21 Sep स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0: 15 लाख लोगों ने ली महासागर संरक्षण की शपथ, जानें पूरा विवरण

✎ स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर अभियान भारत के समुद्र तटों को स्वच्छ रखने और महासागर संरक्षण के प्रति जनभागीदारी तथा जागरूकता बढ़ाने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नेतृत्व में एक राष्ट्रव्यापी पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (महासागर विज्ञान) | GS Paper II — शासन, नीतियाँ और हस्तक्षेप | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (संरक्षण, प्रदूषण)
- Prelims: स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर अभियान, तटीय सफाई अभियान, महासागर संरक्षण, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, जनभागीदारी
- Essay: पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी की भूमिका, भारत में वैज्ञानिक नवाचार और उसका सामाजिक प्रभाव
त्वरित पुनरावृत्ति: स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर अभियान भारत के समुद्र तटों को स्वच्छ रखने और महासागर संरक्षण के प्रति जनभागीदारी तथा जागरूकता बढ़ाने के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नेतृत्व में एक राष्ट्रव्यापी पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में संपन्न ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ 5.0 अभियान में व्यापक जनभागीदारी की सराहना की है। इस अभियान के तहत 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 231 स्थानों पर तटीय सफाई अभियान चलाया गया, जिसमें 15 लाख लोगों ने महासागर संरक्षण की शपथ ली। उन्होंने विज्ञान मंत्रालयों और विभागों के बीच मजबूत समन्वय तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों के व्यापक जन-प्रसार का भी आह्वान किया।
पृष्ठभूमि
- भारत की एक लंबी तटरेखा है, जो लगभग 7,500 किलोमीटर से अधिक है, और यह देश की अर्थव्यवस्था तथा पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- तटीय क्षेत्रों और महासागरों का प्रदूषण, विशेषकर प्लास्टिक कचरे से, समुद्री जीवन और पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है।
- भारत सरकार विभिन्न अभियानों और नीतियों के माध्यम से महासागरों के स्वास्थ्य और तटीय क्षेत्रों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- जनभागीदारी (Public Participation) को ऐसे अभियानों की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है, क्योंकि यह जागरूकता बढ़ाता है और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देता है।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को आम जनता तक पहुँचाना तथा विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करना भी सरकार की प्राथमिकता है ताकि विज्ञान का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँच सके।
- ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ जैसे अभियान संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (UN Sustainable Development Goal) 14 ‘पानी के नीचे जीवन’ (Life Below Water) के अनुरूप हैं, जो महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों के संरक्षण तथा सतत उपयोग पर केंद्रित है।
स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर अभियान क्या है?
- यह एक व्यापक तटीय सफाई अभियान है जिसका उद्देश्य भारत के समुद्र तटों को स्वच्छ रखना और महासागरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
- यह अभियान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के नेतृत्व में विभिन्न सरकारी मंत्रालयों, विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों और नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से चलाया जाता है।
- अभियान का मुख्य लक्ष्य समुद्री प्रदूषण, विशेषकर प्लास्टिक कचरे को कम करना और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखना है।
- इसमें जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया जाता है, जिसमें स्थानीय समुदायों, छात्रों, स्वयंसेवकों और अन्य हितधारकों को तटीय सफाई गतिविधियों में शामिल किया जाता है।
- यह अभियान महासागरों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में सार्वजनिक जागरूकता पैदा करने के लिए शपथ ग्रहण समारोह और अन्य शैक्षिक गतिविधियों का भी आयोजन करता है।
- यह भारत के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ (Swachh Bharat Abhiyan) के समुद्री घटक के रूप में भी देखा जा सकता है, जो स्वच्छता को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाता है।
- अभियान का उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान और सामुदायिक कार्रवाई को एकीकृत करके एक स्थायी समुद्री पर्यावरण प्रबंधन मॉडल विकसित करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| जनभागीदारी | ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ अभियान में 15 लाख लोगों ने महासागर संरक्षण की शपथ ली, जो पर्यावरणीय अभियानों में सार्वजनिक जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। |
| व्यापक कवरेज | यह अभियान 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 231 स्थानों पर चलाया गया, जो तटीय सफाई और महासागर संरक्षण के प्रति एक व्यापक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| वैज्ञानिक समन्वय | विज्ञान मंत्रालयों और विभागों के बीच मजबूत समन्वय पर जोर दिया गया, जिससे वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम जनता तक पहुँचाने में मदद मिलेगी। |
| शहर-आधारित वैज्ञानिक समूह | इन समूहों के विकास का आह्वान किया गया ताकि संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाले संस्थानों और हितधारकों को एक साथ लाया जा सके, जिससे अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा। |
| डिजिटल लाइब्रेरी | वैज्ञानिक उपलब्धियों पर प्रस्तावित डिजिटल लाइब्रेरी भारत के वैज्ञानिक संस्थानों के कार्यों को प्रदर्शित करने वाला एक साझा संग्रह होगा, जिससे ज्ञान का प्रसार होगा। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- महासागरों और तटीय क्षेत्रों की स्वच्छता सुनिश्चित करना समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
- समुद्री प्रदूषण को कम करने से समुद्री जैव विविधता (Marine Biodiversity) का संरक्षण होता है और तटीय समुदायों की आजीविका सुरक्षित रहती है।
सामाजिक महत्व
- जनभागीदारी से पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ती है और नागरिकों में जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
- सामुदायिक जुड़ाव से बड़े पैमाने पर व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है, जो दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।
वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व
- वैज्ञानिक मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वय से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलता है, जिससे पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद मिलती है।
- वैज्ञानिक उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाने से विज्ञान साक्षरता (Science Literacy) बढ़ती है और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलता है।
शासनिक महत्व
- सरकार के विभिन्न अंगों के बीच तालमेल से नीतियों और कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है।
- जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना सुशासन (Good Governance) का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो नागरिकों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करता है।
चुनौतियाँ
1. दीर्घकालिक जनभागीदारी
- अभियानों के बाद भी जनभागीदारी और जागरूकता के स्तर को बनाए रखना एक चुनौती है।
- लोगों को दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना कठिन हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता
2. वैज्ञानिक समन्वय का क्रियान्वयन
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना और उसे बनाए रखना जटिल हो सकता है।
- संसाधनों और सूचनाओं के साझाकरण में नौकरशाही बाधाएँ आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन, संस्थागत समन्वय
3. प्रदूषण के स्रोत
- तटीय सफाई अभियान महत्वपूर्ण हैं, लेकिन भूमि-आधारित प्रदूषण (Land-based Pollution) के मूल कारणों को संबोधित करना आवश्यक है।
- औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि अपवाह और शहरी कचरा जैसे स्रोतों को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन
4. वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रसार
- जटिल वैज्ञानिक जानकारी को आम जनता के लिए सुलभ और आकर्षक बनाना चुनौतीपूर्ण है।
- डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) के कारण सभी वर्गों तक जानकारी पहुँचाना मुश्किल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण | समुद्री जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचाता है, खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करता है। |
| तटीय कटाव | जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों के कारण तटीय क्षेत्रों का क्षरण होता है, जिससे आवास और आजीविका प्रभावित होती है। |
| अवैध मछली पकड़ना | समुद्री संसाधनों का अत्यधिक दोहन होता है, जिससे मछली स्टॉक कम होता है और समुद्री पारिस्थितिकी असंतुलित होती है। |
| जलवायु परिवर्तन के प्रभाव | समुद्र के बढ़ते तापमान, अम्लीकरण और समुद्र स्तर में वृद्धि से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। |
| सीमित संसाधन | तटीय सफाई और संरक्षण प्रयासों के लिए पर्याप्त वित्तीय और मानवीय संसाधनों की कमी। |
आगे की राह
- समुद्री और तटीय क्षेत्रों में स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन (Sustainable Waste Management) प्रणालियों को लागू करना।
- जनभागीदारी अभियानों को नियमित और निरंतर बनाना, केवल एक बार के आयोजन तक सीमित न रखना।
- विज्ञान मंत्रालयों और विभागों के बीच एक औपचारिक समन्वय तंत्र (Formal Coordination Mechanism) स्थापित करना।
- वैज्ञानिक उपलब्धियों को सरल और स्थानीय भाषाओं में प्रस्तुत करने के लिए मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करना।
- स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में समुद्री संरक्षण और पर्यावरणीय शिक्षा को शामिल करना।
- तटीय समुदायों को समुद्री संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करना और उन्हें सशक्त बनाना।
- समुद्री प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर उन्हें नियंत्रित करने के लिए कठोर नियामक उपाय (Strict Regulatory Measures) लागू करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर अभियान · जनभागीदारी · महासागर संरक्षण · तटीय सफाई अभियान · वैज्ञानिक जागरूकता · पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय · वैज्ञानिक समन्वय · डिजिटल लाइब्रेरी · सतत विकास लक्ष्य · पर्यावरण संरक्षण
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}
अवधारणा प्रवाह
समुद्री प्रदूषण में वृद्धि → समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और तटीय आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव → जनभागीदारी और जागरूकता अभियानों की आवश्यकता → स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर जैसे अभियानों का आयोजन → जनता में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना में वृद्धि → वैज्ञानिक समन्वय और ज्ञान प्रसार का महत्व → दीर्घकालिक समुद्री संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान का उद्देश्य केवल तटीय क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना है।
2. इस अभियान में जनभागीदारी एक महत्वपूर्ण घटक है।
3. यह अभियान केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों द्वारा चलाया जाता है, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की इसमें कोई भूमिका नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल एक — कथन 1 गलत है क्योंकि अभियान का उद्देश्य केवल प्लास्टिक प्रदूषण कम करना नहीं, बल्कि समग्र महासागर संरक्षण है। कथन 2 सही है क्योंकि जनभागीदारी इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जैसा कि 15 लाख लोगों द्वारा शपथ लेने से स्पष्ट है। कथन 3 गलत है क्योंकि अभियान में 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 231 स्थानों को शामिल किया गया था, जो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा मंत्रालय ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है?
- गृह मंत्रालय
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
- रक्षा मंत्रालय
- वित्त मंत्रालय
उत्तर: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय — पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान का प्रमुख आयोजक और कार्यान्वयनकर्ता है, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में डॉ. जितेंद्र सिंह के पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) होने से स्पष्ट है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में महासागर संरक्षण के प्रयासों में जनभागीदारी के महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ जैसे अभियानों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार और नागरिक समाज के बीच समन्वय को और कैसे बढ़ाया जा सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** महासागरों के महत्व और भारत के लिए उनके आर्थिक-पारिस्थितिक मूल्य का संक्षिप्त उल्लेख। महासागर संरक्षण की आवश्यकता पर बल।
2. **जनभागीदारी का महत्व:**
* **जागरूकता बढ़ाना:** समुद्री पर्यावरण के प्रति आम जनता में जागरूकता पैदा करना।
* **व्यवहारिक परिवर्तन:** कचरा न फेंकने, प्लास्टिक उपयोग कम करने जैसे व्यवहारिक बदलावों को प्रोत्साहित करना।
* **स्थानीय स्वामित्व:** स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल कर उनमें स्वामित्व की भावना विकसित करना।
* **संसाधन जुटाना:** स्वयंसेवकों के माध्यम से बड़े पैमाने पर सफाई अभियानों को संभव बनाना।
* **नीति निर्माण में सहयोग:** जन दबाव के माध्यम से प्रभावी नीतियों के निर्माण को प्रेरित करना।
3. **’स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ का संदर्भ:** अभियान की सफलता में जनभागीदारी (15 लाख शपथ, 231 स्थान) की भूमिका का उल्लेख।
4. **चुनौतियाँ और सीमाएँ:**
* **दीर्घकालिक जुड़ाव:** अभियानों के बाद जनभागीदारी को बनाए रखने की चुनौती।
* **सीमित प्रभाव:** केवल सफाई से समस्या का मूल समाधान न होना (उत्पत्ति पर नियंत्रण)।
* **संसाधनों की कमी:** बड़े पैमाने पर जनभागीदारी को संगठित करने और बनाए रखने के लिए पर्याप्त संसाधनों का अभाव।
* **शिक्षा का स्तर:** सभी वर्गों में पर्यावरणीय शिक्षा की कमी।
5. **समन्वय बढ़ाने के उपाय:**
* **स्थानीय निकायों की सक्रिय भूमिका:** पंचायतों और नगर पालिकाओं को अभियान में शामिल करना।
* **शैक्षणिक संस्थानों का जुड़ाव:** स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम और नियमित गतिविधियाँ।
* **कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR):** निजी क्षेत्र को वित्तीय और स्वयंसेवी सहायता के लिए प्रोत्साहित करना।
* **डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग:** जागरूकता फैलाने और स्वयंसेवकों को संगठित करने के लिए सोशल मीडिया और ऐप्स का उपयोग।
* **गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के साथ साझेदारी:** जमीनी स्तर पर काम करने वाले NGOs की विशेषज्ञता का लाभ उठाना।
* **पुरस्कार और प्रोत्साहन:** जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर प्रोत्साहन योजनाएँ।
* **वैज्ञानिक संस्थानों का योगदान:** वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम लोगों तक पहुँचाना और उन्हें संरक्षण प्रयासों से जोड़ना।
6. **निष्कर्ष:** महासागर संरक्षण के लिए जनभागीदारी की अनिवार्यता को रेखांकित करते हुए, सरकार, नागरिक समाज और वैज्ञानिक समुदाय के बीच एक समग्र और सतत समन्वय तंत्र की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best PSIR optional coaching for upsc
- Best PSIR optional teacher for upsc
- Best teacher of PSIR optional for upsc
- Best PSIR optional coaching in delhi for UPSC
- यूपीएससी के लिए: पर्यावरण मंत्री ने जयपुर में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ सम्मेलन का किया उद्घाटन - September 21, 2026
- UPSC Alert: Union Environment Minister Inaugurates WWF Global Conservation Summit in Jaipur - September 21, 2026
- संयुक्त राष्ट्र पैनल ने AI एजेंटों की बढ़ती शक्ति पर सुरक्षा बढ़ाने की चेतावनी दी - September 21, 2026

No Comments