12 Aug सीबीडीसी आधारित डीबीटी: चंडीगढ़-दादरा में पीएमजीकेएवाई का डिजिटल रुपया क्रांति
✎ CBDC-आधारित DBT योजना पारदर्शिता, दक्षता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए कल्याणकारी लाभों के वितरण में डिजिटल रुपये के उपयोग को एकीकृत करती है, जिससे रिसाव कम होता है और वास्तविक समय की निगरानी संभव होती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधन जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय; सरकारी बजट के मुख्य घटक; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव
- Prelims: केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY), डिजिटल रुपया (e₹), वित्तीय समावेशन, प्रोग्रामेबल करेंसी, ब्लॉकचेन तकनीक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना
- Essay: भारत में डिजिटल क्रांति और कल्याणकारी योजनाओं का भविष्य, प्रौद्योगिकी-आधारित शासन: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: CBDC-आधारित DBT योजना पारदर्शिता, दक्षता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए कल्याणकारी लाभों के वितरण में डिजिटल रुपये के उपयोग को एकीकृत करती है, जिससे रिसाव कम होता है और वास्तविक समय की निगरानी संभव होती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली के केंद्र शासित प्रदेशों में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजना शुरू की है। यह पहल इन केंद्र शासित प्रदेशों को देश में पहले ऐसे क्षेत्र बनाती है, जहाँ सभी पात्र PMGKAY लाभार्थियों को खाद्य सब्सिडी का हस्तांतरण सीधे उनके CBDC वॉलेट में डिजिटल रुपए (e₹) टोकन के रूप में किया जाएगा। यह कदम सार्वजनिक निधियों के पारदर्शी और कुशल वितरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
पृष्ठभूमि
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजना भारत सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में सब्सिडी और लाभ हस्तांतरित करने के लिए शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य रिसाव को कम करना और पारदर्शिता बढ़ाना था।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत में डिजिटल मुद्रा के रूप में केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को चरणबद्ध तरीके से पेश किया है, जिसे ‘डिजिटल रुपया’ (e₹) कहा जाता है। इसके थोक और खुदरा दोनों खंडों के लिए प्रायोगिक परियोजनाएँ शुरू की गई हैं।
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) एक खाद्य सुरक्षा कल्याण योजना है जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था।
- पुडुचेरी और गुजरात में CBDC-आधारित DBT के प्रायोगिक कार्यान्वयन के सफल अनुभवों के आधार पर, यह नई पहल लक्षित केंद्र शासित प्रदेशों में पूर्ण डिजिटल अपनाने और संतृप्ति का प्रतीक है।
- यह पहल देश के आधुनिक, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित कल्याणकारी वितरण तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत करने के सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।
केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) और DBT का एकीकरण
- केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) एक केंद्रीय बैंक द्वारा जारी एक डिजिटल फिएट मुद्रा है। यह संप्रभु मुद्रा का डिजिटल रूप है और कानूनी निविदा के रूप में मान्य है।
- CBDC-आधारित DBT मॉडल में, पात्र PMGKAY लाभार्थियों को पारंपरिक बैंक खाता हस्तांतरण के बजाय सीधे उनके CBDC वॉलेट में खाद्य सब्सिडी प्राप्त होगी।
- यह सब्सिडी प्रोग्रामेबल CBDC (डिजिटल रुपया) टोकन के रूप में होगी, जिसका अर्थ है कि इसे विशिष्ट उद्देश्यों, जैसे सूचीबद्ध व्यापारियों से खाद्यान्न खरीदने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है।
- इस प्रणाली का उद्देश्य सार्वजनिक निधियों का पारदर्शी और संपूर्ण वितरण सुनिश्चित करना है, जिससे पारंपरिक सब्सिडी वितरण तंत्रों से जुड़े रिसाव, गबन और नकदी लेनदेन को कम किया जा सके।
- यह लाभार्थियों को लाभों का त्वरित और सुरक्षित हस्तांतरण सुगम बनाएगा, साथ ही सरल वॉलेट-आधारित लेनदेन के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगा।
- यह पहल सब्सिडी के उपयोग की जवाबदेही और वास्तविक समय की निगरानी को मजबूत करेगी, जिससे भविष्य की भुगतान प्रणालियों के लिए डिजिटल रुपये की क्षमता का प्रदर्शन होगा।
- यह मॉडल देश के लिए एक अवधारणा के प्रमाण (Proof of Concept) के रूप में कार्य करेगा और अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाने के लिए एक स्केलेबल टेम्पलेट प्रदान करेगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सीबीडीसी आधारित डीबीटी | पारंपरिक बैंक हस्तांतरण के बजाय सीधे सीबीडीसी वॉलेट में खाद्य सब्सिडी का हस्तांतरण। |
| प्रोग्रामेबल सीबीडीसी टोकन | सब्सिडी का उपयोग केवल सूचीबद्ध व्यापारियों से खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जा सकता है, जिससे दुरुपयोग कम होता है। |
| पारदर्शिता और जवाबदेही | सार्वजनिक निधियों के वितरण में रिसाव, गबन और नकदी लेनदेन को कम करता है, वास्तविक समय की निगरानी संभव। |
| वित्तीय समावेशन | सरल वॉलेट-आधारित लेनदेन के माध्यम से लाभार्थियों को लाभों का त्वरित और सुरक्षित हस्तांतरण सुनिश्चित करता है। |
| प्रौद्योगिकी-आधारित वितरण | देश के आधुनिक, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित कल्याणकारी वितरण तंत्र के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सीबीडीसी आधारित डीबीटी मॉडल सार्वजनिक निधियों के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाता है, जिससे रिसाव और भ्रष्टाचार कम होता है।
- यह सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकता है, यह सुनिश्चित करता है कि लाभ लक्षित उद्देश्यों के लिए ही उपयोग किए जाएं, जिससे राजकोषीय विवेक में सुधार होता है।
- यह वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनके पास पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं तक सीमित पहुंच है, जिससे आर्थिक असमानता कम होती है।
शासन और नीतिगत महत्व
- यह पहल कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में सरकार की जवाबदेही और वास्तविक समय की निगरानी को मजबूत करती है।
- यह एक आधुनिक, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित कल्याणकारी वितरण तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
- यह अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाने के लिए एक स्केलेबल टेम्पलेट के रूप में कार्य करता है, जिससे पूरे देश में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मजबूत होती है।
तकनीकी और नवाचार महत्व
- यह डिजिटल रुपये की क्षमता को प्रदर्शित करता है और भविष्य की भुगतान प्रणालियों के लिए एक अवधारणा के प्रमाण के रूप में कार्य करता है।
- यह नवीन तकनीकों के माध्यम से नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने के सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।
- यह सीबीडीसी के एकीकरण के संबंध में मूल्यवान परिचालन अनुभव प्रदान करेगा, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल साक्षरता और पहुंच
- लाभार्थियों के बीच डिजिटल साक्षरता की कमी सीबीडीसी वॉलेट के उपयोग में बाधा बन सकती है।
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन की पहुंच एक चुनौती बनी हुई है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कल्याणकारी योजनाएँ
2. तकनीकी अवसंरचना
- सीबीडीसी प्लेटफॉर्म और वॉलेट के सुचारू संचालन के लिए मजबूत और विश्वसनीय तकनीकी अवसंरचना की आवश्यकता है।
- साइबर सुरक्षा जोखिम और डेटा गोपनीयता चिंताएँ डिजिटल भुगतान प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी: सूचना प्रौद्योगिकी
3. स्वीकृति और जागरूकता
- सीबीडीसी आधारित भुगतान प्रणाली को व्यापारियों और लाभार्थियों के बीच व्यापक स्वीकृति की आवश्यकता है।
- नई प्रणाली के लाभों और उपयोग के बारे में जागरूकता पैदा करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था: वित्तीय क्षेत्र
4. अंतर-संचालनीयता
- विभिन्न सीबीडीसी प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों के बीच अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
- यह सुनिश्चित करना कि सीबीडीसी लेनदेन अन्य वित्तीय सेवाओं के साथ सहज रूप से एकीकृत हो सकें।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था: अवसंरचना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल विभाजन | डिजिटल उपकरणों और इंटरनेट तक पहुंच की कमी वाले लोगों को बाहर कर सकता है। |
| तकनीकी खराबी | सिस्टम की विफलता या तकनीकी त्रुटियां लाभ वितरण में देरी का कारण बन सकती हैं। |
| गोपनीयता संबंधी चिंताएँ | सीबीडीसी लेनदेन की निगरानी से व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। |
| व्यापारी स्वीकृति | सभी सूचीबद्ध व्यापारियों द्वारा सीबीडीसी भुगतान स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहन और प्रशिक्षण की आवश्यकता। |
| धोखाधड़ी और सुरक्षा | डिजिटल वॉलेट और लेनदेन को साइबर हमलों और धोखाधड़ी से बचाना। |
आगे की राह
- डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और लाभार्थियों को सीबीडीसी वॉलेट के उपयोग में प्रशिक्षण प्रदान करना।
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना।
- सीबीडीसी प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों को लागू करना।
- व्यापारियों और लाभार्थियों के बीच सीबीडीसी आधारित डीबीटी प्रणाली के बारे में जागरूकता अभियान चलाना।
- सीबीडीसी प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों के बीच अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित करना।
- लाभार्थियों के लिए शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना ताकि वे किसी भी समस्या का समाधान कर सकें।
- सीबीडीसी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहन प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) · प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) · प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) · वित्तीय समावेशन · डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना · पारदर्शिता · प्रौद्योगिकी-आधारित कल्याणकारी वितरण · शासन में नवाचार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण को बढ़ावा देगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाना’}
अवधारणा प्रवाह
सरकार कल्याणकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी प्रदान करती है। → पारंपरिक डीबीटी में बैंक खातों में धन हस्तांतरित होता है। → सीबीडीसी आधारित डीबीटी में डिजिटल रुपये का उपयोग होता है। → लाभार्थियों को सीबीडीसी वॉलेट में प्रोग्रामेबल टोकन मिलते हैं। → टोकन का उपयोग केवल विशिष्ट वस्तुओं (जैसे खाद्यान्न) के लिए होता है। → इससे पारदर्शिता, दक्षता और रिसाव में कमी आती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) एक कानूनी निविदा है जो केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की जाती है।
2. भारत में CBDC का पायलट कार्यान्वयन पहले पुडुचेरी और गुजरात में किया गया था।
3. CBDC-आधारित DBT मॉडल में, लाभार्थियों को सब्सिडी सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि CBDC वास्तव में केंद्रीय बैंक द्वारा जारी एक कानूनी निविदा है। कथन 2 भी सही है क्योंकि पुडुचेरी और गुजरात में CBDC का प्रायोगिक कार्यान्वयन पहले किया गया था। कथन 3 गलत है क्योंकि CBDC-आधारित DBT मॉडल में, लाभार्थियों को सब्सिडी सीधे उनके CBDC वॉलेट में प्राप्त होती है, न कि पारंपरिक बैंक खातों में।
Q2. अभिकथन (A): CBDC-आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) सार्वजनिक निधियों के पारदर्शी और संपूर्ण वितरण को सुनिश्चित करता है।
कारण (R): यह पारंपरिक सब्सिडी वितरण तंत्रों से जुड़े रिसाव, गबन और नकदी लेनदेन को कम करता है।
उपरोक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि CBDC-आधारित DBT पारदर्शिता बढ़ाता है। कारण (R) भी सही है क्योंकि यह रिसाव और गबन को कम करके पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। इस प्रकार, R, A का सही स्पष्टीकरण है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) आधारित प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) मॉडल भारत में कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में क्रांति लाने की क्षमता रखता है। इस कथन का समालोचनात्मक परीक्षण करें और इसके संभावित लाभों और चुनौतियों पर चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल: परिचय में CBDC-आधारित DBT की अवधारणा और इसके हालिया कार्यान्वयन (चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली) का उल्लेख करें। मुख्य भाग में, इसके संभावित लाभों का विस्तार से वर्णन करें, जैसे पारदर्शिता में वृद्धि, रिसाव में कमी, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा, त्वरित और सुरक्षित हस्तांतरण, और जवाबदेही। इसके बाद, इस मॉडल से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करें, जिनमें डिजिटल साक्षरता की कमी, तकनीकी अवसंरचना की आवश्यकता, साइबर सुरक्षा जोखिम, गोपनीयता संबंधी चिंताएं और लाभार्थियों के बीच स्वीकार्यता शामिल हैं। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें जो इसकी क्षमता को स्वीकार करे लेकिन चुनौतियों के समाधान की आवश्यकता पर भी बल दे।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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