11 Aug स्माइल योजना: सरकार ने भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के पुनर्वास ढांचे को किया सुदृढ़, 10,446 लोगों का पुनर्वास

✎ स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन सुनिश्चित करना है, जो सर्वोच्च न्यायालय के…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ | GS Paper II — शासन: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप
- Prelims: स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भिक्षावृत्ति, पुनर्वास, कौशल विकास, स्वयं सहायता समूह, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, राष्ट्रीय परामर्श समिति
- Essay: भारत में सामाजिक समावेशन और हाशिए पर स्थित समुदायों का सशक्तिकरण, कल्याणकारी राज्य की अवधारणा और कमजोर वर्गों के प्रति उसकी भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन सुनिश्चित करना है, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर आधारित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने हाशिये पर स्थित व्यक्तियों की आजीविका एवं उद्यम के लिए सहायता (स्माइल) – भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के समग्र पुनर्वास (स्माइल-भिक्षावृत्ति) योजना के माध्यम से भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास तथा सामाजिक पुनर्समावेशन को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक उपाय किए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, योजना के आरंभ से अब तक 45.59 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं और 2,824 बच्चों सहित कुल 10,446 व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया है।
पृष्ठभूमि
- भारत में भिक्षावृत्ति एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक समस्या है, जो गरीबी, बेघरता, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और सामाजिक बहिष्कार से जुड़ी है।
- पारंपरिक रूप से, भिक्षावृत्ति को कई राज्यों में कानूनन अपराध माना जाता रहा है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इस दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया है।
- एम.एस. पैटर बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के मानवीय और अधिकार-आधारित पुनर्वास के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया था।
- इस पृष्ठभूमि में, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) ने भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए एक व्यापक योजना की आवश्यकता महसूस की।
- स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना को 23 अक्टूबर 2023 को हाशिए पर स्थित व्यक्तियों के समग्र कल्याण के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
- योजना का उद्देश्य केवल भिक्षावृत्ति को रोकना नहीं, बल्कि इसमें संलग्न व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए संस्थागत सहायता और अवसर प्रदान करना है।
स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना क्या है?
- स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना हाशिये पर स्थित व्यक्तियों की आजीविका एवं उद्यम के लिए सहायता (SMILE – Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना का एक उप-घटक है।
- इसका मुख्य उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास, कौशल विकास, आजीविका सहायता और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना है।
- योजना के तहत बचाए गए बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप देखभाल, शिक्षा, परामर्श तथा परिवार के साथ पुनर्समावेशन की सुविधा प्रदान की जाती है।
- पात्र वयस्क लाभार्थियों को उनकी अभिरुचि, आयु, शारीरिक एवं मानसिक स्थिति तथा स्थानीय आजीविका के अवसरों के आधार पर व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें बढ़ईगीरी, सिलाई, गृह व्यवस्था, स्वच्छता सेवाएं, पाक-कला, ई-रिक्शा चलाना आदि शामिल हैं।
- लाभार्थियों को स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups – SHGs) के गठन में भी सहायता प्रदान की जाती है और उन्हें स्वरोजगार एवं आय सृजन गतिविधियों के लिए बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से जोड़ा जाता है।
- योजना में भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों/आश्रय गृहों के प्रभावी पर्यवेक्षण तथा सम्मानजनक जीवन-स्थितियां सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में, मंत्रालय ने राष्ट्रीय परामर्श समिति (National Consultation Committee) के साथ मिलकर भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों/आश्रय गृहों के लिए आदर्श दिशानिर्देश तैयार किए हैं, जो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे गए हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समग्र पुनर्वास दृष्टिकोण | भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए व्यापक उपाय। |
| वित्तीय आवंटन | योजना के आरंभ से अब तक 45.59 करोड़ रुपये जारी किए गए, जो कार्यान्वयन और प्रशासनिक व्ययों में सहायक। |
| लाभार्थी संख्या | 31 जुलाई 2026 तक 2,824 बच्चों सहित कुल 10,446 व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया। |
| व्यावसायिक प्रशिक्षण | लाभार्थियों की रुचि, आयु और स्थानीय अवसरों के आधार पर बढ़ईगीरी, सिलाई, पाक-कला आदि में प्रशिक्षण। |
| स्वरोजगार सहायता | स्वयं सहायता समूहों के गठन में सहयोग और बैंकों से वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद। |
| आदर्श दिशानिर्देश | सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में मानवीय और अधिकार-आधारित पुनर्वास के लिए रूपरेखा। |
महत्व
सामाजिक न्याय
- यह योजना समाज के सबसे हाशिए पर पड़े वर्गों में से एक, भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने का प्रयास करती है।
- यह सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को बढ़ावा देती है और इन व्यक्तियों को मुख्यधारा में वापस लाने में मदद करती है।
- बच्चों के पुनर्वास पर विशेष ध्यान उनके भविष्य को सुरक्षित करने और उन्हें शिक्षा व देखभाल प्रदान करने में महत्वपूर्ण है।
मानवाधिकार
- यह मानवीय गरिमा और सम्मान के अधिकार को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में आदर्श दिशानिर्देशों का निर्माण अधिकार-आधारित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए और उनके अधिकारों का उल्लंघन न हो।
आर्थिक सशक्तिकरण
- व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास के माध्यम से लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
- स्वरोजगार और आय सृजन गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है।
- यह गरीबी उन्मूलन (Poverty Alleviation) और आजीविका सुरक्षा में योगदान देता है।
शासन और नीति
- यह केंद्र सरकार की हाशिए पर स्थित समुदायों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- विभिन्न मंत्रालयों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ राष्ट्रीय परामर्श समिति का गठन एक सहयोगात्मक नीति निर्माण प्रक्रिया का उदाहरण है।
- राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को आदर्श दिशानिर्देश जारी करना एक समान और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने में सहायक है।
चुनौतियाँ
1. पहचान और पहुंच
- भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की सही पहचान करना और उन तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वे अक्सर अस्थिर होते हैं।
- कई बार ये व्यक्ति संगठित गिरोहों का हिस्सा होते हैं, जिससे उन्हें बचाना और पुनर्वासित करना मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का कल्याण
2. पुनर्वास की निरंतरता
- पुनर्वासित व्यक्तियों को समाज में फिर से एकीकृत करना और उन्हें भिक्षावृत्ति में वापस जाने से रोकना एक सतत चुनौती है।
- प्रशिक्षण के बाद भी आजीविका के स्थायी अवसर प्रदान करना और सामाजिक स्वीकृति सुनिश्चित करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: मानव संसाधन
3. संसाधनों की कमी
- पुनर्वास गृहों, प्रशिक्षित कर्मचारियों और वित्तीय संसाधनों की कमी योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डाल सकती है।
- व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और सामग्री की उपलब्धता भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों का कार्यान्वयन
4. सामाजिक कलंक
- भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों को अक्सर समाज में कलंक और भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका पुनर्समावेशन कठिन हो जाता है।
- समुदाय की मानसिकता में बदलाव लाना और इन व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति विकसित करना महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों का कल्याण
5. अंतर-राज्य समन्वय
- भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्ति अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते रहते हैं, जिससे उनके पुनर्वास और निगरानी में अंतर-राज्य समन्वय की आवश्यकता होती है।
- विभिन्न राज्यों में नीतियों और कार्यान्वयन में एकरूपता बनाए रखना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: केंद्र-राज्य संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भिक्षावृत्ति का मूल कारण | गरीबी, बेरोजगारी, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और सामाजिक बहिष्कार जैसे अंतर्निहित कारणों को संबोधित करने की आवश्यकता। |
| बच्चों का शोषण | भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों को अक्सर शोषण और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके पुनर्वास में विशेष संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है। |
| डेटा की कमी | भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की सटीक संख्या और उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं पर व्यापक डेटा की कमी प्रभावी नीति निर्माण में बाधा डालती है। |
| गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका | गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भागीदारी और क्षमता निर्माण को मजबूत करना, क्योंकि वे जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। |
| कानूनी ढांचा | भिक्षावृत्ति विरोधी कानूनों की प्रभावशीलता और मानवाधिकारों के साथ उनके संतुलन की समीक्षा। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना (SMILE-Beggary Scheme)
आगे की राह
- भिक्षावृत्ति के मूल कारणों जैसे गरीबी, बेरोजगारी और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए व्यापक नीतियां लागू करना।
- पुनर्वासित व्यक्तियों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सुनिश्चित करने हेतु कौशल विकास कार्यक्रमों को बाजार की मांग के अनुरूप बनाना।
- जन जागरूकता अभियान चलाकर भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के प्रति सामाजिक कलंक को कम करना और सामुदायिक स्वीकृति को बढ़ावा देना।
- पुनर्वास गृहों की क्षमता और गुणवत्ता में सुधार करना, साथ ही प्रशिक्षित परामर्शदाताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- राज्य सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय को मजबूत करना ताकि योजना का प्रभावी और व्यापक कार्यान्वयन हो सके।
- भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों के लिए विशेष देखभाल, शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु बाल-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना।
- योजना के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करना और प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर नीतियों में आवश्यक संशोधन करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना · हाशिये पर स्थित व्यक्ति · पुनर्वास ढाँचा · सामाजिक पुनर्समावेशन · कौशल विकास · आजीविका सहायता · राष्ट्रीय परामर्श समिति · आदर्श दिशानिर्देश · मानवीय गरिमा · अधिकार-आधारित दृष्टिकोण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 23’, ‘note’: ‘मानव दुर्व्यापार और बलात् श्रम पर प्रतिबंध’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘कुछ नीति निर्देशक सिद्धांत’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार’}
अवधारणा प्रवाह
भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की पहचान → उन्हें आश्रय गृहों में लाना → देखभाल, परामर्श और शिक्षा प्रदान करना → व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास → स्वरोजगार/आजीविका सहायता → सामाजिक पुनर्समावेशन और निगरानी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
2. इस योजना का उद्देश्य केवल वयस्क भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का पुनर्वास करना है।
3. योजना के अंतर्गत बचाए गए बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना बच्चों सहित भिक्षावृत्ति में संलग्न सभी व्यक्तियों के पुनर्वास का लक्ष्य रखती है। कथन 3 गलत है क्योंकि योजना के अंतर्गत बचाए गए बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप देखभाल, शिक्षा, परामर्श तथा परिवार के साथ पुनर्समावेशन की सुविधा प्रदान की जाती है, उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण संबंधी हस्तक्षेपों के अंतर्गत शामिल नहीं किया जाता।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना के आदर्श दिशानिर्देशों के संबंध में सही है?
- यह केवल केंद्र सरकार द्वारा सीधे लागू किए जाते हैं।
- इन्हें राष्ट्रीय परामर्श समिति के परामर्श से तैयार किया गया है।
- इनका मुख्य उद्देश्य भिक्षावृत्ति को पूरी तरह से अपराध घोषित करना है।
- ये केवल वित्तीय सहायता प्रदान करने पर केंद्रित हैं, पुनर्वास पर नहीं।
उत्तर: इन्हें राष्ट्रीय परामर्श समिति के परामर्श से तैयार किया गया है। — स्माइल-भिक्षावृत्ति योजना के आदर्श दिशानिर्देशों को राष्ट्रीय परामर्श समिति तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से तैयार किया गया है। ये दिशानिर्देश भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के मानवीय, सम्मानजनक एवं अधिकार-आधारित पुनर्वास के लिए एक व्यापक रूपरेखा निर्धारित करते हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास हेतु ‘स्माइल-भिक्षावृत्ति’ योजना के उद्देश्यों और कार्यान्वयन तंत्र पर चर्चा कीजिए। हाशिये पर स्थित इन समुदायों के सामाजिक पुनर्समावेशन में यह योजना कितनी सफल रही है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** ‘स्माइल-भिक्षावृत्ति’ योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके पूर्ण नाम (हाशिये पर स्थित व्यक्तियों की आजीविका एवं उद्यम के लिए सहायता – भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के समग्र पुनर्वास) और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वयन का उल्लेख।
2. **योजना के उद्देश्य:**
* भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की देखभाल, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्समावेशन।
* संस्थागत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करना।
* कौशल विकास और आजीविका सहायता प्रदान करना।
* सम्मानजनक जीवन-स्थितियाँ सुनिश्चित करना।
3. **कार्यान्वयन तंत्र:**
* केंद्र सरकार द्वारा राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता।
* बच्चों और वयस्कों के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण (बच्चों के लिए शिक्षा, परामर्श, परिवार पुनर्समावेशन; वयस्कों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण)।
* व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रकार (बढ़ईगीरी, सिलाई, स्वच्छता सेवाएं, ई-रिक्शा आदि)।
* स्वयं सहायता समूहों (SHG) के गठन में सहायता और वित्तीय संस्थानों से जुड़ाव।
* राष्ट्रीय परामर्श समिति की भूमिका और आदर्श दिशानिर्देशों का विकास।
* सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों (एम.एस. पैटर बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार) का अनुपालन।
4. **सफलता का मूल्यांकन (डेटा और चुनौतियाँ):**
* जारी की गई राशि (45.59 करोड़ रुपये) और पुनर्वासित व्यक्तियों की संख्या (10,446, जिसमें 2,824 बच्चे शामिल)।
* सर्वाधिक लाभार्थी वाले राज्य (तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश)।
* **सफलता के बिंदु:** मानवीय और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण, कौशल विकास, आजीविका के अवसर, सामाजिक सुरक्षा जाल से जुड़ाव।
* **चुनौतियाँ:** व्यापकता और पहुँच की सीमाएँ, सामाजिक कलंक, जागरूकता की कमी, राज्यों के बीच कार्यान्वयन में असमानताएँ, दीर्घकालिक स्थिरता।
5. **निष्कर्ष:** योजना के महत्व पर बल देते हुए, हाशिये पर स्थित व्यक्तियों के लिए एक समावेशी समाज के निर्माण में इसकी भूमिका और भविष्य की राह पर सुझाव।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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