17 Sep सीबीएसई की तीन भाषाओं की नीति पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, जानिए पूरा मामला
✎ CBSE की कक्षा 9 के लिए तीन भाषाओं की अनिवार्यता वाली नीति, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ शामिल हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के त्रि-भाषा सूत्र के अनुरूप है और इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शिक्षा, सामाजिक न्याय, केंद्र एवं राज्यों के बीच संबंध | GS Paper II — संवैधानिक प्रावधान और उनका क्रियान्वयन
- Prelims: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, त्रि-भाषा सूत्र, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court), राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF), अनुच्छेद 29 (1)
- Essay: भारत में भाषाई विविधता और शिक्षा नीति की भूमिका, शिक्षा के अधिकार का क्रियान्वयन और चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: CBSE की कक्षा 9 के लिए तीन भाषाओं की अनिवार्यता वाली नीति, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ शामिल हैं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के त्रि-भाषा सूत्र के अनुरूप है और इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सर्वोच्च न्यायालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की उस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिसमें कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। इस नीति के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन आवश्यक है। याचिकाकर्ताओं ने इस नीति को छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए चुनौती दी है, जबकि CBSE इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने वाला कदम बता रहा है।
पृष्ठभूमि
- CBSE ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ शामिल होनी चाहिए।
- इस नीति को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-स्कूल शिक्षा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप बताया गया है।
- याचिकाकर्ताओं ने इस नीति के क्रियान्वयन के तरीके और CBSE के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए हैं, विशेषकर कक्षा 6 से 8 तक के पाठ्यक्रम निर्माण के संबंध में।
- सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार, CBSE और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) से जवाब मांगा है।
- न्यायालय ने शिक्षकों और संसाधनों की उपलब्धता पर भी ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया है और नीति को अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने का सुझाव दिया था।
- वर्तमान में, विदेशी भाषा चुनने वाले छात्रों को पहले दो भारतीय भाषाएँ पढ़नी होंगी, जिसके बाद विदेशी भाषा को तीसरी या अतिरिक्त भाषा के रूप में चुना जा सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और त्रि-भाषा सूत्र
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भारत की शिक्षा प्रणाली में परिवर्तनकारी सुधारों का एक व्यापक ढाँचा है, जिसका उद्देश्य 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रदान करना है।
- इस नीति का एक प्रमुख पहलू त्रि-भाषा सूत्र (Three-language formula) को बढ़ावा देना है, जिसके तहत छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
- त्रि-भाषा सूत्र का उद्देश्य भाषाई विविधता को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और छात्रों को बहुभाषी क्षमता प्रदान करना है।
- NEP 2020 के अनुसार, तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारत की मूल भाषाएँ होनी चाहिए। यह सूत्र छात्रों को अपनी मातृभाषा/क्षेत्रीय भाषा, एक अन्य भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा का अध्ययन करने का विकल्प देता है।
- इस नीति में भारतीय भाषाओं, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि छात्र अपनी जड़ों से जुड़े रहें और वैश्विक नागरिक भी बन सकें।
- नीति में यह भी कहा गया है कि जहाँ संभव हो, कम से कम कक्षा 5 तक, और अधिमानतः कक्षा 8 तक और उससे आगे भी, शिक्षा का माध्यम घर की भाषा/मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा होना चाहिए।
- त्रि-भाषा सूत्र का क्रियान्वयन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर निर्भर करता है, जिसमें स्थानीय संदर्भ और भाषाई विविधता को ध्यान में रखा जाता है।
- इस नीति का उद्देश्य छात्रों पर बोझ डाले बिना भाषाई कौशल का विकास करना है, और इसके लिए पाठ्यक्रम तथा शिक्षण-शास्त्र में लचीलेपन का प्रावधान किया गया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कक्षा 9 में तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य | राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और बहुभाषी शिक्षा को सुदृढ़ करना। |
| कम से कम दो भारतीय भाषाएँ अनिवार्य | देश की भाषाई विविधता का सम्मान और छात्रों में भारतीय भाषाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना। |
| विदेशी भाषा का विकल्प | छात्रों को तीसरी या अतिरिक्त भाषा के रूप में विदेशी भाषा चुनने की सुविधा, वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्रदान करना। |
| शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू | नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रयास, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसमें राहत देने का सुझाव दिया है। |
| NCF-SE 2023 के अनुरूप | राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा – स्कूली शिक्षा (National Curriculum Framework for School Education) 2023 के सिद्धांतों के साथ संरेखण। |
महत्व
शैक्षणिक महत्व
- यह नीति छात्रों को कम उम्र से ही बहुभाषी बनने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो संज्ञानात्मक विकास और सांस्कृतिक समझ के लिए महत्वपूर्ण है।
- भारतीय भाषाओं के अध्ययन को अनिवार्य करके, यह छात्रों को देश की समृद्ध भाषाई विरासत से जोड़ती है और भाषाई राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है।
- यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक है, जिसका लक्ष्य शिक्षा प्रणाली में समग्र सुधार लाना है।
सांस्कृतिक महत्व
- दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन छात्रों को विभिन्न क्षेत्रीय संस्कृतियों और परंपराओं से परिचित कराएगा, जिससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी।
- यह भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, विशेषकर उन भाषाओं के लिए जो कम बोली जाती हैं या लुप्तप्राय हैं।
- बहुभाषी क्षमता छात्रों को विभिन्न समुदायों के साथ बेहतर ढंग से जुड़ने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
सामाजिक महत्व
- यह नीति छात्रों को भाषाई विविधता के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएगी, जिससे समाज में समावेशिता और सहिष्णुता बढ़ेगी।
- बहुभाषी व्यक्ति रोजगार के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होते हैं, क्योंकि उन्हें संचार और अंतर-सांस्कृतिक कौशल का लाभ मिलता है।
- यह नीति भविष्य में ऐसे नागरिकों का निर्माण करेगी जो विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमियों के लोगों के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत कर सकें।
चुनौतियाँ
1. छात्रों पर अतिरिक्त बोझ
- तीन भाषाओं का एक साथ अध्ययन, विशेषकर दो भारतीय भाषाओं के साथ, छात्रों पर अकादमिक दबाव बढ़ा सकता है।
- कुछ छात्रों के लिए तीसरी भाषा सीखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर यदि उनके पास पहले से ही दो भाषाएँ हों।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-2: शिक्षा, मानव संसाधन
2. शिक्षकों और संसाधनों की कमी
- सभी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में योग्य भाषा शिक्षकों, विशेषकर विभिन्न भारतीय भाषाओं के लिए, की उपलब्धता एक चुनौती हो सकती है।
- पाठ्यपुस्तकों, शिक्षण सामग्री और अन्य भाषाई संसाधनों की कमी नीति के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-2: शिक्षा, मानव संसाधन
3. राज्यों की भाषा नीतियों से टकराव
- कुछ राज्यों की अपनी विशिष्ट भाषा नीतियां हैं, और CBSE की यह नीति उनके साथ टकराव पैदा कर सकती है।
- गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी को दूसरी भारतीय भाषा के रूप में अनिवार्य करने पर विरोध हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-2: संघवाद, शिक्षा
4. CBSE के अधिकार क्षेत्र पर प्रश्न
- याचिकाकर्ताओं ने कक्षा 6 से 8 तक के पाठ्यक्रम के संबंध में CBSE के अधिकार पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि यह आमतौर पर NCERT का कार्यक्षेत्र है।
- यह प्रश्न उठता है कि क्या CBSE के पास इस स्तर पर भाषा नीति को अनिवार्य करने की क्षमता और अधिकार है।
यूपीएससी लिंक: सामान्य अध्ययन पेपर-2: सांविधिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| अतिरिक्त अकादमिक दबाव | छात्रों पर तीन भाषाओं के अध्ययन का बोझ, विशेषकर दो भारतीय भाषाओं के साथ। |
| शिक्षक और संसाधन | विभिन्न भारतीय भाषाओं के लिए योग्य शिक्षकों और पर्याप्त शिक्षण सामग्री की कमी। |
| राज्य की भाषा नीतियां | कुछ राज्यों की मौजूदा भाषा नीतियों के साथ संभावित टकराव। |
| CBSE का अधिकार | कक्षा 6-8 के पाठ्यक्रम निर्धारण में CBSE के अधिकार क्षेत्र पर कानूनी सवाल। |
| कार्यान्वयन की व्यवहार्यता | नीति को तुरंत और प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता पर संदेह। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020
आगे की राह
- नीति के कार्यान्वयन से पहले व्यापक हितधारक परामर्श आयोजित किया जाए, जिसमें राज्यों, शिक्षकों और अभिभावकों को शामिल किया जाए।
- शिक्षकों के प्रशिक्षण और भाषाई संसाधनों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
- छात्रों पर बोझ कम करने के लिए नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, संभवतः कक्षा 6 से शुरू करके धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाए।
- राज्यों की भाषाई विविधता और उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नीति में लचीलापन लाया जाए।
- CBSE और NCERT के बीच भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए, ताकि अधिकार क्षेत्र संबंधी विवादों से बचा जा सके।
- नीति के प्रभावों का नियमित मूल्यांकन किया जाए और आवश्यकतानुसार सुधार किए जाएं, ताकि यह छात्रों और शिक्षा प्रणाली के लिए लाभकारी हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 · त्रिभाषा सूत्र · बहुभाषी शिक्षा · भारतीय भाषाओं का संवर्धन · संवैधानिक प्रावधान · शिक्षा का अधिकार · केंद्र-राज्य संबंध · न्यायिक समीक्षा · शैक्षिक सुधार · पाठ्यक्रम विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 29’, ‘note’: ‘अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 30’, ‘note’: ‘शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 343’, ‘note’: ‘संघ की राजभाषा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 350A’, ‘note’: ‘प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 351’, ‘note’: ‘हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश’}
- {‘article’: ‘आठवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘भारत की आधिकारिक भाषाएँ’}
अवधारणा प्रवाह
CBSE द्वारा कक्षा 9 में तीन भाषा नीति की घोषणा → याचिकाकर्ताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती → नीति को छात्रों पर बोझ और संसाधनों की कमी का तर्क → CBSE का NEP 2020 के अनुरूप भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने का तर्क → सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र, CBSE और NCERT से जवाब तलब → नीति के कार्यान्वयन और अधिकार क्षेत्र पर न्यायिक समीक्षा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 त्रिभाषा सूत्र (Three-language formula) का समर्थन करती है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ शामिल होनी चाहिए।
2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 350A भाषाई अल्पसंख्यकों के बच्चों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा प्रदान करने का निर्देश देता है।
3. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एक सांविधिक निकाय है जो संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। NEP 2020 त्रिभाषा सूत्र का समर्थन करती है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएँ शामिल होनी चाहिए। कथन 2 सही है। अनुच्छेद 350A भाषाई अल्पसंख्यकों के बच्चों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधा प्रदान करने का निर्देश देता है। कथन 3 गलत है। CBSE एक सांविधिक निकाय नहीं है, बल्कि यह शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संगठन है।
Q2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के संदर्भ में, ‘त्रिभाषा सूत्र’ का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- केवल अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं को बढ़ावा देना।
- छात्रों को केवल एक क्षेत्रीय भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित करना।
- भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करना।
- विदेशी भाषाओं को भारतीय भाषाओं पर प्राथमिकता देना।
उत्तर: भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करना। — NEP 2020 में त्रिभाषा सूत्र का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करना है, ताकि छात्र अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकें और विभिन्न भाषाओं में दक्षता प्राप्त कर सकें।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्रस्तावित त्रिभाषा सूत्र के उद्देश्यों और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या CBSE द्वारा कक्षा 9 में तीन भाषाओं को अनिवार्य करने का निर्णय इन उद्देश्यों के अनुरूप है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर की रूपरेखा:
1. परिचय: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और उसके तहत त्रिभाषा सूत्र का संक्षिप्त परिचय।
2. त्रिभाषा सूत्र के उद्देश्य: भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना, बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करना, सांस्कृतिक जुड़ाव, संज्ञानात्मक विकास और राष्ट्रीय एकता।
3. त्रिभाषा सूत्र की चुनौतियाँ: राज्यों की भाषाई विविधता, शिक्षकों और संसाधनों की उपलब्धता, छात्रों पर अतिरिक्त बोझ, क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता, कार्यान्वयन में एकरूपता की कमी।
4. CBSE के निर्णय का विश्लेषण: कक्षा 9 में तीन भाषाओं (दो भारतीय भाषाओं सहित) को अनिवार्य करने का CBSE का निर्णय NEP 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, क्योंकि यह भारतीय भाषाओं के संवर्धन और बहुभाषी शिक्षा पर जोर देता है।
5. निर्णय से जुड़ी चुनौतियाँ: छात्रों पर अकादमिक दबाव, विभिन्न राज्यों की विशिष्ट भाषाई नीतियों से टकराव, पर्याप्त शिक्षण संसाधनों और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी।
6. न्यायिक समीक्षा का महत्व: सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस नीति की समीक्षा का महत्व, जिसमें छात्रों के हित, CBSE के अधिकार और संवैधानिक प्रावधानों पर विचार किया जाएगा।
7. निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करना, जिसमें नीति के सकारात्मक पहलुओं और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों दोनों को स्वीकार किया जाए, तथा एक प्रभावी और समावेशी भाषाई शिक्षा प्रणाली के लिए सुझाव दिए जाएं।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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