हापुड़ में सीएक्यूएम का औद्योगिक निरीक्षण: 16 में से 12 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस

सीएक्यूएम ने हापुड़, उत्तर प्रदेश में उद्योगों का विशेष निरीक्षण किया; 22 इकाइयों में से 16 नियमों की अवज्ञा कर रही थीं, — diagram

हापुड़ में सीएक्यूएम का औद्योगिक निरीक्षण: 16 में से 12 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस

औद्योगिक निरीक्षण प्रक्रियाऔद्योगिक इकाई22 इकाइयाँ निरीक्षित16 नियमों का उल्लंघननिरीक्षणCAQM द्वाराऔद्योगिक उत्सर्जन परगैर-अनुपालन12 को नोटिस2 को सीलवायु प्रदूषणPM2.5, PM10 प्रमुखस्वास्थ्य पर प्रभावनियामक प्रयासCAQM सक्रियनियमों का प्रवर्तन
औद्योगिक निरीक्षण प्रक्रिया

✎ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) NCR में वायु प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण और प्रबंधन के लिए एक वैधानिक निकाय है, जिसके पास प्रदूषणकारी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने का…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environmental and Ecology)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management)  |  GS Paper II — शासन (Governance)
  • Prelims: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (APCD), सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, कारण बताओ नोटिस (SCN)
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के बीच संतुलन, भारत में शहरीकरण और वायु प्रदूषण की समस्या: समाधान और चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) NCR में वायु प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण और प्रबंधन के लिए एक वैधानिक निकाय है, जिसके पास प्रदूषणकारी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने का सर्वोच्च अधिकार है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के हापुड़ में औद्योगिक इकाइयों का विशेष निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान, 22 में से 16 औद्योगिक इकाइयाँ लागू मानदंडों और वैधानिक निर्देशों का पालन नहीं कर रही थीं, जिसके परिणामस्वरूप 12 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और दो इकाइयों को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई NCR में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के CAQM के प्रयासों का हिस्सा है।

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) दुनिया के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है, जहाँ सर्दियों के महीनों में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर तक पहुँच जाती है।
  • वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों का धुआँ, पराली जलाना, निर्माण गतिविधियाँ और घरेलू दहन शामिल हैं।
  • वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विभिन्न सरकारी निकायों और कानूनों को लागू किया गया है, जिनमें पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment (Protection) Act, 1986) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) शामिल हैं।
  • अक्टूबर 2020 में, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए एक व्यापक, समन्वयित और सहभागी दृष्टिकोण के लिए स्थापित किया गया था।
  • CAQM को वायु प्रदूषण से संबंधित सभी मामलों पर राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने का अधिकार है।
  • आयोग नियमित रूप से औद्योगिक इकाइयों, निर्माण स्थलों और अन्य प्रदूषणकारी स्रोतों का निरीक्षण करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे पर्यावरणीय मानदंडों का पालन कर रहे हैं।
  • प्रदूषणकारी उद्योगों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करना, जुर्माना लगाना और उन्हें बंद करने जैसे कदम उठाए जाते हैं ताकि अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
  • यह घटना उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की व्यापक समस्या को उजागर करती है और CAQM जैसे नियामक निकायों की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) क्या है?

  • CAQM एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है जिसे अक्टूबर 2020 में एक अध्यादेश के माध्यम से स्थापित किया गया था, जिसे बाद में ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021’ (Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas Act, 2021) द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
  • इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उपशमन के लिए बेहतर समन्वय, अनुसंधान, पहचान और समाधान प्रदान करना है।
  • यह आयोग पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) के तहत कार्य करता है।
  • CAQM के पास NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से संबंधित सभी मामलों पर सर्वोच्च अधिकार है, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) जैसे अन्य निकायों के कार्यों को प्रतिस्थापित करता है।
  • इसके कार्यों में वायु गुणवत्ता निगरानी, प्रदूषण स्रोतों की पहचान, प्रदूषण नियंत्रण उपायों का कार्यान्वयन, और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करना शामिल है।
  • आयोग के पास उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है, जिसमें जुर्माना लगाना, संचालन बंद करना और कानूनी कार्यवाही शुरू करना शामिल है।
  • यह वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों और नीतियों को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विशेष निरीक्षण अभियान वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियामक संस्थाओं की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
सीएक्यूएम की फ्लाइंग स्क्वॉड स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में प्रभावी प्रवर्तन और अनुपालन सुनिश्चित करने का तंत्र।
गैर-अनुपालन के मामले औद्योगिक इकाइयों द्वारा पर्यावरणीय मानदंडों की अनदेखी और उनके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को उजागर करता है।
कारण बताओ नोटिस जारी करना उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की दिशा में पहला कदम।
अवैध/अनुरूप न होने वाली इकाइयों को सील करना पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई का उदाहरण।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • यह निरीक्षण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए नियामक प्रयासों को दर्शाता है।
  • औद्योगिक प्रदूषण, विशेष रूप से PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों का एक प्रमुख स्रोत है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव डालता है। ऐसे निरीक्षण वायु प्रदूषण को कम करने में सहायक होते हैं।

शासन और नियामक महत्व

  • यह वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की सक्रिय भूमिका को रेखांकित करता है, जिसे NCR में वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के लिए स्थापित किया गया था।
  • यह दर्शाता है कि नियामक संस्थाएं केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके प्रभावी कार्यान्वयन और अनुपालन की निगरानी भी करती हैं।
  • जिला प्रशासन और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (जैसे उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड – UPPCB) के साथ समन्वय, बहु-एजेंसी सहयोग के महत्व को उजागर करता है।

सामाजिक महत्व

  • स्वच्छ वायु का अधिकार एक मौलिक अधिकार का हिस्सा है, और ऐसे प्रवर्तन अभियान नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण की रक्षा में मदद करते हैं।
  • यह उद्योगों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने और स्वच्छ उत्पादन प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

चुनौतियाँ

1. अनुपालन की कमी

  • कई औद्योगिक इकाइयां जानबूझकर या अनजाने में पर्यावरणीय मानदंडों और वैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करती हैं।
  • अपर्याप्त वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (APCD), ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) का अभाव या खराबी, और स्टैक उत्सर्जन रिपोर्ट की अनुपलब्धता सामान्य मुद्दे हैं।

2. प्रवर्तन में चुनौतियाँ

  • बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों की निगरानी और सभी पर प्रभावी ढंग से कार्रवाई करना एक चुनौती है।
  • कुछ इकाइयां निरीक्षण टीमों को प्रवेश से रोककर या जानकारी छिपाकर सहयोग नहीं करती हैं।

3. तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ

  • छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए उन्नत प्रदूषण नियंत्रण प्रौद्योगिकियों में निवेश करना महंगा हो सकता है।
  • प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के रखरखाव और उन्नयन के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की कमी भी एक चुनौती है।

4. अवैध संचालन

  • कुछ औद्योगिक इकाइयां बिना उचित अनुमति (CTO) के या निर्धारित क्षमता से अधिक पर संचालित होती हैं, जिससे प्रदूषण नियंत्रण मुश्किल हो जाता है।
  • खतरनाक कीचड़ वाले लकड़ी से चलने वाले गड्ढे वाले भट्ठी जैसे प्रतिबंधित ईंधन और प्रौद्योगिकियों का उपयोग भी एक गंभीर चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तीव्र दृश्य धुआँ वायु गुणवत्ता पर तत्काल नकारात्मक प्रभाव और स्वास्थ्य जोखिम।
अपर्याप्त वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (APCD) उत्सर्जन को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में विफलता, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।
ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) का अभाव/खराबी वास्तविक समय में उत्सर्जन डेटा की अनुपलब्धता, जिससे निगरानी और अनुपालन में कमी आती है।
वेट स्क्रबर सिस्टम में बाईपास व्यवस्था प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को दरकिनार कर अवैध उत्सर्जन की सुविधा प्रदान करना।
DG सेटों का वैधानिक मानकों के साथ अनुपालन न करना डीजल जनरेटर सेटों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में विफलता।
खतरनाक कीचड़ वाले लकड़ी से चलने वाले गड्ढे वाले भट्ठी का उपयोग अत्यधिक प्रदूषणकारी और प्रतिबंधित तकनीकों का उपयोग, जो गंभीर पर्यावरणीय क्षति का कारण बनता है।

आगे की राह

  • औद्योगिक इकाइयों के लिए प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों के बारे में जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
  • छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को प्रदूषण नियंत्रण प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए।
  • ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) को अनिवार्य किया जाए और इसके प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जाए।
  • गैर-अनुपालन के मामलों में त्वरित और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, जिसमें जुर्माना, संचालन बंद करना और सील करना शामिल हो।
  • नियामक संस्थाओं (जैसे CAQM, UPPCB) की क्षमता निर्माण और मानव संसाधन को मजबूत किया जाए।
  • प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान के लिए नियमित और अप्रत्याशित निरीक्षणों की आवृत्ति बढ़ाई जाए।
  • प्रदूषण नियंत्रण में सार्वजनिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए, जिसमें शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना शामिल है।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) · वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (APCD) · सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) · पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 · राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) · औद्योगिक प्रदूषण · कारण बताओ नोटिस (SCN) · पर्यावरणीय मानदंड · नियामक प्रवर्तन · सतत विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

औद्योगिक गतिविधियाँ  →  पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन (जैसे APCD का अभाव)  →  वायु प्रदूषण (PM2.5, PM10, धुआँ)  →  CAQM द्वारा निरीक्षण और गैर-अनुपालन की पहचान  →  कारण बताओ नोटिस और दंडात्मक कार्रवाई (जैसे सील करना)  →  वायु गुणवत्ता में सुधार के प्रयास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. CAQM का गठन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय के रूप में किया गया है।
2. इसका अधिकार क्षेत्र केवल दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों तक सीमित है।
3. CAQM के पास वायु प्रदूषण से संबंधित मामलों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को निर्देश जारी करने की शक्ति है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि CAQM एक सांविधिक निकाय है जिसका गठन वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 के तहत किया गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि इसका अधिकार क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों तक फैला हुआ है, जिसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्से शामिल हैं। कथन 3 सही है क्योंकि CAQM को वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न प्राधिकरणों, जिसमें राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी शामिल हैं, को निर्देश जारी करने का अधिकार है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (APCD) के अंतर्गत नहीं आता है?

  1. वेट स्क्रबर सिस्टम (Wet Scrubber System)
  2. इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (Electrostatic Precipitator)
  3. बैग फिल्टर (Bag Filter)
  4. सौर पैनल (Solar Panel)

उत्तर: सौर पैनल (Solar Panel) — वेट स्क्रबर सिस्टम, इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर और बैग फिल्टर सभी औद्योगिक उत्सर्जन से वायु प्रदूषकों को हटाने के लिए उपयोग किए जाने वाले वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण हैं। सौर पैनल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का एक साधन है और इसका उपयोग सीधे वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए नहीं किया जाता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण से निपटने में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण करें। इसके समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों और उनके संभावित समाधानों पर भी चर्चा करें। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में CAQM के गठन, उसके अधिदेश और शक्तियों का संक्षिप्त परिचय शामिल होना चाहिए। इसकी भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण करते हुए, इसके द्वारा किए गए सकारात्मक उपायों (जैसे निरीक्षण अभियान, दिशा-निर्देश जारी करना) और उनके प्रभावों पर प्रकाश डालें। चुनौतियों में अंतर-राज्यीय समन्वय का अभाव, औद्योगिक इकाइयों द्वारा अनुपालन न करना, तकनीकी और वित्तीय बाधाएं, और प्रवर्तन तंत्र में खामियां शामिल होनी चाहिए। संभावित समाधानों में प्रौद्योगिकी का उपयोग, क्षमता निर्माण, जन जागरूकता, सख्त प्रवर्तन और अंतर-एजेंसी सहयोग को मजबूत करना शामिल हो सकता है। उत्तर को प्रासंगिक संवैधानिक प्रावधानों (जैसे अनुच्छेद 21, 48A) और पर्यावरणीय कानूनों (जैसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986) से जोड़ा जाना चाहिए।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)

Uttar Pradesh PCS (UPPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: हाल ही में सीएक्यूएम (केंद्रीय गुणवत्ता नियंत्रण मंडल) द्वारा हापुड़, उत्तर प्रदेश में किए गए विशेष निरीक्षण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1) निरीक्षण में शामिल 22 औद्योगिक इकाइयों में से 16 ने नियमों की अवज्ञा की पाई गई। 2) 12 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। 3) यह निरीक्षण पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — निरीक्षण में 22 में से 16 इकाइयों द्वारा नियमों की अवज्ञा, 12 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस तथा पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण उद्देश्य सभी कथन सत्य हैं।

Mains: हापुड़, उत्तर प्रदेश में सीएक्यूएम द्वारा किए गए औद्योगिक निरीक्षण के दौरान पाई गई नियमों की अवज्ञा के कारणों का विश्लेषण करते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण हेतु अपनाए जाने वाले उपायों पर चर्चा कीजिए।


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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