27 Jul सरकार द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को मजबूत करने हेतु 63.67 करोड़ रुपये की सहायता


मानचित्र व माइंड-मैप: SC/ST (Prevention of Atrocities) Act Implementation Funding
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, केंद्र एवं राज्यों द्वारा कमजोर वर्गों के लिए गठित सुरक्षा तंत्र | GS Paper III — समावेशी विकास
- Prelims: अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY), राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY), वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (IPSrC), दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), सहायक यंत्रों एवं उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए दिव्यांगजनों को सहायता (ADIP), दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग
- Essay: समावेशी विकास और कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान, भारत में सामाजिक सुरक्षा जाल का विस्तार: आवश्यकता और प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय पूर्वोत्तर सहित पूरे देश में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु अटल वयो अभ्युदय योजना और राष्ट्रीय वयोश्री योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता और सहायक उपकरण प्रदान कर सामाजिक समावेशन को बढ़ावा दे रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री रामदास आठवले ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत सरकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से असम तथा अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है। उन्होंने इन योजनाओं के तहत प्रदान की गई वित्तीय सहायता और लाभार्थियों की संख्या का विस्तृत विवरण दिया, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रयासों पर प्रकाश पड़ा।
पृष्ठभूमि
- भारत का संविधान (Constitution) अपने नागरिकों को सामाजिक न्याय (Social Justice) और समानता (Equality) सुनिश्चित करने के लिए राज्य को निर्देश देता है, विशेषकर कमजोर वर्गों के लिए।
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से अनुसूचित जातियों (Scheduled Castes), अन्य पिछड़ा वर्गों (Other Backward Classes), वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens), दिव्यांगजनों (Persons with Disabilities) और अन्य वंचित समूहों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए कार्य करता है।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र (North-Eastern Region) भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से विशिष्ट चुनौतियों का सामना करता है, जिसके लिए लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता होती है।
- सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा (Social Security) और समावेशी विकास (Inclusive Development) सुनिश्चित करना है, ताकि कोई भी वर्ग विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे।
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके पूर्ण व समान भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा प्रदान करता है।
- वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती संख्या और उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी विशेष योजनाओं की आवश्यकता है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
- केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) को इन योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए वित्तीय सहायता (Financial Assistance) प्रदान करती है, जिससे जमीनी स्तर पर प्रभाव सुनिश्चित हो सके।
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना (National Vayoshri Yojana) जैसी पहलें आयु-संबंधी दिव्यांगताओं से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण प्रदान कर उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करती हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलें
- अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY): यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक अम्ब्रेला योजना है, जिसके तहत विभिन्न उप-योजनाएं संचालित की जाती हैं। इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को आवास, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और मनोरंजन संबंधी सुविधाएं प्रदान करना है।
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (IPSrC): AVYAY के तहत, यह योजना जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। पिछले पाँच वित्तीय वर्षों में, केवल असम में 1.03 लाख से अधिक लाभार्थी दर्ज किए गए हैं।
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY): इस योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा (BPL) से नीचे जीवनयापन करने वाले अथवा ₹15,000 तक की मासिक आय वाले तथा आयु-संबंधी दिव्यांगताओं से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क सहायक जीवनोपयोगी उपकरण (Assistive Living Devices) उपलब्ध कराए जाते हैं।
- सहायक यंत्रों एवं उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए दिव्यांगजनों को सहायता (ADIP) योजना: यह दिव्यांगजनों को उनकी दिव्यांगता के अनुरूप सहायक उपकरण और यंत्र प्रदान करती है, जिससे उनकी गतिशीलता और स्वतंत्रता बढ़ती है।
- दिव्यांग अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की योजना (SIPDA): यह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रभावी कार्यान्वयन, जागरूकता सृजन और प्रचार-प्रसार के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान करती है।
- दिव्यांग छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना: यह दिव्यांग छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने और अपने कौशल को विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिलता है।
- विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID) योजना: इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए एक सार्वभौमिक पहचान पत्र जारी करना है, जो उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और लाभों तक पहुँचने में मदद करेगा।
- दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना (DDRS): यह दिव्यांगजनों के पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए विभिन्न सेवाएं प्रदान करती है, जिसमें चिकित्सा, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और सामाजिक एकीकरण शामिल है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का सुदृढ़ीकरण | यह अधिनियम अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्यों के विरुद्ध होने वाले अत्याचारों को रोकने, ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने और पीड़ितों को राहत तथा पुनर्वास प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढाँचा है। सरकार द्वारा वित्तीय सहायता इसका प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करती है। |
| राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता | यह सहायता अधिनियम के तहत पीड़ितों को राहत, पुनर्वास, कानूनी सहायता और विशेष अदालतों के संचालन जैसे व्ययों को वहन करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की क्षमता को बढ़ाती है। यह केंद्र-राज्य सहयोग का एक उदाहरण है। |
| सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की भूमिका | यह मंत्रालय SC/ST के कल्याण और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए नोडल मंत्रालय है। इसकी पहलें हाशिए पर पड़े समुदायों के सशक्तिकरण और सामाजिक समानता प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। |
| अत्याचार निवारण | अधिनियम का मुख्य उद्देश्य SC/ST समुदायों के सदस्यों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकना और ऐसे अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करना है, जिससे सामाजिक न्याय और समानता स्थापित हो सके। |
महत्व
सामाजिक न्याय
- यह कदम अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के प्रति होने वाले अत्याचारों को रोकने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन इन समुदायों को सामाजिक सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने में मदद करता है।
कानून का शासन
- वित्तीय सहायता के माध्यम से अधिनियम का सुदृढ़ीकरण यह सुनिश्चित करता है कि कानून का शासन सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो, विशेषकर उन लोगों पर जो ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे हैं।
- यह न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करता है और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने में सहायक होता है।
समावेशी विकास
- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सशक्तिकरण के बिना समावेशी विकास संभव नहीं है। यह पहल इन समुदायों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें विकास प्रक्रियाओं में भागीदार बनाने में मदद करती है।
- यह समाज के कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा जाल प्रदान करके सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।
चुनौतियाँ
1. अधिनियम के कार्यान्वयन में चुनौतियाँ
- जागरूकता की कमी: पीड़ितों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच अधिनियम के प्रावधानों के बारे में पर्याप्त जागरूकता का अभाव।
- न्यायिक प्रक्रिया में देरी: मामलों की सुनवाई में देरी और लंबित मामलों की बड़ी संख्या।
- साक्ष्य जुटाने में कठिनाई: अत्याचार के मामलों में साक्ष्य जुटाने और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्ग
2. सामाजिक पूर्वाग्रह और भेदभाव
- जाति-आधारित भेदभाव अभी भी समाज में व्याप्त है, जिससे अत्याचार के मामलों में वृद्धि होती है।
- पीड़ितों को अक्सर सामाजिक बहिष्कार और प्रतिशोध का सामना करना पड़ता है, जिससे वे शिकायत दर्ज कराने से कतराते हैं।
यूपीएससी लिंक: भारतीय समाज, सामाजिक मुद्दे
3. प्रशासनिक और पुलिस संवेदनशीलता
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों में SC/ST मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता की कमी।
- अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन न करना।
यूपीएससी लिंक: शासन, लोक प्रशासन
4. पुनर्वास और मुआवजा
- पीड़ितों को समय पर और पर्याप्त मुआवजा तथा पुनर्वास सहायता प्रदान करने में चुनौतियाँ।
- पुनर्वास योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| जागरूकता का अभाव | अधिनियम के प्रावधानों और पीड़ितों के अधिकारों के बारे में जानकारी की कमी, जिससे न्याय तक पहुँच बाधित होती है। |
| न्यायिक प्रक्रिया में विलंब | मामलों की धीमी सुनवाई और लंबित मामलों की अधिकता, जिससे पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। |
| सामाजिक भेदभाव | जाति-आधारित पूर्वाग्रह और भेदभाव अभी भी समाज में व्याप्त है, जिससे अत्याचार के मामले बढ़ते हैं। |
| साक्ष्य का अभाव | अत्याचार के मामलों में साक्ष्य जुटाने और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कठिनाई। |
| प्रशासनिक संवेदनशीलता | कानून प्रवर्तन और प्रशासनिक अधिकारियों में SC/ST मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता की कमी। |
आगे की राह
- अधिनियम के प्रावधानों और पीड़ितों के अधिकारों के बारे में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना।
- विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाना और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना।
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- पीड़ितों को समय पर और पर्याप्त वित्तीय सहायता तथा पुनर्वास पैकेज सुनिश्चित करना।
- साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को मजबूत करना और गवाहों की सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित करना।
- सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय · वरिष्ठ नागरिक कल्याण योजनाएँ · दिव्यांगजन सशक्तिकरण · राष्ट्रीय वयोश्री योजना · अटल वयो अभ्युदय योजना · दिव्यांग अधिकार अधिनियम · समावेशी विकास · पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास · सहायक उपकरण वितरण · कौशल विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 15’, ‘note’: ‘धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 17’, ‘note’: ‘अस्पृश्यता का उन्मूलन और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध।’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘राज्य दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि करेगा।’}
अवधारणा प्रवाह
SC/ST के विरुद्ध अत्याचार → अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का प्रावधान → सरकार द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता → अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन → पीड़ितों को न्याय और पुनर्वास → सामाजिक समानता और सुरक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए है।
2. इस योजना के तहत केवल ₹15,000 तक की मासिक आय वाले वरिष्ठ नागरिक ही पात्र हैं।
3. यह आयु-संबंधी दिव्यांगताओं से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क सहायक उपकरण प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करने वाले अथवा ₹15,000 तक की मासिक आय वाले तथा आयु-संबंधी दिव्यांगताओं से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराती है। अतः सभी कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सी योजनाएँ दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण से संबंधित हैं?
1. सहायक यंत्रों एवं उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए दिव्यांगजनों को सहायता (ADIP)
2. दिव्यांग अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की योजना (SIPDA)
3. दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना (DDRS)
4. राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 2 और 3 — ADIP, SIPDA और DDRS योजनाएँ दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण से संबंधित हैं। राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण प्रदान करने से संबंधित है, हालांकि कुछ वरिष्ठ नागरिक दिव्यांग भी हो सकते हैं, यह विशेष रूप से दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। इन योजनाओं के कार्यान्वयन में पूर्वोत्तर क्षेत्र को किन विशिष्ट चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और सरकार उन्हें कैसे संबोधित कर रही है? (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वरिष्ठ नागरिकों (जैसे अटल वयो अभ्युदय योजना, राष्ट्रीय वयोश्री योजना) और दिव्यांगजनों (जैसे ADIP, SIPDA, DDRS) के लिए चलाई जा रही प्रमुख योजनाओं का संक्षिप्त परिचय दें और उनके उद्देश्यों तथा उपलब्धियों पर प्रकाश डालें। दूसरे भाग में, पूर्वोत्तर क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक विशिष्टताओं के कारण इन योजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों (जैसे दुर्गम क्षेत्र, जागरूकता की कमी, सीमित बुनियादी ढाँचा) का उल्लेख करें। अंत में, सरकार द्वारा इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए किए जा रहे प्रयासों (जैसे विशेष वित्तीय सहायता, जागरूकता कार्यक्रम, क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना) को समझाते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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