स्वामित्व योजना: ग्रामीण संपत्ति अधिकार अभिलेखन में क्रांतिकारी बदलाव

स्वामित्व योजना — concept mind map

स्वामित्व योजना: ग्रामीण संपत्ति अधिकार अभिलेखन में क्रांतिकारी बदलाव

✎ स्वामित्व योजना ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण और CORS तकनीक का उपयोग करके संपत्ति के मालिकों को अधिकारों का अभिलेख (संपत्ति कार्ड) प्रदान कर रही है, जिससे संपत्ति विवाद कम होते हैं और संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ती…

SVAMITVA Scheme WorkflowDrone Survey3.30L+ villagesHigh-accuracy mappingProperty Card Creation1.97L villages3.24Cr cardsCard Distribution2.72Cr cardsLegal rights issuedInstitutional CreditAccess enabledRural investment boostDispute ReductionPeace & harmonyWomen empowerment
SVAMITVA Scheme Workflow

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन  |  GS Paper III — भूमि सुधार
  • Prelims: स्वामित्व योजना, पंचायती राज मंत्रालय, ड्रोन सर्वेक्षण, संपत्ति कार्ड, अधिकारों का अभिलेख, CORs तकनीक, ई-ग्राम स्वराज, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति
  • Essay: ग्रामीण विकास में प्रौद्योगिकी की भूमिका, संपत्ति अधिकार और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण

त्वरित पुनरावृत्ति: स्वामित्व योजना ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण और CORS तकनीक का उपयोग करके संपत्ति के मालिकों को अधिकारों का अभिलेख (संपत्ति कार्ड) प्रदान कर रही है, जिससे संपत्ति विवाद कम होते हैं और संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ती है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) के तहत देश भर के 3.30 लाख से अधिक गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त, 1.97 लाख गांवों के लिए 3.24 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं, जिनमें से लगभग 2.72 करोड़ संपत्ति कार्ड संपत्ति मालिकों को वितरित किए जा चुके हैं। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को उनके अधिकारों का अभिलेख (Record of Rights) प्रदान करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है।

पृष्ठभूमि

  • भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि और संपत्ति के स्वामित्व को लेकर अस्पष्टता एक बड़ी समस्या रही है, जिसके कारण संपत्ति विवाद और ग्रामीण विकास में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं।
  • पारंपरिक भूमि रिकॉर्ड प्रणाली अक्सर पुरानी, त्रुटिपूर्ण और अपर्याप्त होती थी, जिससे संपत्ति के सटीक सीमांकन और स्वामित्व के प्रमाण में चुनौतियाँ आती थीं।
  • ग्रामीण संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व दस्तावेजों की कमी के कारण संपत्ति मालिकों को संस्थागत ऋण (Institutional Credit) प्राप्त करने में कठिनाई होती थी, जिससे उनकी आर्थिक क्षमता सीमित हो जाती थी।
  • पंचायती राज मंत्रालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व को स्थापित करने और विवादों को कम करने के उद्देश्य से इस योजना की कल्पना की।
  • यह योजना ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति और सुशासन को बढ़ावा देने के व्यापक सरकारी प्रयासों का एक हिस्सा है।

स्वामित्व योजना क्या है?

  • स्वामित्व योजना (ग्रामों का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में तात्कालिक प्रौद्योगिकी के साथ मानचित्रण) पंचायती राज मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को ‘अधिकारों का अभिलेख’ प्रदान करना है, जिससे उन्हें अपनी संपत्ति का कानूनी स्वामित्व प्राप्त हो सके।
  • यह योजना ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों के उच्च सटीकता वाले मानचित्र बनाने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण और निरंतर संचालित संदर्भ स्टेशन (CORS) तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण आबादी वाली भूमि का सीमांकन करती है।
  • योजना के तहत तैयार किए गए संपत्ति कार्ड संपत्ति विवादों को कम करने, ग्रामीण योजना को बेहतर बनाने और संपत्ति कर संग्रह में दक्षता लाने में मदद करते हैं।
  • यह योजना संपत्ति कार्ड पर संस्थागत ऋण को सुविधाजनक बनाने के लिए वित्तीय सेवा विभाग और राज्य राजस्व विभागों के साथ मिलकर काम करती है, जिससे ग्रामीण संपत्ति मालिकों को आर्थिक सशक्तिकरण मिलता है।
  • पंचायती राज मंत्रालय ड्रोन सर्वेक्षण और मानचित्र तैयार करने के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) को धनराशि प्रदान करता है, जबकि जमीनी सत्यापन, संपत्ति कार्डों की तैयारी और वितरण जैसी बाद की गतिविधियां राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा की जाती हैं।
  • यह योजना ई-ग्राम स्वराज (eGramSwaraj) के साथ एकीकृत नहीं है, क्योंकि ई-ग्राम स्वराज पंचायतों के लिए कार्य-आधारित नियोजन, लेखांकन और निगरानी प्रणाली है, जबकि स्वामित्व योजना संपत्ति अधिकारों पर केंद्रित है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
ड्रोन सर्वेक्षण और CORS तकनीक का उपयोग ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का उच्च सटीकता वाला मानचित्रण, संपत्ति की सीमाओं का स्पष्ट सीमांकन।
अधिकारों का अभिलेख (Record of Rights) का प्रावधान ग्रामीण संपत्ति मालिकों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार प्रदान करना, विवादों में कमी लाना।
संपत्ति कार्डों का वितरण संपत्ति मालिकों को उनकी संपत्ति का दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध कराना, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना।
संस्थागत ऋण की सुविधा संपत्ति कार्डों के आधार पर बैंकों से ऋण प्राप्त करने में सहायता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करना।
पारदर्शी सत्यापन और विवाद समाधान प्रक्रिया संपत्ति अभिलेखों की निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करना, भ्रष्टाचार को कम करना।
पंचायती राज मंत्रालय की केंद्रीय भूमिका योजना के समन्वय और निगरानी के लिए नोडल मंत्रालय, भारतीय सर्वेक्षण विभाग के साथ सहयोग।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • ग्रामीण संपत्ति मालिकों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार मिलने से उन्हें वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में उपयोग करने में मदद मिलती है।
  • संपत्ति कार्डों के आधार पर संस्थागत ऋण (Institutional Credit) की उपलब्धता से ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
  • भूमि विवादों में कमी आने से अदालती खर्च और समय की बचत होती है, जिससे उत्पादकता में वृद्धि होती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व से भूमि बाजार में पारदर्शिता आती है और लेन-देन आसान होता है।

सामाजिक महत्व

  • संपत्ति विवादों में कमी आने से ग्रामीण समुदायों में शांति और सौहार्द बढ़ता है।
  • महिलाओं और हाशिए पर पड़े वर्गों को संपत्ति के अधिकार मिलने से उनका सशक्तिकरण होता है।
  • पारदर्शी प्रक्रिया से संपत्ति अभिलेखों की सटीकता सुनिश्चित होती है, जिससे सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व से सामाजिक सुरक्षा और स्थिरता बढ़ती है।

प्रशासनिक महत्व

  • उच्च सटीकता वाले मानचित्र और अधिकारों के अभिलेख से स्थानीय प्रशासन को बेहतर योजना बनाने और विकास कार्यों को लागू करने में मदद मिलती है।
  • संपत्ति कर संग्रह में पारदर्शिता और दक्षता आती है, जिससे स्थानीय निकायों की आय बढ़ती है।
  • भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण से सरकारी सेवाओं की डिलीवरी में सुधार होता है और भ्रष्टाचार कम होता है।
  • विवाद समाधान की पारदर्शी प्रक्रिया से प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है और नागरिकों का सरकार पर विश्वास बढ़ता है।

चुनौतियाँ

1. राज्यों के बीच असमान कार्यान्वयन

  • कुछ राज्यों में योजना का कार्यान्वयन बहुत धीमा है, जिससे पूरे देश में एकरूपता नहीं आ पा रही है।
  • राज्यों के राजस्व विभागों और पंचायती राज विभागों के बीच समन्वय की कमी एक बड़ी बाधा है।

2. तकनीकी विशेषज्ञता और क्षमता निर्माण

  • ड्रोन सर्वेक्षण और CORS जैसी उन्नत तकनीकों के संचालन के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की कमी।
  • ग्रामीण स्तर पर संपत्ति कार्डों के वितरण और उपयोग के बारे में जागरूकता का अभाव।

3. वित्तीय समावेशन में बाधाएँ

  • सभी बैंकों द्वारा स्वामित्व संपत्ति कार्डों को ऋण के लिए व्यापक रूप से स्वीकार न करना।
  • ग्रामीण आबादी में वित्तीय साक्षरता की कमी, जिससे वे संपत्ति कार्डों का लाभ नहीं उठा पाते।

4. भूमि विवादों का समाधान

  • पुराने और जटिल भूमि विवादों को सुलझाने में लगने वाला समय और संसाधन।
  • पारंपरिक भूमि अभिलेखों और नए डिजिटल अभिलेखों के बीच सामंजस्य स्थापित करना।

5. डेटा सुरक्षा और गोपनीयता

  • बड़ी मात्रा में संपत्ति डेटा के संग्रह और भंडारण से जुड़ी सुरक्षा चिंताएँ।
  • व्यक्तिगत संपत्ति डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
राज्यों में असमान प्रगति कुछ राज्यों में ड्रोन सर्वेक्षण और संपत्ति कार्ड वितरण की धीमी गति, जिससे योजना के लाभों का समान वितरण नहीं हो पा रहा है।
बैंकों द्वारा स्वीकृति सभी बैंकों द्वारा स्वामित्व संपत्ति कार्डों को ऋण के लिए मानक दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने में हिचकिचाहट या प्रक्रियागत बाधाएँ।
जागरूकता का अभाव ग्रामीण संपत्ति मालिकों के बीच स्वामित्व योजना और संपत्ति कार्ड के लाभों के बारे में पर्याप्त जानकारी की कमी।
तकनीकी और मानव संसाधन ड्रोन सर्वेक्षण, डेटा विश्लेषण और संपत्ति कार्ड तैयार करने के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता।
पुराने भूमि विवाद मौजूदा जटिल और लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों का समाधान करना, जो नए अभिलेखों के निर्माण में बाधा बन सकते हैं।
डेटा प्रबंधन और सुरक्षा बड़ी मात्रा में संवेदनशील संपत्ति डेटा के सुरक्षित भंडारण, प्रबंधन और गोपनीयता सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme)
  • ईग्रामस्वराज (eGramSwaraj)

आगे की राह

  • राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना और पिछड़े राज्यों को तकनीकी तथा वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • पंचायती राज मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग और राज्य राजस्व विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करना।
  • राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के माध्यम से स्वामित्व संपत्ति कार्डों की बैंक ऋण के लिए व्यापक स्वीकृति सुनिश्चित करना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति कार्डों के लाभों और उपयोग के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाना।
  • ड्रोन सर्वेक्षण और डेटा प्रबंधन के लिए तकनीकी विशेषज्ञता का विकास करना और स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण करना।
  • पुराने भूमि विवादों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए विशेष तंत्र स्थापित करना।
  • डिजिटल भूमि अभिलेखों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करना।
  • योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना ताकि चुनौतियों की पहचान कर उनका समय पर समाधान किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वामित्व योजना · ग्रामीण संपत्ति अधिकार · ड्रोन सर्वेक्षण · संपत्ति कार्ड · भूमि अभिलेख · वित्तीय समावेशन · पंचायती राज मंत्रालय · डिजिटल इंडिया · ई-गवर्नेंस · भूमि विवाद · राजकोषीय स्थिरता · ग्रामीण विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243H’, ‘note’: ‘पंचायतों द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 300A’, ‘note’: ‘संपत्ति का अधिकार (कानूनी अधिकार)’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची (राज्य सूची)’, ‘note’: ‘भूमि और भूमि अभिलेखों का विषय’}

अवधारणा प्रवाह

ड्रोन सर्वेक्षण और CORS तकनीक का उपयोग  →  ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का उच्च सटीकता वाला मानचित्रण  →  अधिकारों के अभिलेख और संपत्ति कार्डों का निर्माण  →  संपत्ति कार्डों का वितरण और कानूनी मान्यता  →  संस्थागत ऋण की सुविधा और भूमि विवादों में कमी  →  ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. स्वामित्व योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को अधिकारों का अभिलेख उपलब्ध कराना है।
2. स्वामित्व योजना को eGramSwaraj पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है ताकि पंचायतों के लिए कार्य-आधारित नियोजन, लेखांकन और निगरानी प्रणाली को सुगम बनाया जा सके।
3. स्वामित्व संपत्ति कार्ड पर संस्थागत ऋण को सुविधाजनक बनाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग और राज्य राजस्व विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। स्वामित्व योजना का प्राथमिक लक्ष्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को अधिकारों का अभिलेख (Record of Rights) प्रदान करना है। कथन 2 गलत है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, स्वामित्व योजना eGramSwaraj के साथ एकीकृत नहीं है। कथन 3 सही है। पंचायती राज मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग और राज्य राजस्व विभाग बैंक ऋण के लिए स्वामित्व संपत्ति कार्ड की व्यापक स्वीकृति को सक्षम बनाने के लिए सहयोगात्मक रूप से कार्य कर रहे हैं।

Q2. स्वामित्व योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. यह योजना ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों के उच्च सटीकता वाले मानचित्र बनाने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण और CORS (Continuously Operating Reference Station) तकनीक का उपयोग करती है।
2. इस योजना के तहत, संपत्ति कार्डों की तैयारी और वितरण जैसी बाद की गतिविधियां भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा की जाती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1 और न ही 2

उत्तर: केवल 1 — कथन 1 सही है। स्वामित्व योजना ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों के उच्च सटीकता वाले मानचित्र बनाने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण और CORS तकनीक का उपयोग करती है। कथन 2 गलत है। जमीनी सत्यापन, संपत्ति कार्डों की तैयारी और वितरण जैसी बाद की गतिविधियां राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा की जाती हैं, न कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा। भारतीय सर्वेक्षण विभाग को ड्रोन सर्वेक्षण और मानचित्र तैयार करने के लिए धनराशि प्रदान की जाती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत में संपत्ति अधिकारों को औपचारिक बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में कैसे सहायक रही है? इसकी प्रमुख चुनौतियों और आगे की राह पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** स्वामित्व योजना का संक्षिप्त परिचय (पंचायती राज मंत्रालय की पहल, ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकार)।
2. **सहायक भूमिका (औपचारिक संपत्ति अधिकार):**
* ड्रोन सर्वेक्षण और CORS तकनीक का उपयोग कर सटीक मानचित्रण।
* संपत्ति कार्ड का निर्माण और वितरण।
* भूमि विवादों में कमी।
* पारदर्शिता और सटीकता में वृद्धि।
3. **सहायक भूमिका (वित्तीय समावेशन):**
* संपत्ति कार्ड को संपार्श्विक (collateral) के रूप में उपयोग कर संस्थागत ऋण तक पहुंच।
* ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा।
* राज्यों/SLBCs द्वारा बैंकों के साथ समन्वय।
* वितरित ऋणों के आंकड़े (जैसे 1,713 करोड़ रुपये के 11,147 ऋण)।
4. **प्रमुख चुनौतियाँ:**
* सभी गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण और संपत्ति कार्ड वितरण की गति।
* राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के बीच कार्यान्वयन में असमानता।
* संपत्ति कार्ड की बैंकों द्वारा व्यापक स्वीकृति सुनिश्चित करना।
* जागरूकता और क्षमता निर्माण।
* डेटा प्रबंधन और अद्यतन।
5. **आगे की राह:**
* अंतर-मंत्रालयी समन्वय को और मजबूत करना।
* डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार।
* जन जागरूकता अभियान।
* राज्यों के लिए प्रोत्साहन तंत्र।
* eGramSwaraj जैसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ संभावित एकीकरण की संभावनाओं का पता लगाना।
6. **निष्कर्ष:** ग्रामीण सशक्तिकरण और आर्थिक विकास में योजना का महत्व।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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