सीएमपीडीआई और एमएसएमई ने रांची में विक्रेता विकास कार्यक्रम का किया सफल आयोजन

सीएमपीडीआई और एमएसएमई-विकास कार्यालय, रांची द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय विक्रेता विकास कार्यक्रम का सफल समापन — diagram

सीएमपीडीआई और एमएसएमई ने रांची में विक्रेता विकास कार्यक्रम का किया सफल आयोजन

MSME विक्रेता विकास कार्यक्रमCMPDIसार्वजनिक क्षेत्रMSME-विकास कार्यालयस्थानीय कार्यालयविक्रेता विकासकार्यक्रम-सह-प्रदर्शनीPSU/कॉर्पोरेट्सबड़े खरीदारGeM/TReDSडिजिटल प्लेटफॉर्मस्वदेशीकरणआत्मनिर्भर भारत
MSME विक्रेता विकास कार्यक्रम

✎ विक्रेता विकास कार्यक्रम MSME को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बड़े कॉर्पोरेट्स से जोड़कर स्वदेशीकरण, नवाचार और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, औद्योगिक नीति
  • Prelims: विक्रेता विकास कार्यक्रम, MSME-विकास कार्यालय, सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (CMPDI), सार्वजनिक खरीद नीति, GeM (सरकारी ई-मार्केटप्लेस), TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम)
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भूमिका, समावेशी आर्थिक विकास के लिए सरकारी नीतियों का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: विक्रेता विकास कार्यक्रम MSME को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बड़े कॉर्पोरेट्स से जोड़कर स्वदेशीकरण, नवाचार और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (CMPDI) और MSME-विकास कार्यालय, रांची ने संयुक्त रूप से एक दो दिवसीय विक्रेता विकास कार्यक्रम-सह-उत्पाद प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के साथ जुड़ने, उनकी आवश्यकताओं को समझने और दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करने के लिए एक मंच प्रदान करना था, जिससे स्वदेशीकरण और नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार MSME क्षेत्र को देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानती है।
  • सार्वजनिक खरीद नीति (Public Procurement Policy) के तहत, सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए MSME से एक निश्चित प्रतिशत खरीद करना अनिवार्य है।
  • विक्रेता विकास कार्यक्रम (Vendor Development Program) MSME को बड़े खरीदारों, विशेषकर PSU और सरकारी संगठनों की खरीद प्रक्रियाओं और आवश्यकताओं से परिचित कराने का एक प्रभावी माध्यम है।
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान (Atmanirbhar Bharat Abhiyan) के तहत, स्थानीय विनिर्माण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिसमें MSME की भूमिका केंद्रीय है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे GeM (सरकारी ई-मार्केटप्लेस) और TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) MSME के लिए सरकारी खरीद प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
  • महिला उद्यमियों और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन और योजनाओं के माध्यम से मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है।
  • सतर्कता जागरूकता अभियान (Vigilance Awareness Campaign) के तहत ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने से सरकारी खरीद में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।

विक्रेता विकास कार्यक्रम क्या है?

  • विक्रेता विकास कार्यक्रम एक ऐसा मंच है जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बड़े खरीदारों, विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU), सरकारी विभागों और बड़े कॉर्पोरेट्स से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य MSME को इन बड़े खरीदारों की विशिष्ट आवश्यकताओं, खरीद प्रक्रियाओं और गुणवत्ता मानकों को समझने में मदद करना है।
  • यह कार्यक्रम MSME को अपने उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित करने, संभावित खरीदारों के साथ संवाद स्थापित करने और व्यावसायिक संबंध बनाने का अवसर देता है।
  • इन कार्यक्रमों में अक्सर तकनीकी सत्र शामिल होते हैं जहाँ खरीदार अपनी खरीद नीतियों, विक्रेता पंजीकरण प्रक्रियाओं और भुगतान प्रणालियों (जैसे GeM और TReDS) के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
  • यह MSME को नवाचार (Innovation) करने, अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और बड़े खरीदारों की बदलती जरूरतों के अनुरूप अपने उत्पादों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • विक्रेता विकास कार्यक्रम स्वदेशीकरण (Indigenization) को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • यह MSME के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा करके उनकी संवृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाता है।
  • यह कॉर्पोरेट्स और MSME के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा देता है, जिससे एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
विक्रेता विकास कार्यक्रम-सह-उत्पाद प्रदर्शनी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के साथ सीधे जुड़ने और अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करता है।
दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा कॉर्पोरेट्स और MSME के बीच केवल खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर स्थायी व्यावसायिक संबंध स्थापित करने पर जोर।
स्वदेशीकरण और नवाचार पर बल MSME को स्वदेशी उत्पादों के विकास, नवाचार और विशिष्ट समाधान प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करना, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में सहायक है।
सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) और TReDS पर जानकारी MSME को सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में भाग लेने और व्यापार प्राप्तियों को भुनाने के लिए आवश्यक डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रणालियों से परिचित कराना।
महिला और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों पर विशेष ध्यान इन विशिष्ट समूहों के MSME उद्यमियों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्रदान कर समावेशी विकास को बढ़ावा देना।

महत्व

आर्थिक संवृद्धि और आत्मनिर्भरता

  • MSME क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे कार्यक्रम MSME को बड़े कॉर्पोरेट्स और PSU के साथ जोड़कर उनकी क्षमता का विस्तार करते हैं।
  • स्वदेशीकरण पर जोर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलता है।

समावेशी विकास

  • महिला उद्यमियों और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के MSME को विशेष रूप से प्रोत्साहित करना सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देता है, जिससे समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में शामिल होने का अवसर मिलता है।
  • स्थानीय संस्थाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यमों में विकसित होने के लिए प्रेरित करना क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने और संतुलित विकास सुनिश्चित करने में मदद करता है।

पारदर्शिता और सुशासन

  • सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए विक्रेता विकास कार्यक्रम सतर्कता जागरूकता अभियान के तहत आयोजित किए जाते हैं।
  • GeM और TReDS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग खरीद प्रक्रियाओं को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाता है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।

तकनीकी उन्नयन और नवाचार

  • MSME को कॉर्पोरेट्स की आवश्यकताओं के अनुरूप नवाचार करने और विशेष समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे तकनीकी उन्नयन और उत्पाद विकास को गति मिलती है।
  • यह कार्यक्रम MSME को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने और नई तकनीकों तथा प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

चुनौतियाँ

1. वित्त तक पहुँच

  • MSME को अक्सर पूंजी और ऋण तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके विस्तार और नवाचार की क्षमता सीमित हो जाती है।
  • बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने की जटिल प्रक्रियाएं और उच्च ब्याज दरें एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

2. तकनीकी उन्नयन और कौशल विकास

  • कई MSME के पास आधुनिक तकनीक और मशीनरी में निवेश करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती है।
  • कुशल कार्यबल की कमी और कर्मचारियों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

3. बाजार तक पहुँच और प्रतिस्पर्धा

  • बड़े कॉर्पोरेट्स और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना MSME के लिए मुश्किल होता है, खासकर जब उन्हें बाजार तक सीमित पहुंच का सामना करना पड़ता है।
  • सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की जटिलता और जानकारी की कमी भी MSME को इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने से रोकती है।

4. नियामक और अनुपालन बोझ

  • MSME को विभिन्न सरकारी नियमों और अनुपालन आवश्यकताओं का पालन करना पड़ता है, जो अक्सर बोझिल और समय लेने वाले होते हैं।
  • लाइसेंस, परमिट और कर संबंधी अनुपालन छोटे व्यवसायों के लिए एक बड़ी बाधा बन सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
क्रेडिट तक पहुँच MSME के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों से समय पर और पर्याप्त ऋण प्राप्त करना कठिन होता है।
प्रौद्योगिकी अपनाने में बाधा आधुनिक मशीनरी और डिजिटल समाधानों में निवेश के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी।
बाजार सूचना का अभाव बड़े खरीदारों की आवश्यकताओं और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं के बारे में पर्याप्त जानकारी न होना।
मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण उत्पादों और सेवाओं में अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में चुनौतियाँ।
बुनियादी ढाँचागत कमी पर्याप्त बिजली, परिवहन और संचार सुविधाओं का अभाव, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (Micro, Small and Medium Enterprises Development Act, 2006)
  • सरकारी ई-मार्केटप्लेस (Government e-Marketplace – GeM)
  • ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (Trade Receivables Discounting System – TReDS)
  • सार्वजनिक खरीद नीति (Public Procurement Policy)

आगे की राह

  • MSME के लिए आसान और त्वरित ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु वित्तीय संस्थानों को प्रोत्साहित करना और संपार्श्विक-मुक्त ऋण योजनाओं का विस्तार करना।
  • MSME को आधुनिक तकनीक अपनाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) सहायता और सब्सिडी प्रदान करना।
  • सरकारी खरीद प्रक्रियाओं को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाना, तथा GeM जैसे प्लेटफॉर्म पर MSME के पंजीकरण और भागीदारी को बढ़ावा देना।
  • MSME के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों और प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन करना, ताकि वे बदलते बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने उत्पादों और सेवाओं को विकसित कर सकें।
  • महिला उद्यमियों और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के MSME के लिए विशेष प्रोत्साहन, परामर्श और बाजार पहुंच सहायता प्रदान करना।
  • MSME के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना और नियामक बोझ को कम करने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) में सुधार करना।
  • बड़े कॉर्पोरेट्स और PSU के साथ MSME की दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए नियमित विक्रेता विकास कार्यक्रमों और क्रेता-विक्रेता बैठकों का आयोजन करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) · विक्रेता विकास कार्यक्रम · सार्वजनिक खरीद नीति · आत्मनिर्भर भारत · सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) · ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) · स्थानीय से वैश्विक · नवाचार और स्वदेशीकरण · महिला उद्यमी · सतर्कता जागरूकता अभियान

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(क)’, ‘note’: ‘सभी नागरिकों के लिए आजीविका के पर्याप्त साधन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}

अवधारणा प्रवाह

विक्रेता विकास कार्यक्रम का आयोजन  →  MSME और PSU/कॉर्पोरेट्स के बीच सीधा संवाद  →  MSME के उत्पादों का प्रदर्शन और आवश्यकताओं की समझ  →  स्वदेशीकरण, नवाचार और दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा  →  MSME की आर्थिक संवृद्धि और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का लक्ष्य

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित विक्रेता विकास कार्यक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ये कार्यक्रम केवल खरीदार-विक्रेता बैठकों तक सीमित होते हैं और दीर्घकालिक साझेदारी पर ध्यान केंद्रित नहीं करते हैं।
2. GeM (सरकारी ई-मार्केटप्लेस) और TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के बारे में जानकारी इन कार्यक्रमों का एक अभिन्न अंग है।
3. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य MSME को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की खरीद प्रक्रियाओं को समझने में मदद करना है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि विक्रेता विकास कार्यक्रम दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर देते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि GeM और TReDS के बारे में जानकारी इन कार्यक्रमों में दी जाती है। कथन 3 सही है क्योंकि MSME को PSU की खरीद प्रक्रियाओं से अवगत कराना इनका मुख्य उद्देश्य है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के संदर्भ में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की भूमिका का सबसे अच्छा वर्णन करता है?

  1. MSME केवल निर्यात-उन्मुख उत्पादों के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  2. MSME का मुख्य कार्य बड़े उद्योगों के लिए सहायक इकाइयों के रूप में कार्य करना है।
  3. MSME स्वदेशीकरण, नवाचार और रोजगार सृजन के माध्यम से आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  4. MSME केवल शहरी क्षेत्रों में ही आर्थिक गतिविधियों में संलग्न होते हैं।

उत्तर: MSME स्वदेशीकरण, नवाचार और रोजगार सृजन के माध्यम से आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। — MSME स्वदेशीकरण, नवाचार और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, जैसा कि कार्यक्रम में भी रेखांकित किया गया।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भारत के आर्थिक विकास के प्रमुख चालक हैं। सार्वजनिक खरीद नीति के तहत विक्रेता विकास कार्यक्रमों की भूमिका का विश्लेषण करें और चर्चा करें कि ये कार्यक्रम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में कैसे सहायक हो सकते हैं। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: MSME क्षेत्र का महत्व और भारतीय अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका (रोजगार, GDP में योगदान)।
2. विक्रेता विकास कार्यक्रमों की भूमिका: इन कार्यक्रमों के उद्देश्य (खरीदार-विक्रेता संवाद, खरीद प्रक्रियाओं की जानकारी, पारदर्शिता), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) और MSME के बीच संबंधों को मजबूत करना।
3. सार्वजनिक खरीद नीति: MSME के लिए सरकारी खरीद में आरक्षण/प्राथमिकता का प्रावधान (जैसे 25% खरीद MSME से), GeM (सरकारी ई-मार्केटप्लेस) और TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) जैसे प्लेटफॉर्म का उल्लेख।
4. ‘आत्मनिर्भर भारत’ में योगदान: स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना, नवाचार और विशेष समाधानों को प्रोत्साहित करना, स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, रोजगार सृजन, महिला उद्यमियों और SC/ST उद्यमियों को सशक्त बनाना।
5. चुनौतियाँ और आगे का रास्ता: MSME के सामने आने वाली चुनौतियाँ (वित्त, प्रौद्योगिकी, बाजार पहुंच) और इन कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है।
6. निष्कर्ष: MSME और सार्वजनिक क्षेत्र के बीच सहभागिता के माध्यम से समावेशी और सतत आर्थिक विकास की संभावना।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Jharkhand PCS (JPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: सीएमपीडीआई और एमएसएमई-विकास कार्यालय, रांची द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय विक्रेता विकास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?

  1. झारखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास को बढ़ावा देना
  2. झारखंड में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करना
  3. झारखंड में पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने के लिए निवेश आकर्षित करना
  4. झारखंड में शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए सरकारी योजनाओं का प्रचार करना

उत्तर: झारखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास को बढ़ावा देना — इस कार्यक्रम का उद्देश्य झारखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास को बढ़ावा देना था, जिससे राज्य में उद्यमिता और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिल सके।

Mains: झारखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के विकास में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का वर्णन करते हुए, राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का मूल्यांकन कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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