स्वामित्व योजना: ग्रामीण संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री और सरकार का वित्तीय भार

स्वामित्व योजना: ग्रामीण संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री और सरकार का वित्तीय भार

स्वामित्व योजना: ग्रामीण संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री और सरकार का वित्तीय भार

स्वामित्व योजना की प्रक्रियाड्रोन सर्वेक्षणसंपत्तियों की पहचानमूल्यांकनलाभार्थी सूची तैयारशुल्क वहनसरकार द्वारानिःशुल्क पंजीयनवैध स्वामित्वआर्थिक प्रभावऋण, हस्तांतरणविवाद कमपारिवारिक, सीमा
स्वामित्व योजना की प्रक्रिया

✎ स्वामित्व योजना (SVAMITVA) ड्रोन सर्वेक्षण से ग्रामीण आबादी संपत्तियों का मानचित्रण कर संपत्ति पत्र देती है, जबकि भूमि राज्य का विषय होने के कारण पंजीयन और मुद्रांक शुल्क का क्रियान्वयन राज्य सरकारों द्वारा होता है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — राजव्यवस्था: पंचायती राज संस्थाएँ (अनुच्छेद 243G), संघ-राज्य संबंध और भूमि का राज्य विषय होना, केंद्र प्रायोजित/केंद्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था: संपत्ति अधिकार, भूमि सुधार, ग्रामीण ऋण तक पहुँच, राज्य वित्त और राजस्व प्रबंधन
  • Prelims: स्वामित्व योजना (SVAMITVA) और इसका मंत्रालय (पंचायती राज मंत्रालय), ड्रोन आधारित सर्वेक्षण और भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) की मानचित्रण भूमिका, आबादी देह/आबादी भूमि की अवधारणा, संपत्ति पत्र (Property Card) और अधिकार अभिलेख (Record of Rights), संविधान का अनुच्छेद 300A (संपत्ति का अधिकार) और 44वाँ संविधान संशोधन, पंजीयन अधिनियम, 1908 (Registration Act, 1908), भूमि: राज्य सूची की प्रविष्टि 18; पंजीयन और संपत्ति अंतरण: समवर्ती सूची, डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP)
  • Essay: संपत्ति का अधिकार और ग्रामीण आर्थिक समृद्धि: औपचारिक स्वामित्व से पूँजी निर्माण तक, भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण: सुशासन, पारदर्शिता और विवाद-न्यूनीकरण

त्वरित पुनरावृत्ति: स्वामित्व योजना (SVAMITVA) ड्रोन सर्वेक्षण से ग्रामीण आबादी संपत्तियों का मानचित्रण कर संपत्ति पत्र देती है, जबकि भूमि राज्य का विषय होने के कारण पंजीयन और मुद्रांक शुल्क का क्रियान्वयन राज्य सरकारों द्वारा होता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

मध्य प्रदेश सरकार ने स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि पर बनी संपत्तियों की निश्शुल्क रजिस्ट्री का निर्णय लिया है, जिसमें लगभग 87,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियाँ शामिल बताई गई हैं और लगभग 9,000 करोड़ रुपये का मुद्रांक शुल्क तथा पंजीयन शुल्क राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी। ड्रोन तकनीक से अब तक लगभग 49.52 लाख संपत्तियों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और लगभग 600 गाँवों में सर्वेक्षण जारी है, जिसके बाद पात्र संपत्तियों की संख्या 55 लाख से बढ़कर 60 लाख के बीच पहुँचने का अनुमान है। वर्तमान बजट में केवल 3,800 करोड़ रुपये का प्रावधान होने के कारण अगले बजट में अतिरिक्त राशि रखने की बात कही गई है। लाभार्थियों को एसएमएस द्वारा बताया जा रहा है कि स्वयं पंजीयन कराने पर कितना शुल्क लगता, जिससे लाभ की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

पृष्ठभूमि

  • स्वामित्व योजना की शुरुआत पंचायती राज मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 में की गई थी। इसका उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों की संपत्तियों का सर्वेक्षण, मानचित्रण और अधिकार-पत्र (संपत्ति पत्र) देना है।
  • भूमि राज्य का विषय है, इसलिए भू-अभिलेख, राजस्व प्रशासन और पंजीयन का वास्तविक क्रियान्वयन राज्य सरकारों के माध्यम से होता है; केंद्र सरकार नीति-मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और वित्तीय सहयोग देती है।
  • संपत्ति का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 300A के अंतर्गत संवैधानिक अधिकार है। यह 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर इसी रूप में रखा गया।
  • ग्रामीण भारत में बड़ी संख्या में घर और भूखंड अनौपचारिक या अपूर्ण दस्तावेज़ों पर आधारित रहे हैं, जिससे बैंक ऋण, संपत्ति विवाद और सरकारी लाभ में बाधाएँ आती रही हैं।
  • भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए DILRMP जैसे कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं, और स्वामित्व योजना को इसी व्यापक भू-अभिलेख सुधार की दिशा में एक पूरक कदम माना जाता है।

स्वामित्व योजना क्या है?

  • स्वामित्व योजना (SVAMITVA — Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas) ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण द्वारा संपत्तियों की सटीक मैपिंग कर संपत्ति पत्र जारी करने की योजना है।
  • इसमें ड्रोन से उच्च-रिज़ॉल्यूशन छायाचित्र लिए जाते हैं, जिनसे गाँव का मानचित्र तैयार होता है और हर संपत्ति की सीमाएँ चिह्नित की जाती हैं।
  • इसका लक्ष्य आबादी भूमि पर बने मकान, दुकान और खाली भूखंडों का कानूनी मालिकाना हक दस्तावेज़ों में स्पष्ट करना है।
  • संपत्ति पत्र से ग्रामीण परिवार बैंक से ऋण लेने में अपनी संपत्ति को संपार्श्विक (Collateral) के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे संपत्ति की आर्थिक उपयोगिता बढ़ती है।
  • इससे भूमि-विवादों में कमी, ग्राम पंचायत की कर-आधार सूची के सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण नियोजन में सहायता मिलने की संभावना रहती है।
  • राज्य में यह योजना दो चरणों के रूप में काम करती है: पहले सर्वेक्षण और मानचित्रण, फिर संपत्ति पत्र और पंजीयन; वर्तमान निर्णय दूसरे चरण में शुल्क-भार हटाने से जुड़ा है।
  • मुद्रांक शुल्क और पंजीयन शुल्क राज्य सरकार की राजस्व आय का हिस्सा होते हैं; इसलिए इन्हें माफ़ करने या सरकार द्वारा वहन करने से राज्य के बजट पर सीधा वित्तीय भार पड़ता है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
योजना का स्वरूप स्वामित्व योजना (SWAMITVA Scheme) के अंतर्गत आबादी भूमि पर बने मकान, दुकान, खलिहान और खाली भूखंडों का मालिकाना हक दर्ज किया जाता है। मध्य प्रदेश में इसे राजस्व विभाग लागू कर रहा है।
कुल मूल्य और लाभार्थी संपत्तियाँ ग्रामीण क्षेत्र की लगभग 87,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का पंजीयन निःशुल्क किया जा रहा है। अब तक 49,52,567 संपत्तियों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।
सर्वेक्षण की तकनीक ड्रोन आधारित सर्वेक्षण से संपत्तियों की सटीक सीमाएँ और पहचान तय की जाती है। इससे पारंपरिक राजस्व अभिलेखों की त्रुटियाँ कम होती हैं।
राज्य का वित्तीय दायित्व लगभग 9,000 करोड़ रुपये का मुद्रांक शुल्क और पंजीयन शुल्क सरकार स्वयं वहन करेगी। वर्तमान बजट में केवल 3,800 करोड़ रुपये का प्रावधान है, शेष राशि आगामी बजट से दी जानी है।
पारदर्शी सूचना व्यवस्था प्रत्येक लाभार्थी को एसएमएस द्वारा बताया जाता है कि स्वयं पंजीयन कराने पर कितना शुल्क लगता। इससे लाभ का मूल्य स्पष्ट रहता है।
विस्तार की संभावना 600 गाँवों में सर्वेक्षण जारी है। पात्र संपत्तियों की कुल संख्या 55 लाख से बढ़कर 60 लाख के बीच पहुँचने का अनुमान है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • संपत्ति का वैध स्वामित्व बैंकों से ऋण लेने में सहायक होता है, क्योंकि दस्तावेज़ी संपत्ति को संपार्श्विक (Collateral) के रूप में स्वीकार करना आसान होता है।
  • निःशुल्क पंजीयन से नागरिकों पर मुद्रांक शुल्क का भार नहीं पड़ता, जिससे बचत बढ़ती है और संपत्ति का औपचारिक बाज़ार विकसित होता है।
  • संपत्ति के मूल्य का दस्तावेज़ी आधार बनने से स्थानीय कर-आधार का विस्तार होने की संभावना बनती है।

सामाजिक महत्व

  • भूमि और मकान से जुड़े विवाद, विशेषकर पारिवारिक और सीमा संबंधी विवाद, कम होने की संभावना रहती है।
  • आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए पंजीयन की निःशुल्क सुविधा समान अवसर का व्यावहारिक रूप है।

शासन और प्रशासनिक महत्व

  • ड्रोन और डिजिटल अभिलेखों से राजस्व प्रशासन की दक्षता और पारदर्शिता बढ़ती है।
  • राज्य अपने बजट से लाभार्थियों का शुल्क वहन करके नीति-निर्णय को सीधे जनकल्याण से जोड़ता है।

संवैधानिक और विधिक महत्व

  • संपत्ति का अधिकार अब मौलिक अधिकार नहीं है, फिर भी अनुच्छेद 300A के तहत यह विधिक अधिकार है। स्पष्ट अभिलेख इस अधिकार की सुरक्षा को सुदृढ़ करते हैं।
  • सुव्यवस्थित अभिलेख भूमि सुधार और ग्रामीण विकास की नीतियों के लक्ष्यों को पूरा करने का आधार बनते हैं।

चुनौतियाँ

1. बजट प्रावधान और वित्तीय दायित्व

  • वर्तमान बजट में 3,800 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जबकि अनुमानित देनदारी लगभग 9,000 करोड़ रुपये है।
  • शेष राशि के लिए आगामी बजट में अतिरिक्त प्रावधान पर निर्भरता है, जिससे राजकोषीय योजना पर दबाव बन सकता है।

2. विभागीय समन्वय

  • समाचार में भुगतान के लिए कभी राजस्व विभाग, कभी पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग और कभी वाणिज्यिक कर विभाग का उल्लेख है। स्पष्ट भूमिका-विभाजन आवश्यक है।
  • राजस्व, पंजीयन और मुद्रांक से जुड़े अभिलेखों का एकीकृत होना प्रशासनिक चुनौती है।

3. सर्वेक्षण की पूर्णता और अभिलेखों की शुद्धता

  • 600 गाँवों में सर्वेक्षण अभी जारी है और अंतिम संख्या बदल सकती है।
  • सीमा विवाद, उत्तराधिकार से जुड़े स्वामित्व और अधूरे दस्तावेज़ सत्यापन को जटिल बनाते हैं।

4. संपत्ति अधिकार की सुरक्षा और विवाद निपटान

  • दर्ज संपत्ति पर आपत्ति उठने पर विवाद निपटान की स्पष्ट प्रक्रिया आवश्यक है, ताकि अभिलेख अंतिम न्याय का स्थान न ले।
  • बिना उचित प्रक्रिया के संपत्ति से वंचित होने की आशंका से बचाव हेतु सुनवाई और अपील का प्रावधान महत्वपूर्ण है।

5. जागरूकता और डिजिटल पहुँच

  • एसएमएस से शुल्क की जानकारी दी जा रही है, परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और मोबाइल पहुँच असमान हो सकती है।
  • लाभार्थियों को अपने अधिकार, दस्तावेज़ और आपत्ति की प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी न होने से योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
वित्तीय अंतर वर्तमान बजट प्रावधान (3,800 करोड़ रुपये) और अनुमानित देनदारी (लगभग 9,000 करोड़ रुपये) के बीच बड़ा अंतर है।
अंतिम संख्या की अनिश्चितता 600 गाँवों के सर्वेक्षण के बाद पात्र संपत्तियाँ 55 लाख से 60 लाख के बीच पहुँच सकती हैं, इसलिए लागत का अनुमान बदल सकता है।
विभागीय भूमिकाएँ राजस्व, पंजीयन एवं मुद्रांक और वाणिज्यिक कर विभागों के बीच भुगतान की ज़िम्मेदारी का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है।
अभिलेखों में विवाद सीमा, उत्तराधिकार और अधूरे दस्तावेज़ों से जुड़े विवाद सत्यापन प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।
डिजिटल पहुँच ग्रामीण लाभार्थियों की डिजिटल साक्षरता और मोबाइल उपलब्धता असमान होने से सूचना का प्रभावी प्रसार बाधित हो सकता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वामित्व योजना (SWAMITVA Scheme)
  • डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (Digital India Land Records Modernization Programme – DILRMP)

आगे की राह

  • शेष 600 गाँवों के सर्वेक्षण को समयबद्ध कर पात्र संपत्तियों की अंतिम संख्या के आधार पर वित्तीय अनुमान को सुधारा जाए।
  • अगले बजट में 9,000 करोड़ रुपये की देनदारी के लिए स्पष्ट और पूर्ण प्रावधान किया जाए तथा भुगतान की विभागीय ज़िम्मेदारी तय की जाए।
  • राजस्व, पंजीयन एवं मुद्रांक और वाणिज्यिक कर विभागों के बीच एकीकृत डेटा-प्रणाली विकसित की जाए।
  • संपत्ति पंजीयन के बाद आपत्ति-निवारण के लिए सरल, समयबद्ध और सुलभ प्रक्रिया बनाई जाए।
  • ग्राम पंचायत और स्थानीय स्तर पर जागरूकता शिविर लगाकर लाभार्थियों को अधिकार और प्रक्रिया की जानकारी दी जाए।
  • एसएमएस के साथ स्थानीय भाषा में लिखित और मौखिक सूचना के अन्य माध्यम भी उपयोग में लाए जाएँ, ताकि डिजिटल पहुँच की कमी बाधा न बने।
  • भूमि अभिलेखों को नियमित अद्यतन करने की व्यवस्था बने, ताकि भविष्य में उत्तराधिकार और हस्तांतरण के अनुसार रिकॉर्ड सही रहें।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) · संपत्ति पत्र (Property Card) · ड्रोन सर्वेक्षण (Drone Survey) · आबादी भूमि (Inhabited Land) · भू-अभिलेख (Land Records) · डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) · मालिकाना हक (Ownership Rights) · मुद्रांक शुल्क (Stamp Duty) · पंजीयन शुल्क (Registration Fee) · अनुपूरक अनुदान (Supplementary Grants) · अनुच्छेद 300A (Article 300A) · पंचायती राज संस्थाएँ (Panchayati Raj Institutions) · ऋण तक पहुँच (Access to Credit) · संपत्ति आधारित ऋण (Property-backed Credit)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 300A: संपत्ति का विधिक अधिकार
  • अनुच्छेद 246: राज्य सूची में मुद्रांक शुल्क विषय

अवधारणा प्रवाह

ड्रोन आधारित सर्वेक्षण से आबादी भूमि की संपत्तियों की पहचान और चिह्नीकरण  →  संपत्ति का मूल्यांकन (लगभग 87,000 करोड़ रुपये) और लाभार्थी सूची तैयार होना  →  सरकार द्वारा मुद्रांक शुल्क और पंजीयन शुल्क (लगभग 9,000 करोड़ रुपये) का वहन  →  निःशुल्क पंजीयन के साथ लाभार्थी को संपत्ति पर वैध स्वामित्व का दस्तावेज़ी प्रमाण मिलना  →  बैंक ऋण, संपत्ति के हस्तांतरण और कर-आधार के विस्तार जैसे आर्थिक प्रभाव  →  विवाद-कम होने और अभिलेखों की शुद्धता से शासन की पारदर्शिता में वृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) का नोडल मंत्रालय पंचायती राज मंत्रालय है।
2. इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में परिवारों को संपत्ति पत्र देकर मालिकाना हक का अभिलेखीकरण करना है।
3. आबादी क्षेत्रों की मैपिंग में ड्रोन तकनीक का प्रयोग किया जाता है और सर्वेक्षण भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा किया जाता है।
4. भूमि संघ सूची (Union List) का विषय है, इसलिए इस योजना के लिए भूमि संबंधी कानून केवल संसद बना सकती है।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. चारों

उत्तर: केवल तीन — कथन 1, 2 और 3 सही हैं। स्वामित्व योजना का नोडल मंत्रालय पंचायती राज मंत्रालय है, इसका उद्देश्य आबादी क्षेत्र की संपत्तियों का मालिकाना हक अभिलेखित करना और संपत्ति पत्र देना है, तथा सर्वेक्षण भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा ड्रोन से किया जाता है। कथन 4 गलत है क्योंकि भूमि, भूमि-अधिकार और भूमि-राजस्व मुख्यतः राज्य सूची का विषय हैं, इसलिए राज्य सरकारें इन पर कानून बनाती हैं।

Q2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में एक कथन (A) और एक कारण (R) दिया गया है।

कथन (A): स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी क्षेत्र की संपत्तियों के मालिकाना हक को संपत्ति पत्र के माध्यम से औपचारिक रूप दिया जा रहा है।
कारण (R): ड्रोन आधारित सर्वेक्षण से पार्सल-स्तर के सटीक मानचित्र (Cadastral Maps) तैयार होते हैं, जो संपत्ति पत्र जारी करने का आधार बनते हैं।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
  2. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
  3. (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
  4. (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं। पार्सल-स्तरीय सटीक मानचित्र (Cadastral Maps) ही संपत्ति की सीमाओं और स्वामित्व की पहचान का आधार होते हैं, इसलिए कारण (A) की सीधी व्याख्या करता है। स्वामित्व योजना में यही मानचित्र संपत्ति पत्र का आधार बनते हैं।

Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:

सूची I (अनुच्छेद/प्रावधान)
A. अनुच्छेद 115
B. अनुच्छेद 300A
C. अनुच्छेद 243G
D. अनुच्छेद 265

सूची II (विषय)
1. संपत्ति का अधिकार (विधिक अधिकार)
2. अनुपूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदान
3. पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व
4. विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया जाएगा

सही कूट चुनिए:

  1. A-2, B-1, C-3, D-4
  2. A-1, B-2, C-4, D-3
  3. A-2, B-4, C-3, D-1
  4. A-3, B-1, C-2, D-4

उत्तर: A-2, B-1, C-3, D-4 — अनुच्छेद 115 अनुपूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदानों से संबंधित है (A-2)। अनुच्छेद 300A संपत्ति के अधिकार को विधिक अधिकार के रूप में मान्यता देता है (B-1)। अनुच्छेद 243G पंचायतों की शक्तियों और उत्तरदायित्वों से संबंधित है (C-3)। अनुच्छेद 265 के अनुसार विधि के प्राधिकार के बिना कर नहीं लगाया जा सकता (D-4)।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि की संपत्तियों के पंजीयन पर मुद्रांक शुल्क और पंजीयन शुल्क का भार राज्य सरकार द्वारा वहन करने के निर्णय को ग्रामीण संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा का एक प्रभावी उपाय माना जा रहा है। इस नीति का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए कि यह ग्रामीण मालिकाना हक को किस हद तक सुदृढ़ कर सकती है। साथ ही यह भी बताइए कि यदि अनुमानित लगभग 9,000 करोड़ रुपये की देनदारी के सापेक्ष वर्तमान बजटीय प्रावधान अपर्याप्त रहता है, तो राज्य के राजकोषीय प्रबंधन और बजट-प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेंगे। (15 Marks)

रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
(1) भूमिका: स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) का परिचय, पूर्ण नाम Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas, पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 2020 में आरंभ, ड्रोन सर्वेक्षण से आबादी क्षेत्र की संपत्तियों का मानचित्रण और संपत्ति पत्र देना। मध्य प्रदेश का तथ्य: लगभग 49.52 लाख संपत्तियों का सर्वेक्षण पूर्ण, 600 गाँवों में कार्य जारी, कुल पात्र संपत्तियाँ लगभग 55 से 60 लाख अनुमानित, कुल मूल्य लगभग 87,000 करोड़ रुपये।
(2) संवैधानिक और विधिक आधार: अनुच्छेद 300A के अंतर्गत संपत्ति का अधिकार मूल अधिकार न होकर विधिक अधिकार है, इसलिए संपत्ति के अभिलेख की विश्वसनीयता का महत्व बढ़ जाता है। भूमि और भूमि-अधिकार राज्य सूची की प्रविष्टि 18 और भूमि व भवन पर कर राज्य सूची की प्रविष्टि 49 के अंतर्गत आते हैं। मुद्रांक शुल्क की वसूली राज्य के मुद्रांक कानूनों और पंजीयन कार्य पंजीकरण अधिनियम, 1908 के ढाँचे में होती है। अनुच्छेद 243G के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय से संबंधित कार्यों के हस्तांतरण का प्रावधान है, जिसके सन्दर्भ में ग्रामीण भूमि प्रशासन की भूमिका पर चर्चा की जा सकती है।
(3) लाभ का विश्लेषण: मालिकाना हक की औपचारिकता से संपत्ति को संपार्श्विक (Collateral) के रूप में उपयोग करके बैंक ऋण तक पहुँच, भूमि विवादों में कमी, उत्तराधिकार और बँटवारे में स्पष्टता, तथा ग्रामीण परिवारों की वित्तीय सुरक्षा। हरनांडो डी सोटो (Hernando de Soto) के ‘मृत पूँजी’ (Dead Capital) विचार से संबंध जोड़ा जा सकता है, जो बताता है कि औपचारिक संपत्ति अधिकार पूँजी निर्माण में सहायक होते हैं।
(4) सीमाएँ और आलोचनात्मक दृष्टि: सर्वेक्षण और अभिलेख का अद्यतन रहना, राजस्व अभिलेखों और मानचित्रों के बीच असंगति, स्थानीय स्तर पर सीमा-विवाद, परंपरागत अधिकारों और सामूहिक भूमि उपयोग का प्रश्न, तथा शहरी विस्तार से जुड़े जोखिम। भूमि सुधार पर गठित समितियों और डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के अनुभव से तुलना की जा सकती है: अभिलेख के डिजिटलीकरण और कानूनी मान्यता के बीच का अंतर।
(5) राजकोषीय पक्ष: लगभग 9,000 करोड़ रुपये की देनदारी के सामने वर्तमान बजट में केवल लगभग 3,800 करोड़ रुपये का प्रावधान है। अगले वर्ष के बजट में अतिरिक्त प्रावधान की आवश्यकता है। इसके लिए अनुदान माँगों (Demands for Grants), अनुपूरक अनुदान (अनुच्छेद 204 और 205 के अंतर्गत विधानसभा से स्वीकृति) की प्रक्रिया को समझाया जा सकता है। यह भी बताया जा सकता है कि राज्य की वास्तविक देनदारी को समय पर बजट में दर्ज करना पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन के लिए आवश्यक है। विभाग-से-विभाग भुगतान के कारण बजट में राजस्व और वाणिज्यिक कर विभागों के बीच समन्वय का प्रश्न भी उठता है।
(6) संतुलित निष्कर्ष: कल्याणकारी उद्देश्य और राजकोषीय सतर्कता के बीच संतुलन। सुझाव: मानचित्र और अभिलेख का समयबद्ध अद्यतन, मुद्रांक शुल्क के सरलीकरण या चरणबद्ध प्रतिपूर्ति का मॉडल, तथा केंद्र-राज्य सहयोग। एसएमएस के माध्यम से लाभार्थियों को शुल्क का विवरण देना पारदर्शिता का उदाहरण है।

स्रोत: amarujala.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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