22 Oct सिम्बेक्स-2026: भारत-सिंगापुर नौसैनिक अभ्यास विशाखापत्तनम में शुरू, जानिए महत्वपूर्ण बिंदु
✎ सिम्बेक्स (SIMBEX) 1994 में ‘लायन किंग’ के रूप में शुरू हुआ भारतीय नौसेना और सिंगापुर नौसेना का द्विपक्षीय अभ्यास है, जिसका 2026 संस्करण विशाखापत्तनम (बंदरगाह चरण) और बंगाल की खाड़ी (समुद्री चरण) में आयोजित हो रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (भारत और उसके पड़ोसी देश; भारत के द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय समूह; हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका) | GS Paper III — सुरक्षा (समुद्री सुरक्षा की चुनौतियाँ; तटीय एवं समुद्री सुरक्षा में रक्षा बलों की भूमिका)
- Prelims: सिम्बेक्स (SIMBEX) — भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य नौसेना का द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास, पूर्वी नौसेना कमान (Eastern Naval Command) — मुख्यालय विशाखापत्तनम, बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व, पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW — Anti-Submarine Warfare), संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय (UNCLOS — United Nations Convention on the Law of the Sea), 1982, आसियान (ASEAN) — सिंगापुर इसका सदस्य है, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा और भारत-सिंगापुर व्यापक सामरिक साझेदारी (2015), INS कमोर्टा और INS नीलगिरि — भारतीय नौसेना के युद्धपोत
- Essay: समुद्री सहयोग से सामरिक विश्वास: हिंद-प्रशांत में शांति और स्थिरता का आधार, रक्षा कूटनीति की बढ़ती भूमिका: छोटे साझेदार देशों के साथ नौसैनिक अभ्यास का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: सिम्बेक्स (SIMBEX) 1994 में ‘लायन किंग’ के रूप में शुरू हुआ भारतीय नौसेना और सिंगापुर नौसेना का द्विपक्षीय अभ्यास है, जिसका 2026 संस्करण विशाखापत्तनम (बंदरगाह चरण) और बंगाल की खाड़ी (समुद्री चरण) में आयोजित हो रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सिंगापुर-भारत द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास सिम्बेक्स-2026 का 33वां संस्करण 21 से 26 अक्टूबर 2026 तक विशाखापत्तनम में आयोजित हो रहा है। सिंगापुर गणराज्य नौसेना का जहाज RSS Supreme 21 अक्टूबर को विशाखापत्तनम पहुँचा और उद्घाटन समारोह INS नीलगिरि तथा INS कमोर्टा पर हुआ। अभ्यास दो चरणों में होगा: पहला चरण (21–23 अक्टूबर) विशाखापत्तनम में बंदरगाह चरण के रूप में और दूसरा चरण (24–26 अक्टूबर) बंगाल की खाड़ी में समुद्री चरण के रूप में। इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह और हवाई खतरों से निपटने तथा सामरिक युद्धाभ्यास जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। यह आयोजन समुद्री सुरक्षा के साझा मुद्दों पर परिचालन तालमेल बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति व स्थिरता के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- सिम्बेक्स की शुरुआत वर्ष 1994 में ‘एक्सरसाइज लायन किंग’ (Exercise Lion King) के नाम से हुई थी। समय के साथ इसका दायरा, जटिलता और परिचालन स्तर बढ़ा है।
- यह अभ्यास दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग का एक दीर्घकालिक तंत्र है, जिसका आयोजन दोनों देशों में बारी-बारी से होता है।
- भारत और सिंगापुर के संबंध वर्ष 2015 में ‘व्यापक सामरिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक पहुँचे, जिसमें रक्षा सहयोग एक प्रमुख स्तंभ है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व व्यापार का प्रमुख समुद्री मार्ग है। मलक्का जलडमरूमध्य जैसे संकरे जलमार्गों की सुरक्षा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- समुद्री क्षेत्र में सहयोग की वैधानिक रूपरेखा संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय (UNCLOS), 1982 द्वारा निर्धारित होती है, जिसमें नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री क्षेत्रों के अधिकार परिभाषित हैं। भारत ने इस अभिसमय की पुष्टि वर्ष 1995 में की थी।
सिम्बेक्स (SIMBEX) क्या है?
- सिम्बेक्स भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य नौसेना (Republic of Singapore Navy — RSN) के बीच होने वाला द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है।
- इसका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर संबंध, आपसी समझ और संयुक्त रूप से समुद्री अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत करना है।
- अभ्यास के बंदरगाह चरण में पेशेवर विचार-विमर्श, विषय विशेषज्ञों के बीच अनुभव-आदान-प्रदान (SMEE — Subject Matter Expert Exchange), एक-दूसरे के जहाजों का दौरा, खेल गतिविधियाँ और योजना सम्मेलन होते हैं।
- समुद्री चरण में पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW), सतह और हवाई खतरों से निपटने के अभ्यास तथा सामरिक युद्धाभ्यास किए जाते हैं।
- इस अभ्यास के समन्वय में भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान की प्रमुख भूमिका है, जिसका मुख्यालय विशाखापत्तनम में है।
- सिम्बेक्स जैसे अभ्यास ‘रक्षा कूटनीति’ का एक रूप हैं, जिससे विश्वास निर्माण, सूचना-साझेदारी और समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ता है।
- इस प्रकार के अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, खुले और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के लिए भारत की नीति से भी जुड़े माने जाते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| आयोजन स्थल और अवधि | विशाखापत्तनम में 21 से 26 अक्टूबर 2026 तक। पहला चरण बंदरगाह चरण (21–23 अक्टूबर) और दूसरा चरण समुद्री चरण (24–26 अक्टूबर) है। |
| प्रतिभागी नौसेनाएं | भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना (RSN)। सिंगापुर का जहाज RSS Supreme 21 अक्टूबर 2026 को विशाखापत्तनम पहुंचा। |
| समुद्री चरण का क्षेत्र | बंगाल की खाड़ी। इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare – ASW), सतह और हवाई खतरों से निपटने के अभ्यास, समुद्री कौशल प्रदर्शन और सामरिक युद्धाभ्यास शामिल हैं। |
| ऐतिहासिक पृष्ठभूमि | वर्ष 1994 में ‘एक्सरसाइज लायन किंग’ के रूप में आरंभ हुआ। 2026 का आयोजन इसका 33वां संस्करण है। |
| बंदरगाह चरण की गतिविधियां | पेशेवर विचार-विमर्श, विषय विशेषज्ञों के बीच अनुभव आदान-प्रदान (SMEE), एक-दूसरे के जहाजों का दौरा, खेल गतिविधियां और योजना संबंधी सम्मेलन। |
| मेज़बान कमान और उद्घाटन | पूर्वी नौसेना कमान की भागीदारी। उद्घाटन समारोह INS Nilgiri और INS Kamorta पर हुआ, जिसमें दोनों नौसेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। |
महत्व
रणनीतिक (Strategic)
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता का प्रदर्शन होता है।
- भारत की समुद्री भू-राजनीति में सिंगापुर जैसे प्रमुख समुद्री साझेदार के साथ संबंध गहरे होते हैं।
- समुद्री मार्गों की सुरक्षा के संदर्भ में दोनों देशों का सहयोग क्षेत्रीय संतुलन में योगदान देता है।
परिचालन (Operational)
- पनडुब्बी रोधी युद्ध और सतह व हवाई खतरों से निपटने के अभ्यास से संयुक्त परिचालन क्षमता बढ़ती है।
- संयुक्त रूप से समुद्री अभियान चलाने की क्षमता (Interoperability) का व्यावहारिक परीक्षण होता है।
- बंगाल की खाड़ी में समुद्री चरण से सामरिक युद्धाभ्यास के अनुभव साझा होते हैं।
कूटनीतिक (Diplomatic)
- 1994 से चली आ रही लंबी अवधि की नौसैनिक साझेदारी द्विपक्षीय विश्वास को सुदृढ़ करती है।
- वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति से संस्थागत संवाद और पारस्परिक समझ को बल मिलता है।
संस्थागत और क्षमता विकास (Institutional and Capacity Building)
- विषय विशेषज्ञों के बीच अनुभव आदान-प्रदान (SMEE) से प्रशिक्षण और सिद्धांत-निर्माण में सीख मिलती है।
- योजना संबंधी सम्मेलनों से भविष्य के संयुक्त अभ्यासों की तैयारी सुनिश्चित होती है।
चुनौतियाँ
1. परिचालन समन्वय की जटिलता
- दो भिन्न नौसैनिक सिद्धांतों, संचार प्रणालियों और प्रक्रियाओं के बीच तालमेल बनाना तकनीकी रूप से कठिन होता है।
- बढ़ती जटिलता के साथ संयुक्त अभियानों की योजना और निष्पादन का दबाव बढ़ता है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: सुरक्षा चुनौतियां और रक्षा तैयारी
2. समुद्री सुरक्षा की बहुआयामी चुनौतियां
- समुद्री डकैती, अवैध गतिविधियां और गैर-राज्य तत्वों से जुड़े खतरे पारंपरिक नौसैनिक क्षमता से आगे के प्रश्न उठाते हैं।
- बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा साझा दायित्व बन जाती है।
यूपीएससी लिंक: GS-III: आंतरिक सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा; GS-II: भारत के विदेश संबंध
3. हिंद-प्रशांत में शक्ति संतुलन की भू-राजनीति
- क्षेत्र में बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा साझेदारी का संतुलन साधना आवश्यक होता है।
- बहुपक्षीय ढांचे और द्विपक्षीय अभ्यासों के बीच तालमेल बनाए रखना नीतिगत चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: भारत के विदेश संबंध और क्षेत्रीय समूह
4. दीर्घकालिक साझेदारी का संस्थागत सातत्य
- अभ्यास का दायरा बढ़ने के साथ संसाधनों, प्रशिक्षण और समय-सारणी का प्रबंधन अधिक कठिन होता है।
- सरकार बदलने या नीतिगत प्राथमिकताओं में परिवर्तन के बावजूद सहयोग की निरंतरता बनाए रखना चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: GS-II: भारत के विदेश संबंध; GS-III: रक्षा सुधार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| परिचालन तालमेल | दो नौसेनाओं की प्रक्रियाओं और प्रणालियों में अंतर से संयुक्त अभियान में बाधा आ सकती है। |
| समुद्री खतरों का स्वरूप | पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों के मेल से तैयारी के मानक बदलते रहते हैं। |
| क्षेत्रीय भू-राजनीति | हिंद-प्रशांत में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलित कूटनीति कठिन हो जाती है। |
| संसाधन और निरंतरता | अभ्यास के विस्तार के साथ लॉजिस्टिक्स और दीर्घकालिक योजना की मांग बढ़ती है। |
आगे की राह
- संयुक्त परिचालन प्रक्रियाओं (SOP) को मानकीकृत कर परिचालन तालमेल को और सुदृढ़ किया जाए।
- पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री खतरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण और अनुभव आदान-प्रदान का विस्तार किया जाए।
- बंदरगाह चरण के विषय विशेषज्ञ विचार-विमर्श (SMEE) से निकले निष्कर्षों का नियमित फॉलो-अप तंत्र बने।
- समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) के लिए सूचना साझाकरण के तंत्र को मजबूत किया जाए।
- क्षेत्रीय बहुपक्षीय मंचों पर समुद्री सुरक्षा के साझा मानदंडों पर संवाद को आगे बढ़ाया जाए।
- नागरिक और सैन्य समुद्री एजेंसियों के बीच समन्वय से गैर-पारंपरिक खतरों का प्रभावी मुकाबला किया जाए।
- दीर्घकालिक योजना के लिए द्विपक्षीय समुद्री संवाद की संस्थागत समीक्षा नियमित रूप से की जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) · हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) · द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास (Bilateral Naval Exercise) · अंतर-परिचालनीयता (Interoperability) · पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) · संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय, 1982 (UNCLOS) · सागर (SAGAR) दृष्टिकोण · सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) · पूर्वी नौसेना कमान (Eastern Naval Command) · सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) · आसियान (ASEAN) और पूर्व की ओर देखो नीति (Act East Policy) · मलक्का जलसंधि (Strait of Malacca)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 51 — अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश
अवधारणा प्रवाह
1994 में ‘एक्सरसाइज लायन किंग’ के रूप में द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग की शुरुआत हुई। → समय के साथ अभ्यास का दायरा और जटिलता बढ़ी, जिससे पेशेवर संबंध और आपसी समझ मजबूत हुई। → बंदरगाह चरण (21–23 अक्टूबर 2026) में विचार-विमर्श, SMEE और जहाजों के दौरे से आपसी परिचय और योजना बनी। → समुद्री चरण (24–26 अक्टूबर 2026) में बंगाल की खाड़ी में ASW, सतह व हवाई खतरों से निपटने और सामरिक युद्धाभ्यास से परिचालन क्षमता परखी गई। → संयुक्त समुद्री अभियान की क्षमता बढ़ने से परिचालन तालमेल (Interoperability) सुदृढ़ हुआ। → साझा समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ने से हिंद-प्रशांत में शांति और स्थिरता को सहारा मिला। → यह सहयोग भारत-सिंगापुर समुद्री साझेदारी को दीर्घकालिक रूप से आगे बढ़ाता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय विशाखापत्तनम में स्थित है।
2. सिंगापुर आसियान (ASEAN) का सदस्य देश है।
3. सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) का मुख्यालय सिंगापुर में स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय विशाखापत्तनम में है और सिम्बेक्स-2026 का उद्घाटन भी इसी कमान की उपस्थिति में हुआ। कथन 2 सही है: सिंगापुर आसियान का सदस्य है। कथन 3 गलत है: IFC-IOR की स्थापना वर्ष 2014 में भारतीय नौसेना द्वारा हरियाणा के गुरुग्राम में की गई थी, सिंगापुर में नहीं। अतः केवल दो कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन यह समझाने में सहायक है कि सिम्बेक्स जैसे नौसैनिक अभ्यास क्यों आयोजित किए जाते हैं?
अभिकथन (A): सिम्बेक्स जैसे द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास दोनों नौसेनाओं के बीच अंतर-परिचालनीयता को बढ़ाते हैं।
कारण (R): संयुक्त पनडुब्बी रोधी युद्ध और सतह-खतरा प्रबंधन जैसे अभ्यासों में प्रतिभागी नौसेनाएं साझा परिचालन प्रक्रियाएं (Common Operating Procedures) विकसित करती हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, परंतु R गलत है।
- A गलत है, परंतु R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन और कारण दोनों सही हैं। साझा परिचालन प्रक्रियाएं विकसित होने से ही दो नौसेनाएं संयुक्त अभियान में तालमेल से काम कर पाती हैं, इसलिए R, A की सही व्याख्या है। यह अभ्यास के उद्देश्य से भी मेल खाता है जो परिचालन तालमेल को मजबूत करना बताया गया है।
Q3. निम्नलिखित सूचियों का मिलान कीजिए:
सूची I
1. संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि अभिसमय, 1982 (UNCLOS)
2. सागर (SAGAR) दृष्टिकोण
3. सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR)
4. पूर्वी नौसेना कमान
सूची II
a. गुरुग्राम में स्थित समुद्री सूचना साझाकरण केंद्र
b. विशाखापत्तनम में मुख्यालय वाली नौसेना कमान
c. प्रादेशिक सागर 12 नौटिकल मील और अनन्य आर्थिक क्षेत्र 200 नौटिकल मील तक का विधिक ढांचा
d. ‘सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ की क्षेत्रीय समुद्री नीति
सही मिलान चुनिए:
- 1-b, 2-a, 3-d, 4-c
- 1-a, 2-d, 3-b, 4-c
- 1-c, 2-d, 3-a, 4-b
- 1-d, 2-b, 3-c, 4-a
उत्तर: 1-c, 2-d, 3-a, 4-b — 1-c: UNCLOS, 1982 प्रादेशिक सागर (12 नौटिकल मील) और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (200 नौटिकल मील) का विधिक ढांचा देता है। 2-d: SAGAR (Security and Growth for All in the Region) क्षेत्रीय समुद्री दृष्टिकोण है। 3-a: IFC-IOR गुरुग्राम (हरियाणा) में स्थित है। 4-b: पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय विशाखापत्तनम में है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत-सिंगापुर नौसैनिक अभ्यास सिम्बेक्स जैसे द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति को किस प्रकार सुदृढ़ करते हैं? इन अभ्यासों की सीमाओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और बताइए कि गठबंधन-रहित सामरिक स्वायत्तता के संदर्भ में ऐसे अभ्यासों का संतुलित स्वरूप क्या होना चाहिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर की रूपरेखा:
1. भूमिका: सिम्बेक्स-2026 (21-26 अक्टूबर 2026, विशाखापत्तनम) के तथ्य लिखिए। इसकी शुरुआत 1994 में ‘एक्सरसाइज लायन किंग’ के रूप में हुई थी। यह दो चरणों में चलता है: बंदरगाह चरण (21-23 अक्टूबर, SMEE, जहाज दौरे, योजना सम्मेलन) और समुद्री चरण (24-26 अक्टूबर, बंगाल की खाड़ी, ASW, सतह व हवाई खतरे, सामरिक युद्धाभ्यास)।
2. सुदृढ़ीकरण के आयाम:
(क) समुद्री विधि: UNCLOS, 1982 के अंतर्गत प्रादेशिक सागर (12 नौटिकल मील), सन्निहित क्षेत्र (24 नौटिकल मील) और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (200 नौटिकल मील) की अवधारणा तथा मुक्त नौवहन के सिद्धांत की व्यवहारिक पुष्टि।
(ख) सामरिक आयाम: अंतर-परिचालनीयता, ASW में क्षमता-निर्माण, और मलक्का जलसंधि व दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री मार्गों की सुरक्षा में योगदान।
(ग) नीतिगत ढांचा: SAGAR दृष्टिकोण (2015), Act East Policy और आसियान केंद्रितता के संदर्भ में सिंगापुर की भूमिका; 2003 के द्विपक्षीय रक्षा सहयोग समझौते का उल्लेख।
(घ) संस्थागत ढांचा: IFC-IOR (गुरुग्राम) द्वारा सूचना साझाकरण; अंडमान व निकोबार कमान जैसी त्रि-सेवा संरचनाओं की भूमिका।
3. समालोचनात्मक परीक्षण:
(क) अभ्यास गठबंधन नहीं हैं; इनकी परिचालन सीमा और दीर्घकालिक प्रभाव सीमित प्रतिबद्धता पर निर्भर हैं।
(ख) सामरिक स्वायत्तता बनाम बहुपक्षीय साझेदारी: गैर-गठबंधन नीति और रणनीतिक साझेदारी के बीच संतुलन की चुनौती।
(ग) क्षमता की असमानता और संसाधन-सीमाएं; सूचना-साझाकरण में संवेदनशीलता।
4. संतुलित स्वरूप के सुझाव: नियमित समुद्री विधि-आधारित प्रशिक्षण, नागरिक-सैन्य समुद्री सूचना तंत्र का सुदृढ़ीकरण, क्षमता-निर्माण में क्षेत्रीय भागीदारी, और पारदर्शी नीतिगत संवाद।
5. निष्कर्ष: अल्फ्रेड थेयर महान (Alfred Thayer Mahan) के समुद्री शक्ति सिद्धांत का संदर्भ देते हुए निष्कर्ष लिखिए कि समुद्री सहयोग तभी स्थायी है जब वह विधि-सम्मत, पारदर्शी और सामरिक स्वायत्तता के अनुकूल हो।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Andhra Pradesh PCS (APPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: सिंगापुर-भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास ‘सिम्बेक्स-2026’ का 33वां संस्करण किस शहर में आयोजित किया गया?
- A. चेन्नई
- B. विशाखापत्तनम
- C. कोच्चि
- D. मुंबई
उत्तर: B. विशाखापत्तनम — सिम्बेक्स-2026 का आयोजन आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में किया गया, जो भारतीय नौसेना के पूर्वी नौसेना कमान के मुख्यालय के निकट स्थित है।
Mains: विशाखापत्तनम में आयोजित ‘सिम्बेक्स-2026’ जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री अभ्यासों के आयोजन से आंध्र प्रदेश को होने वाले रणनीतिक, आर्थिक और सामाजिक लाभों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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