30 Sep स्वामित्व योजना विवाद: पटवारियों पर कार्रवाई की तैयारी, जानें पूरा मामला
✎ स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से संपत्ति के अधिकार प्रदान कर संपत्ति कार्ड जारी करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय। | GS Paper III — भूमि सुधार।
- Prelims: स्वामित्व योजना, ग्रामीण क्षेत्र, संपत्ति कार्ड, राजस्व विभाग, पंचायती राज मंत्रालय, ड्रोन सर्वेक्षण
- Essay: ग्रामीण भारत का सशक्तिकरण: चुनौतियाँ और समाधान, डिजिटल इंडिया और भूमि अभिलेखों का आधुनिकीकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से संपत्ति के अधिकार प्रदान कर संपत्ति कार्ड जारी करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) के तहत संपत्ति के पंजीकरण (Registry) से संबंधित कार्यों को लेकर सरकार और पटवारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। पटवारियों द्वारा इस कार्य से दूरी बनाए रखने के बाद, सरकार ने अब उनके खिलाफ लंबित पुराने मामलों और शिकायतों का विवरण जुटाना शुरू कर दिया है, जिससे भविष्य में संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।
पृष्ठभूमि
- स्वामित्व योजना को अप्रैल 2020 में प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर लॉन्च किया गया था।
- यह योजना पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj) के तहत संचालित है और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को उनके अधिकारों का दस्तावेजीकरण करने में मदद करना है।
- योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण आबादी को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ (Record of Rights) प्रदान करना है, जिससे वे अपनी संपत्ति का वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में उपयोग कर सकें।
- इसमें ड्रोन तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण आवासीय भूमि का सर्वेक्षण किया जाता है और संपत्ति कार्ड (Property Card) जारी किए जाते हैं।
- योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू संपत्ति संबंधी विवादों को कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अभिलेखों को आधुनिक बनाना है।
- पटवारी, जो ग्रामीण राजस्व प्रशासन की रीढ़ हैं, योजना के तहत संपत्ति पंजीकरण जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन वर्तमान में वे इन कार्यों को करने से इनकार कर रहे हैं।
स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) क्या है?
- स्वामित्व (ग्रामीण क्षेत्रों में गाँवों का सर्वेक्षण और तात्कालिक प्रौद्योगिकी के साथ मानचित्रण) योजना केंद्र सरकार की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के मालिकों को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ प्रदान करना है, जिससे वे अपनी संपत्ति का उपयोग ऋण लेने या अन्य वित्तीय लाभों के लिए कर सकें।
- यह योजना ग्रामीण भारत में संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व को स्थापित करने में मदद करती है, जिससे संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आती है।
- योजना के तहत, नवीनतम ड्रोन प्रौद्योगिकी का उपयोग करके ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों (आबादी क्षेत्र) का सर्वेक्षण किया जाता है।
- सर्वेक्षण के बाद, संपत्ति मालिकों को एक कानूनी ‘संपत्ति कार्ड’ या ‘अधिकारों का अभिलेख’ प्रदान किया जाता है।
- यह योजना पंचायती राज मंत्रालय, राज्य राजस्व विभागों, राज्य पंचायती राज विभागों और भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही है।
- इसके प्रमुख लाभों में ग्रामीण नियोजन में सुधार, संपत्ति कर संग्रह के लिए आधार तैयार करना, संपत्ति संबंधी विवादों को कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय स्थिरता लाना शामिल है।
- यह ‘एक गाँव, एक मानचित्र’ दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण भूमि अभिलेखों का व्यापक और सटीक डिजिटलीकरण करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति का मानचित्रण | ड्रोन तकनीक का उपयोग करके सटीक भूमि रिकॉर्ड तैयार करना। |
| संपत्ति कार्ड का वितरण | ग्रामीण संपत्ति मालिकों को उनके संपत्ति अधिकारों का कानूनी प्रमाण प्रदान करना। |
| विवादों का समाधान | भूमि संबंधी विवादों को कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिरता लाना। |
| वित्तीय समावेशन | संपत्ति कार्ड का उपयोग करके बैंक ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाना। |
| ग्राम पंचायतों का सशक्तिकरण | स्थानीय स्तर पर योजना और राजस्व संग्रह में सुधार। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्पष्ट स्वामित्व को स्थापित करके आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
- संपत्ति कार्ड के माध्यम से ग्रामीण आबादी को ऋण तक पहुंच मिलती है, जिससे कृषि और सूक्ष्म उद्यमों में निवेश को प्रोत्साहन मिलता है।
- यह योजना भूमि विवादों को कम करके मुकदमेबाजी पर होने वाले खर्च को बचाती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।
सामाजिक महत्व
- यह योजना ग्रामीण संपत्ति मालिकों, विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाती है, क्योंकि संपत्ति कार्ड उनके कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित करता है।
- भूमि संबंधी विवादों में कमी आने से ग्रामीण समुदायों में सामाजिक सद्भाव और शांति बढ़ती है।
- पारदर्शी भूमि रिकॉर्ड प्रणाली भ्रष्टाचार को कम करने में सहायक है, जिससे नागरिकों का सरकारी सेवाओं पर विश्वास बढ़ता है।
प्रशासनिक महत्व
- स्वामित्व योजना आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों का उपयोग करके सटीक और अद्यतन भूमि रिकॉर्ड तैयार करती है, जिससे राजस्व प्रशासन में सुधार होता है।
- ग्राम पंचायतों को संपत्ति कर (Property Tax) के माध्यम से राजस्व जुटाने का अधिकार मिलता है, जिससे वे स्थानीय विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित कर सकती हैं।
- यह योजना सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी ढांचा और सेवाएं प्रदान करने के लिए सटीक डेटा उपलब्ध कराती है।
चुनौतियाँ
1. राजस्व कर्मचारियों का असहयोग
- पटवारियों जैसे राजस्व कर्मचारियों का स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री कार्य से इनकार करना योजना के कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न कर रहा है।
- यह असहयोग योजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने में देरी और लागत वृद्धि का कारण बन सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
2. पुराने विवादों का निपटान
- ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी पुराने और जटिल विवादों का समाधान करना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए विशेष कानूनी और प्रशासनिक तंत्र की आवश्यकता है।
- इन विवादों के कारण संपत्ति का स्पष्ट स्वामित्व स्थापित करने में कठिनाई आती है।
यूपीएससी लिंक: भूमि सुधार
3. तकनीकी और क्षमता संबंधी मुद्दे
- ड्रोन सर्वेक्षण और GIS मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए राजस्व कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की आवश्यकता है।
- दूरदराज के क्षेत्रों में तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमी भी एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: ई-गवर्नेंस
4. अंतर-विभागीय समन्वय
- स्वामित्व योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए पंचायती राज, राजस्व और भूमि संसाधन विभागों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।
- समन्वय की कमी से कार्य में दोहराव और अक्षमता हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| पटवारियों का गतिरोध | स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री कार्यों में देरी और बाधा। |
| भ्रष्टाचार के आरोप | पटवारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति और लोकायुक्त/EOW जांच के लंबित मामले। |
| प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी | सरकार द्वारा पुराने मामलों की जानकारी जुटाकर पटवारियों पर कार्रवाई की संभावना, जिससे कार्यबल में असंतोष बढ़ सकता है। |
| योजना के लाभों में विलंब | गतिरोध के कारण ग्रामीण संपत्ति मालिकों को संपत्ति कार्ड और संबंधित लाभों से वंचित होना। |
| विश्वास की कमी | सरकार और राजस्व कर्मचारियों के बीच विश्वास की कमी, जो भविष्य की योजनाओं को भी प्रभावित कर सकती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme)
आगे की राह
- सरकार और पटवारी संघ के बीच रचनात्मक संवाद स्थापित किया जाए ताकि उनके मुद्दों और आपत्तियों का समाधान किया जा सके।
- पटवारियों को स्वामित्व योजना के महत्व और उनके योगदान के बारे में संवेदनशील बनाया जाए, साथ ही उनके लिए प्रोत्साहन योजनाएं भी शुरू की जाएं।
- रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, जिसमें पटवारियों की भूमिका को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए ताकि उनकी आपत्तियों को दूर किया जा सके।
- भ्रष्टाचार के लंबित मामलों की त्वरित जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
- राजस्व कर्मचारियों के लिए आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन में व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- योजना के कार्यान्वयन में ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि जमीनी स्तर पर समर्थन मिल सके।
- एक वैकल्पिक तंत्र विकसित किया जाए, जैसे कि विशेष रजिस्ट्री अधिकारी नियुक्त करना, ताकि पटवारियों के असहयोग की स्थिति में भी कार्य बाधित न हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
स्वामित्व योजना · भूमि अभिलेख · डिजिटलीकरण · ग्रामीण विकास · राजस्व प्रशासन · पटवारी · शासन में पारदर्शिता · नागरिक केंद्रित सेवाएँ · भूमि विवाद · भ्रष्टाचार निरोधक उपाय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘भूमि राज्य सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
केंद्र सरकार द्वारा स्वामित्व योजना का शुभारंभ → ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति का ड्रोन सर्वेक्षण → संपत्ति कार्ड जारी करने की प्रक्रिया → पटवारियों द्वारा रजिस्ट्री कार्य से इनकार → सरकार द्वारा पटवारियों पर कार्रवाई की तैयारी → योजना के कार्यान्वयन में गतिरोध
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकों को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ प्रदान करना है।
2. यह योजना पंचायती राज मंत्रालय के तहत लागू की जा रही है।
3. ड्रोन तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण आवासीय भूमि का मानचित्रण इस योजना का एक प्रमुख घटक है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि स्वामित्व योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण संपत्ति मालिकों को उनके संपत्ति अधिकार दस्तावेज़ प्रदान करना है। कथन 2 सही है क्योंकि स्वामित्व योजना पंचायती राज मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। कथन 3 सही है क्योंकि योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मानचित्रण के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग शामिल है, जिससे सटीक भूमि अभिलेख तैयार किए जा सकें।
Q2. स्वामित्व योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति विवादों को कम करने में सहायक है।
- इसका लक्ष्य ग्रामीण भारत में वित्तीय स्थिरता लाना है।
- यह केवल शहरी क्षेत्रों में संपत्ति के डिजिटलीकरण पर केंद्रित है।
- यह योजना स्थानीय सरकारों को संपत्ति कर संग्रह में मदद करती है।
उत्तर: यह केवल शहरी क्षेत्रों में संपत्ति के डिजिटलीकरण पर केंद्रित है। — स्वामित्व योजना विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकारों के स्पष्टीकरण और डिजिटलीकरण पर केंद्रित है, न कि शहरी क्षेत्रों पर। यह ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति विवादों को कम करने, वित्तीय स्थिरता लाने और स्थानीय सरकारों को संपत्ति कर संग्रह में मदद करने में सहायक है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और संपत्ति अधिकारों को स्पष्ट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस योजना के उद्देश्यों और ग्रामीण शासन पर इसके संभावित प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण कीजिए। साथ ही, इसके कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** स्वामित्व योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके पूर्ण रूप (ग्राम सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में तात्कालिक प्रौद्योगिकी के साथ मानचित्रण) और मुख्य उद्देश्य का उल्लेख।
2. **योजना के उद्देश्य:** ग्रामीण संपत्ति मालिकों को संपत्ति कार्ड प्रदान करना, भूमि विवादों को कम करना, ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय स्थिरता लाना, स्थानीय सरकारों को संपत्ति कर संग्रह में सहायता करना, और ग्रामीण योजना के लिए सटीक भूमि अभिलेख उपलब्ध कराना।
3. **ग्रामीण शासन पर प्रभाव:** पारदर्शिता में वृद्धि, भ्रष्टाचार में कमी, संपत्ति के मुद्रीकरण में आसानी (बैंक ऋण आदि), ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए बेहतर नियोजन, और पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण।
4. **कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:** पटवारियों जैसे स्थानीय राजस्व अधिकारियों का प्रतिरोध (जैसा कि समाचार में उल्लिखित है), तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमी, जागरूकता का अभाव, भूमि अभिलेखों की पुरानी और जटिल प्रकृति, और अंतर-विभागीय समन्वय की कमी।
5. **समाधान के उपाय:** राजस्व अधिकारियों के लिए प्रोत्साहन और प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता का निर्माण, जन जागरूकता अभियान, भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण के लिए कानूनी और प्रशासनिक सुधार, और विभिन्न विभागों के बीच मजबूत समन्वय तंत्र।
6. **निष्कर्ष:** योजना की समग्र क्षमता और इसके सफल कार्यान्वयन के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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