17 Aug ‘स्माइल’ योजना: सरकार ने हाशिये के लोगों के पुनर्वास और समावेशन को किया मजबूत, जानिए प्रमुख बिंदु

✎ स्माइल योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों और ट्रांसजेंडर समुदाय जैसे हाशिए पर स्थित वर्गों का व्यापक पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ, कमजोर वर्गों का उत्थान | GS Paper III — समावेशी विकास
- Prelims: स्माइल योजना, भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का पुनर्वास, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का कल्याण, गरिमा गृह, राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल, आयुष्मान भारत योजना, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, केंद्रीय क्षेत्र की योजना
- Essay: भारत में सामाजिक समावेशन की चुनौतियाँ और समाधान, हाशिए पर स्थित समुदायों का सशक्तिकरण: एक समावेशी समाज की दिशा में
त्वरित पुनरावृत्ति: स्माइल योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों और ट्रांसजेंडर समुदाय जैसे हाशिए पर स्थित वर्गों का व्यापक पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने हाल ही में ‘स्माइल’ (हाशिये पर के लोगों के लिए आजीविका और उद्यम के लिए सहायता) योजना के माध्यम से वंचित और हाशिए पर स्थित व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास तथा सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत करने की जानकारी दी है। इस योजना के तहत भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें पुनर्वास, चिकित्सा सुविधाएं, कौशल विकास और आजीविका के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में बड़ी संख्या में लोग, विशेषकर ट्रांसजेंडर समुदाय और भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्ति, सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक वंचना और भेदभाव का सामना करते हैं।
- इन समुदायों के लिए सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में एकीकृत करने हेतु विशेष हस्तक्षेपों की आवश्यकता महसूस की गई है।
- सरकार ने इन चुनौतियों का समाधान करने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और नीतियों को लागू किया है।
- ‘स्माइल’ योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य इन कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना है।
- यह योजना राज्य सरकारों, ज़िला प्रशासन, शहरी स्थानीय निकायों और अन्य हितधारकों के सहयोग से लागू की जा रही है, जो एक समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- योजना का लक्ष्य केवल तात्कालिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक एकीकरण सुनिश्चित करना है।
स्माइल योजना क्या है?
- स्माइल (SMILE – Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा लागू की गई एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
- इसका मुख्य उद्देश्य वंचित और हाशिए पर स्थित व्यक्तियों, विशेषकर भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए व्यापक पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करना है।
- योजना के दो मुख्य उप-घटक हैं: ‘भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास’ और ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास’।
- ‘भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास’ उप-योजना 12 फरवरी 2022 को शुरू की गई थी, जिसका लक्ष्य भारत को ‘भिक्षावृत्ति मुक्त’ बनाना है। इसके तहत पहचान, लामबंदी, चिकित्सा सुविधाएं, परामर्श, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाते हैं।
- ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए, योजना बेसहारा और आश्रयहीन व्यक्तियों को आश्रय और सहायता प्रदान करने के लिए ‘गरिमा गृह’ स्थापित करती है। अब तक 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 23 गरिमा गृह स्थापित किए गए हैं।
- ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवा, पहचान संबंधी दस्तावेज़ (राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल के माध्यम से), कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
- यह योजना ‘आयुष्मान भारत’ योजना के साथ तालमेल बिठाकर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्वास्थ्य कार्ड भी प्रदान करती है।
- स्माइल योजना का दृष्टिकोण विभिन्न सरकारी विभागों, एजेंसियों और स्थानीय निकायों के बीच तालमेल और सहयोग पर ज़ोर देता है, ताकि पुनर्वास के प्रयासों को प्रभावी और स्थायी बनाया जा सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| व्यापक पुनर्वास दृष्टिकोण | यह योजना केवल तात्कालिक सहायता पर केंद्रित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देती है, जिससे हाशिए पर पड़े व्यक्तियों को सम्मान और आत्मविश्वास के साथ मुख्यधारा में लौटने में मदद मिलती है। |
| बहु-हितधारक सहयोग | राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों, जिला प्रशासन, शहरी स्थानीय निकायों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच तालमेल पर जोर दिया गया है, जो पुनर्वास प्रयासों की प्रभावशीलता को बढ़ाता है। |
| भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का पुनर्वास | यह उप-योजना भिक्षावृत्ति को समाप्त करने और इन व्यक्तियों को चिकित्सा सुविधा, परामर्श, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के अवसर प्रदान करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है। |
| ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का कल्याण | ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए गरिमा गृह, स्वास्थ्य सेवा, पहचान पत्र, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है। |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग | स्माइल-बेगरी पोर्टल और राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल जैसे डिजिटल उपकरण लाभार्थियों की पहचान, ट्रैकिंग और सेवाओं तक पहुंच को सुगम बनाते हैं, जिससे योजना का कार्यान्वयन अधिक पारदर्शी और कुशल होता है। |
महत्व
सामाजिक समावेशन और न्याय
- यह योजना हाशिए पर पड़े और वंचित वर्गों, विशेषकर भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करती है।
- यह इन समूहों को सम्मानजनक जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा में एकीकृत होने के अवसर प्रदान करके सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करती है।
- कौशल विकास और आजीविका सहायता के माध्यम से, यह योजना इन व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने और गरीबी के चक्र से बाहर निकालने में मदद करती है।
मानवाधिकारों का संरक्षण
- यह योजना वंचित व्यक्तियों के गरिमा, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकारों को सुनिश्चित करती है, जो मानवाधिकारों के सार्वभौमिक घोषणापत्र के अनुरूप है।
- ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान उनके लैंगिक पहचान के अधिकार और भेदभाव से मुक्ति के अधिकार को मान्यता देते हैं।
शासन और नीति निर्माण
- यह योजना केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग का एक उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिससे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होता है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग नीति कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाता है, जिससे लाभार्थियों तक सेवाओं की पहुंच बेहतर होती है।
चुनौतियाँ
1. पहचान और लामबंदी
- भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की सही पहचान करना और उन्हें पुनर्वास कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए प्रेरित करना एक बड़ी चुनौती है।
- कई बार ये व्यक्ति संगठित गिरोहों का हिस्सा होते हैं, जिससे उन्हें मुख्यधारा में लाना मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे, कमजोर वर्ग
2. दीर्घकालिक पुनर्वास और एकीकरण
- पुनर्वास के बाद इन व्यक्तियों को समाज में पूरी तरह से एकीकृत करना और उन्हें स्थायी आजीविका प्रदान करना एक सतत चुनौती है।
- सामाजिक पूर्वाग्रह और भेदभाव के कारण उन्हें रोजगार और आवास प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय, कमजोर वर्गों का कल्याण
3. संसाधनों की कमी
- पुनर्वास केंद्रों, चिकित्सा सुविधाओं और कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में इन सेवाओं तक पहुंच एक चुनौती बनी हुई है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे
4. सामाजिक स्वीकृति और जागरूकता
- ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति सामाजिक स्वीकृति बढ़ाना और उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना महत्वपूर्ण है।
- भेदभाव और कलंक को दूर करने के लिए व्यापक सामाजिक अभियान आवश्यक हैं।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कमजोर वर्ग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की पहचान | कई व्यक्ति अपनी पहचान गोपनीय रखना चाहते हैं या संगठित गिरोहों के दबाव में होते हैं, जिससे उन्हें पहचानना और सहायता प्रदान करना कठिन हो जाता है। |
| सामाजिक पूर्वाग्रह और भेदभाव | पुनर्वासित व्यक्तियों, विशेषकर ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज में फिर से एकीकृत होने और रोजगार प्राप्त करने में सामाजिक पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है। |
| स्थायी आजीविका के अवसर | कौशल विकास के बाद भी, इन व्यक्तियों के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसर पैदा करना एक चुनौती है, खासकर जब अर्थव्यवस्था में मंदी हो। |
| गरिमा गृहों का प्रबंधन और विस्तार | गरिमा गृहों की संख्या और क्षमता अपर्याप्त हो सकती है, और उनके उचित प्रबंधन तथा सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। |
| अंतर-विभागीय समन्वय | योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता है, जिसमें अक्सर चुनौतियां आती हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्माइल (हाशिये पर के लोगों के लिए आजीविका और उद्यम के लिए सहायता) योजना
- आयुष्मान भारत योजना
आगे की राह
- भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों की पहचान और लामबंदी के लिए समुदाय-आधारित दृष्टिकोणों को मजबूत करना, जिसमें स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों और स्वयंसेवकों को शामिल किया जाए।
- पुनर्वासित व्यक्तियों के लिए सामाजिक स्वीकृति बढ़ाने हेतु व्यापक जागरूकता अभियान चलाना, जो समाज में उनके प्रति पूर्वाग्रहों को कम कर सके।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को बाजार की मांग के अनुरूप बनाना और लाभार्थियों को रोजगार के स्थायी अवसर प्रदान करने के लिए निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी को बढ़ावा देना।
- गरिमा गृहों की संख्या और क्षमता में वृद्धि करना, साथ ही उनमें प्रदान की जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल और स्माइल-बेगरी पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहुंच और उपयोगिता में सुधार करना, ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी इन सेवाओं का लाभ उठा सकें।
- योजना के कार्यान्वयन में राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और नागरिक समाज संगठनों के बीच समन्वय और सहयोग को और मजबूत करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्माइल योजना · सामाजिक समावेशन · पुनर्वास · हाशिये पर के लोग · भिक्षावृत्ति मुक्त भारत · ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का कल्याण · गरिमा गृह · कौशल विकास · आजीविका सहायता · केंद्रीय क्षेत्र की योजना
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समानता
- अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का प्रतिषेध
- अनुच्छेद 21: प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण
- अनुच्छेद 23: मानव दुर्व्यापार और बलात्श्रम का प्रतिषेध
- अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा
अवधारणा प्रवाह
हाशिए पर पड़े और वंचित वर्ग (भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्ति, ट्रांसजेंडर) → सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा ‘स्माइल’ योजना का शुभारंभ → पुनर्वास, चिकित्सा, परामर्श, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका सहायता → गरिमा गृहों की स्थापना और डिजिटल पोर्टलों का उपयोग → सामाजिक समावेशन, आर्थिक सशक्तिकरण और सम्मानजनक जीवन → भिक्षावृत्ति मुक्त भारत और समावेशी समाज का निर्माण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. स्माइल (SMILE) योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
2. इसका उद्देश्य केवल भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का पुनर्वास करना है।
3. ‘गरिमा गृह’ इस योजना का एक घटक है, जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए आश्रय प्रदान करता है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। स्माइल योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। कथन 2 गलत है। स्माइल योजना का उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के साथ-साथ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों सहित हाशिये पर के अन्य लोगों का भी व्यापक पुनर्वास करना है। कथन 3 सही है। ‘गरिमा गृह’ स्माइल योजना के अंतर्गत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए स्थापित किए गए हैं। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘स्माइल’ योजना के मुख्य उद्देश्य हैं?
1. हाशिये पर के लोगों को कल्याणकारी सेवाओं तक पहुँचने में मदद करना।
2. कौशल और आजीविका की क्षमताएँ विकसित करना।
3. सम्मान और आत्मविश्वास के साथ मुख्यधारा के समाज में फिर से शामिल होने में मदद करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — स्माइल योजना का उद्देश्य हाशिये पर के लोगों को कल्याणकारी सेवाओं तक पहुँचने, कौशल और आजीविका की क्षमताएँ विकसित करने और सम्मान व आत्मविश्वास के साथ मुख्यधारा के समाज में फिर से शामिल होने में मदद करना है। इसलिए, सभी तीनों कथन सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में हाशिये पर के समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए ‘स्माइल’ योजना के उद्देश्यों और प्रमुख घटकों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। क्या यह योजना ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रही है? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: ‘स्माइल’ योजना (हाशिये पर के लोगों के लिए आजीविका और उद्यम के लिए सहायता) का संक्षिप्त परिचय दें, जिसमें इसके मंत्रालय (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय) और केंद्रीय क्षेत्र की योजना होने का उल्लेख हो।
मुख्य उद्देश्य: योजना के व्यापक उद्देश्यों को स्पष्ट करें, जैसे व्यापक पुनर्वास, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास, आजीविका सहायता और सामाजिक समावेशन।
प्रमुख घटक: योजना के दो मुख्य घटकों का विस्तार से वर्णन करें:
1. भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास: इसमें पहचान, लामबंदी, चिकित्सा सुविधाएं, परामर्श, शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करें। ‘स्माइल-बेगरी’ पोर्टल और अब तक पुनर्वासित व्यक्तियों के आंकड़ों का उल्लेख करें।
2. ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास: ‘गरिमा गृह’ की स्थापना, उनकी संख्या और पुनर्वासित व्यक्तियों के आंकड़ों का उल्लेख करें। स्वास्थ्य सेवा (आयुष्मान भारत के साथ तालमेल, AB PM-JAY ट्रांसजेंडर कार्ड), पहचान दस्तावेज (राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर पोर्टल), कौशल विकास और उद्यमिता कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डालें।
सफलता का समालोचनात्मक परीक्षण: योजना की सफलताओं और चुनौतियों का विश्लेषण करें।
सफलताएँ: आंकड़ों (पहचान, पुनर्वास, गरिमा गृह, पहचान पत्र, कौशल प्रशिक्षण) के माध्यम से योजना के सकारात्मक प्रभावों को उजागर करें। एक समावेशी समाज को बढ़ावा देने और हाशिये पर के लोगों को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों पर जोर दें।
चुनौतियाँ/सीमाएँ: योजना के कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों पर चर्चा करें, जैसे जागरूकता की कमी, संसाधनों का असमान वितरण, सामाजिक कलंक, स्थायी आजीविका के अवसरों की कमी, और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय की आवश्यकता।
निष्कर्ष: एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें, जिसमें योजना के महत्व को दोहराया जाए और भविष्य में इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव दिए जाएं, ताकि ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पूर्ण सामाजिक-आर्थिक एकीकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
- SIT Exposes Massive Fraud in APPSC Group-I 2018 Recruitment: OMR Tampering & Forgery - August 17, 2026
- अंतरजातीय विवाह योजना: अशोक-सबिता की सफलता की कहानी, UPSC तैयारी के लिए महत्वपूर्ण - August 17, 2026
- UPSC Focus: How Inter-Caste Marriage Scheme Helped Ashok & Sabita Overcome Social Barriers - August 17, 2026

No Comments