस्थापन।
2. कृषि योग्य भूमि का खारा होना।
3. मीठे पानी के स्रोतों में खारे पानी का प्रवेश।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — समुद्र स्तर में वृद्धि से तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और भूमि का कटाव होता है, जिससे लोगों को विस्थापित होना पड़ता है (कथन 1 सही)। समुद्र का खारा पानी कृषि भूमि में प्रवेश कर उसे अनुपजाऊ बना देता है (कथन 2 सही)। साथ ही, यह भूजल और अन्य मीठे पानी के स्रोतों को प्रदूषित कर देता है (कथन 3 सही)। अतः सभी तीनों परिणाम संभावित हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ समुद्र स्तर में वृद्धि वैश्विक जलवायु परिवर्तन का एक गंभीर परिणाम है, जो विशेष रूप से निम्न-तटीय और द्वीपीय राष्ट्रों के लिए अस्तित्वगत खतरा पैदा करता है। इस कथन के आलोक में, समुद्र स्तर में वृद्धि के कारणों और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, इस चुनौती से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** समुद्र स्तर में वृद्धि की वर्तमान स्थिति और इसके महत्व पर संक्षिप्त परिचय।
2. **समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण:**
* **थर्मल विस्तार:** महासागरों द्वारा ऊष्मा अवशोषण से जल का विस्तार।
* **ग्लेशियरों और बर्फ की चादरों का पिघलना:** आर्कटिक, अंटार्कटिक और पर्वतीय ग्लेशियरों का पिघलना।
* **ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन:** मानव गतिविधियों से उत्सर्जित CO2 और अन्य गैसें जो वैश्विक तापन में योगदान करती हैं।
3. **सामाजिक-आर्थिक प्रभाव:**
* **जनसंख्या विस्थापन:** तटीय क्षेत्रों से लाखों लोगों का पलायन (उदाहरण: तुवालू)।
* **कृषि और खाद्य सुरक्षा:** उपजाऊ भूमि का खारा होना, फसल उत्पादन में कमी।
* **बुनियादी ढाँचा:** तटीय शहरों, बंदरगाहों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को क्षति।
* **मीठे पानी की कमी:** खारे पानी के प्रवेश से पेयजल स्रोतों का दूषित होना।
* **जैव विविधता:** तटीय पारिस्थितिक तंत्रों (मैंग्रोव, कोरल रीफ) पर नकारात्मक प्रभाव।
* **आर्थिक क्षति:** पर्यटन, मत्स्य पालन और अन्य तटीय उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव।
4. **अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका:**
* **संयुक्त राष्ट्र घोषणाएँ और समझौते:** UN घोषणा ऑन सी लेवल राइज, पेरिस समझौता (Paris Agreement) जैसे मंचों की भूमिका।
* **वित्तीय सहायता:** जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) और शमन (Mitigation) के लिए विकासशील देशों को वित्तीय सहायता।
* **प्रौद्योगिकी हस्तांतरण:** जलवायु-लचीली प्रौद्योगिकियों और विशेषज्ञता का साझाकरण।
* **क्षमता निर्माण:** कमजोर राष्ट्रों को योजना बनाने और प्रतिक्रिया देने में मदद करना।
* **शमन प्रयास:** वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए सामूहिक प्रयास।
* **शुरुआती चेतावनी प्रणाली:** आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सहयोग।
5. **निष्कर्ष:** समुद्र स्तर में वृद्धि से निपटने के लिए एक समन्वित, बहु-आयामी और न्यायसंगत वैश्विक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: news.un.org
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